दिल्ली के लालकिला मैदान में आदिवासी संगठनों का विशाल प्रदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे

नई दिल्ली 

 देश की राजधानी दिल्ली का लालकिला मैदान आज एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक समागम और प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इस विशाल रैली और सभा में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग, मध्य प्रदेश के रतलाम सहित देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग परंपरागत वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए अंबिकापुर से जनजातीय समाज के लोगों को लेकर दो विशेष ट्रेनें दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं, जबकि हजारों लोग अपने निजी साधनों से भी यहां पहुंचे हैं। अन्य राज्यों से भी लोग पहुंच रहे है।

जनजातीय समाज द्वारा दिल्ली के पांच प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों से एक साथ विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं, जो सीधे लालकिला मैदान पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील होगी। इन रैलियों के रूट इस प्रकार हैं…

  •     राजघाट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     रामलीला मैदान से लाल किला: 2.8 किलोमीटर
  •     अजमेरी गेट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     कुदसिया बाग से लाल किला: 2 किलोमीटर
  •     श्यामगिरी मन्दिर से लाल किला: 3.5 किलोमीटर

गृहमंत्री अमित शाह होंगे शामिल, राष्ट्रपति और पीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन

लालकिला मैदान में आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस प्रदर्शन के माध्यम से देश का मूल जनजातीय समाज राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मतांतरित (धर्म परिवर्तन कर चुके) लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर करने के लिए ‘डिलिस्टिंग’ कानून बनाने की मांग करना है।

 

छत्तीसगढ़ पुलिस को मिली हुई अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन से लैश

रायपुर.

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है।

इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से इसमें वर्चुअली शामिल हुए। उन्होने हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को जिले में सेवा हेतु रवाना किया।

अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा देगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन अधिक प्रभावी होगा।

तकनीकी क्षमता का उठाएं पूरा लाभ
बिलासपुर रेंज के आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित एवं वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का बेहतर उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

निष्पक्ष न्याय में बड़ी भूमिका निभाएगी वैन
मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सभी नागरिकों के लिए न्याय समान है। उन्होंने कहा कि न्याय भेद नहीं करता और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और सटीक जांच में बड़ी मददगार साबित होगी।

आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक एक्सपर्ट सुश्री ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया, साक्ष्य सुरक्षित रखने में बरती जाने वाली सावधानियों तथा मौके पर ही प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही बताया कि अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जांच और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है।

प्रधानमंत्री की बचत अपील का दिखा असर
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बचत’ संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यशाला में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष राजमन सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

सीहोर में 15 दिन की बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

अमलाहा.

बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में नई और पुरानी चंदेरी के ग्रामीणों ने यह अनोखा प्रदर्शन किया। हाथों में मशालें थामे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पटाखे फोड़कर अपना विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच रात में 2 से 3 घंटे तक लगातार दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है। पेयजल संकट और मच्छरों का बढ़ा प्रकोप रात के समय बिजली गुल रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिजली के अभाव में पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इस कारण गांवों में पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहरों को 24 घंटे बिजली, गांवों में अंधेरा प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शहरों को 24 घंटे बिजली देकर ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ दे रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि प्रदेश में बिजली का कोई बड़ा संकट है, तो सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली काटनी चाहिए। बिजली संकट का खामियाजा गरीब किसानों और ग्रामीणों को नहीं भुगतना चाहिए। सीएम से हस्तक्षेप की मांग, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रात्रिकालीन बिजली कटौती तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समझौते की सुगबुगाहट पर ट्रंप तैयार, शहबाज शरीफ ने जमकर लगाया ‘मक्खन’

नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाया जा सकता है और इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और इसके अंतिम पहलुओं तथा विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिसकी जल्द घोषणा की जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि उनके साथ फोन पर अच्छी चर्चा हुई है।

क्या बोले शहबाज शरीफ
शहबाज शरीफ ने कहा, डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किए,एजिप्ट, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान के साथ फोन पर बात की है। पाकिस्तान की ओर से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फोन पर बात की और इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप के अथक प्रयास को सराहा है। इस चर्चा में मध्य एशिया में शांति के प्रसायसों को लेकर सकारात्मक बातचीत की गई है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान अगले चरण की वार्ता के लिए प्रयास करता रहेगा।

होर्मुज से हटाई जाएँगी
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन का मसौदा साझा किया है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए वैध समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा तथा ईरान वहां बिछाई गयी बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा, ताकि जहाजों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को तेल की स्वतंत्र बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ रियायतें देगा।रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ईरान जितनी जल्दी होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाकर जहाजरानी बहाल करेगा, उतनी ही जल्दी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। एक्सियोस ने बताया कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में ईरान की ओर से कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने का प्रावधान मिल है।

स्थिति के जानकार दो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करने और परमाणु सामग्री छोड़ने को लेकर रियायतों के दायरे पर ‘मौखिक आश्वासन’ दिये हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल अगले 60 दिनों तक वहीं बने रहेंगे और यदि तेहरान अंतिम रूप से समझौता स्वीकार कर लेता है तो क्षेत्र से हट जाएंगे। एक्सियोस ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने की स्थिति में अमेरिका 60 दिनों के भीतर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में हिज्बुल्ला और इजरायल के बीच सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है।

