शादी के 48 घंटे बाद दूल्हे को लगा बड़ा झटका, सुहागरात के बाद दुल्हन ने किया ऐसा कांड कि उड़ गए होश

छतरपुर
 छतरपुर जिले में एक बार फिर “लुटेरी दुल्हन” का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शादी की चाह में बिजावर का एक युवक कथित दलालों के जाल में फंस गया और डेढ़ लाख रुपए गंवाने के बाद अब पुलिस के चक्कर काट रहा है। मामला बिजावर निवासी 35 वर्षीय सोनू पाठक से जुड़ा है, जिसकी शादी उड़ीसा की रहने वाली मनीषा नाम की युवती बताकर कराई गई थी। आरोप है कि उड़ीसा के सम्बलपुर निवासी दलाल काशीराम पल्लवी ने यह पूरा सौदा कराया।

पीड़ित युवक के मुताबिक दलाल ने उसे तीन लड़कियां दिखाई थीं, जिनमें से उसने मनीषा को पसंद किया। इसके बाद 13 मई 2026 को मुंह दिखाई की रस्म कराई गई। अगले दिन 14 मई को छतरपुर स्थित नरसिंह मंदिर में दोनों ने वरमाला पहनाकर शादी की। शादी के बाद परिवार में खुशी का माहौल था और नवविवाहिता का गृह प्रवेश भी धूमधाम से कराया गया।

परिजनों का कहना है कि 16 मई को सुहागरात के बाद अगले दिन सुबह नवविवाहिता ने अचानक तबीयत खराब होने की शिकायत की। 18 मई को उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती कराया गया। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान वह बाथरूम जाने का बहाना बनाकर फरार हो गई। जाते समय वह सोने-चांदी के जेवर और नकदी भी अपने साथ ले गई।

घटना के बाद दूल्हा सोनू पाठक अपने परिजनों के साथ देर रात सिटी कोतवाली पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कथित दलालों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

यह पहला मामला नहीं हैं छतरपुर जिले में इससे पहले भी शादी के नाम पर युवकों को ठगने वाली “लुटेरी दुल्हन गैंग” के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में पुलिस कई बार गिरोह का खुलासा कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शादी के नाम पर ठगी का नेटवर्क लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के दर्शन कर की सर्वकल्याण की प्रार्थना

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के साथ अन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रवास के प्रथम दिन जगदलपुर में नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह और तीन राज्यों छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भेंट एवं चर्चा की। प्रवास के दूसरे दिन मंगलवार को मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भागीदारी की।

छत्तीसगढ़ की कला की सराहना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बस्तर में पारम्परिक लोक नृत्यों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के साथ ही विभिन्न कला शिल्पों और वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ की कला की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक कलाएं और लोक कलाकार प्रतिभा के धनी हैं। मध्यप्रदेश की कलाओं का भी छत्तीसगढ़ की कलाओं से काफी साम्य है। दोनों राज्यों के शिल्पी भी अपने हुनर के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं।

मां दंतेश्वरी देवी के दर्शन और विज्ञान केंद्र का अवलोकन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक के पश्चात दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन किए और सर्वकल्याण के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दर्शन और पूजन के दौरान अनेक श्रद्धालुओं से भेंट और चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को ही दंतेवाड़ा में विज्ञान केंद्र का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान केंद्र में प्रदर्शित विभिन्न विज्ञान प्रादर्श देखे और जानकारी प्राप्त की।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में अपनी यात्रा को सुखद बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ कभी एक थे। उन्हें पूर्व में इस अंचल में आने का सौभाग्य नहीं मिला था। मध्य क्षेत्रीय बैठक के कारण बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी की मंशा के अनुसार महिला, किसान, युवा, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के लिए दोनों राज्य निरंतर कार्य करेंगे।

श्रेष्ठ आतिथ्य के लिए दिया धन्यवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले के प्रति मध्य क्षेत्रीय परिषद बैठक के आयोजन और श्रेष्ठ आतिथ्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

 

दंतेवाड़ा प्रशासन की अनूठी पहल “उजर 100” योजना से संवरेगा मेधावियों का भविष्य

रायपुर

बस्तर अंचल के प्रतिभावान और जरूरतमंद युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और अनूठी शैक्षणिक पहल की है। जिले के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से “उजर 100” योजना शुरू की गई है।
​इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन, चयन प्रक्रिया और पात्रता नियमों को तय करने के लिए आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में दोपहर 3 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्ययोजना का खाका तैयार किया गया।

