त्विषा केस: सास की अग्रिम जमानत पर सुनवाई अब 27 मई को, हाईकोर्ट ने दिया समय

भोपाल 

भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपी सास तथा पूर्व भोपाल जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रदेश सरकार के साथ त्विषा शर्मा के पिता ने भी हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ द्वारा दोनों याचिकाओं पर सोमवार को संयुक्त रूप से सुनवाई की गई।  

याचिका की सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने अनावेदिका गिरिबाला सिंह को याचिका की कॉपी उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 27 मई को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में मिली अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। इसके अलावा जमानत का मिलने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने एकलपीठ को बताया कि भोपाल की पूर्व सत्र व जिला न्यायाधीश की बहू त्विषा शर्मा की 12 मई को रात में संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। इसका पोस्टमार्टम 13 मई को हुआ था। उन्होने 14 मई को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्हें अगले दिन न्यायालय ने अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया।

सोमवार को याचिका की सुनवाई के दौरान अनावेदिका की तरफ से बताया गया कि प्रदेश सरकार की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें मिल गई है। शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की है। प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोरा पैरवी के लिए उपस्थित हुईं। 

MP का यह एयरपोर्ट जल्द जुड़ेगा दुनिया से, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सर्वे शुरू

भोपाल

भोपाल का राजा भोज एयरपोर्ट “इंटरनेशनल एयरपोर्ट” के रूप में जाना जाता है। पिछले दो वर्षों से इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस दुबई के लिए डायरेक्ट फ़्लाइट शुरू करने को लेकर सर्वे और संभावनाएं तलाश रही हैं। कई बार यात्रियों की संख्या और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन भी किया गया, हालांकि अब तक कोई स्थायी शेड्यूल जारी नहीं हो पाया। भोपाल एयरपोर्ट से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित करने के लिए अधिकारी पूरा जोर लगा रहे हैं। एयरपोर्ट का तेजी से विकास किया जा रहा है। यहां के नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कुछ अन्य घरेलू शहरों के लिए उड़ानें

वर्तमान में भोपाल से मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कुछ अन्य घरेलू शहरों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं। लेकिन राजधानी होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कनेक्टविटी का अभाव शहर की व्यापारिक और पर्यटन संभावनाओं को सीमित करता है।

दुबई, सिंगापुर या मध्य-पूर्व के अन्य देशों के लिए सीधी उड़ान
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि दुबई, सिंगापुर या मध्य-पूर्व के अन्य देशों के लिए सीधी उड़ान जल्द शुरू की जानी चाहिए। इससे भोपाल को निवेश और व्यापार के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।

रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी सुविधा शुरू
भोपाल के राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में विकसित किए गए नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं। नियमित उड़ानों से भोपाल आने वाले विशिष्ट और अति विशिष्ट यात्री अब मुख्य लाउंज के बजाय नए रिजर्व लाउंज में समय बिता सकेंगे। एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा शुरू किए गए इस नए अराइवल एरिया का अब तक करीब एक लाख यात्री उपयोग कर चुके हैं।

एस्केलेटर और हेल्प डेस्क से यात्रियों को राहत
यात्रियों की सुविधा के लिए यहां ”मे आइ हेल्प यू” काउंटर भी बनाया गया है, जहां एयरपोर्ट परिसर और सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। नए अराइवल एरिया में यात्री एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले ही प्री-पेड टैक्सी बुक करा सकेंगे। इससे भोपाल आने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल रही है।

विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एस्केलेटर सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब यात्री विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर पार्किंग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। पहले यात्रियों को पार्किंग तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

नरोत्तम मिश्रा की बढ़ सकती है सियासी भूमिका, BJP प्रदेश प्रभारी की बैठक से अटकलें तेज

दतिया 
 मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के दोनों बड़े दलों ने अंदरखाते में तैयारियां शुरु कर दी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश मिलने के बाद दतिया कलेक्टर ने चुनाव संबंधी तैयारियां भी शुरू कर दी है। अटकलें हैं कि यदि उपचुनाव होते है तो दिग्गज नेता व पूर्व गृहमंत्री भाजपा के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। इसी बीच मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी महेंद्र सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात नरोत्तम मिश्रा के भोपाल स्थित निवास पर हुई।

इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान डॉ. मिश्रा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों, प्रदेश की राजनितिक परिस्थितियों एंव विभिन्न समसामयिक विषयों पर लंबी चर्चा की।

दरअसल, यदि दतिया में उपचुनाव होते हैं, तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां हर हालत में इस चुनाव को जीतना चाहती है। भाजपा नरोत्तम मिश्रा के जरिए दतिया सीट पर वापसी करना चाहती है। वहीं नरोत्तम मिश्रा भी हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहते हैं। क्योंकि उनके पास सत्ता में वापसी का ये सुनहरा मौका है। यही वजह है कि भाजपा इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है और रणनीति तैयार करने में जुट गई है। दतिया सीट भाजपा के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। नरोत्तम मिश्रा के लिए ये चुनाव उनके राजनीतिक सफर के लिए बेहद अहम है।

वहीं अगर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस कोर्ट के जरिए उपचुनाव को रोकना चाहती है, वहीं यदि उपचुनाव होते भी हैं तो पार्टी मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।

MP का ऐतिहासिक बुरहानपुर बनेगा इंडस्ट्रियल हब, 1000 करोड़ निवेश का मास्टर प्लान तैयार

 बुरहानपुर

बुरहानपुर शहर ऐतिहासिक और यहां सभी धर्मों के संगम के रूप में जाना जाता है। 400 साल पहले मुगल समय से यहां कपड़े की सबसे बड़ी मंडी रही। जिस तरह यहां कपड़े का ताना बाना बुना जाता था, उसी तरह यहां की गंगा-जमुनी तहजीब रही। यहां का कपड़ा दुनियाभर में प्रसिद्ध था, समय के साथ बाजार की चमक जरूर फीकी पड़ी, लेकिन अब बदलते समय यहां का कपड़ा फिर देशभर में सप्लाइ होने लगा। आने वाले पांच सालों में इसे और उड़ान मिलने जा रही है। साथ ही केले के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर में एक्सपोर्ट जोन से लेकर इस पर आधारित कृषि उद्योग की भी रफ्तार बढ़ी है।

टेक्सटाइल उद्योग से ही बुरहानपुर की पहचान
प्रदेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल उद्योग के रूप में बुरहानपुर की एक अलग ही पहचान है। आने वाले सालों में इस उद्योग की एक और नई तस्वीर उभरेगी। यहां पर एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश होने जा रहा है, जिससे 12 हजार से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

अभी जो तेजी से प्रयास हो रहे हैं इससे एक नए शहर का भविष्य देखने को मिल रहा है। यहां उद्योग के लिए जो माहौल और जमीन तैयार हुई उसमें स्थानीय ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक उद्योगपति निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। यही वजह है कि 2015-16 तक जो बुरहानपुर का कपड़ा उद्योग 770 करोड़ का था, वह अब 1 हजार करोड़ का होगा। इससे जिले की तस्वीर ही बदल जाएगी।

जानें यहां उद्योग की इकॉनोमी

-211 करोड़ का जीएसटी टैक्स 4 साल में दे चुका है बुरहानपुर

-04 साल पहले तक 60 करोड़ का जाता था टैक्स

-04 हजार रजिस्टर्ड औद्योगिक प्रतिष्ठान यहां

-45 हजार पावरलूम

-05 हजार आधुनिक लूम यहां

-01 लाख लोग कपड़ा उद्योग से जुड़े

-01 लाख लोग केला उद्योग से जुड़े हुए
भविष्य में निवेश की तैयारी

-200 करोड़ रेहटा में निवेश की तैयारी

-400 करोड़ सुखपुरी में निवेश

-200 करोड़ फेयर डील में निवेश

-400 करोड़ चार नई स्पीनिंग मिल प्रस्तावित

– 12 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा
एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर

नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असरभोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो, एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है।
नई साधिकार समितियां गठित होंगी

अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।
ये क्षेत्र देंगे ऊंची उड़ान
टैक्सटाइल

