शहर के कुओं का होगा कायाकल्प, जल संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगी बैंकें

इंदौर 

इंदौर के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शहर के खस्ताहाल और बदहाल हो चुके कुओं को नया जीवन देने और उनके संपूर्ण कायाकल्प के लिए नगर निगम प्रशासन ने छह प्रमुख बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस नई योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित बैंक को शहर के 25 से 30 कुओं को संवारने का जिम्मा उठाना होगा। बैंकों को न केवल इन कुओं की साफ-सफाई और मरम्मत करानी होगी, बल्कि उनका गहरीकरण करने के साथ-साथ नगर निगम द्वारा तय किए गए अन्य सभी आवश्यक कार्य भी पूरे कराने होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी नगर निगम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड के माध्यम से विभिन्न निजी कंपनियों और बैंकों के सहयोग से शहर के कई ऐतिहासिक तालाबों को संवारने का काम बड़े पैमाने पर किया था। 

इस वृहद अभियान की पृष्ठभूमि में नगर निगम की विशेष टीमों द्वारा पिछले दिनों शहर के सभी वार्डों और क्षेत्रों में स्थित कुओं का एक विस्तृत सर्वे किया गया था। इस सर्वे के आधार पर निगम ने एक व्यापक सूची तैयार की थी। इसके बाद शुरुआती चरण में निगम ने अपने संसाधनों से कुछ प्रमुख कुओं को संवारने का काम शुरू भी किया था, लेकिन कई स्थानों पर कुओं के आसपास के हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में भी स्थिति यह है कि शहर के कई पारंपरिक कुएं मकानों और दुकानों के अवैध कब्जों की जद में आकर बेहद दयनीय स्थिति में पड़े हुए हैं। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रबंधन के साथ सिलसिलेवार बैठकों का दौर चला था, जिसमें सर्वसम्मति से शहर के तालाबों और कुओं के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी बैंकों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया।

कनाड़िया, बिजासन और मायाखेड़ी सहित कई तालाबों की भी बदलेगी सूरत
इस जल संवर्धन अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय बैंक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। तय कार्ययोजना के अनुसार, कुछ चुनिंदा बैंकों को कनाड़िया क्षेत्र के दो प्रमुख तालाबों के साथ-साथ अरंडिया, मायाखेड़ी, हुकमाखेड़ी और प्रसिद्ध बिजासन तालाब को संवारने का विशेष दायित्व दिया गया है। बैंकों को इन तालाबों के जल भराव क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उनका गहरीकरण करना होगा, साथ ही तालाबों के किनारों पर मजबूत पाल और आकर्षक पाथ-वे का निर्माण भी कराना होगा। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन जलाशयों के आसपास के खाली हिस्सों में बड़े पैमाने पर सघन पौधारोपण के कार्य भी बैंकों के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। विभिन्न बैंकों और निजी कॉर्पोरेट फर्मों द्वारा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत सीएसआर फंड से इन सभी लोक कल्याणकारी कार्यों के खर्च का वहन किया जाता है। पिछले साल भी इंदौर नगर निगम ने इसी रणनीतिक मॉडल पर काम करते हुए बिलावली और लिम्बोदी सहित शहर के कई बड़े तालाबों के आसपास गहरीकरण से लेकर उनके संपूर्ण सौंदर्गीकरण के कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था, जिसके सकारात्मक परिणाम इस बार देखने को मिल रहे हैं।

मध्य क्षेत्र के कुओं पर रहेगा विशेष ध्यान, रहवासियों को मिलेगा सीधा लाभ
तालाबों के अलावा इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा शहर के कुओं को फिर से जीवित करना है। बैंकों को जो 25 से 30 कुओं को संवारने का काम आवंटित किया गया है, उनमें सबसे अधिक संख्या इंदौर के घने बसे मध्य क्षेत्र के कुओं की है। निगम के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान केवल उन्हीं कुओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जहां पर जीर्णोद्धार और गहरीकरण के बाद भविष्य में पर्याप्त पानी मिलने की पूरी संभावना मौजूद है। इन कुओं के सक्रिय होने से आसपास के रहवासियों को दैनिक उपयोग के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और गर्मियों के दिनों में टैंकरों पर निर्भरता भी काफी कम हो जाएगी। आने वाले कुछ ही दिनों में संबंधित बैंकें निविदाएं आमंत्रित कर या अपने स्तर पर एजेंसियों के माध्यम से इन जमीनी कार्यों की विधिवत शुरुआत कराने जा रही हैं। इस पूरे अभियान के दौरान कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नगर निगम के कुशल अधिकारी और इंजीनियर लगातार साइट्स की मॉनिटरिंग और कड़ा निरीक्षण करेंगे। निगम के अधिकारी समय-समय पर बैंकों की कार्यवाहक टीमों को कार्यों की तकनीकी बारीकियों और आवश्यक सुधारों के बारे में दिशा-निर्देश प्रदान करते रहेंगे ताकि जल संरक्षण का यह व्यापक मिशन पूरी तरह सफल हो सके। 

