ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और पंवार

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और  पंवार

भोपाल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को आत्मसात करते हुए, बुधवार को कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे।

“सुरक्षित पर्यावरण का यही आधार-ईंधन बचत हर बार” का संदेश देते राज्यमंत्री श्री टेटवाल कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संसाधनों के संयमित उपयोग का जो आह्वान किया है, उसे आत्मसात कर हम सभी को अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए।

ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की अपील

मंत्री श्री टेटवाल और श्री मंत्री पंवार ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में एक आत्मनिर्भर, स्वच्छ एवं सशक्त भारत के निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।

 

MP में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर, 10% बढ़ेगा माल भाड़ा; दूध-खाने से LPG तक बढ़ सकती है महंगाई

भोपाल 

पांच दिन के अंदर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गईं। इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने मध्य प्रदेश में माल भाड़ा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में माल भाड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले ही दूध, खाना और LPG महंगे हो चुके हैं। अब भाड़े में बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट गड़बड़ाना तय है।

भोपाल के बड़े ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही ऑक्सीजन पर है। अब डीजल के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर यदि भोपाल से इंदौर के बीच का भाड़ा 10 हजार रुपए है तो यह बढ़कर 11 हजार रुपए हो सकता है। एमपी में 8 से 10 लाख ट्रक चलते हैं, जो ऑल इंडिया परमिट वाले होते हैं, यानी ये पूरे देश में कहीं भी माल लाने-ले जाने का काम करते हैं।

माल भाड़ा बढ़ा तो महंगा होगा सामान
ट्रक व लोडिंग वाहनों से पूरे प्रदेश में किराना, सोयाबीन, कपास, गेहूं, सीमेंट, चूना पत्थर, दवाएं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर पैनल, खाद आदि की सप्लाई की जाती है। माल भाड़ा बढ़ने से इन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि भाड़ा बढ़ने का असर आखिरकार जनता पर ही होगा।

खाना महंगा, होटल और रेस्टॉरेंट में 10 से 15% तक बढ़ोतरी
भोपाल होटल एवं रेस्टॉरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली बताते हैं कि होटल इंडस्ट्री पहले ही LPG संकट से जूझ रही है। 2 महीने के अंदर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। अब यह करीब 3 हजार रुपए में मिल रहा है।

LPG संकट के बाद भोपाल में भोजन 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। दूध के रेट 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं। इस वजह से पनीर और दही भी महंगे हो गए, जिसका असर सीधे खाने के मेन्यू पर पड़ा है।

किचन से जुड़ा सामान महंगा हो चुका
किराना कारोबारी विवेक साहू कहते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद बाजार में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ी हैं। इससे जनता के बजट पर असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ता है तो तय है कि कीमतें और भी बढ़ जाएंगी।

टैक्सी संगठन की बैठक अगले सप्ताह
ऑल इंडिया टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन ने बताया कि संगठन और टैक्सी चालकों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। अगले एक सप्ताह में बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें 10 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक के बाद ही तय होगा कि किराया कितना बढ़ाया जाए।

पंपों की स्टॉक लीमिट तय
पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो जाएगी। बता दें ​कि बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है। तेल कंपनियां ऐसी कैपिंग से इनकार किया है। एचपीसीएल के सीजीएम अश्विन के सिन्हा व इंडियन ऑयल के सीजीएम नवनीत मेहता ने ने कहा कि ऐसी कोई कैपिंग नहीं की है।

सुबह उठते ही मिला नौकरी जाने का मेल, Meta ने 8000 कर्मचारियों की छंटनी से मचाई हलचल

 नई दिल्ली

मेटा ने बड़े स्तर पर छंटनी की शुरुआत कर दी है, जिसके लिए कंपनी ने 20 मई की सुबह 4 बजे कई लोगों को ईमेल नौकरी से निकालने का ईमेल किया. इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स मिली है. पुरानी रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा चुका था कि 20 मई को कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी करेगी। 

