2050 तक भारत की धार्मिक तस्वीर कैसी होगी? हिंदू, मुस्लिम और अन्य धर्मों की आबादी पर बड़ा अनुमान

नई दिल्ली

भारत में इस समय जनगणना चल रही है और माना जा रहा है कि जनगणना के पूरी होने के बाद देश की आबादी के आंकड़ों में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है. दरअसल सिर्फ भारत की ही जनगणना नहीं बल्कि 2050 तक अनुमान लगाया जा रहा है कि दुनिया की धार्मिक आबादी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दशकों में मुस्लिम आबादी सबसे तेजी से बढ़ेगी, जबकि हिंदू आबादी में भी बढ़ोतरी जारी रहेगी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत 2050 तक हिंदू बहुसंख्यक देश बना रहेगा. लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी भी भारत में ही रहने वाली है. वहीं मौजूदा समय में इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह स्थिति बदल सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 2050 तक भारत में हिंदू जनसंख्या कितनी हो जाएगी और कितने लोग इस्लाम और दूसरे धर्म मानेंगे। 

2050 तक कितनी होगी हिंदू और मुस्लिम आबादी?
प्यू रिसर्च के अनुसार साल 2010 में दुनिया की कुल आबादी करीब 6.9 अरब थी जो 2050 तक बढ़कर 9.3 अरब तक पहुंच सकती है. इसी दौरान मुस्लिम आबादी में सबसे तेज वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 2010 के मुकाबले 2050 तक मुस्लिम आबादी करीब 73 फीसदी बढ़ सकती है. वही हिंदुओं की आबादी में लगभग 34 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार 2010 में दुनिया में मुसलमानों की आबादी करीब 1.6 अरब थी जो 2050 तक बढ़कर लगभग 2.76 अरब हो जाएगी. दूसरी तरफ हिंदुओं की आबादी 1.3 अरब से बढ़कर 1.38 अरब तक पहुंच सकती है। 

दुनिया की आबादी में कितना हिस्सा होगा? 
आंकड़ों के अनुसार 2010 में दुनिया की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 23.2 फीसदी थी, जो 2050 तक बढ़कर करीब 29.7 फीसदी हो सकती है. वहीं हिंदुओं की हिस्सेदारी 15 फीसदी से मामूली घटकर 14.9 फीसदी रहने का अनुमान है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले चार दशकों तक ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह बने रहेंगे, लेकिन मुस्लिम आबादी तेजी से उनके करीब पहुंच जाएगी। 

भारत में क्या होगी स्थिति?
रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2050 तक हिंदू आबादी सबसे ज्यादा रहेगी. अनुमान है कि उस समय भारत में हिंदुओं की आबादी करीब 1.29 अरब हो सकती है. वहीं मुस्लिम आबादी 31 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है, यानी दुनिया की कुल मुस्लिम आबादी का लगभग 11 फीसदी हिस्सा अकेला भारत में रहेगा. अगर अनुमान सही साबित होते हैं तो 2050 तक भारत की कुल आबादी करीब 166 करोड़ हो सकती है, जिसमें लगभग 78 फीसदी हिंदू और 18 फीसदी मुस्लिम होंगे. वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा थी. इसमें हिंदुओं की संख्या 96.63 करोड़ और मुस्लिमों की संख्या 17.22 करोड़ थी. कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 79.8 फीसदी और मुस्लिमों की 14.2 फीसदी थी. इनके अलावा ईसाई 2.3 फीसदी और सिख 1.7 फीसदी आबादी का हिस्सा थे। 

8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, सालाना इंक्रीमेंट को लेकर बढ़ी कर्मचारियों की उम्मीदें

नई दिल्ली
 केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर आ रही है. सरकार अभी आठवें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर अलग-अलग संगठनों से बातचीत कर रही है और उनकी राय जान रही है. इसी बीच, केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों मतलब स्टाफ साइड (Staff Side) ने सरकार के सामने कुछ स्पेशल मांगें रखी हैं. अगर सरकार इन मांगों को मान लेती है, तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में हर साल होने वाली बढ़ोतरी दोगुनी हो जाएगी और न्यूनतम वेतन भी पहले से कई गुना बढ़ जाएगा। 

