CM मोहन की आज गूगल के साथ हाईलेवल मीटिंग, AI और स्मार्ट गवर्नेंस पर होगा बड़ा मंथन

भोपाल 
 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 मई बुधवार यानी आज राजधानी भोपाल में गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक करेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से आयोजित ये बैठक मध्य प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

इन समाधानों के इस्तेमाल पर होगी चर्चा
बैठक में मध्य प्रदेश सरकार और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई आधारित समाधानों के उपयोग पर चर्चा होगी। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल और सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।

नागरिक सेवा विकास को दी जाएगी प्राथमिकता
धर्म नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 के तकनीक आधारित प्रबंधन, स्मार्ट भीड़ प्रबंधन, एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, डेटा आधारित निगरानी, अधिक प्रभावी नागरिक सेवा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित रोग पहचान और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि में किसानों को डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षण और कौशल विकास पर भी विचार किया जाएगा।

एमपी और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
बैठक में एआई स्किलिंग, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ये बैठक मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने और प्रदेश को नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

बैठक में ये होंगे शामिल
बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इनपर होगा विचार
बैठक में मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई पर आधारित समाधानों के इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल एवं सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।

बस्तर की कला का राष्ट्रीय स्तर पर जलवा, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को भेंट हुई खास शिल्पकृतियां

कोंडागांव.

बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल कोंडागांव में देखने को मिली. गृहमंत्री अमित शाह को भगवान गणेश की विशेष शिल्पकृति भेंट कर स्थानीय कला का सम्मान किया गया. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मां दंतेश्वरी का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया गया.

यह शिल्पकृति स्थानीय मूर्तिकारों की मेहनत और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जा रही है. बताया गया कि कलाकार सुशील सखूजा ने इस कृति को तैयार करवाया, जबकि इसे मूर्त रूप देने में मदन का योगदान रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व है. राष्ट्रीय नेतृत्व तक बस्तर की कला पहुंचने से स्थानीय कलाकारों में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी पहल से हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है.

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, किरण सिंह देव और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बस्तर की कला लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखती है. अब इसे राष्ट्रीय मंच मिलने से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं. सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है.

‘हमारी शादी को अपराध साबित करने की साजिश’, वायरल गर्ल मोनालिसा और फरमान पहुंचे MP हाईकोर्ट

खरगोन 

प्रयागराज महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा और उसके पति फरमान खान ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है. दंपति ने आरोप लगाया कि उनकी अंतर-धार्मिक शादी को अपराध साबित करने के लिए उनके जन्म प्रमाण पत्र में हेराफेरी की गई है. इसलिए, दंपति ने इंदौर बेंच में याचिका दायर उनके जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी दस्तावेजों में की गई हेराफेरी की स्वतंत्र जांच करने की मांग की है। 

याचिका में दावा किया गया कि मोनालिसा भोसले बालिग है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जन्म तिथि लगातार 1 जनवरी, 2008 दर्ज है. याचिका में कहा गया कि उसकी उम्र को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब उसने फरमान खान से शादी की. दंपति का आरोप है कि बाद में मोनालिसा को नाबालिग दिखाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार किए गए। 

केरल में हुई थी शादी
याचिका के अनुसार, मोनालिसा और फरमान की मुलाकात केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया. मार्च 2026 में मोनालिसा अपने रिश्तेदारों के साथ दोबारा केरल गई. वहां शादी के प्रस्ताव पर असहमति होने के बाद, उसने तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन में अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 

11 मार्च को की शादी
केरल पुलिस ने उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र को सरकारी पोर्टल से सत्यापित किया और उन्हें बालिग पाया. इसके बाद, दोनों ने 11 मार्च, 2026 को पूवार के अरुमानूर नायरन देवा मंदिर में शादी कर ली. इस शादी का पंजीकरण केरल विवाह पंजीकरण नियम, 2008 के तहत कराया गया। 