मेटा अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स में से 10 परसेंट यानी करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ते दिखाएगी. कंपनी ने इसकी शुरुआत सिंगापुर बेस्ड टीम के साथ की है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि सिंगापुर के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे लोगों को ईमेल आया है। 

मार्क जकरबर्ग का प्लान आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) में बड़ी इनवेस्टमेंट का है और इस साल भी वह अरबों डॉलर्स की रकम इनवेस्ट करने जा रहे हैं. मेटा ने बताया है कि दुनियाभर में उसके करीब 78 हजार कर्मचारी हैं। 

7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है
मेटा के चीफ पीपुल ऑफिसर जेनेला गाले ने एक इनहाउस मेमो में कहा है कि 8 हजार नौकरी खत्म करने के अलावा कंपनी करीब 7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है. कंपनी का फोकस अब छोटी टीम्स तैयार करना है। 

छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या 16,000 तक पहुंच सकती है
इन प्रस्तावित छंटनियों से अकेले शुरुआती चरण में ही मेटा के वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग 10 प्रतिशत कमचारियों के प्रभावित होने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने छंटनी की पूरी सीमा की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 2026 में बाद में और भी नौकरियां कम होने की संभावना है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 16,000 तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के अधिकारी अभी भी कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी और AI में हुई प्रोग्रेस के आधार पर छंटनी से जुड़ी जानकारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

हालांकि, ये छंटनी अचानक नहीं की जा रही है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पिछले एक साल में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में लीडर बनना चाहती है, जेनरेटिव टूल्स से लेकर उस इंफ्रास्ट्रक्चर तक, जो बड़े पैमाने पर मशीन लर्निंग सिस्टम को चलाता है। इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, मेटा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा खर्च की योजना बना रही है, जिसका अनुमान इस साल के लिए लगभग $135 बिलियन है; इसमें से ज्यादातर हिस्सा AI से जुड़े निवेशों, जैसे डेटा सेंटर, चिप और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, के लिए रखा गया है।

मेटा ने महामारी के दौर में 21,000 लोगों को निकाला था
अगर Meta छंटनी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो यह पिछले कुछ सालों में कंपनी में हुई नौकरियों की कटौती की एक और कड़ी होगी। यह मेटा में 2022 और 2023 में हुई छंटनी के पिछले दौर जैसा ही है, जब कंपनी ने धीमी ग्रोथ और महामारी के दौर में हुए जरूरत से ज्यादा विस्तार के नतीजों के चलते लगभग 21,000 नौकरियां खत्म कर दी थीं। उस दौर को, जिसे जकरबर्ग नें year of efficiency नाम दिया था, ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने, मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने के लिए किए गए ठोस प्रयासों के लिए जाना जाता है।

हालांकि, अब होने वाली छंटनी एक ज्यादा सुगठित संगठन बनाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि कंपनी अधिकारी मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और AI-बेस्ड प्रोसेस पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। अंदरूनी तौर पर, मेटा ने अपनी AI प्राथमिकताओं के हिसाब से टीमों को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। इंजीनियरों को ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए फिर से नियुक्त किया गया है जो कोड लिखने और मुश्किल कामों को संभालने में सक्षम ऑटोनॉमस सिस्टम बनाने पर केंद्रित हैं, जबकि AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स को तेजी से बाजार में लाने के लिए नई यूनिट्स बनाई गई हैं।

2026 में बड़े पैमाने पर छंटनी, अब तक 73,000 की नौकरी गई
इस बदलाव में Meta अकेली नहीं है। इन बदलावों का असर पूरी टेक इंडस्ट्री में महसूस किया जा रहा है, जहां बड़ी कंपनियां एक तरफ नौकरियों में कटौती कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ AI में अपना निवेश बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Amazon ने हाल के महीनों में कथित तौर पर लगभग 30,000 कॉर्पोरेट पदों को खत्म कर दिया है, जो उसके व्हाइट-कॉलर वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। इसी तरह, फिनटेक कंपनी Block ने भी अपने वर्कफोर्स में काफी कटौती की है।

