मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने 19 मई को बस्तर में परिषद् की 26वीं बैठक में इस आशय की सहमति दे दी है। मध्य क्षेत्रीय परिषद् की बैठक लेने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री  शाह उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को लेकर हो रही व्यापक नागरिक व्यवस्थाओं, मानव प्रबन्धन एवं आपदा प्रबंधन का भी मुआयना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक बस्तर में करके देश में नक्सलवाद की समाप्ति का जन संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से बीते सप्ताह राज्य में हुई विशेष गतिविधियों और सरकार को मिली उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सल मुक्त करने में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री  शाह द्वारा पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव सहित ‘नक्सल उन्मूलन अभियान’ में सक्रिय योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत, मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाने का प्रयास करेगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले की भोजशाला परिसर को लेकर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नियंत्रण हमारी प्राथमिकता है। इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने करीब 750 साल पुराने और धार्मिक/ईश वंदना से जुड़े इस मसले का सकारात्मक एवं शांतिपूर्ण समाधान किया है। सरकार इस विषय से जुड़े सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा विदेश से स्वदेश लाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ हर जरूरी प्रयास एवं समन्वय करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण फैसले के मद्देनजर मध्यप्रदेश में शांति, सौहार्द और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रदेशवासियों को सरकार की ओर से बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री का सम्मान – देश का सम्मा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें विदेश में मिल रहा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूरे देश का सम्मान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि, किसानों को मिली नई सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान, ज्वार-बाजरा, कपास, तिल, सोयाबीन और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को यह नई सौगात दी है।

इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह हुए इंडो-फ्रांस कान्क्लेव (भारत-फ्रांस निवेश सम्मेलन) के सफल आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार फ्रांस के साथ हर  क्षेत्र में मिलकर काम करेगी। फ्रांस के राजदूत  थियरी माथू, आईएफसीसीआई की महानिदेशक सु पायल एस कंवर और लगभग 150 प्रतिनिधियों से इसमें हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजनियक, नीति निर्माता, शासकीय अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एण्ड मेडिकेप्स यूनीवर्सिटी, डासाल्ट सिस्टमस, सफलेट, सियस्ट्रा, एन्जी सहित विश्व के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सीईओ-सीओओ और बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रतिनिधियों की इस कान्क्लेव में सहभागिता मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के प्रति दिनों-दिन बढ़ रहे वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।

निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, सरकार ने प्रारंभ किया नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की हाल ही में नियुक्ति की गई है। शासकीय विभागों के प्रमुख निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरण के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए प्रदेश में पहली बार कार्य प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार का एक नवाचारी प्रयास है। इसमें सभी नये पदाधिकारियों को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन की रीति-नीति, नियम-कायदे और वित्त प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देकर सभी से प्रदेश के विकास के लिए काम करने की अपील की। 

भोपाल के प्रकाश तरण पुष्कर स्विमिंग पूल में गैस लीक, चार बच्चों की हालत बिगड़ी

भोपाल

टीटी नगर लिंक रोड नंबर-1 स्थित प्रकाश तरण पुष्कर में बुधवार शाम स्विमिंग के दौरान क्लोरीन गैस लीक होने से चार बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना शाम करीब पांच बजे की है। उस समय पूल में करीब 20 से 25 बच्चे स्विमिंग कर रहे थे।

तभी अचानक कुछ बच्चों को खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत बच्चों को इलाज के लिए जयप्रकाश अस्पताल लेकर पहुंचे।

डाॅक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को घर भेज दिया, लेकिन एहतियात के तौर पर 24 घंटे तक निगरानी रखने की सलाह दी है। परिजन सचिन जैन ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी आध्या जैन भी स्विमिंग कर रही थी। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे लगातार खांसी आने लगी।

हालत इतनी खराब हो गई कि वह बेहोशी जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। वहां मौजूद महिलाओं ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डाॅक्टरों ने जरूरी इलाज किया, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।

