ब्रिक्स राष्ट्र नवाचार, उद्यमिता और वैश्विक सहयोग के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं : मंत्री सारंग

भोपाल 

मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने इंदौर में आयोजित ब्रिक्स यूथ इन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि आज ब्रिक्स राष्ट्र विकासशील देशों की आकांक्षाओं, ऊर्जा, नवाचार क्षमता एवं आर्थिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत सरकार की युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री मती रक्षा खडसे, युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव मती पल्लवी जैन गोविल, अतिरिक्त सचिव  नितेश कुमार मिश्रा, ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप लीडर्स, नीति निर्माता, शिक्षाविद् एवं युवा उद्यमी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत सदैव शांति, साझेदारी, मानवीय मूल्यों एवं वैश्विक सहयोग में विश्वास रखने वाला देश रहा है। उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम् – विश्व एक परिवार है” की भारतीय अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत विश्व को सद्भाव, समावेशी विकास एवं सामूहिक कल्याण की दिशा प्रदान करती रही है।

मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत नवाचार, उद्यमिता, युवा सशक्तिकरण, जलवायु उत्तरदायित्व एवं ग्लोबल साऊथ के विकास के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में भारत सहित चार देशों से प्रारंभ हुआ ब्रिक्स समूह आज 11 सदस्य देशों तक विस्तारित हो चुका है, जो विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है तथा वैश्विक जीडीपी में लगभग 35–40 प्रतिशत योगदान देता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि ब्रिक्स केवल एक आर्थिक गठबंधन नहीं, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सतत विकास के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी वैश्विक मंच है।

मंत्री  सारंग ने कहा कि विश्व अब “सूचना युग” में प्रवेश कर चुका है, जहाँ डेटा, तकनीक एवं ज्ञान नवाचार और उद्यमिता की सबसे बड़ी शक्ति बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब मानव मस्तिष्क को जानकारी, तकनीक एवं ज्ञान से सशक्त किया जाता है, तब वही विचार स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की शक्ति बनते हैं।

मंत्री  सारंग ने 20 मई के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी दिन वर्ष 1498 में पुर्तगाली खोजकर्ता वास्को-डी-गामा समुद्री मार्ग से भारत पहुँचे थे, जिसने वैश्विक व्यापार एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क का नया अध्याय प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि सदियों बाद आज विश्व पुनः भारत में एकत्रित हुआ है, लेकिन इस बार उद्देश्य व्यापार मार्गों की खोज नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता, तकनीक एवं वैश्विक सहयोग के नए मार्ग निर्मित करना है।

मंत्री  सारंग ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय मानव संसाधन दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार मधुमक्खियाँ टीमवर्क, समन्वय एवं सतत पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक हैं, उसी प्रकार मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी एवं कुशल मानव संसाधन क्षमता है, जो नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है।

मध्यप्रदेश के विषय में बोलते हुए  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश नवाचार, निवेश, औद्योगिक विकास एवं स्टार्टअप ग्रोथ का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, औद्योगिक कॉरिडोर, निवेश-अनुकूल वातावरण एवं आईटी, एग्रीटेक, रिन्यूएबल एनर्जी तथा इनोवेशन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंदौर, जो भारत का सबसे स्वच्छ शहर एवं मध्य भारत का इनोवेशन हब है, आधुनिक भारत की स्वच्छता, उद्यमिता, संस्कृति एवं आतिथ्य भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री  सारंग ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं प्रसिद्ध व्यंजनों, विशेष रूप से इंदौरी पोहा एवं जलेबी का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।

पवित्र धार्मिक ग्रंथ मद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत की 18वीं ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता का विशेष सांकेतिक महत्व है, क्योंकि मद्भगवद्गीता के भी 18 अध्याय हैं, जो मानवता को कर्तव्य, निष्काम कर्म एवं विश्व कल्याण का संदेश देते हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास सदैव मानव-केंद्रित, समावेशी एवं समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति समर्पित होना चाहिए।

मंत्री  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि ब्रिक्स यूथ एन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 ब्रिक्स देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को सुदृढ़ करेगी तथा भारत एवं मध्यप्रदेश को नवाचार, निवेश, उद्यमिता एवं युवा-नेतृत्व वाले विकास के महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्रों के रूप में स्थापित करेगी।