कर्मचारियों के संगठनों ने राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र (National Council of Joint Consultative Machinery) के जरिए आठवें वेतन आयोग को एक मांग पत्र भेजा है. इस मांग पत्र में सबसे बड़ी बात यह कही गई है कि कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा के लिए अब 10 साल का लंबा इंतजार नहीं होना चाहिए. महंगाई और बदलते आर्थिक हालातों को देखते हुए हर 5 साल में सैलरी को दोबारा तय किया जाना चाहिए. इसके साथ ही, संगठनों ने मांग की है कि कर्मचारियों की सालाना वेतन बढ़ोतरी (Annual Increment) की दर को मौजूदा 3% से बढ़ाकर सीधे 6% कर दिया जाए. कर्मचारियों का मानना है कि महंगाई के इस दौर में ठीक-ठाक जीवन जीने के लिए इतना इंक्रीमेंट बहुत जरूरी है। 

न्यूनतम सैलरी कितनी हो..?
संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि आठवें वेतन आयोग के तहत अलग-अलग पे स्केल्स को आपस में मिला देना चाहिए. इसके अलावा, सबसे निचले स्तर लेवल-1 (Level 1) के कर्मचारी की न्यूनतम शुरुआती सैलरी करीब 69,000 रुपये प्रति महीना की जानी चाहिए. संगठनों का कहना है कि एक अच्छा और सही वेतन ढांचा देश के लिए बहुत जरूरी है. इससे सरकारी नौकरी में बेहतरीन और टैलेंटेड युवाओं को आकर्षित किया जा सकेगा, पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को नौकरी में बनाए रखा जा सकेगा और सरकारी कामकाज में भी तेजी आएगी। 

खर्च नहीं, देश की तरक्की में एक निवेश है सैलरी बढ़ाना
आमतौर पर माना जाता है कि वेतन आयोग लागू होने से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है. अभी सरकार अपनी कुल कमाई का करीब 13% हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन पर खर्च करती है. नया वेतन आयोग आने से यह खर्च और बढ़ेगा. लेकिन कर्मचारी संगठनों का नजरिया बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि सैलरी पर होने वाले इस खर्च को बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक निवेश (Investment) की तरह देखा जाना चाहिए. जब कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, तो बाजार में उनकी परचेजिंग पावर बढ़ेगी. लोग ज्यादा सामान खरीदेंगे तो बाजार में डिमांड बढ़ेगी और जब मांग बढ़ेगी तो सरकार के पास टैक्स के रूप में ज्यादा पैसा वापस आएगा. इस तरह यह पूरा चक्र देश की आर्थिक तरक्की में मदद करेगा. बता दें कि आठवें वेतन आयोग को अपनी पूरी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपने में करीब 18 महीने का समय लग सकता है। 

नीति आयोग के “Champions of Change” कार्यक्रम में उसूर विकासखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान, छत्तीसगढ़ ने विकास की दिशा में रचा नया कीर्तिमान

रायपुर 

 नीति आयोग के मार्गदर्शन में संचालित “चैंपियंस ऑफ चेंज” कार्यक्रम के अंतर्गत बीजापुर जिले के उसूर विकासखण्ड ने अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में सेंट्रल इंडिया ज़ोन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। 

यह उपलब्धि राज्य सरकार की जनकेंद्रित विकास सोच, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।यह सफलता केवल बीजापुर जिले तक सीमित नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है। विशेष रूप से आकांक्षी और दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की प्रभावी पहुंच, सेवा प्रदायगी में सुधार तथा विकास संकेतकों में सकारात्मक परिवर्तन को इस उपलब्धि ने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है।

उल्लेखनीय है कि नीति आयोग द्वारा संचालित “Champions of Change” कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं संबद्ध सेवाएं, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विकासखण्डों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। उसूर विकासखण्ड ने विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर परिणामों तथा विभागीय समन्वय के आधार पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है।
इस उपलब्धि के पीछे बीजापुर जिले द्वारा अपनाया गया “3C मॉडल” — Convergence (अभिसरण), Collaboration (सहयोग) एवं Competition (प्रतिस्पर्धा) महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। इस मॉडल के माध्यम से योजनाओं के अभिसरण, जनभागीदारी, विभागीय तालमेल तथा सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर परिणाम आधारित कार्य संस्कृति विकसित की गई।

Convergence (अभिसरण) के अंतर्गत स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, शिक्षा, कृषि सहित अन्य विभागों की योजनाओं को समेकित रूप से क्रियान्वित किया गया। Collaboration (सहयोग) के माध्यम से मैदानी अमले, जनप्रतिनिधियों तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, वहीं Competition (प्रतिस्पर्धा) के जरिए विकासखण्ड स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया गया।

“नीति आयोग के ‘ चैंपियंस ऑफ चेंज’ कार्यक्रम में बीजापुर के उसूर विकासखण्ड का राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त करना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और विश्वास का क्षण है।

