आवारा कुत्तों पर SC के आदेश से बढ़े सवाल, क्या शहरों में पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं?

 नई दिल्ली

आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए फैसले ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था. यानी कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने को कहा है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में इतने शेल्टर होम हैं,  जहां सभी कुत्तों को शिफ्ट किया जा सके. अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह आदेश जमीन पर कैसे लागू होगा? तो समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर हकीकत है क्या?

भारत में कितने आवारा कुत्ते हैं?
वैसे भारत में आधिकारिक रुप से सरकार की ओर से इसे लेकर कोई आंकड़ा शेयर नहीं किया गया है. लेकिन, कई सर्वे  के आधार पर बताया जाता है कि भारत में करीब 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं. यह आंकड़ा देश में स्ट्रे डॉग्स की वास्तविक स्थिति का सबसे व्यापक अनुमान माना जाता है. इसके अलावा, अगर कुल आवारा पशुओं की बात की जाए, तो संख्या करीब 2.04 करोड़ तक पहुंच जाती है, जिसमें गाय, बकरी और अन्य पशु भी शामिल हैं. हालांकि इनमें कुत्ते सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं। 

इंडिया डेटा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 20.6 लाख, ओडिशा में 17.3 लाख, महाराष्ट्र में 12.8 लाख, राजस्थान में 10 लाख, मध्य प्रदेश में 10 लाख, कर्नाटक में 10 लाख, पश्चिम बंगाल में 10 लाख और आंध्र प्रदेश में 8.6 लाख आवारा कुत्ते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई बड़े राज्यों में स्ट्रे डॉग्स की आबादी बहुत अधिक है। 

कितने डॉग शेल्टर हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं? भारत में लगभग 3,345 एनिमल शेल्टर होने का अनुमान है. लेकिन इनमें सिर्फ डॉग शेल्टर ही नहीं, बल्कि गौशालाएं और अन्य पशु आश्रय भी शामिल हैं. यानी वास्तविक डॉग शेल्टर की संख्या इससे काफी कम हो सकती है. बीएमसी ने बताया था कि मुंबई में 90,000 से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स के लिए केवल 8 शेल्टर होम थे. दिल्ली में एमसीडी के पास लगभग 20 एनिमल कंट्रोल सेंटर हैं, जिन्हें पूरी तरह आधुनिक शेल्टर नहीं माना जाता। 

क्या पॉसिबल हो पाएगा?
सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि अगर सभी स्ट्रे डॉग्स को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों से हटाकर शेल्टर में रखा जाए, तो इसके लिए एक विशाल और महंगा सिस्टम बनाना पड़ेगा. इसके लिए कुत्तों की पहचान और पकड़, उन्हें शेल्टर तक पहुंचाना, नसबंदी और टीकाकरण, लंबे समय तक देखभाल, लगातार रिकॉर्ड और निगरानी का काम करना होगा. ऐसे में अगर एक कुत्ते पर औसतन 40 रुपये प्रतिदिन का भोजन खर्च माना जाए, तो केवल खाने का सालाना खर्च ही 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। 

कोर्ट में भी ये कहा गया था कि अगर भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए, और एक शेल्टर में औसतन 200 कुत्ते रखे जाएं, तो देश को 77,000 से ज्यादा शेल्टर की जरूरत पड़ेगी. अब नए शेल्ट होम बनाने के लिए हजारों एकड़ जमीन, लाखों कर्मचारियों की जरूरत और हजारों करोड़ रुपये का निवेश की जरुरत होगी।  

कुत्ते के काटने के कितने केस?
साल 2024 में भारत में 37.17 लाख डॉग बाइट केस दर्ज किए गए थे. इसमें 54 संदिग्ध रेबीज़ मौतें रिपोर्ट हुईं. यह डेटा NCDC द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया गया है और संसद में प्रस्तुत किया गया। 