दंपति ने याचिका में लगाए ये आरोप
याचिका में आरोप लगाया कि मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश लौटकर नगर पंचायत महेश्वर द्वारा जारी असली जन्म प्रमाण पत्र को अवैध रूप से रद्द करवा दिया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फरमान के खिलाफ आपराधिक मामला बनाने के लिए अधिकारियों के सामने जाली रिकॉर्ड पेश किए गए. दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और टीवी पर फरमान को ‘आतंकवादी’ बताया गया और शादी को ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया. इन धमकियों के कारण उन्हें केरल में बार-बार अपनी जगह बदलनी पड़ी। 

बता दें, यह याचिका वकील बीएल नागर, सुभाष चंद्रन केआर और अनिरुद्ध केपी के माध्यम से दायर की गई है. केरल हाई कोर्ट ने 23 मार्च, 2026 को इस जोड़े को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी. अब इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। 

MP में ट्रांसफर पर लगी रोक हटी, मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति-2026 को दी मंजूरी

भोपाल 

मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. इस बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है. प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे. सामान्य प्रशासन विभाग (ने ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा था. सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद नीति को अंतिम रूप दिया गया. बता दें कि प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी तबादला नीति को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। 

तबादला नीति में क्या खास है?
नई तबादला नीति के तहत प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20% अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे. इससे बड़े पैमाने पर मनमाने तबादलों पर रोक लगेगी और प्रक्रिया को नियंत्रित रखा जाएगा. जिलों के भीतर होने वाले तबादलों के लिए प्रभारी मंत्री का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है. इस नीति के तहत प्रथम श्रेणी (Class‑I) अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे. वहीं अन्य संवर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को संबंधित विभागीय मंत्री अनुमोदित कर सकेंगे. यह व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण में अतिरिक्त सतर्कता सुनिश्चित करेगी. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो एक ही स्थान पर तीन वर्षों से अधिक समय से पदस्थ हैं। 

कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने दी कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी. वहीं कैबिनेट पीएम मोदी को नार्वे और स्वीडन के दिए गए सम्मान के लिए शुभकामनाएं दी। 

सरस्वती लोक बनाने की तैयारी
धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धारा के भोजशाला मंदिर को वागदेवीकी प्रतिमा को वापस लाने का प्रयास केंद्र सरकार के माध्यम से की जाएगी. साथ ही यहां सरस्वती लोक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं. सीएम ने कहा कि करीब 750 वर्ष पुराने इस धार्मिक विवाद पर न्यायालय ने सकारात्मक और शांतिपूर्ण निर्णय दिया है और राज्य सरकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले का पालन सुनिश्चित करेगी। 

उन्होंने बताया कि बीते दिन सीएम जगदलपुर गए थे, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक रखी थी. यह बैठक बस्तर में हुई थी. केंद्रीय गृहमंत्री ने एक प्रमुख बिंदु रेखांकित किया हैं. उन्होंने कहा कि कभी नक्सल प्रभावित रहे जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए योजना बनाने की बात कही हैं। 

कैबिनेट बैठक में ई-रिक्शा से पहुंचे मंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल-ईरान युद्ध के कारण बने वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। पीएम की इस अपील को अनदेखा कर मध्य प्रदेश के नवनियुक्त निगम, मंडल और बोर्ड के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों ने वाहन रैलियां निकालीं, जिसके बाद पूरे देश में एमपी बीजेपी नेताओं की फजीहत हुई।

मामले में दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व की फटकार पड़ी तो एमपी बीजेपी ने दो नेताओं पर एक्शन लिया। साथ ही कई नेताओं को हिदायत भी दी गई। वाहन रैलियों को लेकर आलोचना होने के बाद अब संगठन ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद मंत्री, विधायक और सांसद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आ रहे हैं।

मंत्रालय ई-रिक्शा से पहुंचे 2 मंत्री
बुधवार को मंत्रालय में हो रही कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गौतम टेटवाल और नारायण सिंह पवार ई-रिक्शा के जरिए पहुंचे। भोपाल के चार इमली में पास-पास रहने वाले दोनों मंत्री एक ही ई-रिक्शा से करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय कर मंत्रालय पहुंचे।

