प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना, कच्चे घर से पक्के मकान तक पहुंची जिंदगी

रायपुर

प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है। इस योजना के माध्यम से अनेक परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं।

सुशासन तिहार के अंतर्गत बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही मती अनीता निषाद से संवाद किया। आवास  मती निषाद की सास मती सुकलहीन निषाद के नाम से स्वीकृत हुआ है।

मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश और मौसम की मार के कारण घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें कुछ समय तक आंगनबाड़ी केंद्र में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रहा है। उन्होंने कहा कि अब बारिश और अन्य मौसम की चिंता नहीं रहती तथा बच्चों के लिए भी बेहतर वातावरण मिला है।

मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री  साय एवं सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को नया जीवन और नई उम्मीद दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है ताकि कोई भी परिवार असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर न हो।

प्रशासन में एआई के प्रयोग से पारदर्शिता के साथ ही घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान हुआ संभव: सोनमणि बोरा

रायपुर

जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 अंतर्गत आदिम जाति विकास विभाग अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आज राज्य स्तरीय एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आदिम जाति विकास विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कहा कि प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग से पारदर्शिता, समय की बचत एवं घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान संभव हुआ है। छत्तीसगढ़ जनजाति संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक के प्रयोग में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। 
             
प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि एआई का प्रयोग पारंपरिक ज्ञान को संजोने, रिमोट एरिया में स्वास्थ्य सुधार, लघु वनोपजों एवं कृषि मंडियों के डिजिटलीकरण, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं की अधिक सुगमता से जानकारी एवं लाभ इत्यादि में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनजातीय विकास में एआई का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। परन्तु एआई मनुष्य की संवेदनशील मानसिकता की प्रतिकृती नहीं कर सकती है। अतः आवश्यकता एवं उपयोगिता के आधार पर जनजातीय क्षेत्र में एआई का प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सबसे दूर, सबसे पहले के ध्येय वाक्य को सार्थक करना है।
              
 संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी ने कांकेर जेल मे बंद नक्सल आदिवासियों पर किए जा रहे उनके कौशल विकास के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनमें से 08 कैदियों द्वारा वंदे मातरम पर किए गए कार्य को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। उन्होंने सरकार को इनकी प्रतिभा पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि यदि ईमानदारी के साथ कार्य किया जाए तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी से जनजातीय विकास के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। 
              
टीआरटीआई के संचालक मती हीना अनिमेष नेताम ने कार्यशाला के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर अपर संचालक  संजय गौढ़, संयुक्त संचालक मती गायत्री नेताम मौजूद रही। वहीं वीडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास तथा परियोजना प्रशासक जुड़े थे। 
एनआईसी डायरेक्टर के  सत्येश शर्मा ने संगोष्ठी में बताया कि यूज ऑफ टेक्नेलॉजी और सर्विस डिलवरी देना दोनों अलग-अलग तथ्य है और चुनौती भी है। उन्होंने बताया कि टेक्नेलॉजी के क्ष़्ोत्र में गुणवत्तायुक्त डाटा संग्रहण प्रमुख पहलु है। उन्होंने डेटा का वेरिफिकेशन करने के साथ-साथ डेटा की कमी को पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा का सलेक्शन सही नहीं होने पर सर्विस डिलवरी में भी समस्या आएगी। उन्होंने बताया कि अगर डेटा का इनपुट सही नहीं होने से परिणाम बायस्ड् आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि एआई मशीन में आएगा तो सारा डिसीजन मशीन ही लेने लगेगा और हमें रिप्लेस करने की कोशिश करना होगा। 
              
आईआईएम के  अमित कुमार जनजातीय उद्यमिता एवं र्स्टाटअप में एआई का उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने एआई के प्रयोग में स्थानीय लेग्वेंज को सबसे बढ़ी बाधा बताया। उन्होंने वास्तविक परिणाम के लिए बोली-भाषा के ज्ञान पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों में टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक तथा अनेक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता हेतु शासकीय स्तर पर भी अभियान चलाने के सुझाव दिए। 

