Electric Two-Wheeler खरीदने वालों के लिए बड़ा अपडेट, सरकार बदल सकती है सब्सिडी नियम

नई दिल्ली

देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर मिलने वाली सब्सिडी को और बढ़ा सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के लिए अतिरिक्त फंड की डिमांड करने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल वाहनों की जगह EV टू-व्हीलर अपनाएं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि EV कंपनियों के शेयरों में भी उत्साह देखा जा रहा है।

सरकार पहले ही PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत FY2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी के लिए करीब ₹10,900 करोड़ आवंटित कर चुकी है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग के बाद इस योजना को जुलाई तक बढ़ा दिया गया था। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार इस योजना को और मजबूत बनाना चाहती है। हालांकि, अतिरिक्त फंड कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से मंत्रालय इस पर चर्चा कर रहा है कि किन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर इस सूची में सबसे ऊपर है।

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हों, ताकि तेल आयात पर दबाव कम किया जा सके। खास बात यह है कि अब EV केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं।

हाल के आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। मई के पहले आधे हिस्से में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल टू-व्हीलर बिक्री में 5.5% की गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि लोग अब पेट्रोल स्कूटर की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता देने लगे हैं। एथर (Ather Energy) के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत सिंह फोकेला ने कहा कि पहले हर घर में पेट्रोल वाहन जरूरी माना जाता था, लेकिन अब हर परिवार कम से कम एक EV रखना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि EV अब घर की दूसरी गाड़ी के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑफिस जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल स्कूटर चलाने में प्रति किलोमीटर कई रुपये खर्च होते हैं, वहीं EV स्कूटर की लागत करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ जाती है। रात में घर पर चार्जिंग कर लेना और पेट्रोल पंप की लाइन से बचना लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।

अगर सरकार सब्सिडी और बढ़ाती है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतों में और कमी आ सकती है। इससे ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), TVS iQube, बजाज चेतक (Bajaj Chetak) जैसे ब्रांड्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। भारत की EV क्रांति अब अगले बड़े चरण में प्रवेश करती दिख रही है, जहां सरकार, कंपनियां और ग्राहक तीनों मिलकर क्लीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी में हैं।

भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर, जल्द दस्तक देगा मॉनसून; कई राज्यों में बारिश के आसार

नई दिल्ली

इस समय पूरा उत्तर और मध्य भारत भीषण लू और टेम्परेचर का टॉर्चर झेल रहा है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार दिखाई नदीं दे रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले 7 दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, IMD ने इसी बीच मॉनसून पर बड़ी खुशखबरी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन में मॉनसून भारत में यानी केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके लिए अनुकूल मौसमी स्थितियां बनी हुई हैं।

मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन में कहा है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान, असम, मेघालय, लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है।
दिल्ली में पिछले 14 सालों सबसे गर्म रात

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (25 मई) को न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 5.7 डिग्री अधिक है और लगभग 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। IMD के अनुसार, इस महीने में न्यूनतम तापमान मई के महीने में इससे पूर्व आखिरी बार 26 मई, 2012 को न्यूनतम तापमान इससे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मई महीने की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब इस साल 21 मई को न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस था।
सोमवार को दिल्ली में आंधी-बरिश

आईएमडी के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है, लोदी रोड में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। वहीं, रिज में यह 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है और आयानगर में यह 32 डिग्री सेल्सियस बना रहा जो सामान्य से 5.3 डिग्री अधिक है। IMD के एक अधिकारी ने कहा, ”सफदरजंग, लोदी रोड और आयानगर में गर्म रात की स्थिति दर्ज की गई है।” IMD ने 25 मई को शाम के समय बहुत हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है, जिससे मामूली राहत मिल सकती है।
IMD का येलो अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, गर्म रात तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है। आईएमडी ने सोमवार को लू चलने की आशंका जताते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है जिसके कारण अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले 3-5 दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। IMD के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में विदर्भ के ब्रह्मपुरी में सबसे अधिक 47.1°C तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है। 24 मई तक मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से लेकर 17°N/95°E तक पहुँच चुकी है। अगले 2-3 दिनों में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं।
भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