भारत का ‘सूर्यास्त्र’ बना दुश्मनों के लिए खतरा, 300 KM तक हर टारगेट निशाने पर

बेंगलुरु 
भारतीय रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने का एक और शानदार उदाहरण सामने आया है. पुणे स्थित निजी क्षेत्र की कंपनी Nibe Limited ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में सूर्यास्त्र (Suryastra) रॉकेट्स का सफल फायरिंग डेमोन्स्ट्रेशन पूरा कर लिया है. कंपनी ने 150 और 300 किलोमीटर रेंज वाली दोनों रॉकेट्स का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण भारतीय सेना द्वारा कंपनी को दिए गए प्रोक्योरमेंट ऑर्डर का हिस्सा है। 

सूर्यास्त्र रॉकेट्स की खासियतें 

    रेंज: 150 किमी और 300 किमी
    CEP (Circular Error Probable): 150 किमी रेंज वाली रॉकेट का CEP मात्र 1.5 मीटर और 300 किमी रेंज वाली रॉकेट का CEP मात्र 2 मीटर.
    प्रकार: प्रिसीजन गाइडेड रॉकेट 
    उद्देश्य: जमीन पर सटीक हमला 
    विशेषता: बेहद उच्च सटीकता, जिससे छोटे-से-छोटे टारगेट को भी नष्ट किया जा सकता है.

1.5 से 2 मीटर का CEP दुनिया के बेहतरीन रॉकेट सिस्टम्स में गिना जाता है. इसका मतलब है कि रॉकेट अपने लक्ष्य से औसतन सिर्फ 1.5-2 मीटर की दूरी पर गिरती है, जो युद्ध में बहुत बड़ी ताकत है। 

ITR चांदीपुर में किए गए इन फायरिंग ट्रायल्स में दोनों रॉकेट्स ने अपने टारगेट्स को बेहद सटीकता से भेदा. परीक्षण के दौरान सभी सिस्टम्स – गाइडेंस, नेविगेशन, प्रोपल्शन और कंट्रोल पूरी तरह सफल रहे। 

Nibe Limited ने इसे भारतीय रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर बताया है. कंपनी ने कहा कि ये रॉकेट्स पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं. भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार विकसित किए गए हैं। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
भारतीय सेना को अब लंबी दूरी की सटीक हमला करने वाले रॉकेट्स मिलेंगे. दुश्मन के ठिकानों, आर्टिलरी पोजीशन्स, कमांड सेंटर्स और अन्य महत्वपूर्ण टारगेट्स को सुरक्षित दूरी से नष्ट किया जा सकेगा. इससे रक्षा आयात पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में निर्यात की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। 

Nibe Limited रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी है. कंपनी पहले से ही विभिन्न रक्षा प्रोजेक्ट्स में काम कर रही है. सूर्यास्त्र रॉकेट का सफल परीक्षण कंपनी की क्षमता को और मजबूत करता है। 

ये रॉकेट्स भारतीय सेना की फायरपावर को काफी बढ़ाएंगे. खासकर सीमा पर तनाव की स्थिति में लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता से सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलेगी. 300 किमी रेंज वाली रॉकेट दुश्मन के गहरे इलाकों तक पहुंचने में सक्षम होगी। 

पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही 10 मिनट डिलीवरी पर असर, अब बढ़ सकती है फास्ट सर्विस की कीमत

मुंबई 

देश में 10 मिनट वाले क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सर्विस का यूज लगभग अब हर घर में होने लगा है, लेकिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर अब इन कंपनियों के ऊपर भी पड़ने वाला है. हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स को लागत बढ़ानी पड़ सकती है। 

फ्यूल बढ़ोतरी का डिलीवरी पर असर
क्विक कॉमर्स में ऐवरेज डिलीवरी लागत 35-50 रुपये प्रति ऑर्डर है, जबकि फूड डिलीवरी में यह 55-60 रुपये के आसपास होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal (Zomato) के लिए ऐवरेज डिलीवरी लागत करीब 45 रुपये और Swiggy के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है. डिलीवरी लागत में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, यानी एक ऑर्डर पर 9-10 रुपये फ्यूल का खर्च आता है। 