समर्थन संस्था से  देवीदास निम्जे ने कहा कि यदि हम स्थानीय स्तर पर एक गांव की बात करें तो किसान को खेती के संबंध में सब कुछ पता होता है, किन्तु नई तकनीकी की जानकारी के अभाव में गांव के दो-तीन लोगों पर ही केन्द्रित होना पड़ता है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के लोगों विशेषकर टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करते हुए नेटवर्क बढ़ने पर बल दिया।
             
एनआईटी के डॉ. राकेश त्रिपाठी ने संगोष्ठी में एआई से स्थानीय ज्ञान को बढ़ाने, ज्ञान सैद्धान्तिक इस्तेमाल करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा ज्ञान को सुदृढ़ कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एआई के माध्यम से अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। 
             
आईआईआईटी नवा रायपुर के डॉ. रामाकृष्ण ने ड्रॉपआउट और पास पर्सनल, क्वालिटी ऑफ टीचिंग और लर्निंग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा मेनटेन करने साथ-साथ आम आदमी तक टेक्नोलॉजी की पहंुच पर जोर दिया। उन्होंने एआई युजर को प्रोटेक्ट करने बायस्ड् इंफॉरमेशन न मिले इस पर भी अपना विचार व्यक्त किया। 

              
जनजातीय विशेषज्ञ  अश्वनी कांगे ने “जनजातीय नेतृत्व आधारित सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर अपना वक्तव्य दिया गया।  कांगे अंदरूनी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी की पहुंच पर जोर दिया उन्होंने कहा कि जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को एक टूल में बाधंना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग के हर पहलु जैसे बीजा पण्डुम, कृषि रस्मों-रिवाज में ज्ञान समाहित है, जिस पर वृहद रूप से चर्चा करने की आवश्कता है। 

               
संगोष्ठी अंतर्गत विशेषज्ञों के द्वारा मुख्य रूप से गुणवत्तायुक्त डॉटा के संकलन पर जोर दिया। विशेषज्ञों को मानना है कि किसी विषय पर जितना ज्यादा डेटा उपलब्ध होगा, उतनी ही विश्वसनीयता और सहजता के साथ एआई को डाटा विश्लेषण कर सही प्रमाण देने में ज्यादा सक्षम होगा।

                 
साथ ही एआई की मदद से जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा स्वास्थ्यगत समस्याओं के निवारण में बेहतर कार्य होगा। क्योंकि अंतिम छोर में माने जाने वाले जनजातीय समुदाय से विकास की गति को प्रारंभ करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में उनके ज्ञान को मूल रूप में सहेजते हुए उनकेे विचारों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक मूल्यों और आधुनिक तकनीकों में सामंजस्य बना रहे। संगोष्ठी में शामिल अन्य विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

राजधानी रायपुर को मिली बड़ी सौगात, लाखों लोगों को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में कचना रेलवे ओवरब्रिज का लोकार्पण कर इसे आम जनता को समर्पित किया। साथ ही 22.79 करोड़ रुपये की लागत से बने शंकर नगर-खम्हारडीह-कचना मार्ग के चौड़ीकरण कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह ओवरब्रिज उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कचना रेलवे फाटक में लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई थी, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ओवरब्रिज के शुरू होने से अब लोगों को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुविधा मिलेगी। इससे विशेष रूप से कचना, खम्हारडीह एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की केंद्रीय सड़क निधि योजना के अंतर्गत इस परियोजना को स्वीकृति मिली थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कचना, खम्हारडीह और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए खुशी का दिन है। जनता की वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। अब यहां ट्रैफिक जाम और वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी। इससे कार्यालय, स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापारी एवं व्यवसायियों को भी बड़ी सुविधा होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त निधि के माध्यम से इस ओवरब्रिज का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूर्ण करने के लिए बधाई दी।