मंत्रियों के पीछे दूसरे ई-रिक्शा में उनके स्टाफ के लोग पहुंचे, लेकिन जिनके पास पास नहीं थे, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। मंत्रियों के बाद उनके स्टाफ के लोग अलग-अलग गाड़ियों से थोड़ी देर के अंतराल पर मंत्रालय पहुंचे।

ये हैं वाहन रैलियां निकालने वाले नेता

    सौभाग्य सिंह ठाकुर (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम): पदभार ग्रहण करने के दौरान उज्जैन से भोपाल तक 200 से 700 गाड़ियों का विशाल काफिला निकाला। वीडियो वायरल होने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।

    सज्जन सिंह यादव (जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा भिंड): नियुक्ति के बाद लग्जरी कारों की विशाल वाहन रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया था। संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।

    वीरेंद्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण): जब पदभार ग्रहण करने पहुंचे, तब उनके समर्थकों ने भी विशाल वाहन रैली निकाली थी। इस रैली के कारण सिंगरौली शहर की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगा था। आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।
    पंकज जोशी (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड): नियुक्ति का जश्न मनाने के लिए विशाल वाहन रैली निकाली थी। काफिले में करीब 100 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं, जिसे पीएम की ईंधन बचाने की अपील का उल्लंघन माना गया।

    सत्येंद्र भूषण सिंह (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम): नियुक्ति के बाद भोपाल के अवधपुरी स्थित घर से बीजेपी प्रदेश कार्यालय तक ई-रिक्शा से पहुंचे। इसके बाद न्यू मार्केट स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने भी ई-रिक्शा से ही पहुंचे। हालांकि भाजपा कार्यालय के बाहर उनके समर्थकों की गाड़ियों की लंबी लाइन नजर आई थी।

    राकेश सिंह जादौन (उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड): यह भी प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग करते नजर आए। हालांकि विदिशा से भोपाल तक वे गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे।

अब ई-व्हीकल्स और बस से सफर कर रहे नेता

प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा मंत्री): पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर दिखाते हुए उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़ दी और ई-स्कूटी (E-Scooter) से मंत्रालय पहुंचे। सीएम हाउस में सत्ता और संगठन की वन-टू-वन मीटिंग में शामिल होने भी वे ई-स्कूटी से ही पहुंचे थे।

गौतम टेटवाल (तकनीकी शिक्षा मंत्री): तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल अपने विधानसभा क्षेत्र में सारंगपुर से पचोर तक बस से सफर कर पहुंचे थे। इसके दो दिन बाद वे प्रभारी जिले बड़वानी में भी कलेक्टर जयति सिंह और अधिकारियों के साथ बस से बैठक में शामिल होने पहुंचे।

डॉ. मोहन यादव (मुख्यमंत्री): सीएम ने खुद अपने काफिले में एस्कॉर्ट और गाड़ियों की संख्या कम की है। पहले उनके काफिले में 13 वाहन चलते थे, जबकि अब सिर्फ 6 गाड़ियां चल रही हैं। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने मेट्रो से सफर कर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।

ट्विशा शर्मा केस में सड़कों पर उतरे पूर्व सेना अधिकारी, पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

भोपाल
 राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को पूर्व सेना अधिकारी और जवान सड़क पर उतर आए। वर्दी वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में निकाली गई रैली में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

शौर्य स्मारक से शुरू हुई रैली
रैली की शुरुआत शौर्य स्मारक से की गई, जहां पूर्व सैनिकों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास, पुलिस मुख्यालय और राजभवन की ओर बढ़ गए, जहां ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई।

पुलिस जांच पर उठे सवाल
मंगलवार को ट्विशा शर्मा के पिता, परिजनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही। इसी के विरोध में पूर्व सैनिकों ने बुधवार को प्रदर्शन कर सरकार से न्याय की मांग की।

सड़ने लगा है ट्विशा का शव’, डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में भी बड़ा खुलासा
ट्विशा का शर्मा का शव 13 मई से भोपाल एम्स में पड़ा हुआ है। परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भोपाल पुलिस की ओर से ट्विशा के परिजनों को एक चिट्ठी लिखी गई है, जिसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव सड़ने लगा है। शव को ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भोपाल एम्स में नहीं है।