अंत में उन्होंने सभी प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए आशा व्यक्त की कि भारत एवं मध्यप्रदेश की उनकी यात्रा नवाचार, संस्कृति, सहयोग एवं मित्रता का अविस्मरणीय अनुभव बनेगी।

 

PM मोदी और अमित शाह पर राहुल गांधी के बयान से मचा सियासी तूफान, BJP ने किया जोरदार पलटवार

 नई दिल्ली

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया। 

राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंभी अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहिएगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है. आपका गृह मंत्री गद्दार है, आपका संगठन गद्दार है, आपने हिंदुस्तान को बेचने को काम किया.  आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया। 

पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल का हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. इस तीखी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया। 

राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तब आपको उनके मुंह पर कहना होगा कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन (भाजपा) गद्दार हैं, आपने हमारे देश को बेचने का काम किया है. आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया. आपने गांधी जी पर आक्रमण किया है, ये बातें आप उनसे खुलकर कह दीजिए। 

राहुल गांधी के बयान पर नितिन नवीन का पलटवार
राहुल के इस बयान पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भारतीय राजनीति की शुचिता और आपसी सम्मान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही हार की निराशा अब राहुल के स्वभाव और चरित्र में साफ दिखने लगी है। 

नितिन नवीन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के ‘राहू’  हैं जो देश के माहौल को गंदा कर रहे हैं.  उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने हमेशा देश की जमीन को गिरवी रखने का काम किया और कभी सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रहती थी, जबकि मोदी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद पर पूर्ण लगाम लगी है और सेना स्वाभिमान से काम कर रही है। 

राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन
बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि  क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई। 

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे हैं. भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में फीस बढ़ी, अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

रायपुर 
 छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में विभिन्न मदों में ली जाने वाली फीस में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। बढ़ी हुई फीस आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। यह जानकारी विभाग ने आज पत्रकारों को दी गई। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा फीस संशोधन का प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे शासन ने स्वीकृति प्रदान करते हुए आदेश जारी कर दिया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि परीक्षा सामग्री, खेल सामग्री और विज्ञान प्रयोगशाला से जुड़ी सामग्रियों की लागत में वृद्धि को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत एक्टिविटी फीस 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए कर दी गई है। गरीब छात्र सहायता कोष 10 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए किया गया है। साइंस क्लब फीस 20 रुपए से बढ़कर 25 रुपए होगी, जबकि स्काउट गाइड फंड 50 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए कर दिया गया है। इसी प्रकार खेलकूद फीस 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए तथा साइंस प्रैक्टिकल फीस भी 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए कर दी गई है।

हायर सेकंडरी एक्टिविटी फीस में भी वृद्धि करते हुए इसे 50 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए किया गया है। हालांकि रेडक्रॉस फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पूर्ववत 30 रुपए ही रहेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्कूलों में आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों और गतिविधियों के संचालन में बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए फीस संशोधन का निर्णय लिया गया है। वहीं फीस वृद्धि के बाद अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।   

प्रदेश में करीब 56 हजार स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 56 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से 44 लाख से अधिक छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में संशोधित शुल्क व्यवस्था से सरकारी स्कूलों के पास बड़ी राशि उपलब्ध होगी। 

छत्तीसगढ़ बना कृषि सुधारों का राष्ट्रीय मॉडल: मंत्री नेताम

रायपुर

 कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 19 मई को आयोजित राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ को कृषि नवाचार, किसान कल्याण और टिकाऊ खेती के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण समृद्धि को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने तिलहन मिशन के तहत पूर्वोत्तर पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ द्वारा लक्ष्य पूरा करने में पहले स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी।   

 मंत्री  नेताम ने बताया कि राज्य में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो देश में धान के लिए सबसे पारदर्शी और ऐतिहासिक समर्थन व्यवस्था मानी जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने 437 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी कर किसानों के खातों में लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का सीधा भुगतान किया है।

भूमिहीन मजदूरों से लेकर डिजिटल खेती तक, छत्तीसगढ़ का व्यापक कृषि विजन

सम्मेलन में मंत्री  नेताम ने कहा कि राज्य सरकार केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत 5 लाख से अधिक परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ तेजी से बागवानी और वैकल्पिक खेती के केंद्र के रूप में उभर रहा है। बस्तर में कॉफी, अनासपाती और जशपुर में चाय की खेती आदिवासी क्षेत्रों में नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही हैं।

कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने जोनल कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में 128 हाईटेक नर्सरी, 71 कोल्ड स्टोरेज, 63 पैकहाउस और 428 सोलर ड्रायर विकसित किए गए हैं। ऑयल पाम, बांस मिशन, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन विस्तार तथा कृषि वानिकी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 4.89 लाख किसानों को 854 करोड़ रुपये से अधिक की दावा राशि वितरित की गई है।  परदेशी ने कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में एआई, ड्रोन तकनीक और एकीकृत किसान पोर्टलों के माध्यम से कृषि व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने की छत्तीसगढ़ की सराहना

राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीस्टेक पोर्टल, दलहन-तिलहन विस्तार, पीएम आशा योजना, प्राकृतिक खेती और तिलहन मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना की। उन्होंने पूर्वाेत्तर एवं पूर्वी भारत के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बीच तिलहन मिशन में लक्ष्य प्राप्ति पर छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान हासिल करने के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर 5 राज्यों के कृषि मंत्री सहित छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं विभागीय सचिव  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि  राहुल देव, संचालक उद्यानिकी  लोकेश चन्द्राकर और संयुक्त संचालक कृषि  गयाराम उपस्थित थे।

प्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए 30,055 करोड़ रूपये की कैबिनेट स्वीकृति

प्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए 30,055 करोड़ रूपये की कैबिनेट स्वीकृति

स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले
किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति
वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति
सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति
श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1779.07 करोड़ रूपये की स्वीकृति
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 373 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय

भोपाल 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए कुल 30,055 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई। मंत्रि-परिषद ने राज्य के कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति -2026 को भी मंजूरी दी है। राज्य के विभिन्न वर्गों के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रुपये के साथ ही विभिन्न आपदाओं में किसानों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11,608.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए 1,779.07 करोड़ रुपये, सिवनी और देवास की समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 593 करोड़ 24 लाख रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संचालन के लिए 373 करोड़ 38 लाख रुपये, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रुपये तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित शौर्य दल और चाइल्ड हेल्पलाइन योजनाओं के लिए 156 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026 का अनुमोदन

मंत्रि-परिषद ने “राज्य एवं जिला स्तर पर अधिकारियों/कर्मचारियों की स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026” का अनुमोदन किया है। स्वीकृति अनुसार इस वर्ष 01 जून 2026 से 15 जून 2026 तक की अवधि के लिये स्थानांतरण से प्रतिबंध शिथिल किया जायेगा। नीति में लिपिकीय त्रुटि सुधार, स्पष्टीकरण अथवा अन्य संशोधन करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को अधिकृत किया गया है।

पद एवं संवर्ग संख्या के आधार पर अधिकतम स्थानांतरण की संख्या का निर्धारण स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ किये जाने तथा स्वयं की गंभीर बीमारियों के प्रकरण में स्थानांतरण को विभागों के निर्धारित प्रतिशत या संख्या के अतिरिक्त रखा गया है।

जिला एवं राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर स्थानांतरण प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से किया जायेगा। सभी विभागों के विभागाध्यक्ष तथा शासकीय उपक्रमों एवं संस्थाओं में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का स्थानांतरण समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद किया जायेगा।

किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने किसानों को फसल हानि या क्षति होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आगामी 05 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11 हजार 608.47 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार पात्र कृषकों को प्रति कृषक प्रत्येक मौसम में न्यूनतम दावा राशि 1,000 रूपये का भुगतान करने के लिए दावा राशि और राशि 1000 के अंतर की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया है।

वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15 हजार 184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.) योजना अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 2,123 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 40 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी महिलाओं को पात्रतानुसार प्रतिमाह 600 रूपये पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है।

राज्य शासन की समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना अन्तर्गत समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 13,061 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के निराश्रित वृद्ध, 18 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी (विधवा) महिलाएं एवं 06 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग जिनकी निशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है एवं 50 वर्ष या अधिक आयु की अविवाहिता को योजना के अंतर्गत पात्रतानुसार 600 रूपये प्रतिमाह पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है।

सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए कुल 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सिवनी की बंडोल समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 232 करोड़ 57 लाख रूपये के स्थान पर पुनरीक्षित योजना लागत राशि 266 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 237 करोड़ रूपये के स्थान पर 327 करोड़ 07 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