डाक सेवा में MP का दमदार प्रदर्शन, यूपी-महाराष्ट्र को पीछे छोड़ बना नंबर वन

ग्वालियर

अब चिट्ठियों का दौर भले कम हो गया हो, लेकिन भरोसे की दौड़ में मध्य प्रदेश ने पूरे देश को पीछे छोड़ दिया है। डाक विभाग की ताज़ा रिपोर्ट (वर्ष 2025-26) ने एक ऐसा सच सामने रखा है, जो बड़े-बड़े राज्यों के माथे पर पसीना ला देगा। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और आर्थिक पावर हाउस महाराष्ट्र जैसे धुरंधर जिस काम में फुस्स हो गए, वहां एमपी के डाकघरों ने 100 फीसदी का परफेक्ट स्कोर बनाया है।

डिजिटल इंडिया के शोर के बीच डाक विभाग के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें मध्य प्रदेश ने सर्विस क्वालिटी के मामले में पूरे देश में झंडा गाड़ दिया है। ग्वालियर डाक विभाग के प्रवर अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि, इस रिपोर्ट ने ये साबित कर दिया है कि, बेहतर मैनेजमेंट हो तो कम संसाधनों में भी शत-प्रतिशत परिणाम दिए जा सकते हैं।

एमपी का मैजिक : सभी 10,275 डाकघरों में फुल सर्विस
जारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 10, 275 डाकघर संचालित हैं। रोचक तथ्य ये है कि, राज्य के सभी 10,275 डाकघरों में समस्त डाक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ये आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्रफल में बड़े और डाकघरों की ज्यादा संख्या (17,957) वाले उत्तर प्रदेश में केवल 2,373 डाकघर ही सभी सेवाएं दे पा रहे हैं। विकसित माने जाने वाले महाराष्ट्र में भी 14,037 में से केवल 9,254 डाकघर ही पूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।

देश का हाल : 1.64 लाख डाकघरों का नेटवर्क
पूरे देश की बात करें तो 31 मार्च 2025 तक कुल 1,64,999 डाकघर कार्यरत हैं। इनमें से 1.57 लाख डाकघर वितरण का काम कर रहे हैं। रिपोर्ट का एक और रोचक पहलू रात्रि कालीन डाकघर हैं। पूरे देश में केवल 130 नाइट पोस्ट ऑफिस हैं, जिनमें दिल्ली (23) सबसे आगे है, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसे केवल 5 डाकघर ही संचालित हैं।
फैक्ट फाइल: टॉप 5 डाकघर वाले राज्य

राज्य—-कुल डाकघर——-सभी सेवाएं देने वाले
उत्तर प्रदेश—–17,957—–2,373
महाराष्ट्र—-14,037——9,254
तमिलनाडु—–11,829—–11,829
राजस्थान—–11,042—–10,872

मध्य प्रदेश—–10,275—–10,275(100 फीसदी)

(नोट : तमिलनाडु और मध्य प्रदेश ही ऐसे बड़े राज्य हैं, जहां सभी सेवाएं देने वाले डाकघरों का अनुपात सबसे बेहतर है।)

इसलिए मारक है यह रिपोर्ट

-संख्या में भले ही 5वें पर, पर सर्विस में नंबर-1
डाकघरों की कुल संख्या में मप्र देश में 5वें स्थान पर है, लेकिन सभी सेवाएं देने की प्रतिबद्धता में यह राज्यों का सिरमौर है।

-नाइट पोस्ट ऑफिस में दिल्ली का बोलबाला
रात में जागने वाले डाकघरों के मामले में दिल्ली (23) सबसे आगे है। मध्य प्रदेश में अभी ऐसे केवल 5 केंद्र हैं, जिन्हें बढ़ाने की जरूरत है।

-डिलीवरी का जाल
प्रदेश के 9,986 डाकघर चिट्ठी -पत्री और पार्सल बांटने के मिशन में 24 गुणा 7 जुटे हैं।

ईरान जंग का असर, UAE की चमक फीकी; करोड़ों कमाने वाली इंडस्ट्री का पलायन शुरू

दुबई

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाजार या मिडिल ईस्ट की राजनीति को ही नहीं हिलाया, बल्कि दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब की बुनियाद तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जिस UAE को पिछले कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेंटर माना जाने लगा था, वहां अब शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई विदेशी प्रोफेशनल्स दूसरे देशों में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। 

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में काम कर रहे कई वेस्टर्न एक्सपैट्स अब ग्रीस की राजधानी एथेंस और साइप्रस जैसे देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इसकी वजह यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरा, जहाजों की आवाजाही में रुकावट और युद्ध के लंबे खिंचने का डर बना हुआ है। 

दरअसल, फरवरी में ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग जाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी तरह से समुद्री नियंत्रण लागू कर रहे हैं, जिसकी वजह से करीब 2000 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंस गए. हालांकि इससे ग्लोबल शिपिंग रेट्स में भारी उछाल आया है और कई टैंकर कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन UAE की अर्थव्यवस्था पर इसका उल्टा असर पड़ रहा है। 

जेबेल अली पोर्ट पर कारोबार की रफ्तार धीमी
दुबई का जेबेल अली पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब्स में गिना जाता है, जहां एक जहाज से सामान दूसरे जहाज में ट्रांसफर होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाता है. लेकिन युद्ध और ब्लॉकेड के कारण यहां कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूरे खाड़ी में ये पोर्ट 60% से भी ज्यादा के कार्गो को मैनेज करता है। 