एक तरफ जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या अधिक) दर्ज की गई है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। IMD ने केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी अगले 4-5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और आसपास के क्षेत्रों पर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है।इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है।
पंजाब-हरियाणा से लेकर पश्चिमी यूपी तक बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे कुछ राहत मिल सकती है। IMD के मुताबिक, 25 से 27 मई के दौरान उप-दहमालयी पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा 25 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इसके अलावा 28 से 30 मई के बीच, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-बिजली के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है।

पूर्व आबकारी आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत, राहत के साथ लगीं शर्तें

रायपुर 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 25 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को करोड़ों रुपये के कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुप एम. पंचोली की पीठ ने राहत प्रदान करते हुए कहा कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना है. 

अदालत ने मुख्य मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले, दोनों में ही निरंजन दास को जमानत दी है.

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि कथित तौर पर ‘किंगपिन’ बताए जा रहे निरंजन दास ने राज्य में अन्य सह-आरोपियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से आबकारी नीति बनाने में भूमिका निभाई थी. 

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि दास को इन मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सह-आरोपियों की तरह ही दास पर भी कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल अदालती सुनवाई व जांच में शामिल होने के लिए ही राज्य में आ सकेंगे. 

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वे बाद में इन शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं.

इससे पहले 1 मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इसी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी जमानत दे दी थी. इस पूरे मामले में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 17 जनवरी 2024 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक पहलुओं की जांच शुरू की थी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) 11 अप्रैल 2024 को मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है. 

ईडी के अनुसार, भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान साल 2019 से 2023 के बीच इस घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दुकानों पर अवैध शराब सप्लाई कर वसूली की गई. केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 2,883 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है.

गढ़चिरौली में माओवादियों की गुप्त हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, जंगल में जमीन के नीचे छिपा था जखीरा

रायपुर
 नक्सल मोर्चे
पर मुस्तैद सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ एक और बड़ी और रणनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। गढ़चिरौली पुलिस ने नक्सलियों के एक गुप्त और अत्याधुनिक हथियार निर्माण कारखाने का पर्दाफाश करते हुए जंगल में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और मशीनों को बरामद कर नष्ट कर दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरी सफलता हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली बेहद सटीक और खुफिया जानकारी के बाद हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा बलों पर होने वाले कई बड़े हमलों को समय रहते टाल दिया गया है।

माओवादियों से पूछताछ में खुलासा
दरअसल, माओवादी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और विभिन्न हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जंगलों में जमीन के नीचे हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। इस बड़ी साजिश का खुलासा तब हुआ जब 16 मई 2026 को ‘ ऑपरेशन अंतिम प्रहार ‘ के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने स्वीकार किया कि बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में हथियार बनाने का एक गुप्त ठिकाना सक्रिय है, जहां भारी मात्रा में खतरनाक उपकरण जमीन के नीचे दबाकर रखे गए हैं।

बीडीडीएस टीम ने घेरा जंगल
सटीक इनपुट मिलते ही गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। 21 मई 2026 को विशेष अभियान दल गढ़चिरौली, प्राणहिता और बम निरोधक दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 22 मई को सुरक्षा बलों ने बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र के उत्तर दिशा में स्थित जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया। बीडीडीएस के जवानों ने जब आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और तकनीकी उपकरणों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन के नीचे छुपाए गए हथियारों के इस बड़े कारखाने का पता चला।

सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार तराशने वाली लेथ मशीन से लेकर बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल और जनरेटर तक बरामद किए हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की हथियार सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचा है।

बहू की सड़क हादसे में मौत, कोर्ट ने सास को दिलाया ₹18 लाख का मुआवजा

बिलासपुर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 22 वर्षीय विवाहिता अंजनी ध्रुव की मृत्यु पर उसके परिजनों के पक्ष में 18,03,720 रुपये का क्लेम अवार्ड पारित किया है।