उल्लेखनीय है कि इस ब्रिज की लंबाई 787 मीटर एवं चौड़ाई 13 मीटर है तथा 48.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस ओवरब्रिज के बनने से रायपुर शहर की यातायात व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा समय की बचत भी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क, पुल और अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने निर्माण कार्य में जुड़े अधिकारियों एवं एजेंसियों को बधाई देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार अपने कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने के साथ ही सीधे लोगों के बीच जाकर योजनाओं और विकास कार्यों का फीडबैक भी ले रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाकर वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है। वे स्वयं अचानक गांवों में पहुंचकर पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि लोग शासन की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं और राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर क्षेत्र विकास से वंचित रहा, लेकिन अब नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। नियद नेल्लानार 2.0 के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। अब तक 20 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है तथा 55 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है और उसी के अनुरूप सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने कहा कि कचना क्षेत्र में लगभग 25 बड़ी कॉलोनियां स्थित हैं और यह रेलवे ओवरब्रिज इन सभी कॉलोनियों को रायपुर शहर से बेहतर तरीके से जोड़ने में अत्यंत प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि कचना का यह ओवरब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि रायपुर और कचना को जोड़ने वाली जीवनरेखा है। इससे न केवल कचना और आसपास के रहवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बिलासपुर और बलौदाबाजार की ओर आने-जाने वाले लोगों को भी यातायात में बड़ी सुविधा प्राप्त होगी।

 साव ने कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। पहली बार लोक निर्माण विभाग को 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मिली है। राज्य सरकार के गठन के बाद रिकॉर्ड संख्या में पुलों का निर्माण किया गया है। यातायात को सुगम बनाने और प्रदेशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार द्रुतगामी सड़कों का निर्माण कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे गांवों तक भी सड़क पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, जहां आज तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, महापौर मती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, पार्षद मती पुष्पा साहू, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त  संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बरगद के पेड़ के नीचे लगाई चौपाल, सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा स्थित ग्राम कमरौद पहुंचकर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 

बरगद के पेड़ की छांव में आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर यह सुनिश्चित कर रही है कि लोगों को राशन, बिजली, प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाकर समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे अब तक प्रदेश के 16 जिलों का दौरा कर लोगों से सीधे संवाद कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं से महतारी वंदन योजना की जानकारी ली, जिस पर महिलाओं ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से राशि मिल रही है। ग्राम की मती देव कुमारी साहू ने बताया कि वह योजना से मिलने वाली राशि अपनी बेटी के भविष्य के लिए बचा रही हैं। 

चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने पांचवीं कक्षा के छात्र पूर्वांश साहू से मुस्कुराते हुए पूछा—“सेल्फी लेंगे क्या?” जिसके बाद छात्र ने उत्साहपूर्वक मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी ली। 

यह आत्मीय क्षण चौपाल का विशेष आकर्षण बना।

मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा पंचायत स्तर पर संचालित अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और अतिरिक्त 10 लाख आवासों का निर्माण भी प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अब तक लगभग 6000 अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार शीघ्र ही ऑनलाइन शिकायत समाधान व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे मोबाइल फोन से अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए टोल फ्री नंबर भी प्रारंभ किया जाएगा।

किसानों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। 

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरपुर बैराज तथा सिकासेर से कोडार परियोजना महासमुंद जिले के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उल्लेखनीय है कि जिले में सिंचाई क्षमता विस्तार के लिए सिकासेर बांध (गरियाबंद) से शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय कोडार तक पानी पहुंचाने की लगभग 3200 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर जनता की बात सुन रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पारदर्शी और जनहित में कार्य करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना और अन्य योजनाओं से प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।  बस्तर जैसे क्षेत्रों में जहां पहले हिंसा का माहौल था, वहां अब खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित हो रही हैं।