Layoffs.fyi के आंकड़ों से इस बदलाव के पैमाने का पता चलता है। इस प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस साल अब तक दुनिया भर की 95 कंपनियों में 73,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है।

मेटा ने बीते महीने कर दिया था कंफर्म
छंटनी की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद बीते महीने ही मेटा ने कंफर्म कर दिया था कि वह करीब 8 हजार लोगों की छंटनी करने जा रहे हैं. इसके बाद कर्मचारियों को मनोबल गिर गया। 
मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने AI को कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता पर ला दिया है. दरअसल, Meta, Google और OpenAI जैसी कंपनियों की बराबरी करने के लिए AI लेवल पर नए इनोवेशन करना जरूरी है. मेटा बीते महीने ही कह चुका है कि वह इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच AI पर इनवेस्टमेंट का प्लान बना रहे हैं। 

दूसरी कंपनियां भी छंटनी की तैयारी में
बीते सप्ताह Cisco ने पिछले हफ्ते 4 हजार लोगों को बाहर निकालने की जानकारी दी थी. वहीं माइक्रोसॉफ्ट, ऐमेजॉन और अन्य कंपनियां भी हाल ही में छंटनी की जानकारी दे चुकी हैं। 

‘देश की प्रतिष्ठा सबसे ऊपर’, PM मोदी की आलोचना पर शरद पवार की दो टूक नसीहत

 मुंबई

NCP (SP) चीफ शरद पवार अक्सर सियासी मतभेद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने कहा है कि जब वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा की बात आती है तो इस पर राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए. राष्ट्रीय सम्मान सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है। 

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं. राजनीतिक मुद्दों पर हमारी उनसे अलग राय हो सकती है. हालांकि जब देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को विदेश में कम करने या उससे समझौता करने की बात आती है तो इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्र के गौरव और सम्मान के मामले में कोई सियासी मतभेद या विवाद नहीं होना चाहिए। 

एनसीपी चीफ ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. शाम मुंबई में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए. साथ ही देश की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए। 

इंदिरा गांधी-नरसिम्हा राव का जिक्र
पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन जैसे नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा। 

पवार ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं. जब राष्ट्र के सम्मान की बात हो, तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए. कुछ लोग आज अलग-अलग पार्टियों में हो सकते हैं, लेकिन आप सभी आम लोगों के बीच जुड़े हुए हैं और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है। 

शुरुआती सियासी सफर को किया याद
अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद करते हुए पवार ने कहा कि 1958 में जब उनकी उम्र 18 वर्ष थी, वह बारामती से पुणे आए थे. उस समय उनके गृह नगर में कोई कॉलेज नहीं था. वह युवा आंदोलन से जुड़े. चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के प्रमुख बने. बाद में महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का नेतृत्व किया, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर काम किया। 

शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन सोवियत संघ की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया. पूर्व पीएम इंद्रकुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके सम्मान का अपमान वह कभी स्वीकार नहीं करेंगी। 

उन्होंने पूर्व सहयोगियों से अपील करते हुए कहा, यदि राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो आप सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ भाग लेना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। 

शहर को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने पर जोर, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने गिनाए विकास कार्य

शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने लगातार किए जा रहे कार्य : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

वित्त मंत्री ने रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास

सामुदायिक भवन, बाल उद्यान और नाली निर्माण से बढ़ेंगी नागरिक सुविधाएं

अधोसंरचना विकास, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर

रायपुर
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नगर पालिक निगम रायगढ़ क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि रायगढ़ शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास में अधोसंरचना विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सुविधाओं और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण

वित्त मंत्री चौधरी ने नगर निगम के वार्ड क्रमांक 28 में विधायक निधि से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन सामाजिक गतिविधियों, बैठकों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे भवन समाज के लोगों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराते हैं और सामाजिक समन्वय को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साहू समाज के छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