बंडोल समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 04 ग्रामों एवं 30 बसाहटों को तथा नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 21 ग्रामों और 11 छूटी हुई बसाहटों को अतिरिक्त रूप से सम्मिलित करने के साथ ही जल जीवन मिशन की गाइडलाइन अनुसार ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ने करने के लिए जल वितरण नलिकाओं, क्लीयर वॉटर राइजिंग मैन, उच्च स्तरीय टंकियों एवं नल कनेक्शन के कार्यों में बढोत्तरी होने के कारण यह पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास अंतर्गत महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए कुल 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 113 करोड़ 50 लाख रूपये, केयर एण्ड सपोर्ट टू विक्टिम अंडर पॉक्सो योजना के लिए 27 करोड़ 50 लाख रूपये और शौर्य दल योजना के लिए 15 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वीकृति अनुसार चाइल्ड हेल्पलाइन अन्तर्गत पूर्व से स्थापित 51 जिलों के साथ-साथ नवगठित 4 जिलों निवाड़ी, मैहर, पांढुर्णा एवं मऊगंज में जिला स्तरीय इकाईतथा 9 पूर्व से स्थापित हेल्प डेस्क के साथ-साथ 04 रेल्वे स्टेशन कटनी, बीना (सागर), मेघनगर (झाबुआ), सिंगरौली में रेल्वे स्टेशन हेल्प डेस्क और 08 बस स्टैंड छतरपुर, बुरहानपुर, सिवनी, ग्वालियर, झाबुआ, नीमच, सतना एवं बालाघाट में हेल्प डेस्क की स्थापना की जाएगी।

प्रदेश के 51 जिलों में मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 योजना को 100 प्रतिशत केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत् संकटग्रस्त बच्चों को एकल खिड़की के रूप में तत्काल आपातकालीन तथा दीर्घकालिक सेवाएँ जैसे मेडिकल, आश्रय, विधिक, भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

“केयर एण्ड सपोर्ट टू विक्टिम अंडर पॉक्सो” प्रदेश के 51 जिलों में मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत केयर एण्ड सपोर्ट टू विक्टिम अंडर पॉक्सो योजना का 100 प्रतिशत केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में संचालन किया जा रहा है। योजना में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (संशोधित 2019) की धारा 4 एवं 6 के तहत 18 वर्ष तक की बालिकाओं को निर्भया फण्ड से वित्तीय सहायता प्रदाय की जाती है।

शौर्य दल योजना अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं के विकास को अवरूद्ध करने वाली कुप्रथा, कुरीति, रिवाज, नकारात्मक भेदभाव पूर्ण सोच कों परिवर्तित करने के लिए ग्राम / वार्ड स्तर पर आंगनवाड़ी क्षेत्र में महिलाओं एवं बालिकाओं को सम्मिलित कर शौर्य दल का गठन किया गया है। शौर्य दल की ये सदस्य बालिकाएं एवं महिलाएं स्वंय और अन्य महिलाओं को जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। महिला सशक्तिकरण, अपराधों की रोकथाम के लिए समुदाय की भागीदारी के रूप में शौर्यादल की अहम भूमिका है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम का क्रियान्वयन कार्यक्रम को 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत लोक सेवा केंद्रों की स्थापना एवं संचालन, सीएम हेल्प लाइन सेंटर का संचालन, सीएम डैशबोर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं।

मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010 राज्य शासन द्वारा किए जा रहे सुशासन के प्रयासों की महत्वपूर्ण कड़ी होकर प्रदेश के नागरिक अधिकारों को सशक्त करने का एक अनूठा प्रयास है। मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है, जिसमें नागरिकों को अधिसूचित सेवाएं प्रदान करने की कानूनी गारंटी दी है। इसके लिए मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010, 25 सितम्बर 2010 से प्रभावशील है। प्रदेश के समस्त 55 जिलों और तहसील स्तर पर लोक सेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है, वर्तमान में कुल 444 लोक सेवा केन्द्र (पी.पी.पी. मॉडल अनुसार) संचालित किए जा रहे है। अधिनियम अंतर्गत अब तक 733 सेवाएं अधिसूचित की जा चुकी हैं और 637 सेवाएं ऑनलाईन प्रदाय की जा रही है।