बदरीनाथ के पास कंचनगंगा में ग्लेशियर टूटने से हलचल, प्रशासन सतर्क

उत्तराखंड

उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ
पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है।

सर्दियों में कम बर्फबारी
हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है।

आर्थिक और सामाजिक नुकसान
पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा।

सामान्य से अधिक तापमान
पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है।

कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर
डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

अमेरिका की नई ग्रीन कार्ड नीति से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, 12 लाख लोगों पर असर

नई दिल्ली

आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा।

ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका
अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है।

12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि “कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।”

उन्होंने कहा, “पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।”

क्या होता है ग्रीन कार्ड?
ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।

 

सुकमा में नक्सलियों का बड़ा डंप बरामद, हथियार बनाने की सामग्री सुरक्षा बलों ने की नष्ट

सुकमा.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवाद विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सली डंप का खुलासा किया। डंप से हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।

दरअसल, पुलिस और बीडीडीएस टीम आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर पोमके-बिनागुंडा क्षेत्र के जंगलों में विशेष सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान टीम ने जमीन के अंदर छिपाकर रखे गए नक्सली डंप का खुलासा किया। इसी के साथ ही मौके से लेथ मशीन, बीजीएल पाइप, 12 बोर पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरी, ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, जिग सॉ मशीन, प्रेशर पंप, सोलर पैनल और करीब 20 फीट फुटबॉल पाइप सहित अन्य सामग्री बरामद की। अधिकारियों के अनुसार, माओवादी इन उपकरणों का उपयोग हथियार बनाने और सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए करते थे।

पुलिस ने मौके पर ही बरामद सभी सामग्री को नष्ट कर दिया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान पथक और बीडीडीएस जवानों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में माओवाद विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।

बिलासपुर में कबाड़ माफिया की VIP एंट्री! थाने में बैठकर चाय पीते तस्वीर वायरल

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में कबाड़ माफिया को थाने के अंदर VIP खातिरदारी देने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें कबाड़ माफिया अकबर खान कोनी थाने के अंदर चाय पीते हुए नजर आ रहा है।

इस तस्वीर ने पुलिस की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वायरल तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी अकबर खान थाने के भीतर आराम से कुर्सी पर बैठा हुआ है और सामने पुलिसकर्मी उसकी सेवा भाव में नजर आ रहे हैं। इस ‘VIP खातिरदारी’ को देखकर ऐसा कतई नहीं लग रहा कि वह कोई आरोपी है। बंद कमरों में चर्चा तेज है कि कबाड़ माफिया को कोनी पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है। आरोप यह भी है कि हर महीने बंधी रकम के एवज में इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मामले में प्रधान आरक्षक बालेश्वर तिवारी और आरक्षक अनुज जांगड़े की भूमिका पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि महज दो दिन पहले ही बिलासपुर एसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अवैध कबाड़ियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कोनी थाना क्षेत्र में अवतार पैलेस के सामने संचालित इस कबाड़ दुकान पर कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने महज 170 बीएनएस (BNS) के तहत औपचारिक कार्रवाई करके खानापूर्ति कर दी। इस पूरे विवाद पर एडिशनल एसपी (ASP) पंकज पटेल का बयान सामने आया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि आरोपी को कोई VIP ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा था, बल्कि उसे दस्तावेजों की जांच के लिए थाने बुलाया गया था। इसके साथ ही पुलिस ने दावा किया है कि विवादित कबाड़ दुकान को फिलहाल सील कर दिया गया है।

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: 29 से नामांकन शुरू, सदस्यता अब डिजिटल तरीके से

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का ऐलान हो गया है. प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त जसप्रीत सिंह और प्रदेश चुनाव अधिकारी रोशन नेगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम जारी किया. 29 मई से 13 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी.

चुनाव पारदर्शी और समय पर पूरा कराने के लिए 5 जोन बनाकर ZRO नियुक्त किए जाएंगे. ब्लॉक और जिला कमेटियों के लिए नामांकन 29 मई से 13 जून तक भरे जाएंगे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी के लिए 11 जून से 13 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. नामांकन के बाद 15 जून से 18 जून तक स्क्रूटनी की प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद सदस्यता अभियान और चुनाव प्रक्रिया एक साथ ऑनलाइन माध्यम से होगी.

सदस्यता के लिए नियम तय
युवा कांग्रेस में सदस्यता और चुनाव लड़ने के लिए 18 से 35 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है. सदस्यता और शिकायत की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. फर्जी सदस्यता रोकने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य की गई है. आवेदन के साथ 8 सेकेंड का वीडियो भी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें आवेदक को खुद आवेदन से जुड़ी जानकारी देनी होगी. आयु प्रमाण के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या अन्य आईडी प्रूफ जरूरी होंगे.

एक व्यक्ति, एक पद का नियम
चुनाव प्रक्रिया में एक व्यक्ति-एक पद का नियम भी लागू रहेगा. सिर्फ एक पद के लिए ही नामांकन दाखिल करने की अनुमति रहेगी. वहीं नामांकन दाखित करने पर उस उम्मीदवार को पुराने पद से मुक्त माना जाएगा.