श्रीराम कॉलोनी में बाल उद्यान का जीर्णोद्धार

वार्ड क्रमांक 21, श्रीराम कॉलोनी में अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से लगभग 46 लाख रुपये की लागत से बाल उद्यान जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत लैंडस्केपिंग, पौधरोपण, मुख्य द्वार, बाउंड्रीवाल, विद्युतीकरण, बच्चों के खेल उपकरण, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस उद्यान के विकसित होने से बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा तथा शहर के हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी।

नाली निर्माण से सुदृढ़ होगी जल निकासी व्यवस्था

रायगढ़ स्टेडियम के पीछे से श्रीराम कॉलोनी मोड़ तक लगभग 37.88 लाख रुपये की लागत से 580 मीटर लंबी नाली निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इस निर्माण से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के दौरान होने वाली समस्याओं में कमी आएगी।

चौधरी ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

रायगढ़ में तेजी से आगे बढ़ रहे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, पुल, केलो नदी तट विकास, तालाब सौंदर्यीकरण, उद्यान निर्माण और ऑक्सीजन जोन जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। इतवारी बाजार क्षेत्र को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिलेगा।

उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन नालंदा परिसर युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आधुनिक अध्ययन केंद्र बनेगा, जहां पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

बिजली बिल समाधान एवं सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में राहत मिल रही है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की।

उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी की जानकारी भी दी और नागरिकों से योजना से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

‘ट्विशा को धीरे-धीरे तोड़ा गया’, बहन के दावे के बाद भोपाल पुलिस पर उठे बड़े सवाल

भोपाल 

भोपाल में अपनी ससुराल में मृत पाई गई ट्विशा की बहन ने कहा है कि वह सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसे साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया गया है। उसको सबसे डिसकनेक्ट किया गया। उसे मनोवैज्ञानिक रूप से इतना तोड़ा कि उसे सबसे अलग कर दिया।

हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती
एक टीवी चैनल से बातचीत में ट्विशा की फुफेरी बहन नैना ने बताया कि वे दोनों अलग-अलग शहर में रहती हैं। हमलोग बचपन से दोस्त हैं। शादी के बाद हम बात नहीं कर पाते थे। उसका पति क्रिमिनल लॉयर है। इसकी पढ़ाई में साइको एनालिसिस होता है। इसने और इसकी मां ने मेरी बहन को पहले साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया और उसके बाद इसकी हत्या की है। यह प्री-मेडिकेटेड मर्डर है। यह एक दिन में किया गया काम नहीं है। हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसका कनेक्शन सिर्फ मां से था। इसकी लास्ट में जो मां से बात हुई है, उसमें लगा है कि कोई एकदम से रूम में आया है। इसके बाद कॉल कट गया और इसके बाद सब कुछ हुआ। इसकी सीडीआर निकलवानी चाहिए।

भोपाल पुलिस कमिश्नर ने माना, ट्विशा मामले में हुई पुलिस से चूक

ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि जिस बेल्ट से ट्विशा शर्मा ने कथित तौर पर फांसी लगाई थी, उसे समय पर पोस्टमार्टम टेबल तक नहीं पहुंचाया गया. अब भोपाल पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने इस लापरवाही को स्वीकार किया है। 

‘पुलिस से हुई है चूक’
‘जिस बेल्‍ट से ट्विशा शर्मा ने फांसी लगाई, वो उस दिन भोपाल एम्स नहीं पहुंचा…’ इस सवाल पर पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने  कहा, ‘हम इसे अपनी टीम की लापरवाही मानते हैं. हालांकि इससे जांच पर कई असर नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि बेल्ट को एफएसएल टीम द्वारा जब्त कर ली गई थी, लेकिन इसे लापरवाही भी कह सकते हैं कि पोस्टमार्टम से पहले उसे अस्पताल नहीं भेजा गया. हालांकि बाद में इसे भोपाल एम्स भेजा गया और इसकी रिपोर्ट भी आ गई है। 

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इस बेल्ट को बाद में अस्पताल भेजकर रिपोर्ट ले ली गई है, इसलिए मुख्य जांच पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस चूक की अलग से जांच की जाएगी। 