प्रकाश तरण पुष्कर के मैनेजर हेमंत जारिया ने बताया कि पाइपलाइन में समस्या आने से क्लोरीन गैस लीक हुई थी। हवा के कारण गैस तेजी से फैल गई। बच्चों को खांसी और घबराहट की शिकायत होने पर तुरंत अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि गैस लीक का पता चलते ही टंकी बदल दी गई। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

भारत-चीन रिश्तों में बड़ा बदलाव! 7 साल बाद दिल्ली दौरे पर आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS में पुतिन भी होंगे शामिल

नई दिल्ली

भारत और चीन के रिश्ते में बहुत जल्द नया मोड़ देखने को मिल सकता है. भारत-चीन लगातार अपने संबंध सुधार रहे हैं. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. यही कारण है कि बीते कुछ समय में चीन-भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली है. अब भारत-चीन संबंध में नया मोड़ आया है. जी हां, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत जल्द भारत आने वाले हैं. सूत्रों की मानें तो इसी साल सितंबर में शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो बीते 7 साल में शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी। 

 रिपोर्ट की मानें तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. माना जा रहा है कि चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में आने की संभावना है. यहां बताना जरूरी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दिल्ली में रहेंगे. रूसी साइड ने पुतिन के दिल्ली दौरे को कन्फ्रम बताया है। 

पुतिन भी आ रहे भारत
रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुतिन की उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी के भी एससीओ समिट में शामिल होने की संभावना है। 

2019 के बाद पहली यात्रा
बहरहाल, ब्रिक्स समिट में अगर शी जिनपिंग आते हैं तो 2019 के बाद उनकी यह पहली यात्रा होगी. शी जिनपिंग की ब्रिक्स समिट में भागीदारी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होगा. आखिरी बार वह 2019 में भारत आए थे. अक्टूबर 2019 में वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में भारत-चीन नेताओं के दूसरे अनौपचारिक सम्मेलन में आए थे. उसके बाद गलवान हिंसा ने भारत-चीन के रिश्तों को बहुत खराब कर दिया। 

भारत-चीन के रिश्ते कैसे बिगड़े
जी हां, भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अप्रैल-मई 2020 में सीमा विवाद के बाद काफी बिगड़ गए थे. तब गलवान हिंसा हुई थी. इस गलवान संघर्ष ने चीन-भारत के संबंधों को बिगाड़ दिया था. इसके बाद तो तनातनी खूब चली. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में शुरू हुई. तब रूस के कजान शहर में ब्रिक्स समिट था. वहां मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों देशों ने एलईएस सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था. तब से लगातार भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। 

भारत-चीन के रिश्ते में 2019 के बाद क्या-क्या हुआ?
    भारत और चीन के रिश्तों में 2019 के बाद कई बड़े उतार-चढ़ाव आए. अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे. तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया था. उस समय रिश्तों में नरमी दिखाई दी थी। 

    लेकिन जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस संघर्ष में दोनों देशों के सैनिक मारे गए और सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया. इसके बाद भारत ने चीन के कई मोबाइल ऐप बैन किए और सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी. दोनों देशों के रिश्ते कई साल तक तनावपूर्ण रहे। 

    इसके बाद धीरे-धीरे सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई. इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और रिश्तों को सामान्य बनाने पर सहमति जताई. इसके बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें फिर तेज हुईं। 

 

कल्दा वन-धन विकास केंद्र बना जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक

भोपाल 

कन्दा वन धन विकास केन्द्र जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक बन गया है। दक्षिण पन्ना में स्किल इस केन्द्र ने म.प्र. में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया है।

केंद्र द्वारा इस वर्ष लगभग 21.4 लाख रुपये का रिकॉर्ड राजस्व एवं लगभग 5 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है, जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक तथा लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। पूर्व वर्षों में केंद्र का राजस्व एवं लाभ क्रमशः वर्ष 2021-22 में 6.5 लाख रुपये एवं 17 हजार रुपये, वर्ष 2022-23 में 4.7 लाख रुपये एवं 67 हजार रुपये, वर्ष 2023-24 में 2.6 लाख रुपये एवं 63 हजार रुपये और वर्ष 2024-25 में 5.1 लाख रुपये एवं 22 हजार रुपये रहा था। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