टैक्सटाइल में बुरहानपुर शहर में विकास की खासी संभावनाएं हैं। यहां का कपड़ा देशभर में सप्लाय होता है, लेकिन इसमें वेल्यू एडिशन के लिए डाइंग, प्रिंटिंग, गारमेंटस, अपेरल मेकिंग को बढ़ावा देना होगा। अभी निम्न गुणवत्ता कपड़ा यहां बन रहा है।
टूरिज्म

यहां का पर्यटन अनछुआ पहलू है। टूरिज्म सर्किट में आना चाहिए। यहां पर टूरिज्म की उद्योग में बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट, होटल, एऊयूजमेंट पार्क भी बढऩा शुरू हो गई, लेकिन अभी इसमें और काम करने जरूरत है। सरकार के साथ हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे तो अच्छा लाभ मिल सकते हैं।
ट्रांसपोर्टेशन

देश के मध्य भाग में होने से सेंट्रल लाइन मुख्य रेल मार्ग, सड़क मार्ग बुरहानपुर से जुड़ चुके हैं। फोरलेन बुरहानपुर में पहुंच चुका है। अभी नया हाईवे लगभग बन चुका है। आगे महाराष्ट्र को जोड़ने का काम बाकी है। जबकि नई रेलवे लाइन भी शहर के विकास में उपयोगी होगी।
बुरहानपुर बड़ा केंद्र, बड़े शहर में उभरेगा

बुरहानपुर उद्योग का बहुत बड़ा केंद्र है। यहां आगे टूरिज्म, कृषि और टेक्सटाइल के रूप में अच्छे परिणाम सामने आएंगे। स्वरोजगार यहां अच्छा मिलेगा। अब हाइवे और रेलवे से कनेक्टिविटी भी बहुत अच्छी बन रही है। बुरहानपुर आगे जाकर बड़े शहर के रूप में उभरेगा।

– हर्षसिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर
पर्यटन को मिले उड़ान

यहां के उद्योग को उड़ान मिलना चाहिए। बुरहानपुर में मिनी एयरपोर्ट की तैयारी चल रही है, अच्छा है, लेकिन इसे और गति मिलने की जरूरत है। यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां हवाई अड्डे की सुविधा हो जाए तो बुरहानपुर से 105 किमी अजंता, 110 पर ओंकारेश्वर, 165 किमी महेश्वर है।

-होशंग हवलदार, पुरातत्वविद्

100 साल पुराने मकानों के नीचे बनेगी मेट्रो टनल, अंडरग्राउंड रूट को मिली मंजूरी

इंदौर 

इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है। 

इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है। 

टनल खुदाई का काम शुरू
भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है। 

इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में 
मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी। 

Indore Honey Trap केस में सभी आरोपी जेल पहुंचे, निजी वीडियो को लेकर नया खुलासा

इंदौर 
 इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को बालेबाले मजिस्ट्रेट के घर पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी बीच सामने आया कि हनी ट्रैप-2 के नाम से चर्चा में आए गैंग की मास्टरमाइंड रेशू और श्वेता ने पुराने हनी ट्रैप प्रकरण के वीडियो का इस्तेमाल कर पांच लोगों को टारगेट बनाया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी सात आरोपियों को औपचारिक कार्यवाही के बाद सीधे बाले बाले मजिस्ट्रेट के घर ले जाकर पेश किया। सोमवार सुबह हुई इस पेशी में अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए, जिसके बाद सातों को जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस के इस कदम को मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। हनी ट्रैप-2 नाम से सामने आए इस नए जालसाजी नेटवर्क में मुख्य भूमिका रेशू और श्वेता बताई जा रही है। दोनों ने पुराने हनी ट्रैप कर कई अन्य मामले के संवेदनशील वीडियो हासिल कर लिए थे और इन्हीं के आधार पर पांच लोगों को ब्लैकमेल किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी पहले भरोसा जीतते थे, फिर निजी पलों के वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी।

मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी इसी गिरोह के संचालन, तकनीकी काम और पैसे की वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कुछ दिनों से लगातार इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही सभी सात आरोपियों श्वेता जैन, रेशु चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन जितेंद्र पुरोहित और पुलिस कर्मी  विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया है। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, लेन-देन और पुराने मामलों के लिंक की गहराई से जांच कर रही है साथ ही आरोपियों से जब्त मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है। त्रिपाठी का कहना है कि यह गैंग संगठित रूप से काम कर रहा था और आगे और खुलासे संभव हैं।