परिजनों को भोपाल पुलिस ने लिखी चिट्ठी
दरअसल, ट्विशा शर्मा के परिजन ससुराल के लोगों पर लगातार हत्या के आरोप लगा रहे हैं। साथ ही अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे हैं। इस बीच भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के माता-पिता को एक चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा है। उसे सड़ने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में आपसे अनुरोध किया जाता है कि कृप्या शव को लेने की व्यवस्था करें।

-80 डिग्री तापमान की है जरूरत
भोपाल पुलिस की चिट्ठी में इस बात का जिक्र है कि अभी शव को भोपाल एम्स में रखा गया है। भोपाल एम्स की मोर्चरी में -4 डिग्री सेल्सियस तापमान है। शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है। यह सुविधा भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं है।

पुलिस के अनुसार ट्विशा शर्मा का पहला पोस्टमार्टम 13 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में पुलिस ने कहा है कि हमें दोबारा पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं है।

पिता कर रहे हैं दूसरी जगह पर पोस्टमार्टम की मांग
वहीं, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्विशा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शांति और गरिमा के साथ किया जा सकेगा।

ये उठ रहे हैं सवाल

    पोस्टमार्टम के दौरान भोपाल पुलिस के चूक भी हुई है
    पीएम के दौरान पुलिस ने वो बेल्ट डॉक्टरों के सामने नहीं पेशी की, जिससे ट्विशा ने खुदकुशी की
    मेडिकल टीम महिला की गर्दन पर मिले लिगेचर निशानों की जांच साइंटीफिक तरीके से नहीं कर पाई
    ट्विशा के परिजनों का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हुई

उलझता जा रहा है मामला
इसी लापरवाही की वजह से ट्विशा शर्मा का केस उलझता जा रहा है। उसकी गर्दन पर दो सामानांतर निशान मिले हैं। इससे मामला उलझता दिख रहा है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में भी टाइम मिसमैच है। ससुराल वालों का कहना है कि उसने रात 10 बजे के बाद फांसी लगाई है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में टाइम 7 बजकर 20 मिनट दिख रही है, जिस वक्त ट्विशा छत पर जा रही थी।

साइकियाट्रिक ट्रीटमेंट पर थी ट्विशा
वहीं, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि उसका इलाज साइकियाट्रिक के पास चल रहा है। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से यह पता चला है कि ट्विशा शर्मा नींद और डिप्रेशन की दवा ले ही थी। 28 अप्रैल से 6 मई तक उसका इलाज चला है। वह एडजसमेंट डिसऑर्डर की शिकार थी। सुसाइड से पहले भी वह डॉक्टर से संपर्क की थी।

 

केशकाल घाटी फोरलेन बायपास निर्माण में लापरवाही नहीं चलेगी, निरीक्षण के बाद पीडब्ल्यूडी सचिव के सख्त निर्देश

केशकाल.

रायपुर-जगदलपुर मार्ग के बहुप्रतीक्षित केशकाल घाटी फोरलेन बायपास को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के साथ बायपास के दोनों छोरों का जायजा लिया.

निरीक्षण के दौरान शेष पेड़ों की कटाई जल्द पूरी करने के निर्देश वन विभाग को दिए गए. साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना बस्तर और छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. करीब 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास तैयार किया जा रहा है. परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुलों का निर्माण भी शामिल है.घाटी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं को कम करने में यह बायपास अहम माना जा रहा है.

सरकार ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए जल्द निर्माण पूरा करने के संकेत दिए हैं. निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर दिखाई देगी.