फिलहाल 4 प्रतिशत बढ़ोतरी से प्रति ऑर्डर 0.44 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर फ्यूल के दाम और बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर हो गए तो यह प्रभाव 1-1.2 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच सकता है. इससे कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर 4-12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है, अगर लागत ग्राहकों पर नहीं डाली गई। 

Eternal और Swiggy पर क्या असर?
Eternal (जिसमें Blinkit शामिल है) और Swiggy दोनों ही फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर निर्भर हैं. FY27 में Eternal के करीब 2.7 अरब और Swiggy के 1.4 अरब ऑर्डर आने का अनुमान है. Swiggy पर असर ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह अभी क्विक कॉमर्स में ब्रेकईवन यानी नो प्रॉफिट, नो लॉस की राह पर है। 

दूसरी ओर, Eternal की स्थिति बेहतर मानी जा रही है. उसका बड़ा स्केल, ज्यादा एड आय और प्रीमियम ग्राहक आधार इसे लागत बढ़ाने में मदद करेगा. कंपनियां अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक चार्ज बढ़ाकर, कुछ खुद उठाएंगी और कुछ डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव डालकर संभालने की कोशिश करेंगी। 

ग्राहकों और डिलीवरी वर्कर्स पर प्रभाव
बढ़ती लागत से 10 मिनट डिलीवरी का कन्वीनियंस महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियां डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज बढ़ा सकती हैं. डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कमाई प्रभावित होने से वे ज्यादा पेमेंट की मांग कर सकते हैं, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा। 

हालांकि, एलारा कैपिटल का कहना है कि थोड़े समय बाद यह कंट्रोल में रहेगा. लंबे समय में कंपनियां दक्षता बढ़ाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाकर और बेहतर प्लानिंग से इस चुनौती से निपट सकती हैं. फ्यूल दामों में बढ़ोतरी अब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती बनकर आ रही है। 

राज्यसभा चुनाव से पहले MP कांग्रेस सतर्क, क्रॉस वोटिंग की आशंका से बढ़ी हलचल

भोपाल
प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें इसी वर्ष जून में रिक्त हो रही हैं। इन सीटों पर निर्वाचन के लिए अधिसूचना शीघ्र जारी होने की आशा है। चुनाव नजदीक आते ही क्राॅस वोटिंग को लेकर कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। कारण, चार विधायक भी खिसक गए तो कांग्रेस के हाथ से सीट निकल जाएगी।

क्रॉस वोटिंग को लेकर मंथन
बता दें कि विधायकों के संख्या बल की दृष्टि से दो सीटें भाजपा को मिलनी तय हैं। बची एक सीट वर्तमान की स्थिति में कांग्रेस के खाते में जाएगी, पर कुछ राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्राॅस वोटिंग या अनुपस्थित रहने की वजह से मप्र में भी पार्टी को डर सता रहा है।

पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने गुपचुप तरीके से ऐसे विधायकों पर नजर रखना शुरू कर दिया है, जो क्रास वोटिंग कर सकते हैं।

विधायकों की अनुपस्थिति बनी चुनौती
दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता शून्य किए जाने के बाद अब कांग्रेस के 64 सदस्य विधानसभा में हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता शून्य करने संबंधी निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो लगा दी है, लेकिन वह चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

दलबदलुओं पर नजर
बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं निर्मला सप्रे के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर सुनवाई चल रही है।सप्रे वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद कई बार भाजपा के मंच पर नजर आ चुकी हैं, हालांकि वह कई बार कह चुकी हैं कि कांग्रेस से त्याग पत्र नहीं दिया है। वह पार्टी में ही हैं। ऐसे में कांग्रेस इस वोट को अपने पक्ष में नहीं मान रही है।

हालांकि, पार्टी सूत्रों ने बताया कि हाल ही में प्रदेश पदाधिकारियों ने सप्रे से बात कर पार्टी के पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया है। इस तरह मल्होत्रा और सप्रे को हटा दें तो कांग्रेस के पास चार अतिरिक्त वोट ही हैं। इस कारण पार्टी का डर बढ़ा हुआ है।

 

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट की रोक, किसानों को लौटाना होगा मुआवजा

