समय-सीमा में पूर्ण करें निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्य: जल संसाधन मंत्री सिलावट

समय-सीमा में पूर्ण करें निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्य: जल संसाधन मंत्री सिलावट

सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

भोपाल 

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि जल संसाधन विभाग की विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का कार्य समय-सीमा में पूर्ण ‍किया जाए। कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर कार्यो का निरीक्षण करें एवं निरीक्षण प्रतिवेदन भिजवाएं। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में कराए जा रहे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं उनकी प्रगति की निरंतर समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य है कि आगामी सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को शिप्रा के निर्मल जल में स्नान कराया जाए और उनकी यात्रा सहज और सुगम हो।

मंत्री सिलावट ने मंगलवार को मंत्रालय में जलसंसाधन विभाग की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री सिलावट ने विभाग की तीन प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना एवं तापी मेगा रिचार्ज परियोजना में कराये जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को कार्य के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सिलावट ने उज्जैन में कराए जा रहे सिंहस्थ सबंधी कार्यों कान्ह डक्ट परियोजना, सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना और क्षिप्रा नदी पर घाट निर्माण कार्य की समीक्षा की। इसके साथ ही उज्जैन, इंदौर और देवास जिलों में निर्माणाधीन बैराजों की अद्यतन जानकारी भी प्राप्त की गई। उन्होंने विभागांतर्गत निर्माणाधीन वृहद, मध्यम एवं लघु सिंचाई परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति की जानकारी ली। मंत्री सिलावट द्वारा भोपाल में केरवा बांध के क्षतिग्रस्त वेस्ट वियर निर्माण कार्य के अंतर्गत बिजली लाइन शिफ्टिंग एवं सुधार कार्य समय-सीमा में पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये।

मंत्री सिलावट ने सीएम मॉनिटरिंग से संबंधित प्रकरणों एवं मुख्यमंत्री की विभागीय घोषणाओं से संबंधित सभी बिन्दुओं पर जानकारी प्राप्त की और प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही इन प्रकरणों की सतत निगरानी करते हुए, इनकी प्रगति से संबंधित रिपोर्ट आगामी पन्द्रह दिवस में दिये जाने के निर्देश दिये।

 

अब तक 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है।

मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है।

मंत्री राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

 

मध्य प्रदेश तपकर हुआ बेहाल! 47°C पहुंचा पारा, नौगांव बना प्रदेश का सबसे गर्म शहर

भोपाल

मध्य प्रदेश में इन दिनों सूरज के सख्त तेवर और लू के थपेड़ों का सितम जारी है. मंगलवार को प्रदेश में पारा 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. इस सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 47 डिग्री पर पहुंचा. इस बीच मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों तक हीटवेव की चेतावनी जारी की है. IMD के अनुसार, बुधवार को भी मौसम बेहद गर्म रहने वाला है, जिससे स्थिति और बिगड़ने वाली है। 

लू के थपेड़े से परेशान लोग
एमपी में सुबह से निकली तेज धूप ने दोपहर तक आग बरसने जैसा एहसास करा रहा है. वहीं लू के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया है. सड़कों पर निकलने वाले लोग चेहरे को कपड़े से ढककर चलते नजर आ रहे हैं. राजधानी भोपाल, ग्वालियर, इंदौर समेत कई शहरों के बाजार दोपहर में सूने पड़ गए हैं। 

गर्मी की वजह से दोपहर के समय में शहर के बाजारों और चौराहों पर आवाजाही कम हो गई है. जरूरी काम से ही लोग घर से बाहर निकल रहे हैं. हालांकि ठंडे पेय, नींबू पानी और गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई। 

MP के इन शहरों में आज तीव्र लू का अलर्ट
मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सतना, रीवा, मऊगंज, दमोह, सीधी, सिंगरौली, सागर, रायसेन और रतलाम में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, खरगोन, शाजापुर, विदिशा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, मंडला, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, शहडोल और मैहर में लू चलने का अलर्ट है. बैतूल, पांढुर्णा, अनूपपुर और सिवनी में भी भीषण गर्मी का दौर रहेगा. इसके अलावा उमरिया, डिंडौरी, बालाघाट, राजगढ़, रायसेन, कटनी और छिंदवाड़ा में वॉर्म नाइट घोषित किया गया है। 

47 डिग्री पहुंचा पारा
मंगलवार को छतरपुर के नौगांव सबसे गर्म रहा. यहां टेम्परेचर रिकॉर्ड 47 डिग्री दर्ज किया गया. वहीं खजुराहो में तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. दतिया में तापमान 45.8 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा राजगढ़ में पारा 45.6 डिग्री सेल्सियस, दमोह में 45.5 डिग्री सेल्सियस, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना-सागर में तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस, सतना में 45.1 डिग्री सेल्सियस, मुरैना, शहडोल, रायसेन, रीवा-श्योपुर में 45 डिग्री, मंडला में 44.6 डिग्री सेल्सियस, उमरिया में 44.5 डिग्री, खरगोन में 44.4 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में 44.2 डिग्री सेल्सियस और खंडवा में 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

इधर, ग्वालियर में तापमान 45 डिग्री पहुंच गया है. राजधानी भोपाल में पारा 44.2 डिग्री, इंदौर में तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में 43.8 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर में पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया।  

मौसम विभाग ने गर्मी से बचने के लिए कुछ स्वास्थ्य सुझाव दिए हैं..

    दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें.
    धूप के सबसे गर्म घंटों (12 से 3 बजे) के दौरान बाहर जाने से बचें. यात्रा करते समय अपने साथ पानी जरूर रखें.
    ओआरएस, छाछ की एवं पेय पदार्थ, ताजे फल (तरबूज, खीरा), नींबू पानी, मौसमी फल सेवन करें, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं.
    गर्मी के समय बाहर निकलते के वक्त सिर को ढककर रखें और सूती कपड़े पहनने से बचें की सलाह दी जाती है.
    छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें, उन्हें धूप से बचें.
    बुखार एवं दस्त (डायरिया) होने पर लापरवाही न बरतें, शरीर गर्म होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.
    खेत, खदान और बाहर काम करने वाले श्रमिक दोपहर में धूप में काम करने से बचें.
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्थानीय अधिकारियों की अधिकृत सूचना से अपडेट रहें.

भोपाल-बीना-इटारसी रूट पर रफ्तार का नया दौर, 9 सुरंगों और 39 बड़े पुलों से गुजरेंगी ट्रेनें

भोपाल 

 मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बीना के बीच जल्द ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने जा रही है. इटारसी भोपाल बीना के बीच बनने जा रही चौथी रेल लाइन के काम ने तेजी पकड़ ली है. चौथी रेल लाइन को केन्द्रीय बजट में स्वीकृति मिलने के बाद इसके सर्वे का काम पूरा हो गया है. रेल्वे अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएगी. 237 किलोमीटर लंबे रूट की इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया है। 

237 किलोमीटर रूट पर बनेंगे 39 बड़े पुल
इटारसी भोपाल बीना तीनों बड़े जंक्शन हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों को रेल लाइन से जोड़ते हैं. तीनों बड़े स्टेशनों के बीच कुल लंबाई 237 रूट किलोमीटर है. इन रूट पर लगातार यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के संचालन का दबाव बढ़ रहा है. इसको देखते हुए इटारसी से बीना तक चौथी रेल लाइन का काम शुरू होने जा रहा है. इस परियोजना के पूरे होने के बाद ट्रेन 9 सुरंगों से होकर गुजरेगी. इसके अलावा 4 महत्वपूर्ण पुलों का भी निर्माण किया जाएगा। 

4329 करोड़ होंगे खर्च
इस रूट में 39 बड़े पुल, 151 छोटे पुल, 43 रोड ओवर ब्रिज और 39 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 4329 करोड़ रुपए हैं. परियोजना के लिए समय सीमा 4 साल निर्धारित की गई है। 

रेल रूट से जुड़ेगी हेरीटेज साइट
चौथी रेल लाइन का काम पूरा होने से मध्यप्रदेश और आसपास के दूसरे राज्यों के प्रमुख हेरीटेज साइज और ईकोटूरिज्म साइट की कनेक्टीविटी और बेहतर होगी. खासतौर से वर्ल्ड हेरीटेज साइट सांची, भीमबेटिका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अलावा दूसरे कई टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचना और आसान हो जाएगा. यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा. इस रूट पर सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर जिले सीधे तौर से जुड़ेंगे। 

उत्तर से दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी
इस रेल लाइन का काम पूरे होने से ट्रेफिक का दबाव कम होगा ओर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी. भोपाल रेल मंडल के डीसीएम नवल अग्रवाल ने बताया, ” इस परियोजना के पूरे होने से 15.2 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता सालाना विकसित होगी. इसका फायदा क्षेत्र में उद्योग और लॉजिस्टिक को मिलेगा. इस रूट पर 25 जोड़ी यात्री ट्रेनों के अलावा करीबन 200 मालगाड़ियों का संचालन और बढ़ेगा. इस परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जा रहा है. पहला बीना से सुमेर, दूसरा सुमेर से रानी कमलापति स्टेशन, तीसरा रानीकमलापति रेल्वे स्टेशन से बरखेड़ा और बरखेड़ा से इटारसी तक रहेगा. इसके लिए भूमि अधिग्रहण काम चल रहा है। 

क्वालिटी ऑडिट मोबाइल ऐप : संस्थाओं की गुणवत्ता सुधार की नई डिजिटल पहल

क्वालिटी ऑडिट मोबाइल ऐप : संस्थाओं की गुणवत्ता सुधार की नई डिजिटल पहल

मध्यप्रदेश में 252 सामाजिक संस्थाओं की निगरानी अब मोबाइल ऐप से

भोपाल 

मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल के रूप में क्वालिटी ऑडिट मोबाइल एप लागू किया गया है। यह पहल डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच को आगे बढ़ाती है। साथ ही विभागीय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों ने इस व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी रूप से स्थापित किया है।