​100 सीटों का वर्गवार निर्धारण, स्थानीय को प्राथमिकता    

​योजना के तहत कुल 100 सीटों का कोटा निर्धारित किया गया है। सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसमें वर्गवार सीटें तय की गई हैं। जिसमे ​अनुसूचित जनजाति (ST) के 76,​अनुसूचित जाति (SC) के 06,​अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 14 और ​अनारक्षित (General) के 04 सीटें शामिल है। इसके साथ ही कुल सीटों में 6 प्रतिशत आरक्षण दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित रहेगा। योजना का लाभ केवल दंतेवाड़ा जिले के मूल निवासी छात्रों को ही मिलेगा, जिन्होंने प्रथम प्रयास में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की हो।

​5 लाख की आय सीमा, लेकिन ‘सुपर टैलेंटेड’ बच्चों को पूरी छूट 

​सामान्यतः योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। लेकिन प्रशासन ने प्रतिभा को नियमों में नहीं बांधा है। छत्तीसगढ़ बोर्ड (CGBSE) की प्रावीण्य सूची में जिले के शीर्ष 10 स्थान पाने वाले छात्रों और IIT, NIT, NEET, JEE, NDA व AIIMS जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाओं में चयन पाने वाले विद्यार्थियों पर आय की कोई सीमा लागू नहीं होगी। इसी तरह छत्तीसगढ़ बोर्ड के टॉप 100 या सीबीएसई के टॉप 20 छात्र, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में चयनित विद्यार्थी, नक्सल प्रभावित परिवारों के बच्चे, खनन प्रभावित ग्रामों के छात्र और बीपीएल (BPL) कार्डधारी परिवारों के होनहार बच्चे इस योजना में पहली प्राथमिकता पर होंगे।

​पढ़ाई से लेकर रहने-खाने का खर्च उठाएगी सरकार; सीधे खाते में आएगा पैसा   

​”उजर 100″ योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को कॉलेज की फीस, हॉस्टल, भोजन और अध्ययन सामग्री (किताबें-कॉपी) का पूरा खर्च दिया जाएगा। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Professional Courses) की पूरी फीस सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान को भेजी जाएगी। वहीं, हॉस्टल और किताबों का खर्च डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे छात्र के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
​काउंसिलिंग के लिए मिलेगी 

हवाई यात्रा की सुविधा

जिला प्रशासन ने मेधावियों के प्रोत्साहन के लिए बड़े कदम उठाए हैं। यदि जिले का कोई छात्र IIT, NIT, AIIMS, NEET या NDA जैसी परीक्षाओं में चुना जाता है, तो उसे संस्थान में रिपोर्टिंग या काउंसिलिंग के लिए जाने हेतु बस, रेल या हवाई यात्रा की मुफ्त सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्रों को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा। ड्रॉप लेकर तैयारी करने वाले छात्रों को विशेष परिस्थिति में कोचिंग सहायता भी मिलेगी।

​ऑफलाइन होंगे आवेदन, बनेगी वेटिंग लिस्ट   ​

चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए आवेदन ऑफलाइन माध्यम से जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा में जमा किए जाएंगे। स्क्रूटनी, मेरिट लिस्ट और फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद जिला स्तरीय कमेटी अंतिम मुहर लगाएगी। मुख्य सूची के साथ 50 विद्यार्थियों की एक प्रतीक्षा सूची (Waiting List) भी बनाई जाएगी, ताकि कोई सीट खाली रहने पर दूसरे हकदार को मौका मिल सके। ​”उजर 100″ योजना दंतेवाड़ा के युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी। आर्थिक तंगी के कारण अब किसी भी होनहार का सपना नहीं टूटेगा। यहाँ के बच्चे अब राष्ट्रीय पटल पर जिले का नाम रोशन करेंगे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन कुरुद-सिर्री मार्ग और सिर्री-चटौद सड़क का किया निरीक्षण

रायपुर

 लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज धमतरी शहर में बनने वाले दो फोरलेन सड़कों की जगह देखी। लोक निर्माण विभाग द्वारा रत्नाबांधा चौक से कांकेर बायपास तक पांच किलोमीटर तथा सिहावा चौक से नगरी रोड में पांच किलोमीटर सड़क का फोरलेन के रूप में उन्नयन किया जा रहा है। इन दोनों सड़कों का काम जल्दी ही शुरू होगा।  बंसल ने अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए दोनों सड़कों के काम समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश कार्यपालन अभियंता को दिए।