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर

नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर

रायपुर
छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है।

स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ

नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी।

वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है।

परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम

रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है।

महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी

नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है।

लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है।

मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।

इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण

कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है।

पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार

नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं।

सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी।

सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब

नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है।

यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है।

सतत विकास और हरित पहल

“पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है।

बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है:

सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास।

राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन।

500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार।

नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना।

वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना।

वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन।

प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास।

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन।

सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन।

नई राजधानी, नए भारत की पहचान

नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत के सबसे आधुनिक, निवेश-अनुकूल और जीवन गुणवत्ता से परिपूर्ण शहरों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

* सुनील कुमार त्रिपाठी
* सहायक संचालक

बेटियों के हौसले को मिली नई उड़ान, डॉ. शिवानी सोनी ने उपभोक्ताओं की सोच पर रिसर्च कर हासिल की PhD

बेटियों के जज्बे को मिली शोध की ‘डिग्री’: डॉ. शिवानी सोनी ने हासिल की PhD की उपाधि

 ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन शॉपिंग उपभोक्ता के मन की गहराई नापकर मिली सफलता 

भोपाल
 राजधानी के शैक्षणिक गलियारे में आज एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। अपनी विद्वत्ता और कड़े परिश्रम के दम पर डॉ. (श्रीमती) शिवानी यशोधर सोनी ने वाणिज्य के क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया है। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के वाणिज्य विभाग ने उनके उत्कृष्ट शोध कार्य को स्वीकार करते हुए उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ (PhD) की मानद उपाधि से विभूषित किया है। बाजार के बदलते मिजाज पर की ‘पीएचडी’ डॉ. शिवानी ने आज के दौर के सबसे प्रासंगिक विषय “ए स्टडी ऑफ फैक्टर्स अफेक्टिंग कंज्यूमर बिहेवियर एंड इट्स सेटिस्फेक्शन टूवर्ड्स ऑनलाइन एंड ऑफलाइन शॉपिंग” पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने बारीकी से इस बात का विश्लेषण किया कि बदलते दौर में ग्राहक कब मोबाइल की स्क्रीन पर ‘क्लिक’ करना पसंद करता है और कब बाजार की गलियों में जाकर सामान की परख करना चाहता है।

मार्गदर्शन का मिला साथ: डॉ. शिवानी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक डॉ. बी.एम.एस. भदौरिया (विभागाध्यक्ष, शासकीय एम.एल.बी. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल) को दिया है, जिनके कुशल निर्देशन में यह जटिल शोध कार्य पूर्ण हुआ। संस्कार और शिक्षा का संगम गौरतलब है कि डॉ. शिवानी सोनी शहर के प्रतिष्ठित और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ. एम.एल. सोनी एवं श्रीमती गीता सोनी की पुत्रवधू हैं। परिवार के शैक्षणिक परिवेश ने उनकी इस उपलब्धि में नींव के पत्थर की तरह काम किया है। बधाइयों का तांता: समूचे सोनी परिवार में जश्न डॉ. शिवानी की इस सफलता की खबर लगते ही उनके शुभचिंतकों और परिजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई।

पति यशोधर सोनी सहित परिवार के सदस्यों ने इसे उनकी बरसों की तपस्या का प्रतिफल बताया। सफलता के इस विशेष अवसर पर सात समंदर पार से भी दुआएं पहुंचीं। शुभकामनाएं देने वालों में प्रमुख नाम: ऑस्ट्रेलिया से: डॉ. ऋतु वर्मा एवं रोहित वर्मा (मेलबर्न)। चिकित्सा एवं शिक्षा जगत: डॉ. ऋचा सोनी और डॉ. सिद्धार्थ सागर। नन्हे सितारे: काव्या, गर्वित, शिवांश और श्रीतिक। संस्थान: होटल दयालश्री पैराडाइज, होटल गीतकाव्या इन, और हिंद होप मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, भोपाल। इसके साथ ही सोनी परिवार (लहार-भिंड) और भोपाल के समस्त मित्रों एवं परिजनों ने डॉ. शिवानी को इस गौरवशाली उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

क्यों खास है यह शोध? (बॉक्स आइटम) आज के दौर में जहां रिटेल मार्केट और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच जंग छिड़ी है, डॉ. शिवानी का यह शोध व्यापारिक जगत के लिए एक दिशा-निर्देश साबित हो सकता है। ग्राहकों की संतुष्टि के पैमानों को जिस तरह से उन्होंने रेखांकित किया है, वह आने वाले समय में मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने वालों के लिए भी उपयोगी होगा। संपादकीय नोट: डॉ. शिवानी सोनी की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती हैं।

TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह? ममता बनर्जी के सामने ही विधायकों ने उड़ाया अभिषेक का मजाक