घटना 16 दिसंबर 2023 की है, जब ग्राम भिलाई (मस्तुरी) निवासी अंजनी अपने पति चोलाराम ध्रुव के साथ मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अस्पताल जा रही थी। भिलाई पुल के पास पति ने वाहन को तेजी व लापरवाही से चलाया, जिससे गिरकर अंजनी की मौत हो गई। थाना मस्तुरी में आरोपी पति के खिलाफ मर्ग दर्ज था।

बीमा कंपनी ने मृतिका की लापरवाही और चालक के पास वैध लाइसेंस न होने की दलीलें दीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पति के पास वर्ष 2035 तक वैध लाइसेंस मौजूद था। आय का पुख्ता प्रमाण न होने पर कोर्ट ने श्रमायुक्त की न्यूनतम मजदूरी दर से ₹10,100 मासिक आय तय की। चूंकि मृतिका पति के साथ पृथक रहती थी, इसलिए कोर्ट ने जेठ-जेठानी को आश्रित न मानकर केवल सास (कमला बाई) को मुख्य आश्रित माना।

वित्तीय सुरक्षा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि जेठ-जेठानी व उनके बच्चों को स्नेह हानि के एवज में कुल 1,92,000 रुपए नगद दिए जाएंगे। वहीं, मुख्य आश्रित (सास) की राशि का 30% हिस्सा 3 वर्ष के लिए बैंक में फिक्स रहेगा, ताकि उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहे और रकम सुरक्षित रहे। शेष 70% राशि तत्काल ट्रांसफर होगी।

 

ट्विशा केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से रोका

भोपाल 
 ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया इस केस को सनसनीखेज बनाने से बचें। मीडिया परिजनों का इंटरव्यू नहीं चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका निष्पक्ष जांच जरूरी है। सच ये है कि लड़की की जान गई है।

मीडिया को बयान देने से बचे पीड़ित और आरोपी के परिवार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित परिवार और आरोपी परिवार दोनों के परिवार वालों से अपील करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं ताकि चल जांच पर किसी तरह का कोई प्रभाव न पड़े।

सॉलिसिटर जनरल बोले- जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा कि ट्विशा केस की जांच आज ही CBI अपने हाथ में लेगी। इस बीच ट्विशा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने FIR दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

गिरिबाला को तुरंत जमानत कैसे? रसूख से जांच में बाधा… ट्विशा केस में सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं और सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित परिवार से मीडिया में या सार्वजनिक मंचों पर बयान न देने की अपील की है. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरिबाला अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि उन्हें तुरंत जमानत कैसे मिल गई। 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBI आज ही मामले की जांच अपने पास ले लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर ले लिया. CJI सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि CBI तुरंत और निष्पक्ष जांच करेगी। 

निष्पक्ष हो जांच: SC
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे ये मौत खुदकुशी हो या फिर कोई अन-नेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मौत), हर हाल में इस पूरे मामले की तह तक जाकर एक निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस वक्त मीडिया और आम जनता के बीच चल रही किसी भी तरह की अटकलों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। 

सरकार के फैसले की सराहना
अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात भी सामने आई कि आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में ये नैरेटिव (विमर्श) सेट किया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले की सराहना की है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके। 

‘जांच में सहयोग नहीं कर रही गिरिबाला’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अब तक पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं, लेकिन वह लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने तुरंत ही जमानत भी मिल गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के लिए उनसे जब उनका मोबाइल मांगा गया तो उन्होंने इस को लेकर भी परेशानियां खड़ी कीं। 

साथ ही ट्विशा के वकील ने कहा कि ट्विशा की सास मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में कॉल डिटेल्स भी दे रही हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इन बातों को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों (आरोपी-पीड़ित) के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वो मीडिया में बयान देने के बजाय अपने बयानों को सीधे जांच एजेंसी के पास रिकॉर्ड कराएं। 

‘परिवार आना चाहिए आगे’
शीर्ष अदालत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा और दुख से गुजरना पड़ता है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवारों को सही वक्त पर अपनी बेटियों के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर उनके साथ सुरक्षित रहे। 