विभागीय सचिव ने धमतरी जिले में कुरुद-चरमुड़िया-गोबरा-सिवनी-चिंवरी-सिर्री सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य का निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग द्वारा 30 करोड़ 38 लाख रुपए से अधिक की लागत से इस 9.3 किमी सड़क का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण किया जा रहा है। इसे फरवरी-2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।

 बंसल ने सिर्री-फुसेरा-करगा-चटौद सड़क चौड़ीकरण के कार्यों को भी देखा। उन्होंने अच्छी गुणवत्ता के साथ सड़क का काम तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। विभाग द्वारा 15 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से 9.6 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। धमतरी के कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी भी दोनों सड़कों के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की

रायपुर 

 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी सहित इन सदस्य राज्यों और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की मेज़बानी में आयोजित की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि यह बहुत हर्ष का विषय है कि यह बैठक बस्तर में आयोजित की जा रही है और इससे पहले ही आज पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि आज भारत के नक्सल मुक्त होने का संपूर्ण श्रेय हमारे सुरक्षाबलों के जवानों के परिश्रम और बहादुरी को जाता है। हमारी एजेंसियों ने बहुत सटीकता के साथ इनपुट एकत्र किए, सभी राज्यों के पुलिसबलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ मिलकर हर इनपुट पर सटीक कार्रवाई करने से संबंधित समयबद्ध निर्णय किए। इसके साथ ही Whole of the Government Approach के साथ सभी राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के सभी विभागों ने नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में विकास को पहुंचाने का काम किया।

 अमित शाह ने कहा कि हमारी लड़ाई समाप्त नहीं हुई है क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगभग पांच दशक से विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी क्षेत्रों के समकक्ष नहीं ले आते, तब तक हमारी लड़ाई समाप्त नहीं होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने पूरे देश के नक्सल मुक्त होने के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन किया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जो भी चीजें चाहिए थीं, उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर उन्हें प्राप्त किया और जहां नेतृत्व की जरूरत थी, वहां मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी ने नेतृत्व भी प्रदान किया और इसी का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है।

 अमित शाह ने कहा कि राज्यों के बीच के और राज्यों और केन्द्र के बीच के सभी विवादित मुद्दे समाप्त कर हम आज एक अच्छे वातावरण में यह बैठक कर रहे हैं।  शाह ने कहा कि आज की बैठक में सभी एजेंडा विकास की मॉनिटरिंग से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमारा संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और क्षेत्रीय परिषद की बैठकें निरंतर हो रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत बड़े भूभाग में चार राज्यों के बीच और चार राज्यों का केन्द्र के साथ कोई विवाद ही नहीं बचा है, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य हैं। उत्तर के हिमालय क्षेत्र से लेकर गंगा-यमुना के मैदानी भूभाग से लेकर मध्य भारत के पठारी, वन समृद्ध और खनिज समृद्ध क्षेत्र इस क्षेत्र में आते हैं, जो निश्चित रूप से देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होने कहा कि यह क्षेत्र हमें देश के अनाज के भंडारों को भरने में बड़ी मदद करता है। इस क्षेत्र के समृद्ध खनिज भंडार से देश के विकास को गति मिलती है और इसी क्षेत्र की समृद्ध विरासत और संस्कृति ने देश को आगे बढ़ाने में मदद की है। इसी क्षेत्र में देश के आस्था के सभी केंद्र करीब-करीब एक ही जगह पर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग सात राज्यों को जोड़ता है और इस दृष्टि से पूरे मध्य क्षेत्र का बहुत महत्व है। गृह मंत्री ने कहा कि आज यह पूरा क्षेत्र ना केवल नक्सल मुक्त हुआ है, बल्कि विवादों से भी मुक्त हुआ है, जो हम सबके लिए बहुत हर्ष का विषय है।

 अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद बैठकों का एक मजबूत और जीवंत तंत्र बना है – हमने इसे निर्णायक, निरंतर और परिणामदायी बनाया है। 2004 से 2014 के 10 वर्षों में क्षेत्रीय परिषद की मात्र 11 बैठकें हुई थीं, जो 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 32 हो गई हैं। पहले 10 वर्षों में स्टैंडिंग कमेटी की 14 बैठकें हुई थीं, जो इस अवधि में ढाई गुना बढ़कर 35 हुई हैं। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 में मात्र 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 में 1729 मुद्दों पर चर्चा हुई है, और उनमें से लगभग 80% मुद्दों का सफल निराकरण भी कर लिया गया है। लंबित मुद्दों में से अधिकांश मॉनिटरिंग से संबंधित हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन -2 पर हमें अभी से फोकस करना चाहिए और हर घर में नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और समाज कल्याण बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। गृह मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और सभी मुख्य सचिवों से आह्वान किया कि कुपोषण के खिलाफ भारत सरकार की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल ड्रॉपआउट दर और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी और अधिक कार्य हों। वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार इस विकसित क्षेत्र को पूर्ण विकसित बनाने में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।

