रुपये को मजबूत करने की तैयारी, सोने के बाद अब विदेशी सामानों पर सरकार की सख्ती संभव

नई दिल्ली

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.5 पर बंद हुआ, जबकि  यह 96.34 पर था. इस गिरते हुए रुपया को संभालने के लिए पिछले महीने ही आरबीआई ने कई अहम कदम उठाए थे. लेकिन इससे भी कुछ खास असर पड़ता हुआ नजर नहीं आया। 

अब सरकार देश के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गैर-जरूरी(non essential) सामानों के इंपोर्ट की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जिन सामानों में भारत की विदेशों पर निर्भरता कम है, उनके आयात पर ज्यादा चार्ज या कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। 

पेमेंट बैलेंस पर दबाव
इस मुद्दे पर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट को लेकर होने वाली मंत्रालय की बैठक में चर्चा हो सकती है. भारत का ट्रेड डेफिसिट अप्रैल में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. इससे देश के पेमेंट बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेश में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। 

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो उसे बहुत सोच-समझकर लागू किया जाएगा, ताकि जरूरी सप्लाई चेन और उद्योगों पर कोई बड़ा असर न पड़े। 

रुपये की स्थिति सुधारने के लिए सरकार का कदम
अगले हफ्ते होने वाली बैठक में सरकार गैर-जरूरी सामानों(non essential items) के आयात को कम करने, रुपये की स्थिति सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने के उपायों पर चर्चा करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है जिससे देश का इंपोर्ट बिल कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले। 

इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही रेवेन्यू बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। 

इंपोर्टेड सामानों नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि कई ऐसे सामान विदेशों से इंपोर्ट किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार उद्योगों से बातचीत कर रही है ताकि गैर-जरूरी आयात कम हो सके. जरूरत पड़ने पर कुछ सामानों पर इंपोर्ट बिल बढ़ाया जा सकता है या नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। 

सोने के आयात पर सरकार का फैसला
हाल ही में सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी और कुछ नियम भी लागू किए थे. सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसमें 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत सेस शामिल है. सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। 

अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उठाए जाने वाले कदम पूरी योजना और संतुलन के साथ होंगे, ताकि जरूरी सामानों और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर असर न पड़े. इसका मकसद रुपये को मजबूती देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। 

सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट मांगी है जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कारोबारियों से कहा है कि जिन चीजों का उत्पादन भारत में हो सकता है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि कई सस्ते आयातित सामान की क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती, इसलिए देश में निर्माण बढ़ाना जरूरी है। 

छत्तीसगढ़ में दवा कारोबार ठप, रायपुर-बिलासपुर समेत 18 हजार मेडिकल स्टोर बंद

सरगुजा.

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आज देशभर में केमिस्ट संगठन हड़ताल पर हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 18 हजार मेडिकल स्टोर बंद हैं, जिनमें थोक और रिटेल दोनों दुकानें शामिल हैं। रायपुर, बिलासपुर में सुबह से मेडिकल स्टोर नहीं खुले हैं। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट से छोटे मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

दवा व्यापारियों के इस आंदोलन को CAIT, चेंबर ऑफ कॉमर्स और कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने समर्थन दिया है। CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने कहा कि यह सिर्फ दवा कारोबार का मुद्दा नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और स्थानीय बाजार को बचाने का मामला है। डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कृपलानी ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी छूट की वजह से स्थानीय मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे छोटे व्यापारियों पर संकट बढ़ रहा है।

स्थानीय व्यापारियों के हितों पर ध्यान दे सरकार
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने भी दवा व्यापारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन और विदेशी कंपनियां भारी छूट देकर स्थानीय दवा कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ दवा व्यापारियों की नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों की भी है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय व्यापारियों और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएं।
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ ने केमिस्ट हड़ताल का किया समर्थन।

मरीजों को परेशानी ना हो इसके लिए व्यवस्था
देशभर में चल रही हड़ताल को देखते हुए छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन अलर्ट हो गया है। मरीजों को दवाओं की कमी न हो, इसके लिए राज्यभर में जरूरी दवाएं और मेडिकल सामान उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सरकारी जनऔषधि केंद्रों, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स, सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य मेडिकल स्टोर्स के जरिए लोगों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