UAE का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट यानी तेल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शिप ओनर ने कहा कि समस्या सिर्फ बिजनेस की नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है. उनका कहना था, “अगर युद्ध बढ़ता है तो क्या दुबई से परिवार को सुरक्षित तरीके से लंदन या पेरिस भेज पाना आसान होगा? यही चिंता लोगों को परेशान कर रही है। 

दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी जंग की मार
युद्ध का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले महीनों में दुबई की हजारों प्रॉपर्टी एजेंसियां बंद हो सकती हैं. कई छोटी कंपनियां, जो तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट और सट्टेबाजी वाले निवेश पर निर्भर थीं, अब टिक नहीं पा रही हैं। 

कोविड के बाद दुबई ने दुनिया भर के निवेशकों, क्रिप्टो कारोबारियों और अमीर प्रोफेशनल्स को आकर्षित किया था. टैक्स में छूट, आसान नियम और तेज ग्रोथ ने इसे ग्लोबल फाइनेंस हब बना दिया था. लेकिन अब ईरान जंग ने पहली बार इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है। 

हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE के पास अभी भी मजबूत आर्थिक संसाधन हैं और दुबई पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, लेकिन यह साफ हो गया है कि होर्मुज संकट और क्षेत्रीय युद्ध ने खाड़ी की सबसे चमकदार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 

शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में शामिल होंगे CM डॉ. मोहन यादव, चुनरी अर्पित करेंगे

उज्जैन

उज्जैन में प्रतिवर्ष गंगा दशहरा होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में 26 मई को सीएम मोहन यादव शिप्रा नदी के तट पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसको लेकर भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक मंडल में तय हुआ कि शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 25 मई को प्रातः 9:00 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा एवं धर्म ध्वजा के पूजन के साथ प्रारंभ होगी। परिक्रमा का समापन 26 मई गंगा दशहरा के अवसर पर शाम 5:00 बजे मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित कर किया जाएगा।

जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा विगत कईं वर्षों से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। यात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण के लिए की गई थी। इस वर्ष 25 मई को यात्रा का शुभारम्भ मोक्षदायिनी मां शिप्रा के राम घाट पर पूजन से होगा।

यात्रा वापस 26 मई को पहुंचेगी
यात्रा जिले में नर्सिंह घाट, लालपुल से त्रिवेणी होकर शहर के मार्गों से निकलकर वापस रामघाट 26 मई को पहुंचेगी। साथ ही 26 मई ,गंगा दशहरा को यात्रा के समापन अवसर पर राम घाट पर गंगा दशहरा उत्सव आयोजित किया जाएगा।

इस वर्ष भी परिक्रमा को सफल, भव्य बनाने तथा श्रद्धालुओं की सेवा हेतु कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा की तैयारी एवं व्यवस्थाओं के संदर्भ में भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

सीएम मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी करेंगे अर्पित
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि गंगा दशमी के अवसर पर आयोजित शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे।

मैथिली ठाकुर और इंडियन नेवी बैंड की प्रस्तुति
26 मई को आयोजित मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) बैंड की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका Maithili Thakur अपने साथियों के साथ भजनों की प्रस्तुति देंगी।

भारत भवन में होगा ‘सदानीरा समागम’
भोपाल स्थित भारत भवन में 27 मई से दो जून तक आयोजित होने वाले सदानीरा समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञान समूह के निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। 

जल संरक्षण में बना जनभागीदारी का रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी श्रीराम मिवारी ने बताया, “मध्य प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर चल रहे अभियान के तहत अब तक 1 लाख 77 हजार से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं. तालाब, कुएं, बावड़ियां और नदियों के संरक्षण के साथ लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है. यह अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का बड़ा आंदोलन बन चुका है। 

उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा से होगी शुरुआत
श्रीराम तिवारी के अनुसार, मुख्य आयोजन से पहले 25 और 26 मई को उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा निकाली जाएगी. यह यात्रा रामघाट से शुरू होकर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों से गुजरेगी. इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे. इस दौरान लोकगायिका मैथिली ठाकुर, भारतीय नौसेना बैंड और कई प्रसिद्ध कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. आयोजकों के अनुसार, पिछले 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब जल संरक्षण आंदोलन की प्रेरणा बन रही है। 

भारत भवन में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ
तिवारी ने बताया कि भोपाल के भारत भवन में होने वाले सदानीरा समागम में देश-विदेश के वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, नीति विशेषज्ञ और संस्कृति जगत की हस्तियां शामिल होंगी. इसमें फिजी, नेपाल, मैक्सिको, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित 9 देशों के राजदूत और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे. इस कार्यक्रम में इसरो के वैज्ञानिकों से लेकर कार्पाेरेट संस्थानों के प्रतिनिधि भी जल संरक्षण पर अपने विचार रखेंगे। 

पंचमहाभूतों पर होगा गहन मंथन
सदानीरा समागम में जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि तत्वों पर अलग-अलग वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे. इसमें मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह सहित कई विशेषज्ञ जल संकट, भूगर्भीय जल, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण पर चर्चा करेंगे. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल सांस्कृतिक मंच नहीं बल्कि जल और प्रकृति को लेकर गंभीर चिंतन का अवसर होगा। 