इंदौर/उज्जैन 

 मध्य प्रदेश में स्थित इंदौर और उज्जैन के बीच बनाए जाने वाले ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट ने इसमें जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी जमीनों का कब्जा लेने पर रोक लगा दी है। साथ ही, जिन किसानों ने मुआवजा ले भी लिया है और वे अपना मुआवजा वापस करते हैं तो उनकी जमीन अधिग्रहण पर भी स्टे लागू कर दिया जाएगा।

अभिभाषक पूनम महाजन ने बताया, सरकार ने इंदौर से उज्जैन के बीच सिंहस्थ को लेकर 48.1 किलोमीटर का फोरलेन रास्ता बनाने की योजना बनाई है, जिसे ग्रीन फील्ड कॉरिडोर नाम दिया गया है। पितृ-पर्वत से शुरू होकर ये रास्ता सीधे चिंतामण गणेश मंदिर के पास उज्जैन बायपास तक बनना है। इससे इंदौर-उज्जैन के बीच की दूरी केवल 30 मिनट में ही पूरी होने का दावा किया गया है। इसके तहत इंदौर की हातोद तहसील में आने वाले ग्राम सागवाल की 16.496 हेक्टेयर जमीन भी अधिग्रहित की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन अधिग्रहण के खिलाफ नाराज किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में आरोप : जारी नोटिफिकेशन में सिर्फ एक्सपर्ट ग्रुप की राय ही दी
इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि किसानों की जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कानूनी रूप से गलत है। जमीन अधिग्रहण के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसमें केवल एक्सपर्ट ग्रुप की राय को ही जारी किया गया है, जबकि नोटिफिकेशन में सामाजिक संग्रहात रिपोर्ट की समरी को नोटिफिकेशन में दिया जाना था। इसके साथ ही अन्य कई कानूनी गड़बडि़यां की गई हैं।

सरकार बोली कोई उल्लंघन नहीं किया, किसानों ने मय फोटे के साक्ष्य दिए
इस याचिका के दायर होने के बाद राज्य के महाधिवक्ता ने 13 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में बयान दिया था कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून के सभी प्रावधानों का पालन करेगी। इसका उल्लंघन करते हुए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। बावजूद किसानों की जमीनों को अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी फोटो सहित जानकारी कोर्ट के समक्ष रखकर मांग की थी कि कोर्ट इस पर स्टे जारी करे अन्यथा किसानों के याचिका दायर करने का कोई अर्थ नहीं रहेगा।

महाधिवक्ता बोले- कुछ किसान मुआवजा ले चुके हैं और अन्य भी तैयार
महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि, याचिका दायर करने वाले किसानों के मामले में जो भी कार्यवाही की जाएगी, वो कानून के मुताबिक ही की जाएगी। साथ ही बताया कि याचिका दायर करने वाले कुछ किसान पहले ही मुआवजा ले चुके हैं और कुछ अन्य भी मुआवजा लेने को तैयार हैं।

जो केस लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजा राशि वापस करनी होगी- कोर्ट
कोर्ट ने माना, चूंकि कोर्ट में याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अगर इस बीच जमीनों का कब्जा ले लिया जाता है तो इसकी संभावना ज्यादा है कि, उस स्थिति में याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रहेगा। इसके चलते जिन्होंने मुआवजा प्राप्त नहीं किया है, उनकी जमीन की जो स्थिति है उसे वैसे ही रखा जाएगा और जिन्होंने मुआवजा प्राप्त कर लिया है, किंतु जो इस केस को लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजे की राशि वापस करनी होगी। जिस तारीख से वो पैसा वापस करेंगे, उस तारीख से उनकी जमीन पर स्टे रहेगा। बावजूद कोई यदि मुआवजा लेने का इच्छुक है तो वो ऐसा कर सकता है। उस स्थिति में सरकार तय कानून के हिसाब से आगे की कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगी।

 

ग्वालियर में 15 साल से विराजमान है भोजशाला की ‘मां वाग्देवी’, 35 दिन में तैयार हुई थी हूबहू प्रतिमा