ट्विशा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- ‘जान चली गई, वजह चाहे जो हो’

भोपाल 

मध्यप्रदेश के चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी एम पंचोली की बेंच ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने मीडिया से इस मामले में आरोपियों के इंटरव्यू न चलाने का आग्रह किया. साथ ही कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले की पूरी जांच को आज ही अपने हाथों में ले रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है। 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि सीबीआई तुरंत जांच अपने पास लेकर इस पर कड़े स्तर की सुनवाई शुरू करेगी. कोर्ट ने कहा कि एक मासूम युवती की जान गई है, वजह चाहे जो हो ,उसका पता चलना चाहिए. उसके स्वतंत्र निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी जरूरी है. क्योंकि मामले में अपराधिक साजिश का भी एंगल शुरुआती जांच और आरोपों से सामने आ रहा है। 

CBI को सौंपी जा रही है जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम मीडिया और जनता की अटकलें नहीं चाहते हैं. सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांच आज सीबीआई को सौंपी जा रही है. सुनवाई के दौरान अदालत को ये भी बताया गया कि एक मृत बेटी होने की तुलना में समाज में एक तलाकशुदा बेटी होना कहीं ज्यादा बेहतर है। 

इस पर अदालत ने सुनवाई के दौरान दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उसे एक युवा बेटी को असमय खोने पर पीड़ित परिवार की असीम पीड़ा के साथ पूरी मानवीय सहानुभूति है। 

ट्विशा के पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह और उनकी सास जो कि एक पूर्व जिला न्यायाधीश हैं, गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूख के कारण स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो रही थी. सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसी प्रक्रियागत अनियमितता को दूर करने के लिए आज ही जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है। 

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच को लेकर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच के संचालन पर दु:ख व्यक्त किया और जांच को लेकर चल रही प्रक्रियागत अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया है। 

12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार
राज्य सरकार की निगरानी में भोपाल में हुए पहले शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) पर जब पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए, तब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) की चार सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मृतका का दूसरा पोस्टमार्टम किया. इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के कारण घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद आखिरकार ट्विशा का अंतिम संस्कार किया जा सका। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि  ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं. उसके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है। 

‘एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार’— राहुल गांधी के दावे में कितना दम?

नई दिल्ली

विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह दावा कि अगले एक साल में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार गिर जाएगी, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. कांग्रेस की एक बैठक में दिए गए इस बयान को बीजेपी ने पूरी तरह हवा-हवाई और राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है. सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी के इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिक आधार है या फिर यह सिर्फ विपक्षी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश है?

अगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो राहुल गांधी का दावा जमीन से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी जैसा नजर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि केंद्र में एनडीए सरकार अभी भी मजबूत संख्या बल के साथ सत्ता में बनी हुई है. बीजेपी भले अकेले दम पर पहले जैसा आंकड़ा न लाई हो, लेकिन गठबंधन के साथ सरकार पूरी तरह स्थिर दिखाई देती है. सरकार पर किसी तरह का तत्काल राजनीतिक संकट नजर नहीं आता। 

दरअसल, हाल के महीनों में हुए कई चुनावों ने यह संकेत दिया है कि बीजेपी का जनाधार अभी भी बेहद मजबूत है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पार्टी को जनता का शानदार समर्थन मिला है. खासतौर पर बंगाल में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी को बेहद मजबूत किया है. असम में भी पार्टी और उसकी सरकार की पकड़ पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है. इन चुनावों ने यह संदेश दिया कि बीजेपी केवल हिंदी पट्टी तक सीमित पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोक
प्रियता आज भी बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का चेहरा अभी भी विपक्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी माना जाता है. विपक्ष लगातार महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता में कोई कमी नहीं दिख रही. उनमें जनता का एक अटूट भरोसा दिखता है. यही वजह है कि बीजेपी लगातार चुनावी राजनीति में भी बढ़त बनाए हुए है। 