संस्कृति, फिल्म और लोककला का अनूठा संगम
श्रीराम तिवारी ने आगे बताया, “हर शाम भारत भवन में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगीत, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां होंगी. इस दौरान प्रवाह फिल्म समारोह के तहत जल संकट और पर्यावरण पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अलावा जल, जंगल और जीवन विषय पर चित्रकला कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जल विषयक पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। 

भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज 81 लोग डॉग बाइट का शिकार; सुप्रीम कोर्ट सख्त

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन आसान नहीं दिख रहा। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन शहर में एक भी डॉग शेल्टर नहीं है। अगले कुछ महीनों में इसके बनने की उम्मीद भी नहीं है।

आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर निगम पिछले पांच साल में 8.5 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। फिर भी रोजाना डॉग बाइट के शिकार करीब 81 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। 15 शिकायतें निगम में रोज आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। रात के समय कई इलाकों में बाइक सवारों और पैदल लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है।

शेल्टर होम होगा आवारा श्वानों का ठिकाना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने नवंबर 2025 में जारी पुनर्वास और नसबंदी संबंधी निर्देशों को प्रभावी बताते हुए कहा है कि इनका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।

810 नो डॉग जोन बनने थे, पर यहां से एक भी कुत्ता नहीं हटा
पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों समेत 810 सार्वजनिक जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा था कि यहां से कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ता नहीं हटाया गया।

शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा श्वान
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पाती है।

वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस पर 2.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।

इसके बावजूद शहर में श्वानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंसक और संक्रमित श्वानों पर नियंत्रण की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

इन इलाकों में ज्यादा खतरा अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात में कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है।

600 कुत्तों की क्षमता, डॉग सवा लाख जानकारी के अनुसार नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। तीनों की कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। यहां रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है।

अब तक इतनी नसबंदी पिछले 5 साल में नगर निगम ने नसबंदी और टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए खर्च किए। इस दौरान 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन शहर में डॉग बाइट और आवारा कुत्तों की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं।

इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे।

शहर में तीन एबीसी सेंटर संचालित
फिलहाल भोपाल में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक सेंटर की क्षमता करीब 150 श्वानों की है।

नगर निगम की टीमें रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी और उपचार के लिए इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं।

एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं।

9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है।

देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई।

गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।

इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना जरूरी है, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।

रुपये को संभालने के लिए RBI की तैयारी, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

नई दिल्‍ली
डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गिरावट को थामने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी भी केंद्रीय बैंक कर सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में बैठकें की हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तमाम कड़े विकल्पों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। 

इस सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने केंद्रीय बैंक की नींद उड़ा दी है. रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी में खूब काम आ सकती है. केंद्रीय बैंक इस विकल्प पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है. आरबीआई की अगली एमपीसी मीटिंग 5 जून से शुरू होगी, लेकिन संकट की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक तय कार्यक्रम से पहले भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर दरों में बदलाव कर सकता है. इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई तय शेड्यूल से अलग जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ा चुका है। 

लोन हो जाएंगे महंगे
यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज महंगा मिलेगा. नतीजा यह होगा कि कमर्शियल बैंक भी आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे, जिससे आम आदमी पर मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा। 

2013 वाले फॉर्मूले की तैयारी
रुपये में गिरावट की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है. हालांकि, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और बैंकिंग प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर है, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते यह मजबूती विनिमय दर (Exchange Rate) में दिखाई नहीं दे रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई साल 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान आजमाए गए फॉर्मूले को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है. उस समय भी रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय बैंकों के माध्यम से एनआरआई (NRI) जमा योजनाएं शुरू की गई थीं। 

रुपये की सेहत सुधारने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आरबीआई इस बार बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की प्लानिंग कर रहा है. आरबीआई का अनुमान है कि अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष डिपॉजिट स्कीम लाकर इस बार लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं, जबकि 2013 के संकट के दौरान इसके जरिए 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे। 

इन पर भी हो रहा विचार
डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अतिरिक्त करेंसी स्वैप एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. संप्रभु डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार की मदद से डॉलर बॉन्ड जारी करने पर भी विचार हो रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार को लेना होगा। 

बंगाल में ममता को अपने ही वार्ड में झटका, शुभेंदु आगे निकले, EC के आंकड़ों से बड़ा खुलासा

 कोलकाता

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट के 73 नंबर वार्ड में हुए मतदान में बीजेपी ने अपना दबदबा साबित किया है. 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में इस वार्ड के अंतर्गत कुल 14,179 वोट डाले गए थे. आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी को 8,932 वोट मिले, जिनका प्रतिशत 62.99 रहा. दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस को सिर्फ 4,284 वोट यानी 30.21 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. भवानीपुर के इसी वार्ड में ममता बनर्जी का कालीघाट स्थित आवास भी आता है, जिसके कारण यह परिणाम राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला साबित हुआ है। 

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वार्ड 73 के कुल 26 बूथों (पार्ट संख्या 200 से 225) पर मतदान हुआ था. हर बूथ पर बीजेपी की पकड़ मजबूत नजर आई। 

अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस और सीपीआई (एम) को बहुत कम वोट हासिल हुए. जहां कांग्रेस को सिर्फ 0.99 फीसदी वोट मिले, वहीं सीपीआई (एम) 4.02 प्रतिशत पर सिमट गई. इस वार्ड में बीजेपी की 32.78 फीसदी की भारी लीड ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार भवानीपुर के स्थानीय निवासियों का रुझान पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में रहा। 

15 हजार वोटों से हारीं थीं ममता 
बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता के भवानीपुर से ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था. शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15,000 वोटों के अंतर से हराया. कुल 293 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की। 

‘दिल्ली की सत्ता से बीजेपी को हटाया जाएगा…’
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी को जल्द ही दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा. वहीं, उनके भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह किसी भी तरह की धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। 

अपने आवास पर TMC विधायकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बनी बीजेपी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों और सड़क किनारे ठेले लगाने वालों (हॉकर्स) को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है. हॉकर्स के ठेलों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है। 

ममता ने सूबे के तमाम हिस्सों में हाल के दिनों में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा की घटनाओं और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा। 

सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया, “यह सरकार हमारे संवैधानिक आदर्शों और मूल्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है. आने वाले दिनों में बीजेपी को दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा। 

शुभेंदु के रडार पर ममता की पार्टी के कई नेता; देखें लिस्ट

 पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कस गया है। राज्यभर में जारी एक अभियान के तहत टीएमसी के कई हाई-प्रोफाइल मंत्रियों, विधायकों, उनके रिश्तेदारों और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इन नेताओं पर वित्तीय हेराफेरी, जबरन वसूली, रंगदारी, अवैध हथियार रखने, चुनाव बाद हुई हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम पूर्व राज्य मंत्री और टीएमसी नेता सुजीत बोस का है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया है। वहीं, संदेशखाली के निलंबित और विवादित टीएमसी नेता शेख शाहजहां को भी कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। शाहजहां पर बड़े पैमाने पर जमीन हड़पने, महिलाओं के खिलाफ हिंसक अत्याचार करने और ईडी अधिकारियों पर हमला करने का मुख्य आरोप है। वर्तमान में वह पुलिस की गिरफ्त में है और उसके खिलाफ व्यापक स्तर पर मुकदमा चलाया जा रहा है।

ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां
यह कार्रवाई केवल शीर्ष नेताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिला और पंचायत स्तर पर भी भारी धरपकड़ जारी है। टीएमसी के एक विधायक के बेटे के पास विदेशी हथियार मिले हैं। दक्षिण 24 परगना जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बिश्नुपुर से टीएमसी विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक विदेशी पिस्तौल और अवैध कारतूस बरामद किए गए हैं। वहीं, मालदा के रतुआ ब्लॉक में टीएमसी द्वारा संचालित बिलाइमारी पंचायत की प्रधान स्मृतिकणा मंडल और उनके पति अनिल मंडल को एक स्थानीय सहकारी बैंक से लगभग 13 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

हिंसा और रंगदारी के मामले
कूचबिहार ब्लॉक नंबर 1 समिति के टीएमसी अध्यक्ष अब्दुल कादर हक को राजनीतिक विरोधियों पर हमले, तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, फाल्टा पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान, सरजीत विश्वास और राजदीप दे को भी रंगदारी और जानलेवा हमले के आरोपों में हिरासत में लिया गया है।

लिस्ट में किनके नाम?
इस सबके बीच कई प्रमुख टीएमसी नेता गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहे हैं। बिश्नुपुर के टीएमसी विधायक दिलीप मंडल अपने बेटे के हथियार मामले और एक अन्य आपराधिक जांच में नाम आने के बाद से लापता हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। दिनहाटा के पूर्व टीएमसी विधायक उदयन गुहा भी हालिया चुनाव के बाद से ही इलाके से गायब हैं और पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए ढूंढ रही है।

इस बड़े एक्शन के बाद बंगाल के कई हिस्सों में सालों से दबा जनता का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। कई पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं और जमीनी हालात इतने बदल चुके हैं कि गुस्से को देखते हुए कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को लोगों से वसूली गई रंगदारी की रकम वापस लौटानी पड़ रही है।

 

 

PF निकालना अब होगा बेहद आसान, UPI से सीधे खाते में आएगा पैसा

नई दिल्ली

अगर आप नौकरी करते हैं और PF का पैसा निकालने के लिए लंबा इंतजार और झंझट से परेशान रहते हैं, तो जल्द आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। EPFO मेंबर्स जल्द UPI के जरिए सीधे अपने बैंक खाते में PF का पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। जिससे PF का पैसा बैंक अकाउंट में आसानी से ट्रांसफर हो सकेगा। माना जा रहा है कि पूरा प्रोसेस सिर्फ 3 आसान स्टेप में पूरा हो जाएगा और यूजर्स को कई दिनों तक इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।

अभी PF निकालने के लिए EPFO पोर्टल पर Claim डालना पड़ता है और पैसा आने में समय लगता है। लेकिन नए UPI आधारित सिस्टम के आने के बाद Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद से पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच सकता है। इससे खासकर उन लोगों को बड़ा फायदा होगा, जिन्हें इमरजेंसी में तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है।