कोलकत्ता 
तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों की मंगलवार को हुई आंतरिक बैठक में असहमति देखने को मिली। खबर है कि फालता सीट पर 21 मई को फिर से होने वाले चुनाव से पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान के अचानक नाम वापस लेने से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, कालीघाट में हुई इस बैठक में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक भी मौजूद थे। बैठक में विधायकों ने फालता में अचानक हुए राजनीतिक उथल-पुथल और पार्टी के संगठनात्मक कामकाज पर सवाल उठाए।

इस घटनाक्रम की वजह जहांगीर खान हैं, जो फालता में राजनीतिक रस्साकशी के स्वघोषित ‘पुष्पा’ हैं। उन्होंने दिन में, फिर से होने वाले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा करके राज्य के राजनीतिक हलकों को चौंका दिया, जिससे हालिया विधानसभा चुनावों की सबसे विवादित सीटों में से एक पर भाजपा के लिए जीत की राह आसान होती दिख रही है।

जहांगीर खान के खिलाफ TMC ने क्यों नहीं की कार्रवाई?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर के नाम वापस लेने का हवाला देते हुए बैठक में सवाल उठाए। संयोगवश, तीनों विधायक कालीघाट की बैठक में एक ही वाहन से पहुंचे थे। टीएमसी सूत्रों ने बताया कि ये सवाल उठाए गए कि जहांगीर ने मतदान से दो दिन पहले चुनाव से नाम वापस ले लिया, फिर भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

अभिषेक बनर्जी पर निशाना
कुछ टिप्पणियों को अभिषेक पर परोक्ष रूप से निशाना साधने के रूप में देखा गया, जिनके डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत फालता विधानसभा क्षेत्र आता है। दो वरिष्ठ विधायकों ने जहांगीर को ‘केंद्रीय प्रशासन वाले क्षेत्र का नेता’ कहकर कथित तौर पर व्यंग्य किया, जो यह डायमंड हार्बर क्षेत्र में कड़े नियंत्रण वाले राजनीतिक तंत्र की धारणा पर एक स्पष्ट कटाक्ष था।

यह सवाल भी उठाया गया कि जहांगीर, जिन्हें कथित तौर पर काफी संगठनात्मक समर्थन प्राप्त है और जिनकी प्रभावशाली नेताओं से निकटता है, ने चुनाव से हटने का फैसला क्यों किया। हाल के हफ्तों में फालता सीट का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। फालता सीट पर 29 अप्रैल को हुए चुनाव को बाद में रद्द कर दिया गया और दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की गई थी।

श्मशान घाट के मुद्दे पर तंज
हालिया चुनाव से पहले, प्रचार के दौरान अभिषेक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि जहांगीर ने उनसे इलाके में श्मशान घाट बनवाने का अनुरोध किया है। बाद में उन्होंने टिप्पणी की कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद, ‘दिल का दौरा पड़ने से मरने वालों’ का वहां अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मंगलवार की चर्चा के दौरान यह विवादास्पद टिप्पणी फिर से सामने आई और विधायकों ने कथित तौर पर पूछा कि अब श्मशान घाट कौन बनवाएगा और किसके लिए बनवाएगा।

टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इन टिप्पणियों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए ऐसे समय में एक व्यापक संदेश के रूप में देखा है, जब संगठन के कुछ वर्ग निजी तौर पर चुनाव के बाद की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। अभिषेक की हालिया राजनीतिक उपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के मद्देनजर भी इस चर्चा का महत्व बढ़ गया।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से सक्रिय रही हैं – कार्यक्रमों में भाग लेती रहीं और चुनाव बाद हुई हिंसा के मुद्दों पर अदालतों का रुख किया। जबकि, अभिषेक अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहे और फालता विधानसभा सीट उनके संसदीय क्षेत्र में आने के बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से नजर नहीं आए।.

