अगर कांग्रेस से हाथ मिला लेतीं ममता, तो क्या बदल जाता बंगाल का चुनावी गणित?

कोलकत्ता 
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही सिर्फ एक राज्य केरल में जीत दर्ज करने में सफल रही हो, पर इन चुनाव में पार्टी यह साबित करने में सफल रही कि उसके बगैर INDIA गठबंधन के घटक दलों के लिए जीत आसान नहीं है। कम से कम पश्चिम बंगाल में यह बात सही बैठती है, क्योंकि भाजपा विरोधी वोट बंटवारे की वजह से तृणमूल कांग्रेस को करीब तीन दर्जन सीट का नुकसान हुआ है।

1 दर्जन से ज्यादा सीटों पर असर
चुनाव परिणाम के आंकड़ों के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक सीट पर कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। वर्ष 2021 में इनमें से दस सीट टीएमसी के पास थी। पर इस बार कांग्रेस को टीएमसी और भाजपा के बीच जीत के अंतर से अधिक वोट मिले। इसके साथ टीएमसी को छह सीट का नुकसान नोटा की वजह से हुआ। इन सीट पर भी कांग्रेस को नोटा से अधिक वोट मिले थे।

बंगाल में कुल विधानसभा सीटें 294 हैं, जिनमें से टीएमसी के खाते में 80 सीटें आईं हैं। जबकि, भाजपा 207 पर विजयी रही है। कांग्रेस ने 2 और लेफ्ट को 1 सीट मिली है।

मुस्लिम वोटर्स ने दिया किसका साथ
इसके साथ भाजपा को मुस्लिम वोट में विभाजन का भी फायदा मिला। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर की कुल 43 में से 20 सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। क्योंकि, मतदाता कांग्रेस, लेफ्ट, इंडियन सेकुलर फ्रंट और हुमायूं कबीर की पार्टी में बंट गए। जबकि वर्ष 2021 में मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकजुट थे। उस वक्त टीएमसी को इन सीट में 35 और भाजपा को सिर्फ आठ सीटें मिली थी।

लेफ्ट के पास सात फीसदी वोट
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट वर्षों सरकार में रहा है। लेफ्ट के पास अभी भी करीब सात फीसदी वोट है। हार के बाद INDIA गठबंधन की दुहाई देने वाली पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले स्थिति को समझ लेतीं, तो उन्हें इस तरह हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। विश्लेषकों का कहना है कि कई दर्जन ऐसी सीट हैं, जहां लेफ्ट और कांग्रेस को तृणमूल की हार के अंतर से अधिक वोट मिले हैं।

स्थिति समझनी होगी
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वक्त आ गया है कि सभी विपक्षी दल एक बार फिर एकजुट और नए सिरे से रणनीति बनाए। बकौल उनके, कांग्रेस अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है, पर क्षेत्रीय पार्टियों को भी स्थिति को समझना होगा। सभी घटक दलों के बेहतर तालमेल और साझेदारी के साथ चुनाव में उतरना होगा। इसके लिए लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा में एकजुटता जरूरी है।

पहले भी हुआ नुकसान
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि विपक्षी दलों के मत विभाजन का फायदा भाजपा को मिला है। वर्ष 2022 के गुजरात और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम इसकी मिसाल हैं। दिल्ली में कांग्रेस को करीब एक दर्जन सीट पर हार के अंतर से अधिक वोट मिले थे। इसी तरह गुजरात में आप की वजह से कांग्रेस को 39 सीट का नुकसान हुआ था। इन सीट पर आप को भाजपा की जीत के अंतर से अधिक वोट मिले थे। जबकि आप को सिर्फ पांच सीटें मिली थी।

यात्रियों को झटका! बिलासपुर-गेवरारोड MEMU पैसेंजर 4 दिन रहेगी रद्द

बिलासपुर.

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के चांपा-गेवरारोड सेक्शन के मध्य स्थित मड़वारानी स्टेशन में अधोसंरचना विकास के अंतर्गत अतिरिक्त लूप लाइन की कमीशनिंग हेतु प्री-नॉन इंटरलॉकिंग तथा नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा. इसके वजह से बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर 21 मई से 24 मई तक नहीं चलेगी.