श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1779.07 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम विभाग अंतर्गत श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1,779 करोड़ 7 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं संगठन अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा योजना को आगामी 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-2027 से वित्तीय वर्ष 2030-2031) तक निरंतर संचालन के लिये राशि 1,583 करोड़ 91 लाख रूपये तथा विभागीय परिसम्पत्तियों का संधारण योजना अंतर्गत परिसम्पत्तियों के संधारण के लिये राशि 50 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। कर्मचारी राज्य बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य योजना के अन्तर्गत बीमित व्यक्ति एवं उनके परिवार के सदस्यों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है।

इसके साथ ही पंजीयक, औद्योगिक न्यायालय अंतर्गत औद्योयगिक न्यायालय के लिए 61 करोड़ 56 लाख रूपये, श्रम न्यायालय के लिए 132 करोड़ 10 लाख रूपये तथा विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजनाओं के लिए 1 करोड़ रूपये की 16वें वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक निरंतरता की स्वीकृति दी गई है।

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 373 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा लोक सेवा प्रबंधन विभाग अंतर्गत अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के कार्यों को वित्तीय वर्ष अप्रैल 2026-27 से मार्च 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 348 करोड़ 38 लाख रूपये और जीव विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए 25 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के मुख्य उद्देश्यों में शासन के लिए प्रबुद्ध-मंडल के रूप में कार्य करते हुए गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य, नीति विश्लेषण, योजनाओं का प्रभाव आंकलन तथा शासन को समय-समय पर परामर्श देना सम्मिलित है। संस्थान द्वारा विभिन्न सामयिक सामाजिक, आर्थिक अन्य सरोकारों से संबंधित अध्ययन, विश्लेषण व अनुसंधान के साथ-साथ शासन की विभिन्न योजना के प्रभाव मूल्यांकन के कार्य भी शामिल है। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम और मुख्यमंत्री यंग इंटर्न फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम का संचालन किया जाता है।

 

GDP में गिरावट के संकेत, फिर भी भारत की रफ्तार बरकरार; अर्थव्यवस्था से जुड़ी आई मिश्रित खबर

नईदिल्ली 
विदेश से भारत के लिए एक साथ दो खबरें आई हैं, इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी और एक बुरी खबर शामिल है. यूनाइटेड नेशंस यानी UN के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड सोशल अफेयर्स (UN DESA) ने एक रिपोर्ट जारी कर भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती कर झटका दिया है, तो वहीं कहा है कि कटौती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।

अब इस रफ्तार से भागेगी इकोनॉमी
पीटीआई के मुताबिक, यूएन की रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट संकट (Middle East Crisis) का हवाला देते हुए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती की गई है. इसे 20 बेसिस पॉइंट कम करते हुए FY26 के लिए 6.4 फीसदी कर दिया गया है. इससे पहले UN ने भारतीय इकोनॉमी के 6.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ने का अनुमान जताया था। 

इसमें एनालिस्ट ने बताया है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध से पैदा हुए पश्चिम एशिया संकट ने ग्लोबल अनिश्चितता पैदा कर दी है, इससे लगने वाले आर्थिक झटकों के मद्देनजर जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया गया है। 

UN DESA की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट टेंशन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुई है. इससे जहां आर्थिक वृद्धि धीमी हुई है, तो महंगाई का दबाव लगातार बढ़ा है. प्रमुख अर्थशास्त्री इंगो पिटर्ले ने कहा कि इस ग्लोबल झटके से भारत भी अछूता नहीं है. ऊर्जा आयात पर निर्भरता के चलते ये प्रभावित हो रहा है। 

UN ने दी ये बड़ी खुशखबरी
भले ही यूएन ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक गुड न्यूज भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी में गिरावट के बाद भी भारत सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुईं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। 

पिटर्ले का कहना है कि हमने भारत में संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत ग्रोथ देखी है, जो कंज्यूमर डिमांड, सार्वजनिक निवेश और सर्विस एक्सपोर्ट में मजबूत प्रदर्शन के चलते है. सबसे तेज इकोनॉमी की लिस्ट में भारत को आगे रखने के में ये प्रमुख कारक होंगे। 