वन-धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय जनजातीय संग्राहकों को लघुवनोपज का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक प्राप्त हो रहा है। इसमें अचार/चिरौंजी चरवा का समर्थन मूल्य 130 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि गुणवत्ता के आधार पर संग्राहकों को वन-धन केंद्र के माध्यम से लगभग 160 रुपये से 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हुआ। बाद में इसी उपज का प्रसंस्करण, डीसीडिंग, सफाई एवं आकर्षक पैकेजिंग कर “कल्दा चिरौंजी” ब्रांड के रूप में विपणन किया गया। इस पहल से स्थानीय संग्राहकों की आय में वृद्धि हुई है तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।

वन-धन विकास केंद्र की गतिविधियों से विशेष रूप से जनजातीय महिला सदस्यों को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। कई महिला सदस्य, जिन्हें पूर्व में कोई आय प्राप्त नहीं होती थी, वे वर्तमान में वन-धन केंद्र से जुड़कर लगभग 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, जिससे जनजातीय महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिली है।

वर्ष 2025-26 में केंद्र को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्राप्त हुई जब जेके सीमेंटt के साथ सीएसआरसाझेदारी स्थापित हुई, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ियों एवं विद्यालयों के लिये महुआ लड्डुओं की नियमित मासिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इससे वन आधारित उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि हुई।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र द्वारा चिरौंजी, प्राकृतिक शहद, महुआ लड्डू, आंवला आधारित उत्पाद, त्रिफला चूर्ण, दहीमन, सूखा आंवला, बाल हर्रा एवं बहेड़ा छिलका जैसे विविध लघु वनोपज आधारित उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पोषणीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र के अधिकांश प्रमुख उत्पादों का एफएसएसएआई मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया, जिसमें उनकी उच्च गुणवत्ता, शुद्धता एवं पोषणीय मूल्य की पुष्टि हुई। परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक शहद में HMF शून्य तथा Fiehe’s Test निगेटिव पाया गया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि शहद ताजा एवं बिना किसी चीनी मिलावट के है। इसी प्रकार चिरौंजी में उच्च ऊर्जा, प्राकृतिक वसा एवं प्रोटीन पाए गए, जबकि ट्रांस फैट एवं कोलेस्ट्रॉल नहीं पाये गये। महुआ लड्डुओं में संतुलित पोषणीय तत्व पाए गए तथा उनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ, कृत्रिम रंग अथवा मिलावट का उपयोग नहीं पाया गया।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र की उपलब्धियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना प्राप्त हुई है। भोपाल में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 2025” में केंद्र के उत्पादों को पूरे मध्यप्रदेश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं नई दिल्ली में आयोजित “भारत ट्राइब्स फेस्ट (आदि महोत्सव) 2026” में कल्दा वन-धन विकास केंद्र का चयन मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में किया गया, जहां चिरौंजी, प्राकृतिक शहद एवं महुआ लड्डुओं सहित विभिन्न उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने। आगंतुकों एवं विशेषज्ञों द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग एवं प्रभावी ब्रांडिंग की विशेष सराहना की गई। दक्षिण पन्ना वन विभाग द्वारा निकट भविष्य में पन्ना, पवई एवं शाहनगर में रिटेल आउटलेट स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय नागरिकों को शुद्ध एवं पोषक वन उत्पाद सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगे तथा वन आधारित जनजातीय आजीविका को और अधिक मजबूती मिलेगी।

ट्रंप को अपने ही छोड़ गए साथ? विरोधियों से बढ़ती नजदीकियों के बीच ईरान जंग पर बढ़ी सियासी चिंता

वाशिंगटन 

अमेरिका की सीनेट में  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा. ईरान युद्ध को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान उसके ही चार सांसदों ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दे दिया. यह प्रस्ताव वॉर पॉवर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा है. सीनेट में यह प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हुआ, जिसमें तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए. रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने ट्रंप के खिलाफ वोट किया, वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। 