 अमित शाह ने कहा कि शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के चारों क्षेत्र में भी और अधिक गति से कार्य करें। गृह मंत्री ने अपील की कि हमारा कम से कम 50% ध्यान ग्रामीण विकास और व्यक्ति को मजबूत बनाने वाली योजनाओं पर रहना चाहिए।

गृह मंत्री ने कहा कि हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक की सुविधा उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हमारी सभी योजनाएं Direct Benefit Transfer (DBT) आधारित हैं, इसीलिए सभी राज्यों को इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने कहा कि POCSO और बलात्कार के मामलों में अगर समय से DNA जांच हो जाए तो इनमें दोषसिद्धि की दर शत-प्रतिशत हो सकती है।  शाह ने कहा कि अदालतों में लंबित पड़े पाँच साल से अधिक पुराने मामलों के तेजी से निपटारे के लिए उच्च न्यायालयों को विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए। गंभीर अपराधों में शासन को ऐसी गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे 1930 हेल्पलाइन पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के प्रारूप के अनुरूप ही राज्यों का प्रारूप लागू करें और राज्यों की हेल्पलाइन के कॉल सेंटर को अपडेट करें।

 अमित शाह ने कहा कि मिलावटखोरी के मामलों में जो केस रजिस्टर्ड होता है और पेनल्टी लगती है तो उसकी प्रसिद्धि की भी व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता को पता चलेगा कि दोषी दुकानों पर मिलावट वाली चीजें मिलती हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली की तीनों नवीन न्याय संहिता पर बहुत अच्छा अमल हुआ है। उन्होंने कहा कि अब भी इसमें बहुत सारे मुद्दे ऐसे हैं जिनके क्रियान्वयन पर हमें बल देना होगा गृह मंत्री ने कहा कि जिस तरह से हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त किया है, उसी तरह से 3 साल में हर आपराधिक मुकदमे को सुप्रीम कोर्ट तक अंजाम देने का लक्ष्य हमें 2029 से पहले पूरा करना है।

छत्तीसगढ़ में कल बंद रहेंगे 20 हजार मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ विरोध

रायपुर.

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ ऑफलाइन दवा विक्रताओं ने हल्ला बोल दिया है. छत्तीसगढ़ सहित देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा विक्रेताओं ने 20 मई को राष्ट्रव्यापी बंद का ऐलान किया है. इस बंद के समर्थन में छत्तीसगढ़ के करीब 20 हजार मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहेंगे.

दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिना पर्याप्त निगरानी और नियमों के दवाइयों की बिक्री की जा रही है, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है और छोटे दवा व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. छत्तीसगढ़ के दवा व्यापारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियों को लेकर लंबे समय से सरकार से शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर यह राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया गया है. बंद के दौरान प्रदेशभर में मेडिकल स्टोर संचालक अपना कारोबार बंद रखेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी करेंगे.

संवेदनशील दवाओं का हो रहा गलत इस्तेमाल
दवा विक्रेताओं के संगठन का आरोप है कि कई ऑनलाइन कंपनियां डॉक्टर की पर्ची के बिना भी दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं. इससे एंटीबायोटिक और अन्य संवेदनशील दवाओं का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, इसलिए इसकी बिक्री पर सख्त नियंत्रण जरूरी है.

हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कुछ मेडिकल स्टोर खुले रह सकते हैं, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की परेशानी न हो. वहीं, बंद को लेकर आम लोगों से पहले ही जरूरी दवाइयां खरीद लेने की अपील की गई है. दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू नहीं किए, तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

नेपाल में बालेन सरकार के बुलडोजर एक्शन से बढ़ी चिंता, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

गोरखपुर
 नेपाल में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। 

उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नेपाल में बढ़ते दबाव और कार्रवाई के चलते वहां रह रहे रोहिंग्या मुसलमान रोजगार और शरण के लिए अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार पूरे देश में अवैध निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। इस कार्रवाई के तहत बुलडोजर से ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। नेपाली सेना ने भी संबंधित निकायों से अवैध बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तृत आंकड़ा मांगा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि काठमांडू के कपन क्षेत्र समेत नेपाल के विभिन्न हिस्सों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हिंदूवादी संगठनों द्वारा नेपाल में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियों को हटाने की मांग की जा रही है।

नेपाल सरकार की कार्रवाई, सेना के डाटा संकलन और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के कारण रोहिंग्या के सामने रोजगार, आवास और आजीविका का संकट गहराने लगा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान उर्दू के साथ नेपाली भाषा भी सीख चुके हैं। कई लोगों द्वारा अवैध तरीके से पहचान पत्र बनवाने की जानकारी भी सामने आई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में उनकी पहचान कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नेपाल में बलरामपुर जिले की सीमा से सटे गढ़वा गांव पालिका के कोईलावास वार्ड नंबर-8 में अवैध बस्तियों का चिन्हांकन भी शुरू कर दिया गया है।वहां के वर्तमान प्रधान अब्दुल खालिक सिद्दीकी इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है और अवैध रुप से रहने वालों को कानूनी अधिकार व जमीन के दस्तावेज देने की मांग कर रहा है।

खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि नेपाल में प्रतिकूल हालात बनने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी सीमावर्ती रास्तों का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में प्रवेश की कोशिश कर सकते हैं।

इसी को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

इंडस वाटर ट्रीटी विवाद से सहमा बांग्लादेश, अब गंगा जल संधि पर चाहता है नया समझौता

ढाका 

बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने कहा है कि भारत के साथ संबंध गंगा जल बंटवारा संधि पर निर्भर करेंगे. इसी साल दिसंबर में यह संधि समाप्त हो जाएगी. इस संधि पर साल 1996 में हस्ताक्षर किए गए थे. इस संधि को आगे जारी रखने के लिए 30 साल पूरे होने के बाद इसे रिन्यू करना होगा। 

बांग्लादेश ने फिर अलापा राग
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि बांग्लादेश नए सिरे से की जाने वाली संधि की अहमियत के संबंध में नई दिल्ली को स्पष्ट संदेश भेजना चाहता है. उन्होंने आगे कहा, “भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का अवसर गंगा जल बंटवारा संधि या फरक्का समझौते पर हस्ताक्षर होने पर निर्भर करेगा। 

मौजूदा भारत-बांग्लादेश समझौता, पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज पर गंगा नदी के पानी के बंटवारे को कंट्रोल करता है. संधि की अवधि समाप्त होने के करीब आने के साथ ही, बीएनपी नेताओं ने भारत पर एक नई व्यवस्था के लिए बातचीत शुरू करने की बात करनी शुरू कर दी है. तर्क दिया है कि किसी भी नए समझौते में बांग्लादेश की जरूरतों की झलक होनी चाहिए। 

संधि को रिन्यू करने की मांग
आलमगीर ने कहा, “हम भारत सरकार को एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश के लोगों की अपेक्षाओं के अनुसार चर्चा के माध्यम से एक नई संधि को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। 

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब बांग्लादेश पद्मा नदी पर एक बड़ी बैराज परियोजना पर भी आगे बढ़ रहा है. इसके बारे में ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत के फरक्का बैराज से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना है। 

गंगा संधि क्यों मायने रखती है
इस बहस के केंद्र में खुद गंगा जल बंटवारा संधि है. भारत और बांग्लादेश के बीच यह द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का में कम पानी वाले मौसम के दौरान गंगा के पानी के बंटवारे को कंट्रोल करता है. दोनों पड़ोसियों के बीच सालों की बातचीत और अस्थायी जल-बंटवारे की व्यवस्था के बाद, पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के कार्यकाल के दौरान 12 दिसंबर 1996 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। 

यह संधि मुख्य रूप से 1 जनवरी से 31 मई के बीच पानी के वितरण को कवर करती है, जब नदी का प्रवाह तेजी से घट जाता है और दोनों देश कृषि, परिवहन तथा दैनिक उपयोग के लिए नदी पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं। 