चुनौतियां बहुत, फिर भी भारत में दम 
यूनाइटेड नेशंस के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत में दम है और देश के उत्पादन में अभी भी 6.4 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान है. हालांकि, यह आंकड़ा बीते साल 2025 में 7.5 फीसदी की तुलना में कम है, जो स्पष्ट तस्वीर पेश करता है कि एनर्जी इंपोर्ट की लागत में तगड़ा उछाल, कठिन वित्तीय परिस्थितियां पैदा कर रहा है। 

रिपोर्ट में ये अनुमान भी जाहिर किया गया है कि अगर वित्त वर्ष 2027 में India’s Economic Growth Rate फिर बढ़कर 6.6 फीसदी हो सकती है। 

PF निकालना होगा और आसान! UPI के जरिए सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

नई दिल्ली
 अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता है तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, अब आपका पीएफ का पैसा सीधे UPI से निकल सकता है। यूपीआई के जरिए सीधे आपके खाते में पीएफ का पैसा आएगा। इसके लिए EPFO ने पूरी तैयारी कर ली है। जल्द ही इसे रोलआउट किया जा सकता है। UPI और ATM के जरिए PF का पैसा जल्द निकालने की सुविधा मिलना शुरू होगी।

PF क्लेम फाइल करने और प्रोसेसिंग के लिए कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। EPFO सब्सक्राइबर अब जल्द ही UPI का इस्तेमाल करके अपने प्रोविडेंट फंड के पैसे सीधे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का कहना है कि इस नए फीचर की टेस्टिंग (epfo upi withdrawal testing) पूरी हो चुकी है, और अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो लाखों कर्मचारी जल्द ही अपने फोन पर बस कुछ ही स्टेप फॉलो करके अपनी EPF बचत तक पहुंच पाएंगे।

आइए जानते हैं कि अगर UPI के जरिए PF का पैसा निकलाने की सुविधा शुरू होती है तो इसका प्रोसेस क्या होगा। इस आर्टिकल में हम आपको स्टेप बॉय स्टेप बताएंगे कि ये प्रोसेस कैसे काम करेगा।

अभी नहीं की गई आधिकारिक घोषणा
सरकार ने अभी इसके आधिकारिक लॉन्च की घोषणा नहीं की है। टेस्टिंग सफल रही है। ऑपरेशनल मंजूरी और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन का काम पूरा होते ही, आने वाले महीनों में इसे शुरू किया जा सकता है। EPFO अपने सात करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के लिए इस सिस्टम को शुरू करने से पहले, बैकएंड सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने पर काम कर रहा है।

UPI के जरिए EPF से पैसे निकालना का प्रोसेस क्या होगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, EPF खाते का एक निश्चित हिस्सा फ्रीज रहने की उम्मीद है, जबकि शेष राशि का एक बड़ा हिस्सा UPI-लिंक्ड बैंक खातों के जरिए निकालने के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।

अगर EPFO अपने सब्सक्राइर्स का पैसा UPI के जरिए निकालने की सुविधा को रोलआउट करता है तो उसका प्रोसेस नीचे दिए गए स्टेप्स की तरह हो सकता है।

    क्लेम करने के लिए आपको UMANG APP या फिर EPFO की वेबसाइट पर जाना होगा।
    इसके बाद मांगी गई जरूरी जनकारी फिल करनी होगी।
    इसके बाद आपको वहां निकासी के लिए UPI का विक्लप दिखेगा।
    UPI निकासी सिलेक्ट करने के बाद आपको आगे बढ़ना होगा।
    ट्रांसफर पूरा करने के लिए, सदस्य बस अपने लिंक्ड UPI PIN का इस्तेमाल कर सकते हैं।
    आपके पीएफ अमाउंट में जमा कुछ पैसा फ्रिज रहेगा। कुछ पैसा ही निकाला जा सकता है।
    अकाउंट में पैसे आ जाने के बाद, सदस्य उनका इस्तेमाल अपनी मर्जी से कर सकते हैं – चाहे डिजिटल पेमेंट के लिए हो, ट्रांसफर के लिए, या फिर ATM से कैश निकालने के लिए।

नोट- ध्यान रहे यह एक अनुमानित प्रोसेस है। क्योंक अभी यह सुविधा रोलआउट नहीं हुई है।
WhatsApp पर भी आएगा EPFO

सिर्फ UPI के जरिए निकासी ही नहीं बल्कि EPFO कई स्तर पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले महीनों में EPFO WhatsApp के जरिए भी सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। अगर ईपीएफओ व्हाट्सएप सुविधा रोलआउट करता है तो सब्सक्राइबर्स अपने PF बैलेंस की जांच कर सकेंगे, पिछले पांच ट्रांज़ैक्शन देख सकेंगे, क्लेम का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे और आधार ऑथेंटिकेशन व बैंक अकाउंट लिंकिंग जैसे लंबित मामलों में सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

 

PM आवास योजना की राशि लेकर नहीं बनाए घर, 455 हितग्राहियों को प्रशासन का नोटिस

तखतपुर/रायपुर.