ये सिर्फ एक राजनीतिक एजेंडा नहीं था, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बुरा संकेत भी है. अब तक सिर्फ बयान आ रहे थे लेकिन इसे ट्रंप के खिलाफ उनकी ही पार्टी की ओर से एक दुर्लभ सार्वजनिक नाराजगी माना जा रहा है. अब तक रिपब्लिकन पार्टी और उसके समर्थक ईरान युद्ध में ट्रंप के साथ खड़े रहे हैं, लेकिन 81 दिन से जारी इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में पार्टी के भीतर भी नाराजगी नजर आने लगी है। 

ट्रंप को हटाने के लिए 25वें संशोधन की भी मांग
मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच कई बार ऐसे सवाल भी उठे हैं कि क्यों उन्हें संविधान का सहारा लेकर हटा न दिया जाए? डेमोक्रेट्स ने 25वें संशोधन की मांग की और डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी कई बार ये कह चुके हैं कि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को तुरंत 25वें संशोधन की धारा 4 लागू करनी चाहिए.अमेरिका के कई सांसद और नेता कह रहे हैं कि ट्रंप का ईरान युद्ध को लेकर बार-बार शब्द बदलना, रणनीति बदलना और यह गाली भरा पोस्ट लिखना, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाता है. ईरान युद्ध में हजारों मौतें हो चुकी हैं और ट्रंप लगातार पूर्ण हवाई नियंत्रण का दावा करते हैं, लेकिन ईरानी हमले खत्म नहीं हो रहे. ऐसे में लोग चिंतित हैं कि राष्ट्रपति का यह व्यवहार देश और दुनिया के लिए खतरा बन सकता है। 

कैसे जा सकती है ट्रंप की कुर्सी?
इस सवाल का सीधा जवाब है – 25वां संशोधन और उसकी धारा 4. यह अमेरिकी संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो 1967 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद पास किया गया. इसका मकसद होता है – अगर राष्ट्रपति मर जाए, इस्तीफा दे दे, हटा दिया जाए या अक्षम हो जाए तो उपराष्ट्रपति को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया तय करना. इसकी धारा 4 की मांग की जा रही है। 

धारा 4: यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत (15 में से 8) को अधिकार है कि वे लिखित रूप से घोषणा करें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हैं. इसके बाद उपराष्ट्रपति तुरंत एक्टिंग राष्ट्रपति बन जाता है. अगर राष्ट्रपति कहे कि वह ठीक है तो 4 दिन में कैबिनेट और उपराष्ट्रपति को कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से साबित करना पड़ता है। 

सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शित किए जाएं मानसिक स्वास्थ्य सहायता हेल्पलाइन नंबर

भोपाल 

अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन की अध्यक्षता में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए गठित Monitoring and Implementation Framework Committee की आज मंत्रालय में बैठक हुई।

अपर मुख्य सचिव  राजन ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संबंधित टेली मानस-14416, उमंग हेल्पलाइन-14425 तथा इमरजेंसी डायल-112 प्रदर्शित करने, हेल्पलाइन नंबरों का स्कूलों एवं महाविद्यालयों में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक करने को कहा।

 राजन ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला स्तर पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं राज्य स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समितियों की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाए तथा उसकी जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलों में आयोजित होने वाली समय-सीमा बैठकों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पैरा-35 में जारी दिशा-निर्देशों का सभी संबंधित विभाग गंभीरता से अध्ययन करें और उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। प्रत्येक संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य रेफरल प्रणाली विकसित की जाए। गार्जियन ट्यूटर योजना/मेंटरशिप प्रणाली को प्रभावी बनाने, भेदभाव, सार्वजनिक अपमान एवं अत्यधिक शैक्षणिक दबाव पर रोक लगाने, हेल्पलाइन एवं आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा शिक्षक एवं कर्मचारियों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देने को कहा।