केमिस्ट एसोसिएशन से सहयोग की अपील
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने छत्तीसगढ़ केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन से भी अपील की है कि हड़ताल के दौरान मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहे। इसके लिए दवा दुकानों और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न करने में सहयोग मांगा गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

जरूरत से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक न करें
प्रशासन ने अपील की है कि घबराकर ज्यादा दवाइयां जमा न करें। रोजाना दवा लेने वाले लोग जरूरत की दवाएं पहले से रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों और मेडिकल स्टोर्स में दवाइयां उपलब्ध रहेंगी।

उज्जैन काल भैरव मंदिर में अब VIP दर्शन की सुविधा, 500 रुपये शुल्क पर मिलेगी विशेष एंट्री

उज्जैन 
मध्यप्रदेश के उज्जैन में राजाधिराज महाकाल के कोतवाल बाबा कालभैरव मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपए शुल्क चुकाना होगा। नई व्यवस्था बुधवार 20 मई से लागू की जा रही है। शुल्क जमा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष व्यवस्था के तहत गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जहां वे पुजारी के माध्यम से बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग अर्पित कर दर्शन कर सकेंगे।

500 रुपये बाबा कालभैरव के VIP दर्शन

मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 500 रुपए की अधिकृत रसीद दी जाएगी। इसके बाद उन्हें सामान्य कतार से अलग गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु अपने साथ लाई मदिरा पुजारी को सौंपेंगे और उनके सामने ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। यह शुल्क महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है।

प्रतिदिन पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
कालभैरव मंदिर में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं पर्व और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रोटोकॉल दर्शन की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है।

महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू हुई व्यवस्था
महाकाल मंदिर में पहले से ही विभिन्न दर्शन और आरती व्यवस्थाएं सशुल्क संचालित हैं। भस्म आरती में प्रवेश के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए शुल्क लिया जाता है। वहीं संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी 250 रुपए में उपलब्ध है। इसी तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा लागू की गई है, हालांकि शुल्क दोगुना रखा गया है।

सीमित संख्या में रहेगी शुरुआत
प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सीमित संख्या में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर आगे इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को और सुचारू बनाने पर निर्णय लिया जाएगा।

संध्या मार्कण्डेय, प्रशासक, कालभैरव मंदिर

बाहरी तत्वों पर कसेगी लगाम
फिलहाल वीआइपी प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था लागू की है। यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि बाहरी तत्वों के चुंगल में फंसकर ये श्रद्धालु वैसे ही रुपए देकर गर्भगृह तक पहुंच रहे थे, तो यह राशि इस तरह से अब मंदिर की आय का स्रोत बनेगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है।

एलएन गर्ग, एसडीएम

माओवादी समस्या पर बड़ी सफलता का दावा, CM मोहन यादव बोले- अब विकास पर रहेगा पूरा फोकस

भोपाल
 छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा तय समय सीमा से पहले माओवादी समस्या के उन्मूलन में सफलता हासिल की है।

उन्होंने बताया कि कई इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि सुरक्षा बलों और जवानों को लगातार प्रोत्साहित किया गया, जिससे नागरिकों का सरकार पर विश्वास मजबूत हुआ है।

केंद्रीय मंत्री शाह और कई मुख्यमंत्री रहे मौजूद
मुख्यमंत्री ने माओवादी समस्या मुक्त भारत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे।

330 करोड़ रुपये से होगा विकास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रभावित गांवों के लिए 330 करोड़ रुपये की लागत से सूक्ष्म विकास योजना लागू की गई है। इसके तहत सड़क, पुल, मोबाइल टावर और नई सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने सहकारिता, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, शहरी विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश की प्रगति को रेखांकित किया।बैठक में सुशासन, जनकल्याण, क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

मोहन यादव सरकार एमपी को औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध
बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने एमपी में औद्योगिक सेक्टर के विस्तार के लिए सुगम नीतियां और अनुकूल वातावरण तैयार किया है। यही वजह है कि एमपी की मोहन यादव सरकार निवेशकों को आकर्षित कर रही है और प्रदेश को सशक्त बना रही है।

मालूम हो कि एमपी सरकार ने मध्य प्रदेश के औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस निवेश आकर्षित करने, रोजगार बढ़ाने और राज्य को औद्योगिक हब बनाने पर रहा है। राज्य सरकार ने 2025 को ‘उद्योग और रोजगार का वर्ष’ घोषित किया, ताकि उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता दी जा सके।