राहुल गांधी अपने बयान में आर्थिक असंतोष और युवाओं की नाराजगी को सरकार के खिलाफ माहौल बनने का कारण बता रहे हैं. कांग्रेस नीट पेपर लीक और छात्रों की परेशानी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. लेकिन, सरकार ने इन मुद्दों पर भी त्वरित कदम उठाते हुए परीक्षा रद्द कर दी. ऐसे में ये मुद्दे भी अब प्रभावी नहीं रहे. वैसे भी भारतीय राजनीति का अनुभव बताता है कि केवल मुद्दों के आधार पर सरकारें नहीं गिरतीं. इसके लिए सत्ता पक्ष के भीतर बड़ा विभाजन, गठबंधन में दरार या व्यापक राजनीतिक संकट होना चाहिए. फिलहाल ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती. इसके बावजूद अगर राहुल गांधी एक मजबूत सरकार के गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं तो इससे उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल उठ सकते हैं। 

विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं
राहुल गांधी के बेतुके दावे के साथ विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही. इंडिया गठबंधन के भीतर कई दलों के अपने-अपने क्षेत्रीय हित हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अब तक कोई स्पष्ट चेहरा या ठोस वैकल्पिक एजेंडा पेश नहीं कर पाया है. कई राज्यों में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर हुआ है. ऐसे में बीजेपी के मुकाबले विपक्ष की चुनौती फिलहाल बिखरी हुई नजर आती है. बीजेपी नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान को इसी नजरिए से देखा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सांसद संबित पात्रा जैसे नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहा और इसलिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। 

असल में राहुल गांधी का बयान ज्यादा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश लगता है. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में यह भरोसा बनाए रखना चाहती है कि बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है. लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरण, मोदी की लोकप्रियता, एनडीए का संख्या बल और विपक्ष की कमजोरी को देखते हुए यह दावा फिलहाल वास्तविकता से ज्यादा राजनीतिक कल्पना जैसा दिखाई देता है। 

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह

’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’

’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’

रायपुर

छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के अंतर्गत बीजापुर जिले के कुटरु में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के त्वरित निराकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने शिविर पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी जन-हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’
           इस वृहद् शिविर में ग्राम पंचायत गुदमा, कोमपल्ली, केतुलनार, सकनापल्ली, अड़ावली, अम्बेली, कुटरु, मंगापेठा, दरभा, उसकापटनम, करकेली, हुर्रागुबाली, फरसेगढ़, रानीबोदली, सागमेटा, पेंकरम, सोमनपल्ली और मण्डेम सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बड़ी तादाद में सम्मिलित हुए।
’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’
          मुख्य अतिथि का संदेश बस्तर मुन्ने (बस्तर के बच्चे/आगे) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना हमारा संकल्प है। इसके लिए ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और शिविरों में तैनात शासकीय अमले का पूरा सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में शासन की अधिकांश योजनाओं का लाभ डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके लिए बैंक खाता और आधार कार्ड का लिंक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके जरिए पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
’भावनात्मक और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम’
        शिविर में उस समय एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पहल ने प्रशासनिक शिविर को एक पारिवारिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया।
’24 से अधिक विभागों ने दी अपनी सेवाएं’
         ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में 24 से अधिक शासकीय विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, जहाँ पात्र हितग्राहियों को ऑन-द-स्पॉट लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नव-निर्मित पक्के मकानों की चाबियाँ हितग्राहियों को सौंपी गईं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कृषि, मत्स्य, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों द्वारा कृषि इनपुट और संबंधित सामग्रियों का वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित विभिन्न मार्गदर्शिका, शासकीय प्रकाशनों और सूचना सामग्रियों का निःशुल्क वितरण किया गया।
’जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण का भरोसा’
        सुशासन तिहार के इस मंच पर ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए। शिविर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवेदनों को संवेदनशीलता से दर्ज करते हुए उनके शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्रीमती दशरी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति आरकी, जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र लेकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, एसडीएम भैरमगढ़, जनपद पंचायत सीईओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव

ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन

रायपुर

मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।  
ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।
 
 सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा

बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई।  मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।  

ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है। 

घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।  
बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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