भविष्य में इस सेक्शन की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इस दौरान 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68734/68733 बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी. 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68732/68731 बिलासपुर-कोरबा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद रहेगी.

देवरी अंडरब्रिज पर 5 दिन बंद रहेगा सड़क यातायात
बिलासपुर. बिलासपुर मंडल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत रेलवे अंडरब्रिज में लोगों को बेहतर सड़क आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रेल प्रशासन प्रतिबद्ध है. रेलवे प्रशासन द्वारा सारागांव-बाराद्वार स्टेशनों के मध्य किमी 655.862 से 655.867 में स्थित देवरी रेल अंडरब्रिज को 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक पूर्णतः बंद कर रोड मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्य करने का निर्णय लिया गया है. इसके फलस्वरूप यह रेल अंडरब्रिज 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक सड़क आवागमन हेतु पूर्णतः बंद रहेगी. इस अवधि में सड़क यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में पास में ही स्थित रेल अंडरब्रिज संख्या 54 (सोननदी ब्रिज) तथा भारत माला अंडरब्रिज का उपयोग किया जा सकता है. 

मौसम देगा राहत की खबर! मॉनसून की एंट्री कब, आज 10 राज्यों में बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली

भारत में मॉनसून की एंट्री में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। खबर है कि मई के अंतिम सप्ताह में राहत भरी बौछारें केरल में दस्तक दे सकती हैं। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश राज्य गर्मी का सामना करेंगे। हालांकि, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को कम से कम 10 राज्यों में बारिश की संभावनाएं जताई हैं।

आज भीगेंगे ये राज्य
IMD ने मंगलवार को बताया है कि 19 मई से 22 मई के बीच जम्मू और कश्मीर, 20 से 22 मई के बीच उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, इस दौरा हवा की रफ्तार 30-40 किमी प्रतिघंटा पहुंच सकती है। साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 19 से 24 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 21 और 22 मई, ओडिशा में 19 मई और 22 मई से 24 मई को बारिश के आसार हैं।

बिहार में 19 से 21 मई के बीच, झारखंड में 20 मई, ओडिशा में 20 और 21 मई को तेज हवा के साथ भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में 19 मई को भारी बारिश हो सकती है। 19 से 22 मई के बीच असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में 22 मई को भारी बारिश हो सकती है। जबकि, असम और मेघालय में ऐसा ही मौसम 21 और 22 को बन सकता है।

कहां पहुंचा मॉनसून
मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के आगमन की तारीख में चार दिन का अंतर देखने को मिल सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों में केरल और माहे के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो सकता है, जिससे केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण लक्षद्वीप से सटे दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बन गया है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और कन्याकुमारी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है।

मौसम विभाग के अनुसार, यह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों, अंडमान सागर के अधिकांश भाग, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।

‘AI का फायदा सिर्फ कंपनी को!’ सैमसंग के 45 हजार कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान किया

 नई दिल्ली

दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में तेजी से आगे बढ़ रही है. हर बड़ी कंपनी AI की रेस में लगी है और इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत है चिप यानी सेमीकंडक्टर. लेकिन इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनियों में से एक Samsung में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक सैमसंग के करीब 45 हजार कर्मचारी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं. यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल मानी जा रही है. खास बात यह है कि ये वही कर्मचारी हैं जो कंपनी के मेमोरी चिप प्लांट्स में काम करते हैं, यानी वही जगह जहां से AI, स्मार्टफोन, लैपटॉप और सर्वर के लिए जरूरी चिप्स बनते हैं। 

AI से फायदा बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों की सैलरी नहीं

इस हड़ताल की वजह सिर्फ एक नहीं है. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बेहतर सैलरी, बोनस और काम के हालात चाहिए. AI बूम की वजह से कंपनी का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन कर्मचारियों को उसका फायदा उतना नहीं मिला. यही असंतोष अब बड़े आंदोलन में बदलता दिख रहा है। 

असल कहानी यहां से दिलचस्प होती है. AI की वजह से चिप्स की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. ChatGPT जैसे टूल्स, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी के लिए भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है. सैमसंग इस सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा है. अगर यहां प्रोडक्शन रुकता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। 