‘गिरिबाला सिंह ने इसे दावे को पुलिस कमिश्नर ने किया खारिज’
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अब तक मिले सबूतों से साफ होता है कि यह हत्या नहीं बल्कि खुदकुशी का मामला है. उनका कहना है कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने के कारण हुई है। 

ट्विशा की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि ट्विशा को गांजे की लत थी और ग्लैमर इंडस्ट्री में जाने के बाद उसके परिवार ने उसे छोड़ दिया था. हालांकि पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह के नशीले पदार्थ या ड्रग्स के सेवन की बात सामने नहीं आई है और न ही पुलिस जांच में ऐसा कोई सबूत मिला है। 

भोपाल पुलिस कमिश्‍नर ने बताया, ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन का कोई जिक्र नहीं है. ट्विशा कोई ड्रग्‍स नहीं ले रही थी… हमारी जांच में भी ट्विशा द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन के दावों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है। 

नहीं पता था कि बुरी तरह फंस चुकी है
ट्विशा की बहन नैना ने बताया कि मैंने उसकी सारी दोस्तों से बात की, वह किसी के कनेक्शन में नहीं थी। उसने अपनी मां से कहा था कि 15 को नोएडा लौटने के बाद वह मुझसे बात करेगी। हमें बताया जा रहा था कि सब कुछ नॉर्मल है। लेकिन, हमें नहीं पता था कि वह इतनी बुरी तरह फंस चुकी है। वह इतनी बोल्ड थी कि मुझे एनर्जी देती थी। वो हमारे घर की सबसे सुंदर, बोल्ड और बिंदास लड़की थी। इस इंसान ने हमलोगों से क्या छीना है, उसे नहीं पता।

हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था
इस बीच ट्विशा के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के साथ कई तरह का दुर्व्यवहार किया जा रहा था। ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। दहेज के लिए उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था। पिता ने इसके लिए सामाजिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। पिता ने कहा कि हमारी परंपरा की सबसे बड़ी बदकिस्मती यह है कि हर मध्यम-वर्गीय परिवार चाहता है कि शादी सफल हो। सामाजिक दबाव इतना ज्यादा होता है कि कोई भी कभी यह सोचता ही नहीं कि शादी को टूट जाने देना चाहिए।

तलाक के बारे में बात कर रही थी
पिता ने कहा कि वह तलाक के बारे में बात कर रही थी। कह रही थी कि पापा, अगर बात नहीं बनी तो मैं उसे छोड़ दूंगी। मैं पीछे नहीं हटूंगी। ट्विशा ने अपनी मां से एक बातचीत के दौरान कहा था कि मैं इस तरह नहीं जीना चाहती। वहीं, ट्विशा के भाई हर्षित ने कहा कि परिवार इंसाफ के लिए लड़ेगा।

ट्विशा की चचेरी बहन मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि उत्पीड़न तब अपने चरम पर पहुंच गया जब ट्विशा की ‘वर्क-फ़्रॉम-होम’ वाली नौकरी चली गई और वह गर्भवती हो गई। उसके पति ने उस बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। बता दें कि 2024 में एक डेटिंग ऐप पर ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से हुई थी। एक साल बाद दिसंबर 2025 में दोनों ने शादी कर ली थी।

‘जय श्रीराम बोलो और पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा’, संजय राउत का BJP पर तीखा तंज

मुंबई 

 देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके समर्थकों पर बेहद तीखा तंज कसा है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने ईंधन की कीमतों में इजाफे को प्रत्याशित बताया और तंज कसते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह तो होना ही था।

संजय राउत ने पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इसमें नया क्या है? यह तो होना ही था। अगर आप बीजेपी के समर्थक हैं तो बस ‘जय श्री राम’ का नारा लगाइए और कीमतें 10 रुपये कम हो जाएंगी। बीजेपी का यही तो असली मंत्र है। ‘जय श्री राम’ बोलिए और आपको वह सब कुछ मिल जाएगा जो आप चाहते हैं।”

उन्होंने बीजेपी को वोट देने वाले आम वोटरों पर भी निशाना साधते हुए आगे कहा, “जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया है, उन्हें अब आराम से बैठना चाहिए और इस स्थिति का सामना करना चाहिए।”