प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर वर्षों तक मकान निर्माण नहीं करने वाले हितग्राहियों पर अब नगर पालिका प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. योजना की पहली किस्त हड़पकर बैठे 455 हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने या सरकारी राशि वापस जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है.

आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-22 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सैकड़ों हितग्राहियों को मकान निर्माण के लिए लगभग 55 से 56 हजार रुपये की प्रथम किस्त जारी की गई थी. लेकिन चार से पांच साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने न तो मकान निर्माण शुरू किया और न ही राशि लौटाई. इस कारण योजना की करोड़ों रुपये की राशि फंस गई है.

नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक ऐसे 455 हितग्राहियों के पास करीब ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि अटकी हुई है. अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस मिलते ही एक हितग्राही ने पूरी राशि वापस जमा कर दी, जबकि दो अन्य ने किस्तों में राशि लौटाने की अनुमति मांगी है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरेश सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिन हितग्राहियों ने शासन की राशि लेने के बाद भी आवास निर्माण नहीं किया है, उनके खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी. 24 घंटे के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं करने अथवा राशि वापस नहीं करने पर एसडीएम कोर्ट में रिकवरी प्रकरण दर्ज किया जाएगा और संबंधित लोगों पर एफआईआर भी कराई जाएगी.

रायपुर के बाद दुर्ग-बिलासपुर में भी लागू हो सकती है कमिश्नर प्रणाली, डिप्टी CM विजय शर्मा के संकेत

दुर्ग.

छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की.

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया.

कमिश्नरेट प्रणाली क्या है
कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है.

रायपुर के बाद दो बड़े शहर
राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है.

पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार
गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम

भोपाल 

प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की योजनाएं उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर दे रही हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

प्रदेश में 934 आईटीआई हैं। इनमें 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्र 2025 में शासकीय आईटीआई में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ। यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासकीय आईटीआई में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है।

प्रदेश की आईटीआई में वर्तमान में 71 आधुनिक ट्रेड्स में 15 हजार से अधिक महिला प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेडों में बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण ले रही हैं। यह बदलते माहौल और बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब बेटियां नए क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना रही हैं।

महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 7 शासकीय महिला आईटीआई संचालित की जा रही हैं। वहीं 56 शासकीय आईटीआई में महिला छात्रावास सुविधा उपलब्ध है। इनमें 3400 से अधिक सीटें हैं। इससे दूर-दराज क्षेत्रों की बेटियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है।

कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी लगातार काम कर रहा है। विशेष महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार मिला है। इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 509 महिलाओं को निःशुल्क वाहन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव और मजबूत हुआ है।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और निर्धन वर्ग की 13 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में बेटियों को प्रशिक्षण जारी रखने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों को उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर मिला है। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों में 5660 बेटियाँ शामिल हैं। सागर की सुस्नेहा रजक और रायसेन की सुलिया जैसी युवतियां प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं। अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं।

महिलाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। “जीवन तरंग” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 3000 बेटियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं “यूएन वीमेन” के सहयोग से बेटियों को “स्टेम और सॉफ्ट स्किल्स” का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे बेटियाँ एडवांस तकनीक और नए कार्यक्षेत्रों से जुड़ रही हैं।

परम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कार्यक्रमों में प्रशिक्षणार्थियों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। इससे बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी 64 हजार से अधिक बेटियों को कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिला है।

प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी सुत्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद परीक्षा में सेंट्रल ज़ोन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर्स में मध्यप्रदेश के 10 प्रतिभागियों में 5 बेटियाँ शामिल रहीं।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 में भोपाल की शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में प्रदेश की बेटियों ने सिल्वर, ब्रॉन्ज और मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए। यह उपलब्धियां प्रदेश की बेटियों की क्षमता और मेहनत को दर्शाती हैं।

कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रयासों से प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रहा है।

 

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