ग्वालियर 

मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर कोर्ट ने इसे मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (सरस्वती) की मुख्य अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 सालों से ग्वालियर में ही कड़ी सुरक्षा के बीच रखी हुई है।

साल 2011 की बसंत पंचमी पर इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी, लेकिन उस समय उपजे सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के बाद इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ग्वालियर के मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है।

लंदन म्यूजियम वाली ‘ओरिजिनल’ मूर्ति का हूबहू रूप ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे ने मां वाग्देवी की इस प्रतिमा और उसकी बनावट से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया।

    लंदन म्यूजियम जैसी हूबहू बनावट: धार की मूल वाग्देवी प्रतिमा वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी हुई है। ग्वालियर में तैयार की गई यह मूर्ति हूबहू उसी डाइमेंशन (आकार) और बनावट में बनाई गई है।

    अष्टधातु से निर्माण: यह प्रतिमा पवित्र अष्टधातु (आठ अलग-अलग धातुओं के मिश्रण) से बनाई गई है, जिसका धार्मिक रूप से बेहद खास महत्व है।

    वजन और ऊंचाई: साढ़े 3 फीट ऊंची और करीब सवा फीट चौड़ी इस भव्य प्रतिमा का कुल वजन 250 किलोग्राम (ढाई क्विंटल) से भी अधिक है।

    लागत और कारीगर: साल 2011 में इस मूर्ति को बनाने में करीब ढाई से तीन लाख रुपए की लागत आई थी। मूर्तिकार प्रभात राय के साथ कुल 26 कलाकारों की टीम ने महज 35 से 40 दिनों की दिन-रात की मेहनत के बाद इसे तैयार किया था।

आरएसएस नेता ने दिया था ऑर्डर
मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज
ने बताया कि साल 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। “2011 में जब मूर्ति बनकर तैयार हुई और इसे धार भेजने की तैयारी थी, तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया।

प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि लगभग दो हफ्तों तक 2 से 5 पुलिसकर्मी हमारे घर पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी साल 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2 से 3 दिन के लिए मूर्ति रखी जाती थी।”

अब मौन धारण किया नवल किशोर ने
ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतन दास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोरी बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

भावुक हो गए मूर्तिकार
प्रभात राय के बेटे अनुज का कहना है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद से वे भी बेहद उत्साहित हैं। हालांकि फिलहाल अभी किसी पक्ष या प्रशासन ने उनसे मूर्ति ले जाने के लिए संपर्क नहीं किया है, क्योंकि सभी कोर्ट के लिखित आदेश और उसकी कानूनी बारीकियों का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अगर भविष्य में भी कोई इस मूर्ति को लेने नहीं आता है, तो मैं इसे बेहद खुशी और गर्व के साथ अपने पास रखूंगा, क्योंकि यह भारत के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है।”

मूल प्रतिमा को स्थापति करने की हो रही तैयारी
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने कहा कि वर्तमान में लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से उसका विशेष महत्व है।

सुमित चौधरी ने बताया कि आंदोलन के दौरान जिन-जिन मूर्तियों का उपयोग किया गया, उन सभी मूर्तियों की “मुक्ति” कराकर उन्हें सम्मानपूर्वक स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भोजशाला में हिंदू महासभा द्वारा रखी गई मूर्ति को लेकर भी आगे प्रक्रिया की जाएगी।

ग्वालियर की मूर्ति की सिर्फ चर्चा
सुमित चौधरी ने स्पष्ट किया कि ग्वालियर में रखी प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर फिलहाल केवल चर्चा चल रही है। अभी इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह केवल योजना स्तर पर विचाराधीन है।

सुमित चौधरी का कहना है कि प्रतिमा स्थापना को लेकर न्यायालय का आदेश पहले ही आ चुका है। कोर्ट ने शासन और प्रशासन को प्रतिमा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन और मांग पत्र भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कोर्ट के आदेश के पालन की मांग की गई है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजा गया है। हिंदू पक्ष ने मांग की है कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को जल्द भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए।