प्रदेश में संचालित शासकीय एवं अशासकीय संस्थाएं जैसे दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र, वृद्धाश्रम, दिव्यांगजनों के संचालित विशेष विद्यालय और नशा मुक्ति केंद्र समाज के कमजोर वर्गों को आश्रय और सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में 252 संस्थाओं के सुचारू संचालन और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। एमपीएसईडीसी के सहयोग से विकसित यह मोबाइल ऐप निरीक्षण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाता है।

इस ऐप की कार्यप्रणाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित है, जिसकी शुरुआत जिला अधिकारी द्वारा विभागीय पोर्टल पर लॉगइन करने से होती है। इसके बाद स्थानीय निकाय में पदस्थ सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को पोर्टल पर पंजीकृत कर यूजर आईडी प्रदान की जाती है, जो उन्हें एसएमएस के माध्यम से प्राप्त होती है। निरीक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निरीक्षण दल का गठन किया जाता है और उसकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है।

अगले चरण में संबंधित संस्था का चयन कर सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को निरीक्षण के लिए असाइन किया जाता है। अधिकारी मोबाइल ऐप डाउनलोड कर आवश्यक अनुमतियां प्रदान करते हैं तथा लोकेशन ऑन कर लॉगइन करते हैं। इसके बाद जिस संस्था का निरीक्षण किया जाना है, उसका चयन कर निरीक्षण प्रक्रिया प्रारंभ होती है।

निरीक्षण के दौरान मोबाइल ऐप के माध्यम से संस्था के न्यूनतम 5 फोटो लिए जाते हैं, जिनके साथ विस्तृत विवरण और रिमार्क दर्ज किए जाते हैं। ऐप में निर्धारित प्रश्नों के उत्तर संस्था की वास्तविक स्थिति के आधार पर भरे जाते हैं, जिससे मूल्यांकन निष्पक्ष और तथ्यात्मक बनता है। निरीक्षण के आधार पर अंत में संस्था को ग्रेडिंग प्रदान की जाती है और रिपोर्ट को सबमिट कर निरीक्षण पूर्ण किया जाता है।

पूरी प्रक्रिया के बाद निरीक्षण रिपोर्ट संचालनालय और जिला स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है। जिला अधिकारी इन रिपोर्टों और ग्रेडिंग का परीक्षण कर संस्थाओं में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करते हैं। इससे न केवल निगरानी व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि संस्थाओं के संचालन में निरंतर सुधार भी देखने को मिलता है।

राज्य शासन इन संस्थाओं में रहने वाले दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य जरूरतमंदों को बेहतर जीवन स्तर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुदान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने में भी यह एप महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कुल मिलाकर, यह मोबाइल ऐप मध्यप्रदेश में सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए एक आधुनिक और प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उभरा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता बनी रहे और प्रत्येक हितग्राही तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं पहुंचें। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम भी है। 

दतिया सीट पर BJP की हलचल तेज, नरोत्तम मिश्रा की कद्दावर नेता संग बंद कमरे में लंबी बैठक

भोपाल/दतिया

 मध्यप्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद यहां उपचुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र के बाद दतिया कलेक्टर ने निर्वाचन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इसी बीच प्रदेश की सियासत में उस समय नई हलचल पैदा हो गई, जब दतिया से पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीर खुद विधानसभा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर साझा की और लिखा — “पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी ने आज विधानसभा में सौजन्य भेंट की…”

हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन दतिया उपचुनाव की संभावनाओं के बीच इस भेंट के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा दतिया सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर रणनीति तैयार कर रही है।

दरअसल, दतिया वही सीट है जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। मिश्रा लंबे समय तक इस क्षेत्र की राजनीति का मजबूत चेहरा रहे हैं और उनकी हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया था। अब जब अदालत के फैसले के बाद सीट खाली हुई है, तो भाजपा इसे वापसी के मौके के तौर पर देख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन सकता है। खासकर नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है। फिलहाल सभी की नजर चुनाव आयोग की घोषणा और भाजपा-कांग्रेस की रणनीति पर टिकी हुई है। दतिया का सियासी रण एक बार फिर गर्माने लगा है।

पारदर्शिता पर प्रशासन का विशेष फोकस
प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे 18 मई तक अपने अधिकृत प्रतिनिधियों की सूची, फोटो और पहचान पत्र उपलब्ध कराएं ताकि मशीनों की जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। जानकारी के अनुसार दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों के लिए उपयोग होने वाली ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे ताकि प्रक्रिया पर सभी की निगरानी बनी रहे।

दतिया सीट का राजनीतिक महत्व फिर बढ़ा
दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से प्रदेश की सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल सीटों में गिनी जाती रही है। इस क्षेत्र की राजनीति केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर प्रदेश की व्यापक राजनीति पर भी दिखाई देता है। यहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच वर्षों से सीधा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। यही वजह है कि उपचुनाव की हलचल शुरू होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की प्रतिद्वंद्विता रही चर्चा में
दतिया की राजनीति में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच मुकाबला हमेशा सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इस हार ने प्रदेश की राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी क्योंकि नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। अब भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद एक बार फिर यह सीट सियासी प्रतिष्ठा का केंद्र बनती दिखाई दे रही है।