 राजन ने एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एलजीबीटीक्यू एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही रैगिंग, बुलिंग एवं उत्पीड़न की रोकथाम तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने अभिभावकों के लिए जागरूकता एवं मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करने, मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने तथा खेल, कला एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। नियमित करियर काउंसलिंग एवं वैकल्पिक करियर मार्गदर्शन, छात्रावासों को नशा मुक्त एवं सुरक्षित बनाए रखने तथा कोचिंग हब में विशेष मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण  के.जी. तिवारी, जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त  तरुण राठी, तकनीकी शिक्षा आयुक्त  अवधेश शर्मा सहित स्कूल शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

राजेश दाहिमा
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MP में स्कूल टीचर्स की भर्ती पर बड़ा फैसला, ग्वालियर हाईकोर्ट ने अंग्रेजी अनिवार्यता पर सुनाया अहम आदेश

ग्वालियर 

एमपी में मिडिल स्कूल टीचर्स बनने के लिए अंग्रेजी जरूरी हो गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि स्नातक में अंग्रेजी विषय अनिवार्य है तभी मिडिल स्कूल शिक्षक बन सकेंगे। मप्र उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने शिक्षक भर्ती को लेकर यह अहम फैसला सुनाया है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी के पास स्नातक स्तर पर संबंधित विषय की डिग्री नहीं है, तो केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उसे मिडिल स्कूल शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। इसी के साथ हाईकोर्ट में दायर याचिका भी खारिज कर दी।

हाईकोर्ट का यह मामला माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा ने शिक्षक भर्ती के प्रावधानों को चुनौती दी थी। उन्होंने उच्च योग्यता के आधार पर नियुक्ति पर विचार करने की मांग की थी पर सरकार ने कोर्ट में इसे नियमों के विपरीत बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश देने से स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया।

याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। उन्होंने अंग्रेजी विषय के शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान विभाग ने नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी कि उनके पास स्नातक स्तर पर अंग्रेजी विषय नहीं था। पवन कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि वे अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर हैं। उनकी उच्च योग्यता को पात्रता मानते हुए नियुक्ति पर विचार किया जाए। इधर सरकार ने इसे भर्ती नियमों के विपरीत बताया।

ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के तर्क पर सहमति जताई। इसी के साथ कोर्ट ने ‘खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते’ सिद्धांत को दोहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट- नियमों के विपरीत नहीं दे सकते निर्देश
डबल बेंच ने कहा कि भर्ती नियम वैधानिक और बाध्यकारी होते हैं। यदि बाद में नियमों में ढील दी जाती है तो उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने विज्ञापन की शर्तों के कारण आवेदन ही नहीं किया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई नियम प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएशन को ग्रेजुएशन के समकक्ष माना गया हो। इसलिए लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता।

बंगाल में BJP सरकार बनने का दावा, शुभेंदु अधिकारी बोले- राष्ट्रवादियों की होगी सत्ता

कोलकाता

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार राष्ट्रवादियों की सरकार होगी, और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी तथा राज्य की व्यवस्था को बदलने के लिए काम करेगी। उत्तर बंगाल के लोगों द्वारा भगवा पार्टी को लगातार दिए जा रहे समर्थन के लिए भाजपा की ओर से आभार व्यक्त करते हुए, अधिकारी ने मुख्यमंत्री के तौर पर इस क्षेत्र की अपनी पहली यात्रा के दौरान कहा कि नई बनी सरकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी।

अधिकारी ने कहा, “यह लोगों की सरकार होगी, राष्ट्रवादियों की सरकार होगी और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी।” मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी एक सपनों की सरकार होगी जो लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। हम सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के झंडे का रंग या सत्ता में बैठे लोगों को बदलना नहीं चाहते। हम तो व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।”

हर महीने मिलेंगे तीन हजार रुपये
उत्तरी बंगाल के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी में भाजपा दफ्तर में बोलते हुए, अधिकारी ने कहा कि पार्टी ने अपने ‘संकल्प पत्र’ (चुनावी घोषणापत्र) में जो घोषणाएं की थीं, उन्हें पूरा किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बना रहेगा। नई सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत, पिछली ममता बनर्जी सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली 1,500 रुपये की मासिक आर्थिक मदद को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा।