साथ ही नई ‘औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025’ लागू की गई, जिसमें टेक्सटाइल, ईवी मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, बायोटेक, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के लिए विशेष नीतियां बनाई गई हैं। सरकार ने अगले पांच सालों में 20 लाख रोजगार और औद्योगिक जीडीपी को 6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

सीएम मोहन यादव ने डिजिटल ट्रांसमिशन कार्यक्रम में की शिरकत
उधर, पिछले दिनों एमपी के चीफ मिनिस्टर मोहन यादव ने जबलपुर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत अन्य गणमान्य लोगों के साथ एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान सीएम मोहन ने कहा, ‘मध्य प्रदेश न्याय और संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है। आज जबलपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ मुलाकात की।’

सीएम ने आगे कहा, ‘केंद्रीय विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के साथ ‘डिजिटल ट्रांसमिशन: पेपरलेस कानूनी प्रणाली को आगे बढ़ाना’ विषय पर आयोजित विधि व्याख्यान कार्यक्रम में विचार साझा किए। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भारतीय न्याय परंपरा के कई महान उदाहरण मिलते हैं। आज न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और भारतीय मूल्यों के पुनर्जागरण का काल है।’

 

CM मोहन की आज गूगल के साथ हाईलेवल मीटिंग, AI और स्मार्ट गवर्नेंस पर होगा बड़ा मंथन

भोपाल 
 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 मई बुधवार यानी आज राजधानी भोपाल में गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक करेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से आयोजित ये बैठक मध्य प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

इन समाधानों के इस्तेमाल पर होगी चर्चा
बैठक में मध्य प्रदेश सरकार और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई आधारित समाधानों के उपयोग पर चर्चा होगी। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल और सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।

नागरिक सेवा विकास को दी जाएगी प्राथमिकता
धर्म नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 के तकनीक आधारित प्रबंधन, स्मार्ट भीड़ प्रबंधन, एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, डेटा आधारित निगरानी, अधिक प्रभावी नागरिक सेवा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित रोग पहचान और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि में किसानों को डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षण और कौशल विकास पर भी विचार किया जाएगा।

एमपी और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
बैठक में एआई स्किलिंग, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ये बैठक मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने और प्रदेश को नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

बैठक में ये होंगे शामिल
बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इनपर होगा विचार
बैठक में मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई पर आधारित समाधानों के इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल एवं सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।

बस्तर की कला का राष्ट्रीय स्तर पर जलवा, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को भेंट हुई खास शिल्पकृतियां

कोंडागांव.

बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल कोंडागांव में देखने को मिली. गृहमंत्री अमित शाह को भगवान गणेश की विशेष शिल्पकृति भेंट कर स्थानीय कला का सम्मान किया गया. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मां दंतेश्वरी का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया गया.

यह शिल्पकृति स्थानीय मूर्तिकारों की मेहनत और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जा रही है. बताया गया कि कलाकार सुशील सखूजा ने इस कृति को तैयार करवाया, जबकि इसे मूर्त रूप देने में मदन का योगदान रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व है. राष्ट्रीय नेतृत्व तक बस्तर की कला पहुंचने से स्थानीय कलाकारों में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी पहल से हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है.

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, किरण सिंह देव और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बस्तर की कला लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखती है. अब इसे राष्ट्रीय मंच मिलने से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं. सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है.

‘हमारी शादी को अपराध साबित करने की साजिश’, वायरल गर्ल मोनालिसा और फरमान पहुंचे MP हाईकोर्ट

खरगोन 

प्रयागराज महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा और उसके पति फरमान खान ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है. दंपति ने आरोप लगाया कि उनकी अंतर-धार्मिक शादी को अपराध साबित करने के लिए उनके जन्म प्रमाण पत्र में हेराफेरी की गई है. इसलिए, दंपति ने इंदौर बेंच में याचिका दायर उनके जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी दस्तावेजों में की गई हेराफेरी की स्वतंत्र जांच करने की मांग की है। 