‘प्री-जज नहीं बनाना चाहती कोर्ट’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और आम जनता से इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से पूरी तरह दूर रहने की अपील की. सीजेआई ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि लोग देश की इस सबसे प्रीमियर जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा रखें. अदालत अभी उन मुद्दों के परिणाम पर कोई पहले से राय (प्री-जज) नहीं बनाना चाहती है, जिनकी जांच होना अभी बाकी है। 

परिवार दायर कर सकता है ट्रांसफर याचिका
इसके अलावा ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि वह इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता के लिए इसे मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग कर सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और वो इसके लिए किसी भी समय स्थानांतरण याचिका दायर कर सकते हैं। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं। 

क्या है मामला
बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल के घर की छत पर फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए उसका पति और सास जिम्मेदार है। वहीं, ससुराल पक्ष ने आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग्स लेने लगी थीं।

12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार 12 दिन बाद हुआ। इस दौरान ट्विशा की मां बदहवास दिखीं। वह दहाड़ मार-मारकर रो रही थीं। परिवार के अन्य सदस्य भी फूट-फूटकर रो रही थी। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स की चार सदस्यीय मेडिकल टीम ने उनका दूसरा पोस्टमार्टम पूरा किया।

 

इबोला वायरस को लेकर भारत में हाई अलर्ट, सरकार ने जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था। 

संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि
आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला (‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता
इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने ‘अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं। 

भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। 

देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट
भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 

कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें। 

इबोला का ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन बेहद खतरनाक
इबोला का ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे ‘इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

एयरपोर्ट पर Reel और Video Shooting पर रोक, DGCA की नई गाइडलाइन लागू

 रायपुर
 एयरपोर्ट परिसर में रील, वीडियो और फोटो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने वालों के लिए अब सख्ती बढ़ा दी गई है। रायपुर समेत देश के बड़े एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ते रील कल्चर और सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन (DGCA) और ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी (BCAS) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

संवेदनशील क्षेत्रों में शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित
नई गाइडलाइन के तहत एयरपोर्ट के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटो, वीडियो और रील बनाना पूरी तरह बैन रहेगा। सुरक्षा जांच क्षेत्र, विमान पार्किंग एरिया और यात्रियों को विमान तक ले जाने वाले जोन में कैमरा चलाने पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीसीए ने इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना है।

अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा होल्ड एरिया, जहां सीआइएसएफ यात्रियों और सामान की जांच करती है, वहां किसी भी प्रकार की वीडियो शूटिंग या फोटोग्राफी कानूनी अपराध मानी जाएगी।

विमान के पास वीडियो शूटिंग पर रोक
विमान खड़े होने वाले क्षेत्र, रनवे से जुड़े हिस्सों और बस से विमान तक जाने वाले रास्तों में रुककर वीडियो या फोटो बनाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से विमान संचालन और मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होते हैं और सुरक्षा जोखिम बढ़ता है।

उड़ान के दौरान सीमित छूट
डीजीसीए के निर्देशों के अनुसार यात्री टेकआफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान अपनी सीट से सामान्य फोटो या वीडियो ले सकते हैं। ऐसा कोई उपकरण या तरीका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिससे विमान संचालन प्रभावित हो। केबिन क्रू यदि कैमरा बंद करने का निर्देश देता है तो उसका पालन करना अनिवार्य होगा।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्रों में वीडियो या रील बनाते पाए जाने पर सीआइएसएफ द्वारा फोन या रिकार्डिंग उपकरण जब्त किया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विमान अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। साथ ही उसे अनरूली पैसेंजर घोषित कर तीन महीने से लेकर दो साल या उससे अधिक समय तक हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

प्रोफेशनल शूटिंग के लिए अनुमति जरूरी
यदि कोई व्यक्ति विज्ञापन, फिल्म या प्रोफेशनल ब्लाग के लिए एयरपोर्ट परिसर में शूटिंग करना चाहता है तो उसे डीजीसीए और संबंधित एयरपोर्ट अथारिटी से पहले अनुमति लेनी होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य रहेगा।

दिल्ली में CM विष्णु देव साय की CM रेखा गुप्ता से मुलाकात, सुशासन और विकास पर चर्चा

