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मध्य प्रदेश

PM-VBRY के तहत 19 जून को ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी करेंगे प्रधानमंत्री

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विवेक झा, भोपाल/नई दिल्ली। रोजगार सृजन और युवाओं को औपचारिक कार्यबल से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) एक नए पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े लाभार्थियों के साथ संवाद भी करेंगे, जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन और देशभर के 200 क्षेत्रीय केंद्रों पर किया जाएगा।

भोपाल और मंडीदीप भी बनेंगे राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा

राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ ही मध्यप्रदेश में भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) सभागार और एचईजी, मंडीदीप में भी क्षेत्रीय आयोजन किए जाएंगे। इन दोनों कार्यक्रमों में करीब 700 नियोक्ता, कर्मचारी और गणमान्य नागरिक भाग लेंगे।

मैनिट में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल तथा भोपाल की महापौर मालती राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं मंडीदीप स्थित कार्यक्रम में भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा मुख्य अतिथि होंगे।

देशभर में 200 स्थानों पर एक साथ होंगे कार्यक्रम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया है। देशभर में 200 स्थानों पर समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, राज्य मंत्री, महापौर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भाग लेंगे।

अनुमान है कि इन आयोजनों में 65 हजार से 70 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें लगभग 9 हजार नियोक्ता प्रतिनिधि और 45 हजार कर्मचारी शामिल रहेंगे। इससे योजना के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ औपचारिक रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पहली नौकरी करने वाले युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पहली बार औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। योजना के भाग-ए के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकृत और एक लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने के वेतन के बराबर, अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है।

पहली किस्त छह माह की निरंतर सेवा पूरी करने पर तथा दूसरी किस्त 12 माह की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद जारी की जाती है। इससे युवाओं में दीर्घकालिक रोजगार और बचत की आदत को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

नियोक्ताओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन

योजना के भाग-बी में अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर नियोक्ताओं को ₹3,000 प्रति माह तक दो वर्षों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के लिए यह सहायता दो अतिरिक्त वर्षों तक बढ़ाई गई है।

50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नए कर्मचारियों तथा 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम पांच नए कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी, तभी वे योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

₹99 हजार करोड़ से अधिक का परिव्यय, 3.5 करोड़ रोजगार का लक्ष्य

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹99,446 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया है। इसका लक्ष्य दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन करना है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ युवा पहली बार औपचारिक कार्यबल का हिस्सा बनेंगे। योजना के लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होंगे।

रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा का भी विस्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी आएंगे। EPFO पंजीकरण के माध्यम से श्रमिकों को भविष्य निधि जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

शुरुआती चरण में मिले उत्साहजनक परिणाम

योजना के शुरुआती क्रियान्वयन में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मार्च 2026 में 4.41 लाख प्रथम बार काम करने वाले कर्मचारियों को लगभग ₹247 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। वहीं 17,551 प्रतिष्ठानों को ₹214 करोड़ के प्रोत्साहन जारी किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 6.46 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए।

विकसित भारत के विजन को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि PM-VBRY भारत में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने, उद्योगों को नई नियुक्तियों के लिए प्रोत्साहित करने और युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रोजगार, निवेश और कौशल विकास को जोड़ने वाली यह योजना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

बॉक्स: PM-VBRY एक नजर में

  • योजना का नाम: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)
  • कुल परिव्यय: ₹99,446 करोड़
  • लक्ष्य: 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना
  • पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को लाभ: अधिकतम ₹15,000 तक प्रोत्साहन
  • नियोक्ताओं को प्रोत्साहन: प्रति अतिरिक्त कर्मचारी ₹3,000 प्रतिमाह तक
  • विशेष लाभ: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए अतिरिक्त दो वर्ष तक सहायता
  • लाभ अवधि: 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगार
  • भुगतान व्यवस्था: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) एवं PAN-लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से

भोपाल कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • स्थान: मैनिट सभागार, भोपाल
  • तिथि: 19 जून 2026
  • मुख्य अतिथि: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • विशिष्ट अतिथि: कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मालती राय
  • अनुमानित सहभागिता: लगभग 700 नियोक्ता, कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक

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