लंबी चली हड़ताल तो महंगे होंगे डिवाइसेज
अगर यह हड़ताल लंबे समय तक चलती है, तो सबसे पहले असर चिप सप्लाई पर दिखेगा. चिप्स कम होंगे, तो कंपनियों के लिए प्रोडक्ट बनाना मुश्किल होगा. इसका मतलब है कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं। 

सीधे शब्दों में कहें तो अगर सैमसंग के प्लांट्स में काम रुकता है, तो आने वाले समय में मोबाइल और गैजेट्स महंगे हो सकते हैं. यह असर सिर्फ टेक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा। 

आज बैंकिंग, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल और यहां तक कि सरकारी सिस्टम भी चिप्स पर निर्भर हैं. ऐसे में सप्लाई में गड़बड़ी आने से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। 

फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन अगर कंपनी और यूनियन के बीच समझौता जल्दी नहीं होता, तो यह हड़ताल लंबी खिंच सकती है. और जितनी लंबी यह चलेगी, उतना ही बड़ा असर बाजार पर पड़ेगा। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले समय का संकेत है. AI की वजह से कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं. अगर उन्हें उनका हिस्सा नहीं मिला, तो ऐसी हड़तालें और बढ़ सकती हैं। 

दुनिया AI और टेक्नोलॉजी की बात कर रही है, लेकिन उसके पीछे काम करने वाले लाखों लोग भी हैं. अगर वही लोग काम रोक दें, तो पूरी डिजिटल दुनिया की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। 

आम आदमी के लिए यह खबर सिर्फ एक कॉर्पोरेट विवाद नहीं है. इसका सीधा असर उसकी जेब पर पड़ सकता है. आने वाले महीनों में अगर गैजेट्स महंगे होते हैं या उनकी कमी होती है, तो इसकी एक बड़ी वजह यही हड़ताल हो सकती है। 

बस्तर पहुंचे CM योगी, मुख्यमंत्री साय ने किया गर्मजोशी से स्वागत

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होने पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उन्हें सम्मान दिया।

बता दें कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन आज बस्तर में किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय, विकास और प्रशासनिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विभिन्न समसामयिक मुद्दों, राज्यों के बीच आपसी समन्वय तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में सुशासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

Iran-US War: ईरान की 14 शर्तों पर अड़ा अमेरिका, ट्रंप ने ठुकराया प्रस्ताव; समझौते की उम्मीद धुंधली

वाशिंगटन

ईरान-अमेरिका के युद्ध में अब तक लग रहा था कि जल्दी ही दोनों पक्ष फिर से भिड़ जाएंगे. अमेरिका की ओर से लगातार धमकियां आ रही थीं, तो ईरान भी कभी चुप नहीं बैठा. ऐसे में माना जा रहा था कि 24-48 घंटों के भीतर ही खाड़ी फिर जल उठेगी. हालांकि अब थोड़ी राहत की खबर ये आई है कि कम से कम अमेरिका आगे के हमलों को टालने की योजना बना चुका है. पहले से ही दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, इस बीच ये खबर थोड़ी राहत जरूर देगी। 

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमला फिलहाल टाल दिया है. उनके मुताबिक कतर, सऊदी अरब और UAE के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अब ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने साफ कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है. उन्होंने कहा कि तेहरान सम्मान, ताकत और अपने राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करते हुए वार्ता में शामिल हुआ है। 

अब तक ईरान युद्ध में क्या-क्या हुआ?

    इस बीच इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष जारी है. अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों और सैन्य कार्रवाई में 3020 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 9273 लोग घायल हुए हैं। 

    उधर गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों को रोकने को लेकर भी इजरायल की आलोचना बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को रोक लिया. बताया जा रहा है कि करीब 47 नौकाओं को कब्जे में लिया गया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। 

    इस कार्रवाई के बाद कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सहायता जहाजों को रोकना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता, लेबनान में जारी हमले और गाजा सहायता बेड़े को लेकर विवाद ने पूरे क्षेत्र को फिर से बड़े संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। 