याचिका में दावा किया गया कि मोनालिसा भोसले बालिग है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जन्म तिथि लगातार 1 जनवरी, 2008 दर्ज है. याचिका में कहा गया कि उसकी उम्र को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब उसने फरमान खान से शादी की. दंपति का आरोप है कि बाद में मोनालिसा को नाबालिग दिखाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार किए गए। 

केरल में हुई थी शादी
याचिका के अनुसार, मोनालिसा और फरमान की मुलाकात केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया. मार्च 2026 में मोनालिसा अपने रिश्तेदारों के साथ दोबारा केरल गई. वहां शादी के प्रस्ताव पर असहमति होने के बाद, उसने तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन में अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 

11 मार्च को की शादी
केरल पुलिस ने उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र को सरकारी पोर्टल से सत्यापित किया और उन्हें बालिग पाया. इसके बाद, दोनों ने 11 मार्च, 2026 को पूवार के अरुमानूर नायरन देवा मंदिर में शादी कर ली. इस शादी का पंजीकरण केरल विवाह पंजीकरण नियम, 2008 के तहत कराया गया। 

दंपति ने याचिका में लगाए ये आरोप
याचिका में आरोप लगाया कि मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश लौटकर नगर पंचायत महेश्वर द्वारा जारी असली जन्म प्रमाण पत्र को अवैध रूप से रद्द करवा दिया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फरमान के खिलाफ आपराधिक मामला बनाने के लिए अधिकारियों के सामने जाली रिकॉर्ड पेश किए गए. दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और टीवी पर फरमान को ‘आतंकवादी’ बताया गया और शादी को ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया. इन धमकियों के कारण उन्हें केरल में बार-बार अपनी जगह बदलनी पड़ी। 

बता दें, यह याचिका वकील बीएल नागर, सुभाष चंद्रन केआर और अनिरुद्ध केपी के माध्यम से दायर की गई है. केरल हाई कोर्ट ने 23 मार्च, 2026 को इस जोड़े को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी. अब इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। 

MP में ट्रांसफर पर लगी रोक हटी, मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति-2026 को दी मंजूरी

भोपाल 

मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. इस बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है. प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे. सामान्य प्रशासन विभाग (ने ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा था. सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद नीति को अंतिम रूप दिया गया. बता दें कि प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी तबादला नीति को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। 

तबादला नीति में क्या खास है?
नई तबादला नीति के तहत प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20% अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे. इससे बड़े पैमाने पर मनमाने तबादलों पर रोक लगेगी और प्रक्रिया को नियंत्रित रखा जाएगा. जिलों के भीतर होने वाले तबादलों के लिए प्रभारी मंत्री का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है. इस नीति के तहत प्रथम श्रेणी (Class‑I) अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे. वहीं अन्य संवर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को संबंधित विभागीय मंत्री अनुमोदित कर सकेंगे. यह व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण में अतिरिक्त सतर्कता सुनिश्चित करेगी. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो एक ही स्थान पर तीन वर्षों से अधिक समय से पदस्थ हैं। 

कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने दी कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी. वहीं कैबिनेट पीएम मोदी को नार्वे और स्वीडन के दिए गए सम्मान के लिए शुभकामनाएं दी। 

सरस्वती लोक बनाने की तैयारी
धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धारा के भोजशाला मंदिर को वागदेवीकी प्रतिमा को वापस लाने का प्रयास केंद्र सरकार के माध्यम से की जाएगी. साथ ही यहां सरस्वती लोक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं. सीएम ने कहा कि करीब 750 वर्ष पुराने इस धार्मिक विवाद पर न्यायालय ने सकारात्मक और शांतिपूर्ण निर्णय दिया है और राज्य सरकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले का पालन सुनिश्चित करेगी। 

उन्होंने बताया कि बीते दिन सीएम जगदलपुर गए थे, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक रखी थी. यह बैठक बस्तर में हुई थी. केंद्रीय गृहमंत्री ने एक प्रमुख बिंदु रेखांकित किया हैं. उन्होंने कहा कि कभी नक्सल प्रभावित रहे जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए योजना बनाने की बात कही हैं। 

कैबिनेट बैठक में ई-रिक्शा से पहुंचे मंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल-ईरान युद्ध के कारण बने वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। पीएम की इस अपील को अनदेखा कर मध्य प्रदेश के नवनियुक्त निगम, मंडल और बोर्ड के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों ने वाहन रैलियां निकालीं, जिसके बाद पूरे देश में एमपी बीजेपी नेताओं की फजीहत हुई।