ये विधायक हुए नाराज
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से डेटा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि ममता बनर्जी भवानीपुर सीट के 267 में 207 बूथों पर पीछे चल रहीं थीं। यहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

अभिषेक बनर्जी पर हुए नाराज
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि तीनों विधायकों ने आरोप लगाए हैं कि सांसद अभिषेक बनर्जी के फैसले पार्टी पर थोपे गए थे, जिसके चलते पार्टी को झटका लगा। साथ ही फालता से जहांगीर खान के नामांकन वापस लेने पर भी तंज कसा गया।

क्या था रिएक्शन
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा, ‘बुआ और भतीजे की जोड़ी को समझ ही नहीं आया कि उनके साथ अचानक यह क्या हो गया। वे दोनों बिल्कुल चुपचाप बैठे सुनते रहे। उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था, लेकिन वे कुछ बोले नहीं।’ उन्होंने बताया ठीक इसके पहले ही पार्टी प्रमुख ने दावा किया था कि भाजपा भविष्य में केंद्र से चली जाएगी।

अखबार से बातचीत में एक सूत्र ने कहा, ‘कुणाल ने खुलकर कहा कि अब बहुत हो गया है और खुलकर बोलने की आजादी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके कालीघाट वाले घर पर ऐसी बहुत सी बैठकें हो चुकी हैं, अब हमें उन बैठकों को छोड़कर सड़कों पर उतरना चाहिए ताकि बीजेपी की इस बुलडोजर आर्मी से गरीब और बेबस लोगों को बचाया जा सके।’

लगातार दूसरी बार हारी हैं ममता बनर्जी
साल 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, टीएमसी ने राज्य में 200 से ज्यादी सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बरकरार रखने में सफलता हासिल की थी। वहीं, 2026 में उन्हें दोहरा झटका लगा। एक ओर जहां उन्होंने भवानीपुर सीट शुभेंदु अधिकारी के हाथों गंवाई। जबकि, टीएमसी भी महज 80 सीटें ही जीत सकी। भाजपा ने अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया।

15 विधायक गायब
बैठक में विधायकों की उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 विधायक अनुपस्थित थे।कई विधायकों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, वहीं मालदा के एक विधायक ने नेतृत्व को कथित तौर पर सूचित किया कि वह काम के सिलसिले में दिल्ली में हैं। इससे राजनीतिक हलकों में उनके संभावित भावी कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

LoP पर क्या हुआ फैसला
वहीं बैठक में बॉलीगंज के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने से संबंधित प्रक्रियात्मक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि विधायकों ने उन्हें नामित करने के समर्थन में एक पत्र पर हस्ताक्षर किए।

कोलकाता में अभिषेक की कुछ संपत्तियों के संबंध में जारी किए गए नगर निगम नोटिस पर उनके द्वारा कड़ा विरोध जताने के कुछ घंटों बाद यह बैठक हुई। विधायकों की बैठक में, उन्होंने कहा कि न तो नोटिस और न ही धमकियां उन्हें झुका पाएंगी।

बैठक में मौजूद एक टीएमसी विधायक ने अभिषेक के हवाले से कहा, ‘वे मेरा घर गिरा दें, वे नोटिस भेजें। मैं अपना सिर नहीं झुकाऊंगा। चाहे कुछ भी हो जाए, भाजपा के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी।’

अभिषेक बनर्जी को 43 संपत्तियों पर नोटिस, जानिए किन प्रॉपर्टीज को लेकर उठा विवाद

 कोलकाता
पश्चिम बंगाल BJP ने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से कथित रूप से जुड़ी 43 संपत्तियों की एक विस्तृत लिस्ट सार्वजनिक कर दी है. इनमें कई संपत्तियां अभिषेक बनर्जी के परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों जैसे ममता बनर्जी, अमृता बनर्जी, सबिता बनर्जी, मिनाती बनर्जी, बाणानी बनर्जी और सायानी घोष के साथ संयुक्त रूप से मालिकाना हक (स्वामित्व)वाली बताई गई हैं। 

इसके अलावा अर्पिता बनर्जी, सुदेष्णा बनर्जी, आकाश बनर्जी, सोमनथ बनर्जी और प्रियंका दास जैसे कई अन्य नाम भी अलग-अलग संपत्तियों के मालिकों या पर्सन लायबल टैक्स के रूप में सूची में शामिल हैं। 