बसों में सफर मुफ्त
इसके अलावा, सरकार ने म
हिलाओं के लिए सरकारी बसों में सफर मुफ्त कर दिया है और राज्य में ‘आयुष्मान भारत योजना’ शुरू करने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बदली हुई स्थिति में, अब ‘सिंडिकेट’, ‘कट मनी कल्चर’ या ‘माफिया राज’ जैसी कोई चीज नहीं होगी, और पश्चिम बंगाल में किसी भी तरह की राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं होगी।

‘सभी वादों तय समय-सीमा के भीतर पूरे होंगे’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा था कि TMC शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में ‘सिंडिकेट राज’, ‘कट मनी कल्चर’ और ‘माफिया राज’ का बोलबाला था, और उन्होंने राज्य में कानून का राज स्थापित करने का संकल्प लिया था। अधिकारी ने कहा कि नई भाजपा सरकार जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणबानंद के सपनों को पूरा करना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी।

अगले पांच साल तक जारी रहेगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

भोपाल 

किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के किसानों को बडा तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला लिया है। योजना के प्रभावी क्र‍ियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 11608.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किये हैं।

प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर किसानों को सहायता देने योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन, फसल स्थिति और उपज निर्धारण में तकनीकी के उपयोग में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

वर्ष 2023-24 में 35.18 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 961.68 करोड़ का दावा भुगतान किया गया। वर्ष 2024-25 में 35.56 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 275.86 करोड़ का दावा भुगतान किया गया।

प्रदेश में वर्ष 2016 से किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। योजना में भागीदार किसानों को फसल नुकसान या क्षति होने पर वित्तीय सहायता मिलती है। खरीफ मौसम में बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी मौसम में 1.5 प्रतिशत अधिकतम प्रीमियम किसानों द्वारा देय होता है। किसानों द्वारा देय प्रीमियम और बीमांकित प्रीमियम की दर के अंतर को सामान्य प्रीमियम सब्स‍िडी की दर माना जाता है। इसकी भागीदारी केन्द्र और राज्य द्वारा बराबर वहन की जाती है।

केन्द्र सरकार द्वारा सिंचित और असिंचित जिलों की फसलों में केन्द्र सरकार की प्रीमियम सब्स‍िडी की सीलिंग क्रमश: 25 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की सीमा तक रखी गई है। यदि इस सीलिंग के अधिक दरें प्राप्त होती हैं तो अतिरिक्त भार राज्य शासन को वहन करना होता है। मध्यप्रदेश में क्षतिपूर्त‍ि स्तर का 80 प्रतिशत निर्धारित है। आगामी वर्षो में भी सभी फसलों के लिये क्षतिपूर्त‍ि का स्तर 80 प्रतिशत रखा गया है।

वैकल्पिक क्रियान्वयन मॉडल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिये राज्य अपनी आवश्यकता अनुसार उपयुक्त मॉडल चुन सकता है।

पहला कप एण्ड सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल और दूसरा कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल। कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 110 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 110 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। 80 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 80 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन को वापस की जाती है।

कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 130 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 130 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार द्वारा बराबर अनुपात में किया जाता है। 60 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 60 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार को वापस की जाती है। मॉडल पर निर्णय गुण-दोष के आधार पर लिया जायेगा।

किसानों को फायदें

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक हानि होने पर किसानों को मदद करती है। इस योजना के तहत किसानों के द्वारा भुगतान की जाने वाली बीमा की प्रीमियम राशि को बहुत ही कम रखा गया है। छोटे किसान भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। यह योजना 2 प्रतिशत (खरीफ फसलें), 1.5 प्रतिशत (रबी फसलें) और 5 प्रतिशत (वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलें) की प्रीमियम दर पर किसानों के व्यय को कम करने और किसानों की आय को स्थिर करने के उद्देश्य से फसल विफलता होने पर एक व्यापक बीमा कवर देती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन प्रदेश के जिलों में 11 क्लस्टर्स में किया जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर के लिये बीमा कंपनियों का चयन निविदा के माध्यम से किया गया है।