चौपाल के दौरान ग्राम की मती लता साहिस ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना तथा गैस सिलेंडर का लाभ मिला है। वहीं मती मधु साहू ने मछली पालन से जुड़ाव और गर्मी के दौरान पानी की समस्या बताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने सोलर आधारित बोर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बिहान योजना से जुड़ी परी साहू ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे आत्मनिर्भर बनी हैं और अब फैंसी एवं किराना दुकान संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद वे “लखपति दीदी” कहलाने लगी हैं। 

ग्रामीण  मोहन कुलदीप ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिसंबर 2025 में सोलर पैनल लगवाने पर उन्हें एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी मिली और पहले जहां उनका बिजली बिल लगभग 3500 रुपये आता था, अब शून्य हो गया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

दिव्यांग हितग्राहियों के चेहरे पर खिली मुस्कान

चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने तीन दिव्यांग हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए। भारती मारकण्डेय को व्हीलचेयर तथा रवि कुमार पटेल और यादराम साहू को ट्रायसिकल प्रदान की गई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनके दैनिक जीवन और आवागमन में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के जीवन को सहज, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा अधिकारियों को जरूरतमंद हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मातृशक्ति के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण की घोषणा की, जहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं स्व-सहायता समूहों की गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कमरौद से चरोदा तक लगभग चार किलोमीटर सड़क निर्माण तथा ग्राम में मुक्ति धाम निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया और ग्रामीणों ने उनका आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सांसद मती रूपकुमारी चौधरी, विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,  अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

करहीबाजार समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने दी विकास कार्यों की सौगात

रायपु

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड भाटापारा स्थित ग्राम करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में शामिल होकर क्षेत्रवासियों को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने ग्राम करहीबाजार में सर्व समाज हेतु 25 लाख रुपये की लागत से सांस्कृतिक भवन निर्माण तथा सुकालू के घर से सिद्ध बाबा मार्ग तक 25 लाख रुपये की लागत से सी.सी. रोड निर्माण कार्य की घोषणा की। उन्होंने करहीबाजार एवं कोदवा के हायर सेकेंडरी स्कूलों में भवन निर्माण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने ग्राम विटकुली में 20 लाख रुपये की लागत से मांगलिक भवन निर्माण तथा ग्राम पंचायत कोठमी, मोपका, कोनी, बोरसी, कोदवा, पाटन एवं रामपुर में 10-10 लाख रुपये की लागत से सी.सी. रोड निर्माण कार्यों की घोषणा की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने माँ महामाया मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की तथा स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचकर धात्री माताओं को किट वितरित की और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए हितग्राहीमूलक स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने फुटबॉल खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उनके अनुरोध पर फुटबॉल को किक लगाई। उन्होंने “हम होंगे कामयाब 2.0” पोर्टल का शुभारंभ भी किया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवजात बच्चों को अन्नप्राशन कराया तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हेलमेट वितरित किए। प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही  राजकुमारी के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होकर मुख्यमंत्री ने भगवान  गणेश की प्रतिमा भेंट की और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने “मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0” के अंतर्गत सोखता पिट निर्माण में श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने जल संचयन के क्षेत्र में कार्य कर रही जल संचयन दीदी  बेबी सेन एवं  अम्बे मानिकपुरी से बातचीत कर उनके प्रयासों की सराहना की।

समाधान शिविर में हितग्राहियों ने शासन की योजनाओं से मिले लाभ साझा किए।  नंद कुमार ध्रुव ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान मोटराइज्ड वाहन संबंधी समस्या के निराकरण हेतु दिए गए आवेदन का त्वरित समाधान हुआ, जिसके लिए उन्होंने शासन-प्रशासन का आभार जताया।  दिलीप कुमार वर्मा ने बताया कि स्वामित्व पट्टा योजना के तहत भूमि मिलने से उन्हें आवास निर्माण में सुविधा मिली है।