ईरान ट्रंप-नेतन्याहू के सिर पर रखेगा इनाम
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर शांति वार्ता अभी भी अटकी हुई है। इस बीच ईरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर इनाम घोषित करने पर विचार कर रहा है. द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की संसद एक ऐसे बिल पर वोटिंग की तैयारी कर रही है, जिसमें ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वाले व्यक्ति को इनाम देने का प्रस्ताव रखा गया है। 

 बार-बार शर्तें बदलने से समझौते में आ रही दिक्कत
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बघेई ने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान की चिंताओं को अमेरिका तक पहुंचाया है. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष खत्म करने के लिए ईरान का नया संशोधित प्रस्ताव वॉशिंगटन को सौंपा है. एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि दोनों देश बार-बार अपनी शर्तें और मांगें बदल रहे हैं, जिससे समझौता करना मुश्किल हो रहा है। 

ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाएगा अमेरिका
ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक अमेरिका ने बातचीत के दौरान ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में राहत देने पर सहमति जताई है. यह राहत ईरान की बड़ी मांगों में शामिल थी ताकि वह शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हो सके. हालांकि अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौता होने तक यह छूट लागू रह सकती है. वहीं पाकिस्तान ने ईरान की ओर से तैयार किया गया नया प्रस्ताव अमेरिका को सौंपा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए है. एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं है और यह भी कहा कि दोनों देश बार-बार अपनी शर्तें बदल रहे हैं। 

 

अभिषेक बनर्जी कौन होते हैं साइन करने वाले?’ बंगाल विधानसभा ने MLA का लेटर लौटाया

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा? यह अब तक साफ नहीं हो सका है। इसी बीच खबर है कि विधानसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस की तरफ से नामित विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय से 80 सदस्यों का समर्थन पत्र मांगा है। वहीं, पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ से साइन किए लेटर को खारिज कर दिया है। ऐसे में विधायक ने RTI यानी सूचना का अधिकार दाखिल किया है।

क्या है विवाद
दरअसल, टीएमसी की तरफ से चट्टोपाध्याय को नामित किया गया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में सचिवालय में लेटर भेजा था, जिसमें उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। अब इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। जबकि, सचिवालय का कहना है कि 80 विधायकों के साइन किया हुआ पत्र लाया जाए।

इसके बाद बालीगंज विधायक ने RTI दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि 2011, 2016 और 2021 में विपक्ष के नेता को चुनने के लिए किन नियमों का पालन किया गया था।

दफ्तर पर लगा है ताला
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘विधानसभा में विपक्ष का नेता चुनने के लिए आमतौर पर ऐसी कोई चिट्ठी नहीं भेजी जाती। विधानसभा का सचिवालय सीधे उस व्यक्ति को बता देता है कि उन्हें विपक्ष का नेता चुन लिया गया है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि विपक्ष के नेता के दफ्तर में भी ताला लटका हुआ है।’

सचिवालय भड़का
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेजरी बेंच के एक सदस्य ने कहा, ‘वह (अभिषेक) यह पत्र जारी करने वाले कौन होते हैं? वह सांसद हैं और तथाकथित महासचिव हैं। उनके पास तृणमूल विधायक दल में औपचारिक रूप से कोई पद नहीं है। इस मामले में उनके साइन क्यों चलेंगे।’ साथ ही कहा, ‘ये बकवास अब रुकनी ही चाहिए।’
पत्र में क्या

13 मई को तृणमूल की तरफ से विधानसभा सचिव समरेंद्र नाथ दास को पत्र सौंपा गया था। इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। साथ ही फिरहाद हाकिम को विपक्ष का चीफ व्हिप बनाया गया था। जबकि, नयन बंदोपाध्याय और आशिमा पात्रा को उपनेता बनाने की बात कही गई थी।

चट्टोपाध्याय का कहना है, ‘मैं आरटीआई दाखिल करने के लिए मजबूर हो गया था। उसमें मैंने पूछा है कि बीते तीन सालों में सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए किन नियमों का पालन किया है।’ उन्होंने नियमों का पालन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विपक्ष में सबसे बड़े दल को महज 30 सीटों की जरूरत होती है।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सचिवालय ने चट्टोपाध्याय की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि विधायकों एक आंतरिक मीटिंग में अपना नेता चुनना चाहिए। सूत्रों ने यह भी कहा कि सचिवालय ने बैठक के नतीजों का ब्योरा मांगा है।

पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई ASI और प्रधान आरक्षकों के तबादले

रायपुर 
छत्तीसगढ़ के पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल की सूचना मिली है। यहां बेमेतरा जिले में ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले किए गए है। एक साथ 140 पुलिसकर्मियों के तबादले हुए हैं। डीआईजी रामकृष्ण साहू के निर्देश के बाद ट्रांसफर आदेश जारी किया गया है। इस बदलाव को कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जारी सूची के मुताबिक, कई ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले और नई पदस्थापनाएं की गई हैं। करीब 140 पुलिसकर्मियों का एक साथ ट्रांसफर किया गया है। उन्हें वर्तमान पदस्थापना स्थान से हटाकर नई जगह पर तैनात किया गया है। पुलिस विभाग में यह बड़ा फेरबदल प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

ट्रांसफर आदेश के साथ विस्तृत सूची भी जारी की गई है, जिसमें प्रत्येक कर्मचारी का पदनाम, नाम, वर्तमान पदस्थापना और नई पदस्थापना स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है। पुलिसकर्मियों को जल्द ही अपने-अपने कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि जिले में पुलिस व्यवस्था और अधिक सक्रिय होगी। साथ ही अपराधों पर नियंत्रण और जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान में भी सुधार देखने को मिलेगा।

हाईकोर्ट में बच्चों की दो टूक, बोले- बाल संप्रेक्षण गृह में हैं सुरक्षित; सौतेली बहन को नहीं मिली कस्टडी

बिलासपुर.

बच्चों की मार्मिक कहानी सुनने के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों बच्चों को फिलहाल बाल संप्रेक्षण गृह में ही कड़े विधिक संरक्षण में रखने का अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर मासूम बच्चों ने अपनी मर्मस्पर्शी व्यथा सुनाई। बच्चों ने कोर्ट से कहा कि हम बंदी नहीं हैं, बल्कि बाल संप्रेक्षण गृह में पूरी तरह सुरक्षित हैं।

याचिकाकर्ता के पति ने बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। बच्चों के इस चौंकाने वाले बयान और विधिक तथ्यों की पुष्टि के बाद कोर्ट ने आदेश दिया। दरअसल, सरगुजा क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी नाबालिग सौतेली बहन और भाई को कुछ लोगों ने अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा है। याचिकाकर्ता महिला ने बच्चों को अपने साथ रखने की मांग करते हुए उनकी सुरक्षा करने वाली एक समाज सेविका, महिला एवं बाल संप्रेक्षण गृह के अधिकारियों सहित अन्य को पक्षकार बनाया था।

चीफ जस्टिस की डीबी में मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि बच्चों को बंदी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनकी सुरक्षा और विधिक संरक्षण के दृष्टिगत उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया है। इस पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए न्यायालय ने बच्चों को कोर्ट में प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट के निर्देशानुसार, पुलिस सुरक्षा में दोनों बच्चों को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

भाई-बहन ने कोर्ट में बताई पूरी सच्चाई
न्यायालय के समक्ष दोनों भाई-बहन ने पूरी सच्चाई बताई। बच्चों ने बताया कि याचिकाकर्ता सौतेली बहन के पति ने नाबालिग बच्ची से तीन बार दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। इस गंभीर अपराध की प्राथमिकी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी है और आरोपी फरार है। कोर्ट ने मासूम बच्चों द्वारा दी गई इस बेहद गंभीर जानकारी को प्रशासनिक और विधिक स्तर पर तत्काल सत्यापित कराया।

तथ्यों की पुष्टि होने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला की नीयत को भांपते हुए बच्चों को उसकी सुपुर्दगी में देने से साफ इंकार कर दिया और उन्हें संप्रेक्षण गृह में ही रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले के समस्त विधिक तथ्यों को रिकार्ड पर लेते हुए प्रतिवादी समाज सेविका को अपना पक्ष व जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है।

ईरान-अमेरिका तनाव का असर, महंगे कच्चे माल से अमृतसर में ठप पड़ी मशरूम खेती

अमृतसर.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की।

हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है।

उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े
पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है।

उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है।

मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार
इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे।

मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।

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