कैसे होता है पानी का बंटवारा
समझौते के तहत, यदि फरक्का में पानी का प्रवाह 70 हजार क्यूसेक या उससे नीचे गिर जाता है, तो भारत और बांग्लादेश प्रत्येक को उपलब्ध पानी का आधा हिस्सा मिलता है. जब प्रवाह 70 हजार और 75 हजार क्यूसेक के बीच होता है, तो बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक मिलता है. भारत को शेष हिस्सा मिलता है. यदि प्रवाह 75 हजार क्यूसेक से अधिक हो जाता है, तो भारत को 40 हजार क्यूसेक मिलता है. बांग्लादेश को बाकी का हिस्सा मिलता है। 

यदि पानी का स्तर तेजी से गिरता है, तो संधि में कोई निश्चित न्यूनतम गारंटी शामिल नहीं है. इसके बजाय, अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि यदि किसी भी 10 दिनों की अवधि के दौरान फरक्का में प्रवाह 50 हजार क्यूसेक से नीचे चला जाता है, तो दोनों देश तत्काल परामर्श करेंगे. इस समय “समानता, निष्पक्षता और किसी भी पक्ष को नुकसान न पहुंचाने” के आधार पर आपातकालीन समायोजन करेंगे। 

फरक्का बैराज एक बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है
यह समझौता इस बात की भी गारंटी देता है कि 11 मार्च से 10 मई के बीच सूखे के मौसम की सबसे संवेदनशील अवधि के दौरान, भारत और बांग्लादेश तीन अलग-अलग 10-दिवसीय चक्रों में बारी-बारी से 35 हजार क्यूसेक पानी प्राप्त करेंगे। 

भारत-बांग्लादेश संबंधों में फरक्का बैराज खुद दशकों से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है. बांग्लादेश सीमा के पास पश्चिम बंगाल में स्थित इस बैराज का निर्माण भारत द्वारा 1970 के दशक में गंगा से हुगली नदी में पानी मोड़ने के लिए किया गया था. इससे तलछट को साफ किया जाता है, ताकि कोलकाता बंदरगाह पर नौवहन क्षमता में सुधार किया जा सके। 

बांग्लादेश लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि इस डाइवर्जन से सूखे के महीनों के दौरान निचले प्रवाह में पानी का बहाव कम हो जाता है. इससे कृषि, मत्स्य पालन, भूजल भंडार और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। 

गंगा चपाई नवाबगंज जिले के माध्यम से बांग्लादेश में प्रवेश करती है. यहां इसे स्थानीय रूप से ‘पद्मा’ नदी के नाम से जाना जाता है. यह देश की सबसे महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक बनी हुई है. खेती, मछली पकड़ने, पारिस्थितिकी तथा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए यह केंद्रीय भूमिका निभाती है। 

सैकड़ों नदियों से घिरा बांग्लादेश, ऊपरी प्रवाह वाले भारत के साथ जल-बंटवारे की व्यवस्था पर बहुत अधिक निर्भर है. दोनों देश 54 सीमा पार नदियों को साझा करते हैं। 

आलमगीर के अनुसार, बांग्लादेश की लगभग 17 करोड़ आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा आजीविका और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नदी प्रणाली पर निर्भर है। 

भारत लगातार यह कहता रहा है कि फरक्का बैराज मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह पर नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए बनाया गया था. हुगली नदी में मोड़ा गया पानी तलछट को बाहर निकालने और शिपिंग चैनलों को बेहतर बनाने में मदद करता है। 

संधि की समाप्ति ने राजनीतिक तनाव को दोबारा बढ़ाया
यह मुद्दा अब फिर से सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि वर्तमान संधि की समाप्ति अवधि नजदीक आ रही है. बांग्लादेश के भीतर इस बात को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है कि इसकी जगह क्या होना चाहिए। 

बीएनपी नेताओं ने मांग की है कि वर्तमान समझौते की अवधि समाप्त होने से काफी पहले एक नए समझौते पर बातचीत शुरू हो जानी चाहिए. आलमगीर ने यह भी तर्क दिया कि जब तक एक वैकल्पिक संधि को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक मौजूदा व्यवस्था लागू रहनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य के जल-बंटवारे के समझौते निश्चित समय-सीमा तक सीमित नहीं होने चाहिए। 

यह नई चर्चा बांग्लादेश द्वारा पद्मा नदी पर एक बड़ी बैराज परियोजना को मंजूरी देने के कुछ ही दिनों बाद आई है. इसके बारे में ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य फरक्का बैराज के “नकारात्मक प्रभाव” की भरपाई करना है. इस परियोजना के 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

पुष्पा झुकेगा नहीं’ वाले TMC नेता जहांगीर खान ने बदले सुर? री-पोलिंग से पहले नामांकन वापस