 अनीता निषाद ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले उन्हें कच्चे मकान के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित आवास प्राप्त हुआ है। वहीं  पिंकी बंजारे ने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों की संजीवनी बना डायल 1033, संकट में तुरंत मिल रही मदद

रायपुर

राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033

कल्पना कीजिए, आप एक खूबसूरत सफर पर हैं। खुली सड़क, रफ्तार पकड़ती गाड़ी और सुहाना मौसम—सब कुछ शानदार चल रहा है। लेकिन अचानक अगले ही मोड़ पर कोई हादसा हो जाए, तो पलभर में खुशियां मातम में बदल सकती हैं। ऐसे सुनसान हाईवे पर, जहां दूर-दूर तक कोई मदद नजर नहीं आती, वहां मोबाइल स्क्रीन पर चमकता एक नंबर उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर सामने आता है—1033। आज राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह नंबर लाखों यात्रियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

संकट की घड़ी में फरिश्ता बनती है एक कॉल

हाइवे दुर्घटना के बाद का पहला घंटा चिकित्सा विज्ञान में “गोल्डन ऑवर” कहलाता है। इस दौरान घायल को सही इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डायल 1033 इसी गोल्डन ऑवर का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है।

जैसे ही कोई व्यक्ति 1033 पर कॉल करता है, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कंट्रोल रूम तुरंत सक्रिय हो जाता है। जीपीएस तकनीक के जरिए हादसे की लोकेशन ट्रेस की जाती है और कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग वाहन और जरूरत पड़ने पर क्रेन मौके पर पहुंच जाती है। घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने के साथ-साथ रास्ता भी साफ कराया जाता है।

“7 से 10 मिनट में पहुंच गई एम्बुलेंस”

रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे का शिकार हुए श्री नितिन वर्मा बताते हैं,
“दोपहर करीब 2 बजे मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। मोबाइल नेटवर्क भी कमजोर था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कहां हूं। मैंने 1033 पर कॉल किया और महज 7 से 10 मिनट में एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई। मेरे लिए वह नंबर किसी संजीवनी से कम नहीं था।”

सिर्फ एक्सीडेंट नहीं, हर परेशानी का साथी है 1033

अक्सर लोग समझते हैं कि 1033 सिर्फ सड़क हादसों में मदद करता है, जबकि यह हाइवे पर हर तरह की परेशानी में आपका भरोसेमंद साथी है।

अगर रात में गाड़ी पंचर हो जाए, इंजन खराब हो जाए, सड़क पर पेड़ या मलबा गिर जाए, मवेशी आ जाएं, किसी सहयात्री की तबीयत बिगड़ जाए, टोल या फास्टैग संबंधी समस्या हो या हाइवे पर असुरक्षा महसूस हो—हर स्थिति में 1033 मदद के लिए उपलब्ध है।

रात के सन्नाटे में 1033 बना सहारा

ट्रक ड्राइवर श्री गुरदीप सिंह बताते हैं,
“रात करीब 9:45 बजे रायपुर से बिलासपुर जाते समय ट्रक का टायर फट गया। सुनसान हाईवे पर भारी वाहन के साथ फंस जाना बहुत मुश्किल स्थिति थी। मैंने 1033 पर कॉल किया। कुछ ही देर में हाईवे पेट्रोलिंग टीम पहुंच गई। उन्होंने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई और पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा भी सुनिश्चित की।”

जब जाम हो गया चक्का, पेट्रोलिंग टीम ने बढ़ाया हाथ

बिलासपुर-नागपुर रूट पर सफर कर रहे श्री एस.पी. चौबे ने बताया कि उनकी कार पंचर होने के बाद स्टेपनी बदलने के दौरान पहिया जाम हो गया था। काफी कोशिशों के बावजूद चक्का नहीं खुल रहा था। तभी वहां से गुजर रही 1033 की रूट पेट्रोलिंग टीम रुकी और अपने हैवी टूल्स की मदद से चक्का खोलकर टायर बदला। टीम की तत्परता और मदद ने यात्रियों का दिल जीत लिया।

मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

बिलासपुर से महासमुंद जा रहे एक भारी ट्रेलर का ब्रेक अचानक जाम हो गया। बीच हाइवे पर इतने बड़े वाहन का रुकना बड़ा खतरा बन सकता था। सूचना मिलते ही 1033 टीम मौके पर पहुंची और ट्रेलर के पीछे से आने वाले वाहनों को सतर्क करने के लिए सेफ्टी कोन और चेवरॉन बोर्ड लगाए। टीम की मुस्तैदी से न केवल ट्रैफिक व्यवस्थित रहा, बल्कि एक बड़ा हादसा भी टल गया।

24 घंटे उपलब्ध, हर भाषा में मदद

1033 की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और उपलब्धता है। यह सेवा 24×7 सक्रिय रहती है। हिंदी, अंग्रेजी समेत कई स्थानीय भाषाओं में सहायता उपलब्ध है। सबसे अहम बात यह कि यह टोल-फ्री सेवा है, इसलिए मोबाइल में बैलेंस न होने पर भी कॉल किया जा सकता है।

आज जब देश के हाईवे आधुनिक और हाई-स्पीड हो रहे हैं, तब सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। ऐसे में हर यात्री को अपने मोबाइल में 1033 जरूर सेव रखना चाहिए। क्योंकि मुश्किल की घड़ी में यही चार अंक जिंदगी की रफ्तार को थमने नहीं देते।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाया नजर का चश्मा

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाया नजर का चश्मा

सुशासन तिहार शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल का किया निरीक्षण

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं और सेवाओं की जानकारी ली।

स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 76 वर्षीय श्री गोवर्धन ध्रुव, 65 वर्षीय श्रीमती अनुपकुंवर पाल तथा कक्षा छठवीं के छात्र संजय चक्रधारी एवं जयसेन को अपने हाथों से नजर का चश्मा पहनाया। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब पढ़ने-लिखने और दैनिक कार्यों में काफी सुविधा होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।

विदेश में उच्च शिक्षा का सुनहरा अवसर: मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन आमंत्रित

भोपाल

विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के उच्‍च् शिक्षा विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत सत्र 2026-27 (जनवरी से जून 2026) के लिए पात्र विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

यह योजना विशेष रूप से अनारक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के लिए संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से उन्हें स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर विदेश में अध्ययन हेतु राज्य सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। आवेदन प्रक्रिया 11 मई से प्रारंभ हो चुकी है और 25 मई 2026 शाम 6 बजे तक आवेदन जमा किए जा सकेंगे।

हर वर्ष 20 विद्यार्थियों को मिलता है लाभ

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष कुल 20 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इनमें जनवरी से जून सत्र के लिए 10 और जुलाई से दिसंबर सत्र के लिए 10 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। उपलब्ध आवेदनों और पात्रता के आधार पर चयन समिति अंतिम निर्णय लेती है।

इन विद्यार्थियों को मिलेगा योजना का लाभ

इस योजना का लाभ केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासी अनारक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। आवेदक का कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा मध्यप्रदेश स्थित विद्यालयों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और पीएचडी के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि आवश्यक है।

आवेदन के लिए आयु सीमा भी निर्धारित की गई है। स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष और पीएचडी के लिए 35 वर्ष रखी गई है। आवेदक के परिवार की वार्षिक आय सभी स्रोतों से 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही आवेदक किसी प्रकार के रोजगार में कार्यरत नहीं होना चाहिए।