संजय राउत का यह बयान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आए नए उछाल के बाद आया है, जिसने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपये और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इससे ठीक चार दिन पहले भी केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में देश भर में 3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया था।

ईंधन की कीमतों में यह तेजी मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त तेल और ऊर्जा भंडार है, लेकिन घरेलू बाजार में लगातार बढ़ रही कीमतों ने विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है। संजय राउत के अलावा कांग्रेस नेताओं ने भी इस बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

जनगणना में गलत जानकारी देना पड़ेगा भारी, मकान नंबर मिटाने पर भी लगेगा जुर्माना

दुर्ग.

आगामी जनगणना के सुचारू संचालन के लिए प्रगणकों और नागरिकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस जारी की हैं। जिसके अनुसार सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति मकान पर लिखे नंबर को मिटाया या नुकसान पहुंचाता है तो उस पर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की अधिसूचना के परिपालन में जिला प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी की गई है. इसमें बड़ी बात यह है कि सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, स्थानीय सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए किसी भी महिला को उसके पति/ मृत पति का नाम या किसी भी नागरिक को अपने परिवार के सदस्यों का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। नागरिकों को अपने घरों में प्रगणकों को युक्तियुक्त प्रवेश देने और मकानों पर जनगणना के लिए आवश्यक नंबर या चिन्ह लगाने की अनुमति देनी होगी। प्रगणकों को भी नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और घरेलू रूढ़ियों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए है।

प्रगणकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे वैधानिक सीमा में रहकर केवल केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में निर्दिष्ट और निर्धारित प्रश्नों को ही पूछें तथा नागरिकों से अनावश्यक या अतिरिक्त पूछताछ न करें। साथ ही, अपने कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या इंकार करने पर प्रगणकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है, उत्तर देने से इनकार करता है, या मकानों पर लिखे गए नंबरों को मिटाता / नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर 1,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

जनगणना कार्य में बाधा डालने या कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश करने पर 1,000 रु. जुर्माने के साथ अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल का भी प्रावधान है। जनता के भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में प्राप्त किये गए आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
ज्ञात हो कि जनगणना के आंकड़ों का प्राथमिक उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सटीक नीति निर्धारण, लोक प्रशासन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन व आरक्षण के लिए किया जाता है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में सही जानकारी देकर सहयोग करने की अपील की है।

आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह

विशेष लेख

आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह

रायपुर
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है।
राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं।

प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है।

छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं।

• डॉ. दानेश्वरी संभाकर
• उप संचालक (जनसंपर्क)

‘पार्टनर बनो या 1 करोड़ दो’, बिल्डर को धमकाने वाली हनी गर्ल श्वेता भोपाल से गिरफ्तार

 भोपाल

रात करीब सवा ग्यारह बजे का वक्त. इंदौर का सुपर कॉरिडोर, जहां आमतौर पर देर रात गाड़ियों की रफ्तार और सुनसान सड़कें ही दिखाई देती हैं. एक कारोबारी अपनी कार रोककर फोन पर बात कर रहा था. तभी पीछे से एक दूसरी कार आकर रुकती है. कुछ लोग उतरते हैं. पहले बात होती है, फिर आवाज ऊंची होती है, और अगले ही पल कथित तौर पर मारपीट शुरू हो जाती है. इसके बाद जो कहा गया, वही इस पूरी कहानी का सबसे सनसनीखेज हिस्सा बन गया- ‘हमारे साथ पार्टनर बनो… नहीं तो एक करोड़ रुपये दो। 

इस कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब पुलिस ने जांच करते-करते भोपाल से एक महिला को हिरासत में लिया, जिसका नाम है श्वेता जैन… वही श्वेता, जिसका नाम मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप केस में पहले भी सामने आ चुका है. पूरा मामला हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत से शुरू हुआ. हितेंद्र इंदौर में प्रॉपर्टी डीलिंग और शराब कारोबार से जुड़े हैं। 