बीजेपी ने इन संपत्तियों की लिस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया है कि इनका सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध अभिषेक बनर्जी से जुड़ा हुआ है. सूची में शामिल संपत्तियों के स्वामित्व, स्थान और अन्य विवरणों को सार्वजनिक किया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 

इस सामने आए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, कोलकाता के विभिन्न स्ट्रीट और वॉर्डों में दर्ज ये संपत्तियां अलग-अलग लोगों के साथ ज्वाइंट ओनरशिप में हैं. लिस्ट में साफ तौर पर 58/3 बैरकपुर ट्रंक रोड पर स्थित ऑर्बिट ल्यूमियर, गरियाहाट रोड पर स्थित समिरन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और बेहला के बेचराम चटर्जी रोड स्थित ‘साईं भवन’ जैसी अचल संपत्तियों के असेसी नंबर और पते दर्ज दिखाई दे रहे हैं। 

कोलकाता के कई पॉश इलाकों में फैली हैं संपत्तियां
असेसमेंट विभाग की इस लिस्ट में कोलकाता के कई महत्वपूर्ण इलाकों जैसे डी गुप्ता लेन, धर्मतला रोड, देवेन्द्र घोष रोड, सर्वे पार्क, कालीपद मुखर्जी रोड और मोतीलाल गुप्ता रोड की संपत्तियों को ‘एक्टिव’ स्टेटस में दिखाया गया है. इनमें से अधिकांश संपत्तियों के साथ अलग-अलग मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं, जिन्हें अब जांच और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में लाया जा रहा है। 

सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार इन सभी 43 संपत्तियों के स्वामित्व विवरण की गहन जांच कराएगी. जांच में ये पता लगाया जाएगा कि इन संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व कौन है, इनकी खरीदारी के स्रोत क्या हैं और इनमें कोई अनियमितता तो नहीं है। 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि नगर मामलों के विभाग और कोलकाता नगर निगम की संपत्ति रिपोर्टों से पता चला है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर स्वामित्व वाली 24 संपत्तियों में से 14 उनकी कथित कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के नाम पर, 4 सांसद के नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं। 

भवानीपुर में एक धन्यवाद सभा में बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री ने तृणमूल के तीन और नेताओं या उनके करीबी सहयोगियों की संपत्तियों के बारे में विवरण का खुलासा किया और फिर जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सभी भ्रष्ट व्यक्तियों को सलाखों के पीछे भेज देगी। 

‘मैंने संपत्ति खोजने का दिया था निर्देश’
शुभेंदु ने लोगों को बताते हुए कहा कि मैंने नगर मामलों के विभाग के सचिव और कोलकाता नगर निगम के आयुक्त से 4 व्यक्तियों की संपत्ति का विवरण प्राप्त करने के लिए कहा था. क्या आप उनके नाम जानना चाहते हैं?

सीएम ने बताया, ‘पहले नंबर पर बेलेघाटा के राजू नस्कर हैं, जिनके पास 18 संपत्तियां हैं. दूसरे नंबर पर कस्बा की सोना पप्पू हैं, जिनके पास 24 संपत्तियां हैं. तीसरे नंबर पर भतीजा अभिषेक बनर्जी हैं. इनमें से 14 संपत्तियां ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ कंपनी के नाम पर, चार उनके अपने नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं. चौथे नंबर पर जावेद (अहमद) खान (तृणमूल के कस्बा विधायक) के बेटे हैं, जिनके पास 90 संपत्तियां हैं। 

‘सभी भ्रष्ट लोगों को भेजेंगे जेल’
उन्होंने आगे कहा, ‘जनता को लूटने वाले लुटेरे हैं. (पुलिस अधिकारी) शांतनु सिन्हा बिस्वास और (पूर्व मंत्री) सुजीत बोस की तरह, जिन्हें जेल भेजा गया था, बीजेपी सरकार निकट भविष्य में ये सुनिश्चित करेगी कि ऐसे सभी भ्रष्ट लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। 

वहीं, सोमवार को अभिषेक बिधाननगर पुलिस द्वारा हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए एक मामले में सुरक्षा की मांग करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे। 

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