सुमित चौधरी ने कहा कि एएसआई केवल परिसर की देखरेख और संरक्षण का कार्य करता है। प्रतिमा स्थापना का निर्णय पूरी तरह कोर्ट के आदेश के अनुसार ही होगा। उन्होंने कहा कि मूर्ति आएगी तो कोर्ट के आदेश से ही आएगी, इसमें एएसआई के हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं उठता।

मध्यप्रदेश में बनेगा हाई कैपेसिटी रेल नेटवर्क, 11 हजार करोड़ से बदलेगी रेलवे की तस्वीर

 कटनी/बीना
 मध्यप्रदेश में रेलवे नेटवर्क विस्तार की दो बड़ी परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने मंजूरी देकर प्रदेश के यात्री और माल परिवहन ढांचे को नई दिशा दी है। इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड पर चौथी रेल लाइन और न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी- चौथी रेल लाइन परियोजना शुरू होने से रेलवे की संचालन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। दोनों परियोजनाओं पर मिलाकर 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं से न केवल ट्रेनों की इन लेटलतीफी कम होगी, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल
इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यहां यात्री और मालगाडिय़ों का भारी दबाव रहता है। इधर पश्चिम मध्य रेलवे के न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना से सिंगरौली की कोयला तथा कटनी के सीमेंट उद्योगों को फायदा पहुंचेगा।

करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे
रेलवे ने इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड चौथी रेल लाइन बनाने का निर्णय लिया है। यह लाइन 237 किमी लंबी बनेगी। करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे। रेलवे ने इस वित्तीय वर्ष में इसके लिए 100 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए हैं।

जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया
वहीं पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया है। 264 किमी के इस कॉरिडोर पर 6779.87 करोड़ खर्च होंगे। परियोजना कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों से होकर गुजरेगी। इसके सिंगरौली की कोयला और ऊर्जा बेल्ट तथा कटनी के सीमेंट व खनिज उद्योगों को इससे सबसे अधिक फायदा होगा।

बता दें कि एमपी का कटनी जिला, प्रदेश के माइनिंग सेेंटर के रूप में उभर रहा है। यहां बाक्साइट की खदानों के साथ ही अब सोना भी मिला है। खदानों में प्रचुर मात्रा में स्वर्ण अयस्क होने का दावा किया जा रहा है। कटनी का सीमेंट उद्योग देशभर में विख्यात है।

इन परियोजनाओं को हरी झंडी

इटारसी-भोपाल-बीना चौथी रेल लाइन
लंबाई: 237 किमी
लागत: 4329 करोड़
समयसीमा: 4 वर्ष
आवंटन: 100 करोड़ रुपए

न्यू कटनी जंक्शन-सिंगरौली तीसरी-चौथी रेल लाइन
लंबाई: 264.070 किमी
ट्रैक विकास: 578.675 किमी
लागत: 6779.87 करोड़ रुपए
समयसीमा: 4 वर्ष

मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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केन्द्रीय गृह मंत्री शाह बैठक के बाद सिंहस्थ की तैयारियों का करेंगे मुआयना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को सरकार की उपलब्धियों की दी जानकारी

उज्जैन 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 19 मई को बस्तर में परिषद् की 26वीं बैठक में इस आशय की सहमति दे दी है। मध्य क्षेत्रीय परिषद् की बैठक लेने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री शाह उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को लेकर हो रही व्यापक नागरिक व्यवस्थाओं, मानव प्रबन्धन एवं आपदा प्रबंधन का भी मुआयना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक बस्तर में करके देश में नक्सलवाद की समाप्ति का जन संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से बीते सप्ताह राज्य में हुई विशेष गतिविधियों और सरकार को मिली उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सल मुक्त करने में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री शाह द्वारा पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव सहित ‘नक्सल उन्मूलन अभियान’ में सक्रिय योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत, मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाने का प्रयास करेगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले की भोजशाला परिसर को लेकर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नियंत्रण हमारी प्राथमिकता है। इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने करीब 750 साल पुराने और धार्मिक/ईश वंदना से जुड़े इस मसले का सकारात्मक एवं शांतिपूर्ण समाधान किया है। सरकार इस विषय से जुड़े सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा विदेश से स्वदेश लाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ हर जरूरी प्रयास एवं समन्वय करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण फैसले के मद्देनजर मध्यप्रदेश में शांति, सौहार्द और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रदेशवासियों को सरकार की ओर से बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री का सम्मान – देश का सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें विदेश में मिल रहा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूरे देश का सम्मान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि, किसानों को मिली नई सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान, ज्वार-बाजरा, कपास, तिल, सोयाबीन और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को यह नई सौगात दी है।

इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह हुए इंडो-फ्रांस कान्क्लेव (भारत-फ्रांस निवेश सम्मेलन) के सफल आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार फ्रांस के साथ हर  क्षेत्र में मिलकर काम करेगी। फ्रांस के राजदूत थियरी माथू, आईएफसीसीआई की महानिदेशक सुपायल एस कंवर और लगभग 150 प्रतिनिधियों से इसमें हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजनियक, नीति निर्माता, शासकीय अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एण्ड मेडिकेप्स यूनीवर्सिटी, डासाल्ट सिस्टमस, सफलेट, सियस्ट्रा, एन्जी सहित विश्व के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सीईओ-सीओओ और बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रतिनिधियों की इस कान्क्लेव में सहभागिता मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के प्रति दिनों-दिन बढ़ रहे वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।

निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, सरकार ने प्रारंभ किया नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की हाल ही में नियुक्ति की गई है। शासकीय विभागों के प्रमुख निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरण के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए प्रदेश में पहली बार कार्य प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार का एक नवाचारी प्रयास है। इसमें सभी नये पदाधिकारियों को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन की रीति-नीति, नियम-कायदे और वित्त प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देकर सभी से प्रदेश के विकास के लिए काम करने की अपील की।

 

दिल्ली में दिखेगी दुनिया की सबसे ताकतवर तिकड़ी! BRICS मंच पर साथ नजर आ सकते हैं मोदी, पुतिन और जिनपिंग

नई दिल्ली

दुनिया बहुत जल्द दिल्ली की धमक देखने वाली है. भारत में ब्रिक्स के मंच से नया वर्ल्ड ऑर्डर दिखेगा. पश्चिम एशिया तनाव के बीच एक ही मंच पर दुनिया की सबसे मजबूत तिकड़ी दिखेगी. जी हां, हम बात कर रहे हैं पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की. सितंबर महीने में ब्रिक्स समिट होने वाली है. यह ब्रिक्स समिट नई दिल्ली में होगी. इस ब्रिक्स समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो फिर दुनिया को ब्रिक्स के मंच से नया मैसेज जाएगा. ब्रिक्स के मंच से एक नया गठजोड़ आकार लेगा। 

रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा कन्फर्म है. खुद रूसी साइड ने भी इसकी घोषणा कि है कि पुतिन सितंबर में ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. अब तक शी जिनपिंग को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है. हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। 

शी जिनपिंग आएंगे भारत!
सूत्रों की मानें तो रूस और चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि उनके नेता इस सम्मेलन में आने की संभावना है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने व्लादिमीर पुतिन की ब्रिक्स समिट में उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी SCO सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। 

क्यों अहम है जिनपिंग का भारत दौरा
अगर शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में आते हैं तो यह बड़ी खबर होगी. दुनिया के लिए भी एक मैसेज होगा. अमेरिका के कान खड़े हो जाएंगे. वैसे भी डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स से बहुत जलते हैं. वह ब्रिक्स को मजबूत होता नहीं देखना चाहते. वह ब्रिक्स की ताकत से डरते हैं. वह ब्रिक्स को लेकर काफी जहर उगल चुके हैं. ऐसे में अगर ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की तिकड़ी दिखती है तो पूरी दुनिया में खलबली मचेगी। 