दिल्ली में इंटरव्यू के बाद होगी नियुक्ति
युवा कांग्रेस में जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पदों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व जरूरी होगी. दिल्ली में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने इंटरव्यू भी लिया जाएगा.

V-MARC की नई वायर रेंज लॉन्च, बोले विशेषज्ञ — “सुरक्षा और तकनीक का नया दौर शुरू”

विवेक झा, भोपाल। विद्युत और पावर केबल उद्योग की अग्रणी कंपनी V-MARC ने राजधानी भोपाल में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में अपनी अत्याधुनिक वायर रेंज E Beam Cross Linked Flexi TUF HFFR Wire सहित कई नए विद्युत उत्पादों का अनावरण किया। कंपनी ने दावा किया कि यह वायर देश की सबसे सुरक्षित वायर श्रेणी में शामिल है, जो आधुनिक तकनीक और उच्च सुरक्षा मानकों के साथ तैयार की गई है।

कार्यक्रम में भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के 90 से अधिक डीलर्स एवं व्यापारियों ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान कंपनी अधिकारियों ने नई तकनीकों, विद्युत सुरक्षा और वायर उद्योग के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की।

150 डिग्री तापमान पर भी प्रभावी, E-Beam तकनीक बनी खासियत

कंपनी अधिकारियों ने बताया कि नई वायर रेंज में अत्याधुनिक Electron Beam Cross Linked Technology का उपयोग किया गया है। इस तकनीक के कारण वायर का इंसुलेशन अत्यधिक तापमान में भी सुरक्षित और प्रभावी बना रहता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायर लगभग 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम है। यही वजह है कि इसे हाई सेफ्टी और हाई परफॉर्मेंस श्रेणी का उत्पाद माना जा रहा है।

कंपनी का कहना है कि इस तकनीक से वायर की मजबूती, लचीलापन और अग्नि सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। HFFR तकनीक होने के कारण आग लगने की स्थिति में धुआं और जहरीली गैसें भी कम निकलती हैं, जिससे मानव सुरक्षा बढ़ती है।

“तकनीकी नवाचार ही हमारी पहचान”

कार्यक्रम में कंपनी के FMEG नेशनल हेड विनय दामोदर राव, मध्य प्रदेश स्टेट हेड नीरज खटोड़ एवं उनकी टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने कहा कि V-MARC लगातार तकनीकी नवाचार और आधुनिक समाधान विकसित करने के लिए जानी जाती है।

नीरज खटोड़ ने बताया कि कंपनी समय-समय पर अपने उत्पादों में तकनीकी उन्नयन करती रहती है ताकि ग्राहकों को सुरक्षित, आधुनिक और विश्वसनीय उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।

इसी क्रम में कंपनी ने वायर एवं केबल के साथ-साथ स्विचेस, MCBs, फैन, गीजर और स्ट्रीट लाइट जैसे कई नए उत्पाद भी बाजार में उतारे हैं।

हर उत्पाद की कई स्तरों पर जांच

मध्य प्रदेश स्टेट हेड नीरज खटोड़ ने बताया कि किसी भी उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले विभिन्न तकनीकी और गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। प्रत्येक उत्पाद की सुरक्षा, मजबूती और कार्यक्षमता की कई चरणों में जांच की जाती है ताकि अंतिम उपभोक्ता को उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल सके।

व्यापारियों ने भी नई वायर रेंज को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बताते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

कच्चे माल की महंगाई और प्रतिस्पर्धा से जूझ रही वायर इंडस्ट्री

कॉपर और एल्यूमिनियम की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

देश की वायर और केबल इंडस्ट्री इस समय जहां तेजी से बढ़ती मांग का लाभ उठा रही है, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की महंगाई और बढ़ती प्रतिस्पर्धा उद्योग के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

मीडिया से बातचीत में नीरज खटोड़ ने बताया कि कॉपर और एल्यूमिनियम की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से उत्पादन लागत बढ़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं पर पड़ रहा है। सीमित मार्जिन और लंबी क्रेडिट अवधि के कारण कई व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और EV सेक्टर से बढ़ रही मांग

बिजली, रियल एस्टेट, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, स्मार्ट सिटी, डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट्स में तेजी से हो रहे निवेश के कारण वायर और केबल इंडस्ट्री का भविष्य मजबूत दिखाई दे रहा है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से भी उच्च गुणवत्ता वाले वायर और केबल की मांग तेजी से बढ़ रही है।

नकली वायर से सुरक्षा पर खतरा

उद्योग जगत ने बाजार में बिक रहे नकली और घटिया गुणवत्ता वाले वायर को गंभीर चिंता का विषय बताया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे उत्पाद न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि ब्रांडेड कंपनियों की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

व्यापारिक संगठनों ने सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की मांग की है।

“आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा बाजार”

नीरज खटोड़ का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बिजली खपत और औद्योगिक विकास के चलते वायर एवं केबल सेक्टर आने वाले वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज करेगा। नई तकनीक, सुरक्षित उत्पाद और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

पढ़ें देखें प्रोफाइल