QS टॉप-500 विश्वविद्यालयों में ही अध्‍ययन की अनुमति

योजना की एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्र केवल उन्हीं विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन के लिए पात्र होंगे जो क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (QS World University Rankings) की वैश्विक सूची के शीर्ष 500 संस्थानों में शामिल हों। यह रैंकिंग विश्व के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, प्रतिष्ठा और वैश्विक मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। संबंधित विश्वविद्यालय से प्रवेश अथवा ऑफर लेटर प्राप्त होना भी अनिवार्य है। छात्र को स्वयं अपने प्रयासों से स्टूडेंट वीजा प्राप्त करना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि छात्रवृत्ति वास्तव में गुणवत्तापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए उपयोग हो।

मिलेगी व्यापक आर्थिक सहायता

यह योजना व्यापक वित्तीय सहयोग प्रदान करती है। राज्य सरकार शिक्षण शुल्क, वीजा शुल्क, बीमा प्रीमियम, इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा और अन्य आवश्यक शैक्षणिक व्यय वहन करेगी। योजना के तहत अधिकतम 40 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 36 लाख रुपये) तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 38 हजार अमेरिकी डॉलर तक शिक्षण एवं संबंधित व्यय तथा 2 हजार अमेरिकी डॉलर, पुस्तकें, शोध सामग्री, उपकरण और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए निर्धारित हैं।

शिक्षण शुल्क सीधे संबंधित विश्वविद्यालय को भेजा जाएगा, जबकि अन्य अनुमन्य व्यय विद्यार्थियों के बैंक खातों में जमा किए जाएंगे।

मेरिट पर आधारित होगी चयन प्रक्रिया

विद्यार्थियों का चयन 100 अंकों की मेरिट प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक योग्यता, चयनित विश्वविद्यालय की QS रैंकिंग और साक्षात्कार को आधार बनाया जाएगा। उच्च रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों के लिए अधिक अंक निर्धारित किए गए हैं।

पहले परीक्षण समिति आवेदन पत्रों की जांच कर पात्र उम्मीदवारों की सूची तैयार करेगी। इसके बाद चयन समिति साक्षात्कार लेकर अंतिम सूची जारी करेगी। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो आयु में वरिष्ठ उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी।

नियमों का पालन अनिवार्य

योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। योजना के प्रावधानों के अनुरूप अध्ययन पूर्ण करने तथा आवश्यक सूचनाएं समय-समय पर उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई है। किसी विशेष परिस्थिति में नियमों के उल्लंघन या अपूर्ण जानकारी पाए जाने पर शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए चयनित विद्यार्थियों से आवश्यक बंधपत्र भी लिया जाएगा।

विदेश में पढ़ाई के दौरान, नियमित निगरानी

छात्रवृत्ति प्राप्त विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर उच्च शिक्षा विभाग नियमित नजर रखेगा। संबंधित विश्वविद्यालयों से समय-समय पर प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त किए जाएंगे। यदि प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया तो छात्रवृत्ति समाप्त की जा सकती है।

पीएचडी शोधार्थियों के लिए शोध प्रगति रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। इससे योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

आवेदन कैसे करें

इच्छुक विद्यार्थी आवेदन पत्र स्वयं, वाहक, डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से कार्यालय आयुक्त, उच्च शिक्षा, सतपुड़ा भवन, भोपाल में निर्धारित समय सीमा तक जमा कर सकते हैं। योजना की विस्तृत मार्गदर्शिका और आवेदन पत्र उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

पात्रता एक नजर में

  •     मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य
  •     अनारक्षित वर्ग के छात्र-छात्राएं पात्र
  •     10वीं और 12वीं मध्यप्रदेश से उत्तीर्ण
  •     न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक
  •     परिवार की आय 8 लाख रुपये से कम
  •     स्नातकोत्तर हेतु आयु 30 वर्ष तक
  •     पीएचडी हेतु आयु 35 वर्ष तक
  •     QS टॉप-500 विश्वविद्यालय में प्रवेश/ऑफर लेटर आवश्यक