नई सुविधा के आने से यूजर्स को होंगे ये फायदे भी EPF सब्सक्राइबर्स अपने अकाउंट में उपलब्ध Withdrawal Balance देख सकेंगे, यानी कितना पैसा निकाल सकते हैं इसकी जानकारी सीधे मिल जाएगी। इसके बाद यूजर्स अपने बैंक अकाउंट से लिंक UPI ID और UPI PIN की मदद से ट्रांजैक्शन पूरा कर सकेंगे। इससे पैसा सुरक्षित तरीके से सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा।

UPI के जरिए PF का पैसा निकालने का 3 स्टेप प्रोसेस

Step 1: सबसे पहले EPFO Portal या UMANG App में अपने UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से Login करना होगा। इसके बाद KYC और बैंक डिटेल्स चेक करनी होंगी। यहां आपको UPI ID लिंक करने का ऑप्शन भी मिल सकता है।

Step 2: अब PF Withdrawal या Claim सेक्शन में जाकर जितनी राशि निकालनी है, उसे चुनना होगा। इसके बाद अपनी UPI ID दर्ज करके OTP या वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरा करना पड़ सकता है।

Step 3: वेरिफिकेशन और अप्रूवल पूरा होने के बाद PF का पैसा सीधे आपके UPI से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर हो सकता है। यानी Google Pay, PhonePe, Paytm या दूसरे UPI ऐप से जुड़े अकाउंट में पैसा जल्दी पहुंच सकता है। हालांकि अभी तक EPFO ने आधिकारिक तौर पर किसी खास ऐप का नाम नहीं बताया है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सुविधा करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

इन बातों का रखना होगा ध्यान

1. EPFO में Aadhaar, PAN और Bank Account KYC पूरी होनी चाहिए।

2. मोबाइल नंबर UAN से लिंक होना जरूरी है।

3. UPI ID उसी बैंक अकाउंट से जुड़ी होनी चाहिए, जो EPFO में दर्ज है।

4. गलत जानकारी होने पर Claim अटक सकता है।

हमजा बुरहान भी ढेर, पाकिस्तान में छिपे भारत के दुश्मनों का लगातार हो रहा सफाया

नई दिल्ली
 पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है । इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं। 

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत?

भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया । 

लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला?

पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था। 
मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया?

जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था। 

पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ?

साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था। 

ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई?

लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था। 

यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट

    मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा.
    हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद.
    जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान.
    दाऊद इब्राहिम कास्कर.
    वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा.
    लखबीर सिंह उर्फ रोडे.
    रंजीत सिंह उर्फ नीता.
    परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़.
    भूपिंदर सिंह भिंडा.
    गुरमीत सिंह बग्गा.
    गुरपतवंत सिंह पन्नून.
    हरदीप सिंह निज्जर.
    परमजीत सिंह उर्फ पम्मा.
    साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम.
    यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई.
    अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की.
    शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह.
    फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू.
    अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर.
    इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ.
    यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम.
    शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन.
    सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग.
    गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद.
    जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद जफर खान उर्फ मौलवी उर्फ खुर्शीद इब्राहिम.
    रियाज इस्माइल शाहबांदरी उर्फ शाह रियाज अहमद उर्फ रियाज भटकल उर्फ मोहम्मद रियाज उर्फ अहमद भाई उर्फ रसूल खान उर्फ रोशन खान उर्फ अजीज.
    मोहम्मद इकबाल उर्फ शाहबांदरी मोहम्मद इकबाल उर्फ इकबाल भटकल.
    शेख शकील उर्फ छोटा शकील.
    मोहम्मद अनीस शेख.
    इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मेमन उर्फ मुश्ताक उर्फ सिकंदर उर्फ इब्राहिम अब्दुल रजाक मेमन उर्फ मुस्तफा उर्फ इस्माइल.
    जावेद चिकना उर्फ जावेद दाऊद टेलर.
    हाफिज तलहा सईद.
    मोहिउद्दीन औरंगजेब आलमगीर उर्फ मकतब अमीर उर्फ मुजाहिद भाई उर्फ मोहम्मद भाई उर्फ एम. अम्मार उर्फ अबू अम्मार मैडम उर्फ औरंगजेब अंजार उर्फ मौलाना अम्मार मदनी उर्फ मौलाना अम्मार उर्फ अबू अम्मार उर्फ अम्मार अल्वी.
    अली काशिफ जान उर्फ जान अली काशिफ.
    मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लाट्रम.
    आशिक अहमद नेंगरू उर्फ नेंगरू उर्फ आशिक हुसैन नेंगरू उर्फ आशिक मौलवी.
    शेख साजाद उर्फ शेख सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद अह शेख.
    अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर.
    इम्तियाज अहमद कंदू उर्फ साजाद उर्फ फैयाज सोपोर.
    शौकत अहमद शेख उर्फ शौकत मोची.
    बासित अहमद रेशी.
    हबीबुल्लाह मलिक उर्फ साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह उर्फ नूमी उर्फ नुमान उर्फ लंगड़ा.
    बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम.
    इर्शाद अहमद उर्फ इदरीस.
    रफीक नाई उर्फ सुल्तान.
    जफर इकबाल उर्फ सलीम उर्फ जमालदीन उर्फ शमशेर नाई उर्फ शमशेर खान.
    बिलाल अहमद बेग उर्फ बाबर.
    शेख जमील-उर-रहमान.
    एजाज अहमद अहंगर.
    मोहम्मद अमीन खुबैब.
    अरबाज अहमद मीर.
    डॉ. आसिफ मकबूल डार.
    अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डला.
    हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा.
    लखबीर सिंह उर्फ लांडा.
    सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार.
    मोहम्मद कासिम गुज्जर उर्फ सलमान उर्फ सुलेमान.