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया है. इस सीट पर 21 मई को फिर से वोटिंग होनी थी. लेकिन वोटिंग से 48 घंटे पहले ही उन्होंने चुनाव की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है. इससे पहले खान ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था और अग्रिम जमानत की अर्जी दी. उन्होंने कहा कि वोटिंग की तारीख से पहले उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। 

TMC प्रवक्ता बोले- पता नहीं क्यों लिया यह फैसला
TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने बताया कि फाल्टा से उसके उम्मीदवार जहांगीर खान ने 21 मई को विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनाव से हटने का फैसला कर लिया है. TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी को खान के इस फैसले के बारे में जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। 

इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी को खान के इस निर्णय के बारे में सूचना मिली है। हालांकि, पार्टी को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले के पीछे क्या कारण है। उन्होंने कहा, हमने सुना है कि जहांगीर खान ने फाल्टा उपचुनाव में चुनाव नहीं लड़ने या भाग नहीं लेने का फैसला किया है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि पार्टी अभी तक उनके नाम वापस लेने के पीछे के कारण से अवगत नहीं है। यह अचानक लिया गया फैसला माना जा रहा है। पार्टी इस मामले में अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

‘पुष्पा’ का नया क्लाइमेक्स
फिल्म ‘पुष्पा’ का मशहूर संवाद ‘पुष्पा झुकेगा नहीं साला’ बोलकर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने वाले जहांगीर खान का यह कदम किसी बड़े फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं है. चुनाव प्रचार के दौरान उनके दबंग अंदाज और सोशल मीडिया रील्स को देखकर किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे वोटिंग से ठीक पहले मैदान से हट जाएंगे. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, जो नेता चंद दिनों पहले तक विरोधियों को खुलेआम ललकार रहा था, उसने चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन की कड़क घेराबंदी के आगे घुटने टेक दिए. स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि आखिरकार ‘पुष्पा’ का यह तेवर इतनी जल्दी कैसे ढीला पड़ गया। 

क्यों हो रहा फाल्टा विधानसभा में री-पोलिंग?
इस पूरे ड्रामे के पीछे की असल कहानी 29 अप्रैल को हुए पहले दौर के मतदान से जुड़ी हुई है. फाल्टा विधानसभा सीट के सभी 285 पोलिंग बूथों पर उस दिन वोट डाले गए थे, लेकिन मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली, ईवीएम मशीनों पर काली पट्टी (ब्लैक टेप) चिपकाने और मतदाताओं को डराने-धमकाने की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं. विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए सीधे दिल्ली तक गुहार लगाई थी. इसके बाद, चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए 29 अप्रैल को हुए पूरे चुनाव को ही पूरी तरह रद्द कर दिया और आगामी 21 मई को पूरी सीट पर नए सिरे से ‘Fresh Poll’ यानी पुनर्मतदान कराने का ऐतिहासिक फरमान जारी कर दिया। 

21 मई को होने हैं चुनाव
फाल्टा विधानसभा सीट के लिए वोटिंग हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दो चरणों में से दूसरे चरण में, 29 अप्रैल को हुई थी। उस दिन, फाल्टा से चुनावी धांधली की कई शिकायतें सामने आई थीं। कई बूथों पर, भाजपा उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्नों के बगल वाले ईवीएम बटन पर सफेद टेप लगा दिया गया था। इसके बाद, विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता, जो फिलहाल मुख्यमंत्री अधिकारी के सलाहकार हैं। उन्होंने खुद फाल्टा का दौरा किया और इस मामले की गहन जांच की।

उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पूरे फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में दोबारा वोटिंग का आदेश दिया था। दोबारा वोटिंग 21 मई को होगी, और नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे। जहांगीर खान उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होने चुनाव में पर्यवेक्षक के तौर पर आए आईपीएस अजयपाल शर्मा को लेकर टिप्पणी की थी। जिसमें जहांगीर खान ने अजयपाल की सिंघम वाली टिप्पणी पर कहा था कि अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं। 

पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “हमें पता चला है कि जहांगीर खान ने फाल्टा चुनाव में न लड़ने या हिस्सा न लेने का फैसला किया है. उनके इस फैसले के पीछे की वजह के बारे में हमें अभी भी कोई जानकारी नहीं है। 

सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर खान को चुनाव से हटने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए देखा जा सकता है. हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं हुई है। 