यह उपलब्धि बताती है कि हमारा छत्तीसगढ़ अब आकांक्षी क्षेत्रों में भी विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहा है। कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले दूरस्थ अंचल आज स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, आधारभूत सुविधाओं और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

यह सफलता हमारी जनकेंद्रित विकास सोच, विभागीय समन्वय, सतत मॉनिटरिंग और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय            

स्वामित्व से संपत्ति का अधिकार, बिहान से आत्मनिर्भरता की राह : कोसरंगी चौपाल में ग्रामीण विकास की दिखी तस्वीर

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत आरंग विकासखंड के ग्राम कोसरंगी पहुंचकर ग्रामीण विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने चौपाल कार्यक्रम में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को  पट्टे वितरित कर उन्हें वैधानिक अधिकार प्रदान किए, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित आजीविका सेवा केंद्र का निरीक्षण कर महिलाओं की आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री  साय ने चौपाल को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीणों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से आबादी भूमि और संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को अपनी जमीन और मकान पर कानूनी अधिकार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल पट्टा वितरण नहीं, बल्कि ग्रामीणों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिलने से ग्रामीणों को बैंक से ऋण लेने में सुविधा होगी तथा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज सहजता से उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत छह हितग्राहियों को पट्टे वितरित किए। पट्टा प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें अपनी संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिला है, जिससे भविष्य अधिक सुरक्षित हुआ है और योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होगा।

मुख्यमंत्री  साय ने इसके बाद ग्राम कोसरंगी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत संचालित आजीविका सेवा केंद्र का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने बिहान समूह से जुड़ी महिलाओं से आत्मीय संवाद करते हुए केंद्र की गतिविधियों, आय-व्यय तथा रोजगार सृजन से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।

समूह की अध्यक्ष  गीता वर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि केंद्र में हल्दी-मिर्ची प्रसंस्करण, गेहूं पिसाई, धान बीज क्रय-विक्रय सहित विभिन्न ग्रामीण आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे समूहों को नियमित आय प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बिहान जैसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही हैं। उन्होंने समूह की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए आजीविका गतिविधियों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहा है और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार जनता के हित और समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संभागायुक्त  श्याम धावड़े, कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

 

बालाघाट के सांदीपनि विद्यालय का छात्र जाएगा नासा, शैक्ष्रणिक भ्रमण के लिए हुआ चयन

भोपाल

प्रदेश के बालाघाट जिले स्थित सांदीपनि विद्यालय के कक्षा 12वीं के छात्र  मयंक मात्रे ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। आईएसएससी 2026 में  मयंक मात्रे ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता के आधार पर उनका चयन प्रतिष्ठित नासा एजुकेशन टूर के लिए हुआ है।  मयंक की यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनकी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

“Grand Winner” घोषित

मध्यप्रदेश के सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी क्रम में बालाघाट जिले के सांदीपनि विद्यालय वारासिवनी के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने आईएसएससी (International Space Science Competition) में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर विद्यालय एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि के साथ उन्हें “Grand Winner” घोषित किया गया तथा आगामी सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले नि:शुल्क नासा एजुकेशन टूर (USA) के लिये चयनित किया गया है। यह प्रतियोगिता Go4Guru द्वारा देशभर के स्कूल एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है।

सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों को आईएसएससी 2026 प्रतियोगिता की जानकारी दिए जाने के बाद इच्छुक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में मयंक ने 8 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया। 4 मई को घोषित परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-5 प्राप्त कर देशभर के शीर्ष 17 विद्यार्थियों में स्थान बनाते हुए फाइनल राउंड के लिए चयनित हुए। इसके बाद 15 मई 2026 को जूम के माध्यम से आयोजित लाइव फाइनल राउंड में नासा से संबद्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रतिनिधियों एवं Go4Guru टीम की उपस्थिति में प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में त्वरित उत्तर आधारित विभिन्न क्विज राउंड हुए, जिनमें प्रतिभागियों को कुछ ही सेकंड में उत्तर प्रस्तुत करना था। देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के मध्य प्रतिस्पर्धा करते हुए मयंक ने सर्वाधिक 155 अंक प्राप्त किए और आईएसएससी 2026 के विजेता घोषित हुए।