उपचुनाव में दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का आगामी उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल सकता है। कांग्रेस जहां पिछली जीत को बरकरार रखने की चुनौती के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत झोंक सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया में चुनावी सभाओं, रणनीतिक बैठकों और राजनीतिक बयानबाजी का दौर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

जनता की नजरें अब राजनीतिक रणनीतियों पर

उपचुनाव की तैयारियों के बीच दतिया की जनता भी अब राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और क्षेत्रीय समीकरणों का असर चुनावी परिणामों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर चुनावी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में दतिया का यह उपचुनाव प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा करता दिखाई दे रहा है।

दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट है दतिया
एमपी के बड़े नेताओं की भी निगाह एमपी की दतिया सीट क्यों लगी है, इसका कारण यह हाईप्रोफाइल सीट है। इस सीट पर राजेंद्र भारती कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और भाजपा की तरफ से नरोत्तम मिश्रा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। दोनों ही व्यक्तियों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है। कभी नरोत्तम मिश्रा जब भाजपा की ओर से विधायक थे तो राजेंद्र भारती की शिकायतों के बाद उन्हें भी अयोग्य घोषित कराने का मामला कोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद राजेंद्र भारती कांग्रेस के विधायक बने तो वे एक सहकारी बैंक के एफडी घोटाले में फंस गए। इन्हें सजा हो गई और राजेंद्र भारती को अयोग्य घोषित कर दिया। अब वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके लिए राजेंद्र भारती ने भाजपा नेता पर साजिशन फंसाने के आरोप लगाए थे।

नरोत्तम ने कहा था- मैं लौटकर आउंगा
2023 में राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे, जबकि नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट मिले थे। अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा काफी निराश हो गए थे। कुछ ही दिनों में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने शायराना अंदाज में कहा था कि मैं लौटकर आउंगा, यह वादा रहा। जब राजेंद्र भारती को कोर्ट ने सजा सुनाई और विधानसभा ने उनकी सदस्यता खत्म कर दी, इसके बाद से ही नरोत्तम मिश्रा का वही बयान फिर वायरल होने लगा है, जिसमें वे कह रहे हैं कि ‘मैं लौटकर आउंगा।’ नरोत्तम मिश्रा कह रहे हैं कि क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत में। कर्म पथ पर जो भी मिला, यह भी सही है, वह भी सही है। मैं लौटकर आउंगा यह वादा है। चुनावों की तारीखों की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा सक्रिय नजर आ रहे हैं। स्थानीय राजनीति में भी नरोत्तम मिश्रा पर निगाह लग गई है। 2023 का चुनाव हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा भाजपा संगठन में सक्रिय रहे। इस दौरान उनके कार्यकाल में कांग्रेस के कई दिग्गजों को भाजपा की सदस्यता दिलाई गई थी।

आजाद समाज पार्टी ने घोषित किया प्रत्याशी
भाजपा और कांग्रेस अभी रणनीति ही बना रहे हैं, इस बीच आजाद समाज पार्टी ने दतिया उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार ही घोषित कर दिया है। दामोदर यादव को प्रत्याशी बनाया है। यह पार्टी सत्ता और विपक्ष के समीकरण बिगाड़ सकती है। इस पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव ने दावा किया है कि वे चुनाव जीतेंगे।

 

 

डिनर से कोलोसियम तक दिखी मोदी-मेलोनी की बॉन्डिंग, 4 साल में 7 मुलाकातों से बदले भारत-इटली रिश्ते

 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इटली पहुंचे। रोम पहुंचने के बाद उन्हें PM जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। PM मोदी ने X पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने साथ में डिनर भी किया। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद मोदी और मेलोनी ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा भी किया।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘वेलकम टु रोम, माय फ्रेंड।’

PM मोदी ने कहा कि आज होने वाली औपचारिक बातचीत में भारत-इटली दोस्ती को और मजबूत करने पर चर्चा जारी रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी इटली में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात करेंगे।

अपनी पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को वह रोम पहुंचे, जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मेलोनी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “Welcome my friend .”

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी और इटली पीएम मेलोनी की मुलाकातें औपचारिक कूटनीतिक मुलाकातों से कहीं ज्यादा अहमीयत रखता है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को एक नई दिशा दी है. कभी सीमित व्यापारिक रिश्तों तक सिमटे दोनों देशों के संबंध अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, AI और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे बड़े रणनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुके हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी रोम पहुंचते ही अपना एजेंडा भी बताया. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में बताया, “इस दौरे में भारत और इटली के बीच सहयोग को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर खास ध्यान दिया जाएगा। 

मोदी-मेलोनी की पहली मुलाकात बाली में
इस नई साझेदारी की शुरुआत नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में हुए G20 शिखर सम्मेलन से मानी जाती है. उस वक्त मेलोनी हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री बनी थीं. दोनों नेताओं की पहली मुलाकात में यह साफ हो गया था कि भारत और इटली नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं. इसी बैठक में ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और इटैलियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की भारत में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी। 