पीड़ित हितेंद्र ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उनकी मुलाकात अलका दीक्षित नाम की महिला से हुई थी. इसी पहचान के जरिए उनकी मुलाकात लाखन चौधरी नाम के व्यक्ति से कराई गई. लाखन ने खुद को इंदौर, देवास, धार और आसपास के इलाकों में प्रभावशाली बताते हुए रियल एस्टेट कारोबार में पार्टनर बनने का प्रपोजल दिया। 

शुरुआत में यह सामान्य बिजनेस ऑफर लगा. कहा गया कि साथ मिलकर काम करेंगे तो बड़ा फायदा होगा. लेकिन शिकायत के मुताबिक, जब हितेंद्र ने इसमें रुचि नहीं दिखाई, तो कथित तौर पर दबाव बढ़ने लगा. उनसे कहा गया कि उन्हें अलका दीक्षित के साथ 50 फीसदी हिस्सेदारी का एग्रीमेंट करना होगा. हितेंद्र ने इनकार कर दिया. यहीं से कहानी का टोन बदल गया। 

28 अप्रैल की रात, इंदौर में हितेंद्र अपनी कार से सुपर कॉरिडोर से लवकुश चौराहे की तरफ जा रहे थे. फोन पर बात करने के लिए उन्होंने कार सर्विस रोड पर रोक दी. तभी पीछे से एक दूसरी कार आकर रुकी. शिकायत में कहा गया कि उस कार से अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और कुछ अन्य लोग उतरे. आते ही धक्का-मुक्की शुरू हुई. फिर कथित तौर पर धमकी दी गई- या तो साझेदारी करो, या एक करोड़ रुपये दो। 

पीड़ित का आरोप है कि बात सिर्फ पैसों की मांग तक नहीं रुकी. आरोपियों ने कहा कि उनके परिवार की पूरी जानकारी उनके पास है. अगर पैसे नहीं दिए, तो परिवार को खत्म कर दिया जाएगा. फोटो और वीडियो वायरल कर बदनाम करने की भी धमकी दी गई। 

यहीं से पुलिस की एंट्री होती है. शिकायत के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया. कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ. फिर जांच का दायरा बढ़ा. कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, आर्थिक लेनदेन और सोशल मीडिया कनेक्शन खंगाले जाने लगे. इसी दौरान एक नाम सामने आया- श्वेता जैन। 

श्वेता स्वप्निल जैन मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल रही है. वर्ष 2019 में सामने आए इस हाई-प्रोफाइल मामले में नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को कथित रूप से वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोप लगे थे. श्वेता का नाम उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आया था. पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था और लंबे समय तक मामला सुर्खियों में रहा था. बाद में मानव तस्करी जैसे कुछ मामलों में कोर्ट से राहत भी मिली थी. श्वेता मूल रूप से मध्य प्रदेश से जुड़ी है। 

अब कई साल बाद वही नाम फिर सामने आया है. इस बार आरोप सीधे तौर पर एक कारोबारी से रंगदारी और कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़े हैं. इंदौर पुलिस की टीम ने भोपाल के मिनाल इलाके में दबिश देकर श्वेता को हिरासत में लिया. फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है. पुलिस को शक है कि यह मामला सिर्फ कुछ लोगों की रंगदारी तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। 

इस केस में एक दिलचस्प पैटर्न भी सामने आता है. शुरुआत एक जान-पहचान से होती है. फिर बिजनेस पार्टनरशिप का ऑफर. उसके बाद दबाव. फिर धमकी. और आखिर में कथित तौर पर फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल का डर. पुलिस इसे सामान्य मारपीट या वसूली का मामला नहीं मान रही। 

थाना अयोध्या नगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे का कहना है कि इंदौर पुलिस की टीम ने भोपाल पहुंचकर मिनाल इलाके से श्वेता जैन को हिरासत में लिया. पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका रही. क्राइम ब्रांच का मानना है कि मामले में कई और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है. पुलिस मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया कनेक्शन और आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है। 

 

पढ़ें देखें प्रोफाइल