आर्थिक सहायता में क्या मिलेगा

  •     शिक्षण शुल्क
  •     वीजा शुल्क
  •     बीमा प्रीमियम
  •     हवाई यात्रा व्यय
  •     पुस्तकें और शोध सामग्री
  •     अधिकतम 40,000 अमेरिकी डॉलर तक सहायता
  • महत्वपूर्ण तिथियां
  •     आवेदन प्रारंभ: 11 मई 2026
  •     अंतिम तिथि: 25 मई 2026, शाम 6 बजे
  •     आवेदन स्थान: आयुक्त, उच्च शिक्षा कार्यालय, सतपुड़ा भवन, भोपाल

 

माँ और शिशु स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है।

तकनीक आधारित निगरानी से प्राप्त हुए सकारात्मक परिणाम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है।

प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एएनएमओएल 2.0 एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम पंजीयन, जांच और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन 24×7 उपलब्ध कराया जा रहा है। सुमन पहल के अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और प्राथमिकता आधारित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुँच के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाने के लक्ष्य की दिशा में सुगठित प्रयास जारी रहेंगे।

 

पारंपरिक मछली पालन से आगे बढ़कर स्टार्टअप आधारित होगा मत्स्योद्योग : राज्यमंत्री पंवार

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मत्स्योत्पादन को दोगुना करने के विजन को लेकर ‘मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026’ के सफल क्रियान्वयन की दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय ‘हितधारक सम्मेलन’ हुआ। इस सम्मेलन में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की उपस्थिति में मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों और निवेशकों ने उत्साह दिखाया।

राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि प्रदेश में पहले वर्ष 10 हज़ार केज लगाने का लक्ष्य था, लेकिन निवेशकों की ओर से लगभग 2 लाख केज लगाने के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जा रही है।

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने कहा कि आज का यह समागम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार पहली बार पारंपरिक मत्स्य पालन की सीमाओं से आगे बढ़कर एकीकृत मत्स्योद्योग (हितग्राही और उद्यमी मॉडल) पर काम कर रही है। इसे केवल एक समाज आधारित योजना के रूप में न देखकर, हर वर्ग को साथ लेकर चलने और रोजगार सृजन की ‘स्टार्टअप आधारित ब्लू इकॉनमी’ के रूप में देखा जाना चाहिए।

केज कल्चर के लिए खत्म हो आवेदन की समय सीमा:  पंवार

राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केज कल्चर के प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया को किसी समय-सीमा में न बांधा जाए। इसे एक सतत प्रक्रिया बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी और हितग्राही इससे जुड़ सकें। कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य विकास के लिए 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने, हैचरी निर्माण और फिश फीड के लिए शासन द्वारा पूरी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र के हितधारकों से मत्स्य उत्पादन के आधुनिकीकरण में सहयोग की अपील की।

हर निवेशक के साथ जुड़ेंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर: सचिव  सिंह

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश जलाशयों का केंद्र है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए हर निवेशक के साथ सुविधानुसार एक ‘कॉन्टैक्ट ऑफिसर’ नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी निवेशक के सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण, सब्सिडी और अन्य विभागीय कार्यों को पूर्ण कराने में मदद करेगा। साथ ही, विभाग द्वारा मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्यमंत्री  नारायण सिंह पंवार ने केज कल्चर के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिक रूप से चयनित केज कल्चर के हितधारकों को अभिस्वीकृति पत्र वितरित किये गए। मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी ने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में निवेशकों और उद्यमियों के साथ ‘राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस’ भी आयोजित की गई, जिसमें स्टेक होल्डर्स से प्राप्त प्रस्तावों और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रदेश में ‘केज कल्चर’ को बढ़ावा देने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सीड, फीड और जाल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विक्रेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के संचालक  मनोज पथरोलिया, मत्स्य महासंघ के महाप्रबंधक  रवि गजभिए समेत प्रदेश भर से आए मत्स्य उद्यमी, निवेशक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। उप संचालक, मत्स्योद्योग  गिरीश मेश्राम ने सभी अतिथियों, निवेशकों और हितधारकों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

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