भारत-इटली में स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप
इसके बाद मार्च 2023 में मेलोनी भारत आईं और रायसीना डायलॉग में चीफ गेस्ट बनीं. यही वह मोड़ था जहां दोनों देशों के रिश्तों को आधिकारिक तौर पर “स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप” का दर्जा मिला. इस दौरान रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसके तहत दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, सिक्योर इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. इटली की बड़ी रक्षा कंपनियों को भारत में सैन्य उपकरणों के को-प्रोडक्शन का रास्ता भी खुला। 

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा इटली
सितंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के रिश्ते एक और स्तर ऊपर पहुंच गए. इटली भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEC का हिस्सा बना. इस कॉरिडोर का मकसद भारत को यूरोप से जोड़ने वाला नया व्यापारिक और समुद्री नेटवर्क तैयार करना है. इसी दौरान माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी फाइनल हुआ, जिससे भारतीय छात्रों, रिसर्चर्स और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए इटली में अवसर बढ़े। 

AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स पर करार
जून 2024 में इटली में आयोजित G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की फिर मुलाकात हुई. यहां बातचीत का फोकस भविष्य की टेक्नोलॉजी पर रहा. दोनों देशों ने AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, टेलीकॉम और क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. साथ ही इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी राइट्स यानी पेटेंट और डिजाइन से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए। 

जी-20 में मेलोनी-मोदी की मुलाकात
इसके बाद नवंबर 2024 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए G20 सम्मेलन में दोनों देशों ने 2025-2029 के लिए फाइव ईयर जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान लॉन्च किया. यह अब तक का सबसे बड़ा रोडमैप माना गया, जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, शिक्षा, व्यापार और वैश्विक सहयोग समेत 10 बड़े सेक्टर शामिल किए गए। 

नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के जोहोन्सबर्ग में हुए G20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद अहम समझौता हुआ. दोनों देशों ने “इंडिया-इटली जॉइंट इनीशियेटिव टू काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म” लॉन्च किया, जिसका मकसद आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाना था। 

दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल आतंकी हमले के बाद मेलोनी ने भारत के साथ खुलकर एकजुटता दिखाई थी. इस पहल के तहत दोनों देशों ने आतंकियों को मिलने वाली अवैध फंडिंग और क्रॉस-बॉर्डर वित्तीय नेटवर्क को रोकने, संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर निगरानी बढ़ाने और एफएटीएफ और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई। 

“इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर” पर करार
अब मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यह रोम यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने वाली मानी जा रही है. इस दौरान “इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर” की अवधारणा को औपचारिक रूप दिया गया है. इसका मकसद हिंद महासागर से लेकर यूरोप तक समुद्री व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. साथ ही AI को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसमें इटली के “एल्गोर-एथिक्स” मॉडल और भारत की “ह्युमन सेंट्रिक एआई” सोच को साथ लाने की कोशिश की गई है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की यह बढ़ती नजदीकी सिर्फ दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है. एक तरफ भारत यूरोप में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं इटली एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देखता है। 

चारधाम यात्रा में 30 दिन में 55 मौतें, क्या हाई अल्टीट्यूड बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?

देहरादून 

उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी. यानि इस यात्रा को 30 दिन पूूरे हो चुके हैं. इस दौरान आधिकारिक तौर पर यात्रा में शामिल 55 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. ज़्यादातर मौतों की मुख्य वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, विशेषकर दिल की बीमारियां और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियां। 

इसमें 30 लोगों की मृत्यु केदारनाथ यात्रा के रास्ते में हुई तो 10 लोगों की मौत बदरीनाथ यात्रा के दौरान हुई तो यमनोत्री और गंगोत्री धाम के रास्ते में 8 और 7 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है। 

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार चार धाम यात्रा में मौतों में 70–75% तक मामले खराब स्वास्थ्य यानि प्री‑एक्सिस्टिंग हार्ट डिज़ीज, हाई ब्लडप्रेसर, डायबिटीज, पल्मोनरी एडिमा आदि के कारण होते हैं. कई वृद्ध यात्री या फिटनेस कम वाले लोग ऊंचाई, थकान और तनाव के कारण अचानक हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों में सूजन से मर जाते हैं। 

आमतौर पर लोग यहां के चार धामों की यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है. चूंकि ये यात्रा हाई अल्टीट्यूड पर ही ज्यादा होती है, लिहाजा लोगों को हृदय संबंधी दिक्कतों से भी जूझना होता है. सलाह दी जाती है कि हृदय संबंधी दिक्कतों वाले इन यात्राओं से बचें. आगे ये जानेंगे कि आखिर ऊंचाई वाली जगहें क्यों दिल संबंधी बीमारियों वालों के लिए जानलेवा भी बन जाती हैं। 

उत्तराखंड के चारों धाम ऊंचाई वाली जगहों पर ही हैं. सभी पहाड़ों की ऊंचाई पर हैं, उनमें मौसम भी ठंडा और बर्फीला रहता है, चाहे यमुनोत्री हो या फिर बद्रीनाथ. वहां गर्मी के मौसम में भी इर्द गिर्द के पहाड़ों पर बर्फ ढंकी नजर आती है. लेकिन ऊंचाई वाली जगहें कैसे हृदय स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। 