मामले में दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व की फटकार पड़ी तो एमपी बीजेपी ने दो नेताओं पर एक्शन लिया। साथ ही कई नेताओं को हिदायत भी दी गई। वाहन रैलियों को लेकर आलोचना होने के बाद अब संगठन ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद मंत्री, विधायक और सांसद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आ रहे हैं।

मंत्रालय ई-रिक्शा से पहुंचे 2 मंत्री
बुधवार को मंत्रालय में हो रही कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गौतम टेटवाल और नारायण सिंह पवार ई-रिक्शा के जरिए पहुंचे। भोपाल के चार इमली में पास-पास रहने वाले दोनों मंत्री एक ही ई-रिक्शा से करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय कर मंत्रालय पहुंचे।

मंत्रियों के पीछे दूसरे ई-रिक्शा में उनके स्टाफ के लोग पहुंचे, लेकिन जिनके पास पास नहीं थे, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। मंत्रियों के बाद उनके स्टाफ के लोग अलग-अलग गाड़ियों से थोड़ी देर के अंतराल पर मंत्रालय पहुंचे।

ये हैं वाहन रैलियां निकालने वाले नेता

    सौभाग्य सिंह ठाकुर (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम): पदभार ग्रहण करने के दौरान उज्जैन से भोपाल तक 200 से 700 गाड़ियों का विशाल काफिला निकाला। वीडियो वायरल होने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।

    सज्जन सिंह यादव (जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा भिंड): नियुक्ति के बाद लग्जरी कारों की विशाल वाहन रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया था। संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।

    वीरेंद्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण): जब पदभार ग्रहण करने पहुंचे, तब उनके समर्थकों ने भी विशाल वाहन रैली निकाली थी। इस रैली के कारण सिंगरौली शहर की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगा था। आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।
    पंकज जोशी (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड): नियुक्ति का जश्न मनाने के लिए विशाल वाहन रैली निकाली थी। काफिले में करीब 100 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं, जिसे पीएम की ईंधन बचाने की अपील का उल्लंघन माना गया।

    सत्येंद्र भूषण सिंह (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम): नियुक्ति के बाद भोपाल के अवधपुरी स्थित घर से बीजेपी प्रदेश कार्यालय तक ई-रिक्शा से पहुंचे। इसके बाद न्यू मार्केट स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने भी ई-रिक्शा से ही पहुंचे। हालांकि भाजपा कार्यालय के बाहर उनके समर्थकों की गाड़ियों की लंबी लाइन नजर आई थी।

    राकेश सिंह जादौन (उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड): यह भी प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग करते नजर आए। हालांकि विदिशा से भोपाल तक वे गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे।

अब ई-व्हीकल्स और बस से सफर कर रहे नेता

प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा मंत्री): पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर दिखाते हुए उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़ दी और ई-स्कूटी (E-Scooter) से मंत्रालय पहुंचे। सीएम हाउस में सत्ता और संगठन की वन-टू-वन मीटिंग में शामिल होने भी वे ई-स्कूटी से ही पहुंचे थे।

गौतम टेटवाल (तकनीकी शिक्षा मंत्री): तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल अपने विधानसभा क्षेत्र में सारंगपुर से पचोर तक बस से सफर कर पहुंचे थे। इसके दो दिन बाद वे प्रभारी जिले बड़वानी में भी कलेक्टर जयति सिंह और अधिकारियों के साथ बस से बैठक में शामिल होने पहुंचे।

डॉ. मोहन यादव (मुख्यमंत्री): सीएम ने खुद अपने काफिले में एस्कॉर्ट और गाड़ियों की संख्या कम की है। पहले उनके काफिले में 13 वाहन चलते थे, जबकि अब सिर्फ 6 गाड़ियां चल रही हैं। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने मेट्रो से सफर कर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।

ट्विशा शर्मा केस में सड़कों पर उतरे पूर्व सेना अधिकारी, पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

भोपाल
 राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को पूर्व सेना अधिकारी और जवान सड़क पर उतर आए। वर्दी वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में निकाली गई रैली में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

शौर्य स्मारक से शुरू हुई रैली
रैली की शुरुआत शौर्य स्मारक से की गई, जहां पूर्व सैनिकों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास, पुलिस मुख्यालय और राजभवन की ओर बढ़ गए, जहां ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई।