UAPA की लिस्ट के कौन-से आतंकी मारे जा चुके हैं?

यूएपीए लिस्ट में शामिल कुल 57 मोस्ट वांटेड आतंकियों में से कई बड़े नाम पिछले कुछ समय में ढेर किए जा चुके हैं. इनमें से अधिकतर आतंकियों को पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने अपनी गोली का शिकार बनाया, जबकि कुछ अन्य देशों में मारे गए.

नंबर 6. लखबीर सिंह उर्फ रोडे: खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट का यह टॉप आतंकी पाकिस्तान में छिपा बैठा था. दिसंबर 2023 में पाकिस्तान के लाहौर में बीमारी (हार्ट अटैक) के कारण इसकी मौत की रिपोर्ट सामने आई थी.

नंबर 8. परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़: खालिस्तान कमांडो फोर्स का चीफ, जो लंबे समय से पाकिस्तान में शरण लिए हुए था. 6 मई 2023 को लाहौर की जौहर टाउन सोसाइटी में सुबह की सैर के दौरान दो अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने इसे गोलियां मारकर ढेर कर दिया.

नंबर 12. हरदीप सिंह निज्जर: खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ का चीफ. 18 जून 2023 को कनाडा के सरे शहर में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में अज्ञात हमलावरों ने इसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

नंबर 22. शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई: साल 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड. अक्टूबर 2023 में पाकिस्तान के सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने इसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया.

नंबर 38. अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान: साल 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले का मुख्य साजिशकर्ता और अल बदर का आतंकी. हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने इसे कई गोलियां मारकर जहन्नुम पहुंचा दिया.

नंबर 43. बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम: हिजबुल मुजाहिद्दीन का टॉप कमांडर, जो कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने का इंचार्ज था. फरवरी 2023 में पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर अज्ञात हमलावरों ने इसे पॉइंट ब्लैंक रेंज पर गोली मारकर ढेर कर दिया था.

इस तरह भारत सरकार की इस लिस्ट में शामिल कम से कम 6 बड़े और खूंखार आतंकी अब तक मारे जा चुके हैं. अधिकतर का अंत ‘अज्ञात हमलावरों’ की गोलियों से हुआ है.

 

India on Alert: दुनिया की जंग का असर भारत पर क्यों? संकट के पीछे ये 4 बड़े कारण

नई दिल्ली

भारत आर्थिक तौर पर संकट के दौर से गुजर रहा है. कारण सबको पता है, मिडिल-ईस्ट में तनाव. हालात ये हैं कि भारत के लोग सुबह उठकर सबसे पहले नजर डालते हैं कि दुनिया में कच्चा तेल और युद्ध को लेकर क्या अपडेट्स हैं। 

दरअसल, दुनिया के किसी कोने में कोई मिसाइल दागता है, दो देश आपस में टकराते हैं, या कोई बड़ा देश कमजोर देश पर पाबंदियां लगाता है, तो उसकी सीधी मार भारत की जेब पर पड़ती है. यानी करे कोई, और भुगते कोई. यह सिस्टम हर भारतीय को चुभता है। 

रूस-यूक्रेन का युद्ध हो, या फिलहाल अमेरिका और ईरान की जंग. तबाही का मंजर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा है? जबकि इस दौरान अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बना हुआ है, भारत का बाजार ही पस्त नहीं है, बल्कि जीडीपी की रफ्तार थमने वाली है। 

अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों दुनिया की हर जंग का बिल भारत को चुकाना पड़ता है, इसके पीछे के असली कारण क्या हैं और इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता क्या है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, और इसके पीछे कोई इत्तेफाक है, मुख्यतौर पर फिलहाल 4 कारण सामने दिख रहे हैं। 

1. कच्चा तेल (भारत की मजबूरी)
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी एक तरह से भारत की इकोनॉमी तेल पर टिकी है. जब भी पश्चिम एशिया में तनाव होता है, हॉर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर संकट आता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, और भारत कुछ नहीं कर पाता है। 

जबकि अमेरिका का गणित अलग है. अमेरिका अब सिर्फ तेल खरीदता नहीं है, वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. जब तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होता है, यानी ऐसे संकट में भी अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता. जबकि भारत के डॉलर पानी की तरह बहने लगते हैं. इसे अर्थशास्त्र की भाषा में ‘आयातित महंगाई’ कहते हैं, यानी महंगाई बढ़ने के कारण विदेशी फैसले होते हैं। 