अधिक ऊंचाई पर रहना अगर उन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होता है, जिनका हृदय स्वास्थ्य अच्छा होता है. तो उन लोगों के लिए खतरनाक जो मौजूदा तौर पर हृदय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हों. बहुत से श्रद्धालु बिना पहले से डॉक्टरी जांच, फिटनेस टेस्ट या ऊंचाई के अनुकूलन के बिना सीधे चार धाम के लिए निकल पड़ते हैं। 

हाई अल्टीट्यूड यानि उच्च ऊंचाई किसे माना जाता है?
– समुद्र तल से 6,560 फीट से नीचे का कोई भी स्थान कम ऊंचाई वाला माना जाता है. इससे ऊपर की यात्रा मध्यम ऊंचाई और उच्च ऊंचाई वाली मानी जाती है. समुद्र तल से 6,560 से 9,840 फीट के बीच वाले स्थानों को मध्यम ऊंचाई वाला माना जाता है. समुद्र तल से 9,840 फीट से ऊपर की जगहें उच्च ऊंचाई वाली होती हैं. ये वो जगहें हैं जहां आपका शरीर ऊंचाई से संबंधित महत्वपूर्ण प्रभावों का अनुभव करने लगता है। 

भारत में हाई अल्टीट्यूड एरिया के पैरामीटर्स क्या हैं?

– भारतीय सेना उच्च ऊंचाई (एचए) क्षेत्रों को 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर के क्षेत्रों के रूप में परिभाषित करती है। इन्हें ऊंचाई के आधार पर तीन चरणों में वर्गीकृत किया गया है:

स्टेज I: 9,000–12,000 फीट (2,750–3,657 मीटर)
चरण II: 12,000-15,000 फीट (3,657-4,572 मीटर)
चरण III: 15,000 फीट से ऊपर (4,572 मीटर)

चार धाम की यात्रा किन ऊंचाइयों से गुजरती है?
– छोटा चार धाम के दर्शन के लिए 4000 मीटर से भी ज्‍यादा ऊंचाई तक की चढ़ाई करनी होती है. इसमें कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें होती हैं तो कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें. इसलिए ये यात्रा मुश्किल मानी जाती है। 

चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय में ऊंचाई पर होती है, इसलिए इसे उच्च ऊंचाई वाली यात्रा कहा जाता है. चार धाम यात्रा के चार तीर्थस्थल इन ऊंचाइयों पर हैं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वाले पैरामीटर्स के हिसाब से भी ये सारी जगहें हाई अल्टीट्यूड एरिया हैं। 

यमुनोत्री: 3,291 मीटर
गंगोत्री: 3,415 मीटर
केदारनाथ: 3,553 मीटर
बद्रीनाथ: 3,300 मीटर
केदारनाथ: 11,700 फीट
गंगोत्री: 10,200 फीट

हाई अल्टीट्यूड वाले इलाके आमतौर पर कैसे होते हैं?
– उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आमतौर तापमान काफी ठंडा होता है. ज्यादा बारिश होती है, तेज हवाएं चलती हैं. कम वायु दबाव होता है और हवा में ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगता है। 

इस ऊंचाई के लिए कई तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं
1. धीरे-धीरे चढ़ो
2. एक दिन में कम ऊंचाई से सीधे 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर जाने से बचें
3. एक बार 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर सोने की ऊंचाई को प्रतिदिन 1,600 फीट (500 मीटर) से अधिक नहीं बढ़ाएं
4. प्रत्येक 3,300 फीट (1,000 मीटर) पर अनुकूलन के लिए एक अतिरिक्त दिन की योजना बनाएं.

उच्च ऊंचाई आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती है?
– जब आप अधिक ऊंचाई पर होते हैं, तो पतली हवा के कारण आपके फेफड़ों को कम ऑक्सीजन प्राप्त होती है. यह आपके फेफड़ों और हृदय पर इसलिए ज्यादा जोर बढ़ा देता है क्योंकि आपके शरीर के बाकी हिस्सों को भी लगातार ऑक्सीजन युक्त रक्त की जरूरत होती है. जिसकी मात्रा पर अशर पड़ने लगता है. इसी वजह से बहुत अधिक ऊंचाई पर बहुत से स्वस्थ लोगों को भी चक्कर आना, सिरदर्द और थकान जैसे दिक्कतें होने लगती हैं। 

अगर कोई हृदय संबंधी दिक्कतों से गुजर रहा है तो इस ऊंचाई पर क्या अनुभव करता है?