फसल उपज का आंकलन सेटेलाईट आधारित रिमोट सेसिंग तकनीक से किया जा रहा है। इसके लिये कृषि विभाग द्वारा नेशनल रिमोट सेसिंग केन्द्र (इसरो), मध्यप्रदेश काउसिंल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन से समझौता किया गया है। मौसम सूचना तंत्र एवं डाटा प्रणाली का उपयोग कर योजना का क्र‍ियान्वयन किया जायेगा।

 

1 हजार से अधिक बच्चों को मिला मनचाहे विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश

भोपाल 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम अंतर्गत द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी की प्रकिया बुधवार को संपन्न हो गई। इसमें 11 हजार 485 बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश मिला।

इस लॉटरी प्रक्रिया में उन बच्‍चों को शामिल किया गया था, जिन्‍हें प्रथम चरण की लॉटरी में उनकी पसंद के स्‍कूल आवंटित नहीं हो सके थे। ऐसे बच्‍चों को निजी विद्यालयों की रिक्‍त सीटों के अनुरूप द्वितीय चरण की लॉटरी के लिए अपनी वरीयता अंकित करते हुए आवेदन करने का एक और अवसर प्रदान किया गया था। द्वितीय चरण की लॉटरी में बच्‍चों को उनकी चुनी गई वरीयता के आधार पर निजी विद्यालयों में सीट का आवंटन  20 मई को ऑनलाइन लॉटरी की स्वचालित कंप्यूटर प्रक्रिया द्वारा किया गया। संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह द्वारा द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी का बटन क्लिक किया गया।

नर्सरी कक्षा में 7 हजार 599, केजी 1 में 2 हजार 747 और कक्षा 1 में 1 हजार 139 बच्‍चों का दाखिला हुआ। इस अवसर पर संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने लॉटरी में चयनित बच्चों को उनकी पसंद का स्कूल आवंटित होने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्‍होंने पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था निर्मित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग और मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्‍ट्रानिक्‍स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन टीम की प्रशंसा भी की।

इस वर्ष आरटीई के तहत लॉटरी के लिए दस्तावेज सत्यापन के उपरांत 1 लाख 80 हजार 875 बच्चे पात्र चयनित हुए थे, जिनमें से 1 लाख 6 हजार से अधिक बच्‍चों को शाला आवंटन प्राप्‍त हुआ था। इसके उपरांत 97 हजार 052 बच्‍चों के द्वारा चयनित स्‍कूलों में प्रवेश लिया जा चुका है। आज आयोजित हुई द्वितीय चरण की लॉटरी में 11 हजार 485 और बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में प्रवेश आवंटन प्राप्‍त हुआ है। इस प्रकार इस वर्ष सत्र 2026-27 में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश आवंटन प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों की संख्‍या 1 लाख 17 हजार 400 से अधिक हो गई है।

पोर्टल पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं आवंटन पत्र

द्वितीय चरण की लॉटरी में जिन बच्‍चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश प्राप्‍त हुआ है, उनके अभिभावक आरटीई पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवंटन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।ऑनलाइन लॉटरी में जिनके स्कूलों का आवंटन हुआ है, उन्हें उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस माध्‍यम से भी सूचना दी जा रही है। बच्चे उन्‍हें आवंटित स्कूलों में 20 मई से 10 जून, 2026 तक जाकर प्रवेश ले सकेंगे। इन बच्चों की फीस सरकार द्वारा नियमानुसार सीधे स्कूल के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी।

इस अवसर पर राज्‍य शिक्षा केंद्र की आरटीई नियंत्रक किरण कुशवाह, प्रशासक डॉ. राकेश दुबे और तकनीकी सहयोगी विभाग मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि  नितीन तुरकर,  राम यादव सहित अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे। 

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