इस उपलब्धि के अंतर्गत मयंक का चयन आगामी नासा शैक्षणिक भ्रमण (NASA Educational Tour) के लिए किया गया है। इस दौरान उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर, ऑरलैंडो का भ्रमण, अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन, थीम पार्क अनुभव तथा डिज़्नी स्प्रिंग्स जैसी शैक्षणिक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर प्राप्त होगा।

मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी निरंतर मेहनत, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने बताया कि वे नियमित अध्ययन के साथ ISRO, NASA एवं Space Science से संबंधित विषयों का लगातार अध्ययन करते रहे।

गौरतलब है कि विद्यालय के उप प्राचार्य  हुमराज पटले के नेतृत्व में विद्यालय में विज्ञान, नवाचार एवं समग्र विकास आधारित गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यालय में नियमित अकादमिक संवाद, शिक्षक समीक्षा बैठकें, योजनाबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रक्रियाएँ संचालित की जाती हैं। साथ ही, पीपल संस्था द्वारा प्रदान किए जा रहे सतत शैक्षणिक सहयोग, प्रशिक्षण आधारित मार्गदर्शन, अकादमिक सुझावों एवं विभिन्न शिक्षण प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने विद्यालय में शिक्षण गुणवत्ता, अकादमिक संवाद एवं सीखने के वातावरण को और अधिक बेहतर एवं परिणामोन्मुख बनाया है। छात्र की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

 

शिक्षक राष्ट्र निर्माण में समर्पित हों, तभी बनेगा सशक्त भारत : डॉ. शर्मा

भोपाल

आनंद विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राज्य आनंद संस्थान, भोपाल में 18 से 23 मई 2026 तक शासकीय शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय आनंद सभा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में गुना, ग्वालियर और सीधी जिले के शिक्षक प्रशिक्षणार्थी शामिल हो रहे हैं। कार्यशाला का संचालन राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य के निर्देशन में हो रहा है।

प्रशिक्षण के पांचवे दिवस लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक डॉ. मनीष शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को मार्गदर्शित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी सोच को सीमित नहीं रखना चाहिए। भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर आधारित है, जिसका अर्थ है पूरा विश्व हमारा परिवार है।

डॉ. शर्मा ने कहा, “जब हम देश निर्माण के लिए समर्पित होंगे तो बच्चे भी देशभक्त बनेंगे और उनका चरित्र निर्माण होगा। व्यक्ति अधिक कार्य करने से नहीं थकता, बल्कि कार्य को बोझ समझकर करने से थकता है। खुद को छोटी सोच और छोटे फ्रेम में न बांधें, तभी आपको आनंद की अनुभूति होगी।” उन्होंने महावीर स्वामी का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा वीर वह है जो स्वयं से लड़ता है और आत्म-विजय प्राप्त करता है।

चौथे दिवस हुई मानव-मूल्यों पर चर्चा

कार्यशाला के चौथे दिवस में मानव, परिवार और समाज आधारित मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक भी लिया गया। कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय से शंकर खत्री, रिसोर्स पर्सन नवीन शर्मा, कौशल बूटोलिया, अभिषेक शर्मा, राजेश पटेल, शैलेंद्र सिंह, मनोज जैन, रवि शंकर रजक, भारती शाक्य और सुमन जैन सहित अन्य अधिकारी और प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

 

बड़वानी के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 06 व्यक्तियों को त्वरित सहायता पहुँचाकर कराया अस्पताल में भर्ती

भोपाल

बड़वानी जिले के थाना पाटी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्रवाई से सड़क दुर्घटना में घायल हुए 06 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायलों को राहत मिली और समय रहते उनका उपचार प्रारंभ हो सका।

21 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना पाटी क्षेत्र अंतर्गत बोकराटा रोड पर दो मोटर साइकिलों की आमने-सामने से टक्कर हो गई है, जिसमें 06 व्यक्ति घायल हो गए हैं।  पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना पाटी क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री प्रशांत मोरे एवं पायलट श्री विशाल चौहान ने मौके पर पहुंचकर पाया कि मोटर साइकिल दुर्घटना में 06 व्यक्ति घायल हो गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित डायल 112 वाहन एवं चिकित्सा वाहन की सहायता से अस्पताल पहुँचाया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की स्थिति में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, तत्परता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं।

 

कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पंजीकृत श्रमिकों को मिलेगा कैशलेस आयुष चिकित्सा का लाभ