पुलिस जांच पर उठे सवाल
मंगलवार को ट्विशा शर्मा के पिता, परिजनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही। इसी के विरोध में पूर्व सैनिकों ने बुधवार को प्रदर्शन कर सरकार से न्याय की मांग की।

सड़ने लगा है ट्विशा का शव’, डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में भी बड़ा खुलासा
ट्विशा का शर्मा का शव 13 मई से भोपाल एम्स में पड़ा हुआ है। परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भोपाल पुलिस की ओर से ट्विशा के परिजनों को एक चिट्ठी लिखी गई है, जिसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव सड़ने लगा है। शव को ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भोपाल एम्स में नहीं है।

परिजनों को भोपाल पुलिस ने लिखी चिट्ठी
दरअसल, ट्विशा शर्मा के परिजन ससुराल के लोगों पर लगातार हत्या के आरोप लगा रहे हैं। साथ ही अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे हैं। इस बीच भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के माता-पिता को एक चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा है। उसे सड़ने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में आपसे अनुरोध किया जाता है कि कृप्या शव को लेने की व्यवस्था करें।

-80 डिग्री तापमान की है जरूरत
भोपाल पुलिस की चिट्ठी में इस बात का जिक्र है कि अभी शव को भोपाल एम्स में रखा गया है। भोपाल एम्स की मोर्चरी में -4 डिग्री सेल्सियस तापमान है। शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है। यह सुविधा भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं है।

पुलिस के अनुसार ट्विशा शर्मा का पहला पोस्टमार्टम 13 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में पुलिस ने कहा है कि हमें दोबारा पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं है।

पिता कर रहे हैं दूसरी जगह पर पोस्टमार्टम की मांग
वहीं, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्विशा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शांति और गरिमा के साथ किया जा सकेगा।

ये उठ रहे हैं सवाल

    पोस्टमार्टम के दौरान भोपाल पुलिस के चूक भी हुई है
    पीएम के दौरान पुलिस ने वो बेल्ट डॉक्टरों के सामने नहीं पेशी की, जिससे ट्विशा ने खुदकुशी की
    मेडिकल टीम महिला की गर्दन पर मिले लिगेचर निशानों की जांच साइंटीफिक तरीके से नहीं कर पाई
    ट्विशा के परिजनों का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हुई

उलझता जा रहा है मामला
इसी लापरवाही की वजह से ट्विशा शर्मा का केस उलझता जा रहा है। उसकी गर्दन पर दो सामानांतर निशान मिले हैं। इससे मामला उलझता दिख रहा है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में भी टाइम मिसमैच है। ससुराल वालों का कहना है कि उसने रात 10 बजे के बाद फांसी लगाई है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में टाइम 7 बजकर 20 मिनट दिख रही है, जिस वक्त ट्विशा छत पर जा रही थी।

साइकियाट्रिक ट्रीटमेंट पर थी ट्विशा
वहीं, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि उसका इलाज साइकियाट्रिक के पास चल रहा है। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से यह पता चला है कि ट्विशा शर्मा नींद और डिप्रेशन की दवा ले ही थी। 28 अप्रैल से 6 मई तक उसका इलाज चला है। वह एडजसमेंट डिसऑर्डर की शिकार थी। सुसाइड से पहले भी वह डॉक्टर से संपर्क की थी।

 

केशकाल घाटी फोरलेन बायपास निर्माण में लापरवाही नहीं चलेगी, निरीक्षण के बाद पीडब्ल्यूडी सचिव के सख्त निर्देश

केशकाल.

रायपुर-जगदलपुर मार्ग के बहुप्रतीक्षित केशकाल घाटी फोरलेन बायपास को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के साथ बायपास के दोनों छोरों का जायजा लिया.

निरीक्षण के दौरान शेष पेड़ों की कटाई जल्द पूरी करने के निर्देश वन विभाग को दिए गए. साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना बस्तर और छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. करीब 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास तैयार किया जा रहा है. परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुलों का निर्माण भी शामिल है.घाटी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं को कम करने में यह बायपास अहम माना जा रहा है.

सरकार ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए जल्द निर्माण पूरा करने के संकेत दिए हैं. निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर दिखाई देगी.

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