रायपुर
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिल्ली दौरे पर हैं. अपने व्यस्त दिल्ली दौरे पर सीएम ने आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की. ये मुलाकात वैसे तो सौजन्य मुलाकात रही, लेकिन दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच कई अहम विषयों पर भी चर्चा हुई। 

विष्णु देव साय की सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता के साथ सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर अहम चर्चा की. दोनों की ये मुलाकात सीएम रेखा गुप्ता के आवास पर हुई. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में चल रही योजनाओं को लेकर भी चर्चा की. मुलाकात के दौरान जनहित, सुशासन, शहरी विकास और सार्वजनिक सुविधाओं में विस्तार और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई. मुलाकात के दौरान सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता को छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी दी. सीएम साय ने रेखा गुप्ता को बताया कि कैसे हम जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए छत्तीसगढ़ की जनता को लाभ पहुंचा रहे हैं। 

सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर चर्चा
मुलाकात के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने देश के विकास में अपने-अपने राज्यों की अहम भूमिका और आपसी सहयोग पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं के बीच समसायमिक मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया गया है. सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात के दौरान उनको छत्तीसगढ़िया संस्कृति से जुड़ी कई भेंट भी गिफ्ट किए। 

विकास योजनाओं पर सरकार का फोकस
बीते दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर थे. अमित शाह ने छत्तीसगढ़ और बस्तर में चल रहे विकास के कार्यों को लेकर साय सरकार की तारीफ की थी. छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद के खत्म होने के ऐलान के बाद से छत्तीसगढ़ लगातार विकास योजनाओं पर फोकस करने में लगा है. सीएम कई मंचों से खुद ये कह चुके हैं कि वो बस्तर के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। 

दुबई से ऑपरेट हो रहा था करोड़ों का Online Satta रैकेट, रायपुर में सोनू फतनानी गिरफ्तार

रायपुर
 राजधानी रायपुर की क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए दुबई से “नसीब बुक” संचालित करने वाले आरोपी सोनू फतनानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को तिल्दा पहुंचने के दौरान घेराबंदी कर पकड़ा गया। कार्रवाई में पुलिस ने उसके कब्जे से 9 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।

पुलिस के अनुसार, सोनू फतनानी लंबे समय से दुबई में बैठकर ऑनलाइन सट्टे का कारोबार संचालित कर रहा था। वह “नसीब बुक” नाम से सट्टा एप और नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क के जरिए छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अवैध सट्टेबाजी का कारोबार फैलाया गया था।

भारत आने की सूचना पर सक्रिय हुई क्राइम ब्रांच
क्राइम ब्रांच को आरोपी के भारत आने की सूचना पहले ही मिल चुकी थी। इसके बाद पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही सोनू फतनानी तिल्दा पहुंचा, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नामों और करोड़ों रुपये के लेन-देन का खुलासा हो सकता है।

भाई राहुल फतनानी की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का भाई राहुल फतनानी भी इस सट्टा नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राहुल सट्टे से आने वाली रकम के प्रबंधन का काम संभालता था।

तिल्दा के वार्ड क्रमांक-05 में राहुल का एक आलीशान बंगला बन रहा है। पुलिस अब उसकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
बब्बन लालवानी से जुड़े मिले तार

पुलिस जांच में आरोपी के संबंध पूर्व में गिरफ्तार सटोरिया बब्बन लालवानी से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क होने और ऑनलाइन सट्टे के कारोबार में साझेदारी की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, करीब तीन माह पहले सोनू फतनानी की बुआ का निधन हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी के डर से वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ था। इसके बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी।
पुराने विवाद भी आए सामने

पुलिस सूत्रों ने बताया कि राहुल फतनानी पहले भी विवादों में रह चुका है। जानकारी के मुताबिक, भारी रकम हारने के बाद उसने एक अन्य सटोरिए के सामने अपने घर में मिट्टी तेल डालकर आत्महत्या की कोशिश की थी। हालांकि उस दौरान उसे बचा लिया गया था। फिलहाल क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच में जुटी हुई है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

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