भोपाल 

मध्यप्रदेश में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों को कैशलेस आयुष चिकित्सा का लाभ दिया जायेगा। यह श्रमिकों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार की गरिमामयी उपस्थिति में श्रम विभाग और आयुष विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। इस एमओयू पर आयुष विभाग की ओर से आयुक्त डॉ. संजय मिश्र और श्रम विभाग (ईएसआईसी) की ओर से संचालक डॉ. सी. एस. जायसवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आयुष विभाग के प्रमुख सचिव  शोभित जैन एवं श्रम विभाग के सचिव  रघुराज एम आर सहित दोनों ही विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है और यह पहल भारतीय चिकित्सा पद्धति को आमजन में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के श्रमिक सामूहिक रूप से योग कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश देंगे।

मंत्री  परमार ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को विश्वसनीयता के साथ आमजन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस एमओयू के तहत की जा रही गतिविधियों की हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार सुविधाओं का विस्तार भी किया जायेगा। इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमिक वर्ग में योग और सूर्य नमस्कार से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए श्रम विभाग द्वारा आयुष विभाग के सहयोग से तैयार किए गए एक विशेष ‘लोगो’ का भी विमोचन किया गया।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी राज्य बीमा योजना के लाभार्थियों को राज्य के शासकीय आयुष संस्थानों, जैसे चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, एलोपैथिक अस्पतालों में संचालित आयुष विंग्स और औषधालयों के माध्यम से समग्र, सुलभ और पूरी तरह से कैशलेस चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इसके तहत पंजीकृत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी पद्धतियों पर आधारित वैकल्पिक उपचार के बहुआयामी विकल्प प्राप्त हो सकेंगे। इस योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिसके प्रथम चरण में इसे प्रदेश के 9 शासकीय आयुष चिकित्सा महाविद्यालयों में शुरू किया जाएगा और इसके बाद दोनों विभागों की आपसी सहमति से इसका विस्तार जिला स्तरीय आयुष चिकित्सालयों, आयुष विंग और डिस्पेंसरीज़ में किया जाएगा। इस पहल से जहाँ एक ओर दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर एलोपैथिक स्वास्थ्य संस्थानों पर मरीजों का बढ़ता दबाव भी कम होगा।

एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, श्रम विभाग द्वारा ईएसआईसी के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक और उनके आश्रित परिवार के सदस्य (जैसे जीवनसाथी, आश्रित माता-पिता एवं पात्र संतान) इस योजना में लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे। लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन ई-पहचान पत्र, बीमा संख्या अथवा अन्य वैध माध्यमों से किया जाएगा। इन संस्थानों में पात्र मरीजों को चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क ओपीडी परामर्श देने के साथ आवश्यक आयुष औषधियों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान में उपलब्धता के आधार पर पंचकर्म व अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएँ, योग व जीवनशैली परामर्श तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया और मोटापा जैसे दीर्घकालिक रोगों का समग्र प्रबंधन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उपचार के लिये सीजीएचएस अथवा राज्य शासन द्वारा निर्धारित दरों को लागू किया जाएगा और ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध प्रतिपूर्ति की जाएगी।

सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे।

नवाचारों की प्रशंसा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है।

19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति

बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है।

समाधान योजना 2025-26

समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई।

प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी

प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग  नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं।

ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ यादव के प्रमुख निर्देश

    सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक, ड्रम-जेरीकेन में बिक्री पर रोक

रायपुर

पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग के अनुसार प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों पर 22 मई 2026 की स्थिति में 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है।

राज्य को प्रतिदिन आपूर्ति जारी है। 21 मई को ही 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल की प्राप्ति हुई है। लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित ऑयल कंपनी डिपो से जिलों को मांग के अनुसार सप्लाई की जा रही है। रबी फसल कटाई और खरीफ की तैयारी के कारण डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे ध्यान में रखकर आपूर्ति बढ़ाई गई है।

ड्रम-जेरीकेन में बिक्री प्रतिबंधित, किसानों को छूट  
राज्य शासन ने 22 मई को जारी आदेश में सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल और जेरीकेन में ईंधन की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। उल्लंघन पर मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत ‘अप्राधिकृत विक्रय’ मानकर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई होगी।

हालांकि रबी-खरीफ सीजन के लिए किसानों, कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों और अस्पताल, मोबाइल टावर जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके लिए अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप बिक्री की अनुमति होगी।

पैनिक खरीदारी से बचने की अपील  
सचिव खाद्य ने 20 मई को सभी ऑयल कंपनियों के साथ समीक्षा बैठक कर ड्राई आउट होने वाले पंपों को तत्काल स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से प्रभावित होकर पैनिक खरीदारी या संग्रहण न करें। राज्य में ईंधन की आपूर्ति सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

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