– यदि आप किसी हृदय संबंधी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का अनुभव करते हैं तो अधिक ऊंचाई का आपके शरीर पर और भी अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को आमतौर पर ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने के तुरंत बाद हृदय गति और रक्तचाप दोनों में बढोतरी महसूस होगी. ये समस्याएं आमतौर पर रात में और ज्यादा हो जाएंगी। 

अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होता है क्या?
– इस बात के प्रमाण हैं कि अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं. हार्वर्ड स्कूल ऑफ ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक ऊंचाई पर रहने वाले व्यक्तियों में इस्केमिक हृदय रोग से मरने की संभावना कम होती है. उनकी जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लंबी होती है। 

क्या हृदय रोग से पीड़ित रोगी अधिक ऊंचाई पर यात्रा कर सकते हैं?
– जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि उच्च रक्तचाप या हृदय रोग वाले व्यक्तियों के लिए ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना खतरनाक हो सकता है। 
अध्ययन के अनुसार, उच्च ऊंचाई वाले स्थानों (9,840 फीट और अधिक) में कठोर शारीरिक गतिविधियों में संलग्न होने से हृदय रोग वाले लोगों के हृदय और रक्त वाहिकाओं पर बहुत अधिक तनाव पड़ सकता है, जिससे कई तरह के लक्षण हो सकते हैं। 

– सांस लेने में कठिनाई
– चक्कर आना
– छाती में दर्द
– थकान

हृदय रोगों के साथ अधिक ऊंचाई पर यात्रा करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

  • – हृदय रोग के साथ उच्च ऊंचाई पर पानी पीनाकुछ सामान्य सिफ़ारिशें हैं जिनका उच्च ऊंचाई वाले स्थानों की यात्रा करते समय हृदय रोग से पीड़ित सभी लोगों को पालन करना चाहिए:
  • – अपने उच्च ऊंचाई वाले स्थान पर चढ़ने से पहले मध्यवर्ती ऊंचाई पर एक या अधिक रातें बिताकर धीरे-धीरे उच्च ऊंचाई पर अभ्यस्त हो जाएं
  • – समुद्र तल पर आपकी आदत की तुलना में धीमी गति और कम तीव्रता से व्यायाम करें
  • – उचित रूप से हाइड्रेटेड रहें
  • – पूरी नींद लें
  • – उच्च ऊंचाई पर हृदय और रक्तचाप की दवाओं को संभावित रूप से समायोजित करने की आवश्यकता के बारे में अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से बात करें.

बिजली बिल मामले में रेलवे को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 10 साल पुरानी दलील; देना होगा ₹15,000 करोड़ सरचार्ज

नई दिल्ली
 सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं में से एक भारतीय रेलवे को बड़ा वित्तीय झटका दिया है. अदालत ने साफ किया है कि रेलवे बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा पाने का हकदार नहीं है. उसे अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह ही अपनी बिजली खपत पर सभी तरह के सरचार्ज देने होंगे. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने रेलवे की आठ अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के पुराने फैसले को सही ठहराया है. इस फैसले से राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन रेलवे के बजट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है। 

रेलवे पर क्यों फूटा 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बम?
भारतीय रेलवे हर साल करीब 33 अरब यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करती है. इस बड़े फैसले के बाद रेलवे को बैकडेटेड एरियर यानी पुराना बकाया भी चुकाना होगा. राज्यों के हिसाब से यह क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज 50 पैसे से लेकर 2.5 रुपये प्रति यूनिट तक है। 

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की डिस्कॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे रेलवे के ओपन एक्सेस इस्तेमाल की अवधि और क्षेत्र के हिसाब से बकाया राशि का आकलन करें. रेलवे के आंतरिक अनुमानों के अनुसार यह कुल बकाया राशि कम से कम 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यह रकम रेलवे के चालू वित्त वर्ष के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। 

10 साल पुराने कानूनी दांवपेंच में कहां मात खा गई रेलवे?

    रेलवे साल 2015 से अदालत में यह दलील दे रही थी कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है. इस रणनीति के पीछे रेल मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय का साल 2014 का एक पत्र था। 

    रेलवे का दावा था कि रेलवे एक्ट 1989 की धारा 11 के तहत उसे खुद का बिजली नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने का अधिकार प्राप्त है. इसलिए वह ग्रिड से सीधे बिजली लेते समय किसी भी तरह का सरचार्ज देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। 

    सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानूनन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी होने के लिए दूसरों को बिजली बेचना जरूरी है, जबकि रेलवे पूरी बिजली खुद ही कंज्यूम करती है। 

रेलवे डिस्ट्रीब्यूटर है या सिर्फ एक कंज्यूमर?
सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि रेलवे का पूरा ओवरहेड इक्विपमेंट और ट्रैक्शन सबस्टेशन उसका आंतरिक सिस्टम है. यह कोई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम नहीं है. बिजली कानून के तहत लाइसेंसी कहलाने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए। 

    पहली शर्त यह कि आपके पास डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हो.
    दूसरी यह कि आप किसी तीसरे पक्ष को बिजली की सप्लाई करते हों.