अब सुधरने लगे रिश्ते
वैसे भी चीन और भारत के जिस तरह से रिश्ते उठा-पटक वाले रहे हैं, ऐसे में शी जिनपिंग का ब्रिक्स समिट में शामिल होना, बड़ी बात होगी. सबसे अधिक चर्चा जिनपिंग के भारत दौरे की ही होगी. शी जिनपिंग का अक्टूबर 2019 के बाद भारत का पहला दौरा होगा. 2019 में जब वह भारत आए थे, तब वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में पीएम मोदी से मिले थे.
हालांकि, भारत और चीन के बीच रिश्ते अप्रैल-मई 2020 में सीमा पर गतिरोध शुरू होने के बाद बिगड़ गए थे. गलवान संघर्ष ने दोनों देशों के बीच दूरी और बढ़ा दी. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान हुई थी. तब पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था। 

भारत-चीन रिश्तों में सुधार
    पिछले डेढ़ साल में भारत और चीन ने संबंधों को स्थिर करने में काफी प्रगति की है. इसमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा जारी करना, चीनी कंपनियों पर लगी पाबंदियों में ढील और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली शामिल है। 

    हालांकि, एलएसी पर अभी भी 50,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं. सैनिकों की वापसी और तनाव कम करने की प्रक्रिया अब भी जारी है। 

    पिछले हफ्ते ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी. उसी में चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे की पटकथा लिखी गई है। 

 

CAA नियमों में बड़ा बदलाव, पाकिस्तान-बांग्लादेश से हिंदुओं की भारत एंट्री पर सख्ती

कोलकाता/ नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक नया नोटिफिकेशन जारी कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक आवेदकों के लिए अतिरिक्त खुलासे अनिवार्य कर दिए. अब इन देशों से भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को यह बताना होगा कि उनके पास इन देशों का कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट है या नहीं. अगर पासपोर्ट है, तो उसकी पूरी जानकारी देनी होगी और भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिन के भीतर उसे सरेंडर भी करना पड़ेगा। 

गृह मंत्रालय के इस फैसले को CAA प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें कुछ आवेदकों के पास पुराने या अमान्य विदेशी पासपोर्ट पाए गए. भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता और दो पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं है. ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत की नागरिकता मिलने के बाद कोई व्यक्ति दूसरे देश की पहचान या दस्तावेज का इस्तेमाल न कर सके। 

CAA का क्या है नया नियम?
नए नियमों के मुताबिक, हर आवेदक को शपथ पत्र के जरिए यह घोषित करना होगा कि उसके पास पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सरकार की ओर से जारी कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट नहीं है. अगर किसी के पास ऐसा दस्तावेज है, तो उसे पासपोर्ट नंबर, जारी करने की जगह, जारी होने की तारीख और एक्सपायरी डेट जैसी पूरी जानकारी देनी होगी. इसके बाद नागरिकता मंजूर होने पर 15 दिनों के भीतर वह पासपोर्ट संबंधित देश के दूतावास या उचित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा। 

क्यों हुआ यह बदलाव?
दरअसल 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता आसान बनाना था. इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय शामिल हैं. केंद्र सरकार ने 2024 में इस कानून को लागू करने के लिए नियम अधिसूचित किए थे और अब उन्हीं नियमों में संशोधन कर यह नई शर्त जोड़ी गई है। 

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है. अधिकारियों के अनुसार, कई बार देखा गया कि आवेदक भारत में नागरिकता की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पुराने विदेशी दस्तावेज अपने पास रखते हैं. इससे पहचान, यात्रा और कानूनी स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है. ऐसे मामलों को रोकने के लिए अब सरकार ने पासपोर्ट सरेंडर को अनिवार्य बना दिया है। 

क्या होगा असर?
ये नई अधिसूचना ऐसे समय आई है जब भारत की सीमाओं पर अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और नागरिकता से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं. खासकर बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले लोगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सतर्क रही हैं. ऐसे में सरकार अब नागरिकता प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और खुलासे को ज्यादा सख्त बनाना चाहती है। 

इस नए नियम के बाद CAA के तहत आवेदन करने वालों की जांच प्रक्रिया और लंबी तथा कड़ी हो सकती है. आवेदकों को अब अपने पुराने दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड देना होगा. साथ ही नागरिकता मिलने के बाद विदेशी पासपोर्ट रखने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी। 

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