‘सिंघम’ की कड़क एंट्री
फाल्टा में दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा दांव खेला. आयोग ने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के तेजतर्रार और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस अधिकारी डॉ. अजय पाल शर्मा को विशेष पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर फलता भेजा. अजय पाल शर्मा की छवि अपराधियों में खौफ और जनता में ‘सिंघम’ वाली रही है. उनके फाल्टा में पैर रखते ही केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया। 

जब आमने-सामने आए दोनों
आईपीएस अजय पाल शर्मा की एंट्री के बाद फाल्टा का सियासी पारा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, वोटरों को डराने-धमकाने की शिकायत मिलने पर आईपीएस अजय पाल शर्मा भारी पुलिस बल के साथ सीधे जहांगीर खान के दफ्तर और आवास पर धमक गए थे. कैमरे के सामने आईपीएस शर्मा ने जहांगीर खान के करीबियों और सुरक्षाकर्मियों को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा था, “उसे (जहांगीर को) कह देना कि अपनी हद में रहे, अगर किसी भी तरह की बदमाशी या वोटरों को डराने की कोशिश की तो बहुत बुरी तरह निपटे जाएंगे, बाद में रोना मत। 

विवाद पर मचा भारी बवाल
इस कड़क चेतावनी के बाद टीएमसी और आईपीएस अजय पाल शर्मा के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया. टीएमसी नेतृत्व ने इसे असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि आईपीएस शर्मा बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और टीएमसी उम्मीदवार के परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं. यहां तक कि एक स्थानीय महिला ने आईपीएस शर्मा और केंद्रीय बलों पर देर रात घर में घुसने और बदसलूकी करने का आरोप लगाते हुए फलता थाने में शिकायत भी दर्ज करा दी थी. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस कार्रवाई पर तीखी आपत्ति जताई थी, जबकि बीजेपी ने ‘सिंघम’ की इस सख्ती का खुलकर समर्थन किया था। 

अदालती चक्रव्यूह का दबाव?
इस भारी विवाद और प्रशासनिक शिकंजे के बीच जहांगीर खान कानूनी तौर पर भी घिर चुके थे. अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट की शरण ली थी. अदालत ने उन्हें 26 मई तक अंतरिम राहत देते हुए चुनाव खत्म होने तक गिरफ्तारी पर रोक तो लगा दी थी, लेकिन कोर्ट ने यह शर्त भी जोड़ी थी कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और इलाके में कोई अशांति नहीं फैलाएंगे। 

गंभीर कुपोषण से स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ी नन्ही शान्वी

रायपुर

महिला एवं बाल विकास विभाग की सतत निगरानी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और परिवार के सहयोग से बीजापुर जिले के विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम पीलूर की एक वर्षीय बालिका शान्वी मड़े ने गंभीर कुपोषण को मात देकर सामान्य श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। शान्वी की यह सफलता क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई है।

शान्वी की माता  सरिता मड़े ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य काफी कमजोर था और उसका वजन उम्र के अनुसार बहुत कम था। जांच में शान्वी गंभीर कुपोषण से पीड़ित पाई गई। उस समय उसका वजन 7.900 किलोग्राम था।

स्थिति को गंभीर देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने लगातार घर-घर जाकर परिवार को संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में समझाया। प्रारंभ में परिवार बच्ची को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ले जाने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन लगातार समझाइश और मार्गदर्शन से परिवार सहमत हुआ।

परियोजना अधिकारी  कल्पना रथ और सेक्टर सुपरवाइजर कु. उजाला बंजारे ने भी परिवार से मुलाकात कर आवश्यक परामर्श दिया। इसके बाद  विगत 2 अप्रैल को शान्वी को एनआरसी में भर्ती कराया गया, जहां उसे चिकित्सकीय देखरेख, विशेष पोषण आहार और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया।
एनआरसी में उपचार और घर लौटने के बाद नियमित देखभाल तथा सही पोषण मिलने से शान्वी के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में उसका वजन बढ़कर 9.200 किलोग्राम हो गया है तथा उसकी ऊंचाई 70.2 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। अब शान्वी पूरी तरह सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है।
शान्वी की यह कहानी बताती है कि समय पर पहचान, सही उपचार, पोषण संबंधी जागरूकता और परिवार के सहयोग से कुपोषण जैसी समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

स्वस्थ बचपन, खुशहाल भविष्य

शान्वी की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश बन गई है कि सही देखभाल और पौष्टिक आहार से हर बच्चा स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकता है।

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