2. डॉलर की दादागीरी
दुनिया में व्यवस्था ऐसी है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो ग्लोबल इंवेस्टर्स अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए डॉलर खरीदने भागते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर पड़ जाता है. मौजूदा दौर में पिछले करीब 2 महीने से यही हो रहा है. रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है कि जो तेल दो महीने पहले महज 70-75 डॉलर प्रति बैरल में खरीद रहे थे, अब उसके लिए 100 डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है. एक तो कच्चा तेल का महंगा होना, और फिर रुपया का कमजोर पड़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरी चोट पहुंचाता है. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। 

3. शेयर बाजार का गणित
वैश्विक तनाव के दौरान हमेशा भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, और उसकी वजह भी विदेशी निवेशक (FII) ही होते हैं. जबकि ऐसे संकट के समय में अमेरिका बच जाता है. क्योंकि अमेरिका को दुनिया का ‘सेफ हेवन’ माना जाता है. जैसे ही दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, विदेशी निवेशक भारत जैसे ‘इमर्जिंग मार्केट्स’ से अपना मुनाफा समेटते हैं और उस पैसे को निकालकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स या अमेरिकी शेयर बाजार में लगा देते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि भारत का बाजार गिर जाता है और अमेरिका का बाजार मजबूती से डटा रहता है। 

4. तनाव का एक्सपोर्ट पर सीधा असर
भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजें एक्सपोर्ट करता है. लेकिन जब समुद्री रास्तों पर युद्ध का साया होता है, तो एक्सपोर्ट बाधित हो जाता है, या फिर जहाजों की आवाजाही दूसरे लंबे रूटों से करनी पड़ती है. इससे जहाजों का किराया और इंश्योरेंस का प्रीमियम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है. फिर विदेशी बाजारों में पहुंचते-पहुंचते इनमें आयात किया जाने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है, प्रोडक्ट महंगा होने की वजह से बिक्री घट जाती है. यानी कुल मिलाकर एक्सपोर्ट ठप पड़ जाता है और देश में आने वाली विदेशी करेंसी कम हो जाती है। 

जब ये सारे संकट एक साथ आते हैं, तो देश की विकास दर यानी जीडीपी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि घरेलू मोर्चे पर किसी तरह का कोई संकट नहीं होता है. केवल एक तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है. जिससे सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं. फिर महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं. ब्याज दरें बढ़ते ही होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं। 

फिर जब लोन महंगा होगा और जेब में पैसा कम बचेगा. आम आदमी नया घर, गाड़ी या मोबाइल चाहकर भी नहीं खरीद पाएगा. जब लोग नहीं खरीदेंगे तो फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा. फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा, तो नई नौकरियां नहीं आएंगी. जिससे जीडीपी की रफ्तार अपने आप सुस्त पड़ जाएगी। 

इस चक्रव्यूह से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए?
ये तो साफ है कि इस संकट के लिए दुनिया को कोसने से कुछ नहीं होगा. भारत को अगर वाकई में आत्मनिर्भर बनना है, तो कुछ मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। 

ऊर्जा पर विदेशी निर्भरता कम 
जब तक हम तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहेंगे, हमारी नब्ज उनके हाथ में रहेगी, और ऐसे झटके लगते रहेंगे. हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को तेजी से कम करना होगा. गाड़ियों को इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करना और पेट्रोल में E30 यानी 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाना होगा. सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में भारत को इतनी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी कि हमें बाहर से कच्चा तेल मंगाने की जरूरत सिर्फ पेट्रोकेमिकल्स के लिए पड़े, न कि ईंधन के लिए। 

इसके अलावा भारत को ‘डी-डॉलरइजेशन’ यानी डॉलर की दादागीरी को कम करने की दिशा में सोचना पड़ेगा. रूस, यूएई, ईरान या जिन भी देशों के साथ भारत व्यापार करता है. उनसे सीधे ‘रुपया-रुबल’ या ‘रुपया-दिरहम’ में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देना होगा. अगर भारत कच्चा तेल रुपये में खरीदने में कामयाब हो जाता है, तो दुनिया के किसी भी युद्ध से फॉरेक्स रिजर्व पर कोई आंच नहीं आएगी। 

घरेलू निवेशकों को ‘सुपरपावर’ बनाना
भारतीय शेयर बाजार को मजबूत करना होगा, फिर विदेशी निवेशक आते-जाते रहेंगे, और उसका कोई खास असर नहीं होगा. इसका एक अच्छा उदाहरण ये है कि पिछले करीब एक साल से विदेशी निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं, उसके बावजूद बाजार एक दायरे में बना हुआ है, ये ताकत मार्केट को रिटेल निवेशकों से मिली है। 

‘चाइना प्लस वन’ का पूरा फायदा उठाना होगा
मौजूदा हालात में भारत को सिर्फ सर्विसेज (IT) के भरोसे नहीं बैठना है, ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम्स को और कड़ा करके भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का ऐसा हिस्सा बनाना होगा ताकि दुनिया भारत के बिना चल ही न सके. जब दुनिया की बड़ी कंपनियों के कारखाने भारत में होंगे, तो वैश्विक तनाव के समय भी विदेशी फंड भारत से पैसा निकालने की हिम्मत नहीं करेंगे। 
 

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