रेलवे जो भी बिजली खरीदती है, उसका इस्तेमाल केवल इंजनों, सिग्नलों और स्टेशनों को चलाने में होता है. वह इसे किसी बाहरी उपभोक्ता को नहीं बेचती है. इसी आधार पर कोर्ट ने रेलवे को बिजली कानून की धारा 2(15) के तहत सिर्फ एक कंज्यूमर माना है। 

क्या अब फेल हो जाएगी रेलवे की महा-बचत योजना?
रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य मोहम्मद जमशेद के अनुसार, इस अदालती आदेश में रेलवे की पूरी वित्तीय बचत को खत्म करने की क्षमता है. रेलवे ने साल 2015 के आसपास एक बड़ी नीतिगत पहल शुरू की थी. इसके तहत ओपन एक्सेस से सस्ती बिजली खरीदकर एक दशक में 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बचाने का लक्ष्य था. यह नया फैसला उस पूरी योजना पर पानी फेर सकता है। 

रेलवे ने अपने ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया है. इस मिशन पर करीब 46,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बचाने की यह मुहिम अब ओपन एक्सेस मार्केट के महंगे सरचार्ज के जाल में फंस गई है। 

पाकिस्तान के ‘इस्लामिक NATO’ के जवाब में भारत की बड़ी रणनीति, मुस्लिम देशों में बढ़ सकती है हलचल

नई दिल्ली

ईरान जंग ने मौजूदा वर्ल्‍ड ऑर्डर को उलट-पुलट कर रख दिया है. होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और LPG लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. मौजूदा संकट को देखते हुए अब तमाम देश एनर्जी सप्‍लाई के लिए अल्‍टरनेटिव रूट डेवलप करने की कोशिश में जुटे हैं. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देशों के आपसी रिश्‍ते भी बदलने लगे हैं. पुराने समीकरण ध्‍वस्‍त हो रहे हैं तो नए गुट बन रहे हैं. पाकिस्‍तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर इस्‍लामिक NATO की नींव रखने का काम किया है. इन तीनों देशों का लक्ष्‍य संकट के समय एक-दूसरे का साथ देना है. हालांकि, अभी तक यह बस जुबानी जमाखर्च ही साबित हुई है. दूसरी तरफ, इस त्रिकोणीय गठजोड़ के अपने सामरिक महत्‍व भी हैं. अब भारत ने कथित इस्‍लामिक NATO का जवाब अपने अंदाज में तैयार कर लिया है. दिलचस्‍प बात यह है कि इसमें इजरायल की भी एंट्री मानी जा रही है. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की UAE यात्रा की बात सामने आई थी. हालांकि, इसे खारिज कर दिया गया है. इटली के सामरिक मामलों के एक्‍सपर्ट मानते हैं कि भारत, UAE और इजरायल का गठजोड़ पश्चिम एशिया में शांति के लिए X फैक्‍टर साबित हो सकता है। 

इटली के जियोपॉलिटकल एक्‍सपर्ट सर्गियो रेस्टेली ने ‘टाइम्‍स ऑफ इजरायल’ में लिखे लेख में भारत, UAE और इजरायल के त्रिकोणीय गठजोड़ की बात कही है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है. भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्गियो रेस्टेली ने The Times of Israel में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और ईरान के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की कला विकसित करनी होगी. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को खाड़ी देशों को भरोसा दिलाते हुए ईरान के साथ संवाद के दरवाजे खुले रखने चाहिए और साथ ही इजरायल के साथ सहयोग को भी मजबूत करना चाहिए. रेस्टेली के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया UAE यात्रा ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में संघर्षों ने वैश्विक शक्तियों की विदेश नीति की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के संबंध अब केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश, बुनियादी ढांचा, रक्षा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं। 

भारत के लिए यूएई और इजरायल का महत्‍व
इतालवी एक्‍सपर्ट ने यूएई को ऐसा साझेदार बताया जो क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को व्यवहारिक परियोजनाओं में बदलने की क्षमता रखता है. उनके मुताबिक, अबू धाबी भारत की पश्चिम एशिया नीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है. रेस्टेली लिखते हैं कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता घरेलू आर्थिक मुद्दा भी है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का असर महंगाई, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू बजट पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के इजरायल के साथ रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं. वहीं, यूएई पूंजी, भौगोलिक पहुंच और क्षेत्रीय स्वीकार्यता प्रदान करता है. रेस्टेली के अनुसार, यूएई और इजरायल मिलकर पश्चिम एशिया में एक नए व्यावहारिक ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, जो नारों की बजाय बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और स्थिरता पर आधारित है। 

ईरान भारत के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण
सर्गियो रेस्टेली ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी पश्चिम एशिया नीति को किसी एक धुरी तक सीमित नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से. उन्होंने चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) को भारत-ईरान साझेदारी का सबसे ठोस उदाहरण बताया. रेस्टेली ने कहा कि ईरानी विदेश मंत्री अब्‍बास अरागची (Abbas Araghchi) की दिल्ली यात्रा ने यह संकेत दिया कि भारत तेहरान के साथ गंभीर संवाद बनाए रखना चाहता है. उनके अनुसार, संकटग्रस्त क्षेत्र में सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की क्षमता ही जिम्मेदार कूटनीति की पहचान है. लेख में कहा गया कि यूएई भारत की उभरती पश्चिम एशिया रणनीति का मुख्य आधार है, इजरायल तकनीक और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोगी है, जबकि ईरान संपर्क और क्षेत्रीय संकट प्रबंधन के लिए आवश्यक साझेदार बना रहेगा. रेस्टेली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तेल आयातक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने हितों और रणनीतिक विकल्पों के साथ एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका तय कर रहा है। 

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