बालाघाट के सांदीपनि विद्यालय का छात्र जाएगा नासा, शैक्ष्रणिक भ्रमण के लिए हुआ चयन

बालाघाट के सांदीपनि विद्यालय का छात्र जाएगा नासा, शैक्ष्रणिक भ्रमण के लिए हुआ चयन

आईएसएससी 2026 में देशभर में हासिल किया प्रथम स्थान, अंतरिक्ष विज्ञान में सांदीपनि विद्यालय की गूंज पहुंची नासा तक

बालाघाट

प्रदेश के बालाघाट जिले स्थित सांदीपनि विद्यालय के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। आईएसएससी 2026 में मयंक मात्रे ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता के आधार पर उनका चयन प्रतिष्ठित नासा एजुकेशन टूर के लिए हुआ है। मयंक की यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनकी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

“Grand Winner” घोषित

मध्यप्रदेश के सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी क्रम में बालाघाट जिले के सांदीपनि विद्यालय वारासिवनी के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने आईएसएससी (International Space Science Competition) में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर विद्यालय एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि के साथ उन्हें “Grand Winner” घोषित किया गया तथा आगामी सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले नि:शुल्क नासा एजुकेशन टूर (USA) के लिये चयनित किया गया है। यह प्रतियोगिता Go4Guru द्वारा देशभर के स्कूल एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है।

सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों को आईएसएससी 2026 प्रतियोगिता की जानकारी दिए जाने के बाद इच्छुक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में मयंक ने 8 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया। 4 मई को घोषित परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-5 प्राप्त कर देशभर के शीर्ष 17 विद्यार्थियों में स्थान बनाते हुए फाइनल राउंड के लिए चयनित हुए। इसके बाद 15 मई 2026 को जूम के माध्यम से आयोजित लाइव फाइनल राउंड में नासा से संबद्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रतिनिधियों एवं Go4Guru टीम की उपस्थिति में प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में त्वरित उत्तर आधारित विभिन्न क्विज राउंड हुए, जिनमें प्रतिभागियों को कुछ ही सेकंड में उत्तर प्रस्तुत करना था। देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के मध्य प्रतिस्पर्धा करते हुए मयंक ने सर्वाधिक 155 अंक प्राप्त किए और आईएसएससी 2026 के विजेता घोषित हुए।

इस उपलब्धि के अंतर्गत मयंक का चयन आगामी नासा शैक्षणिक भ्रमण (NASA Educational Tour) के लिए किया गया है। इस दौरान उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर, ऑरलैंडो का भ्रमण, अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन, थीम पार्क अनुभव तथा डिज़्नी स्प्रिंग्स जैसी शैक्षणिक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर प्राप्त होगा।

मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी निरंतर मेहनत, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने बताया कि वे नियमित अध्ययन के साथ ISRO, NASA एवं Space Science से संबंधित विषयों का लगातार अध्ययन करते रहे।

गौरतलब है कि विद्यालय के उप प्राचार्य हुमराज पटले के नेतृत्व में विद्यालय में विज्ञान, नवाचार एवं समग्र विकास आधारित गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यालय में नियमित अकादमिक संवाद, शिक्षक समीक्षा बैठकें, योजनाबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रक्रियाएँ संचालित की जाती हैं। साथ ही, पीपल संस्था द्वारा प्रदान किए जा रहे सतत शैक्षणिक सहयोग, प्रशिक्षण आधारित मार्गदर्शन, अकादमिक सुझावों एवं विभिन्न शिक्षण प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने विद्यालय में शिक्षण गुणवत्ता, अकादमिक संवाद एवं सीखने के वातावरण को और अधिक बेहतर एवं परिणामोन्मुख बनाया है। छात्र की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

 

दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर प्रधानमंत्री जी के संदेश को जन आंदोलन बनाएं : मंत्री राजपूत

दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर प्रधानमंत्री जी के संदेश को जन आंदोलन बनाएं : मंत्री राजपूत

मंत्रालय से पैदल पहुंचे शासकीय निवास स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सादगी का दिया संदेश

भोपाल 
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को विभागीय समीक्षा बैठक के उपरांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हुए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, अनुशासित जीवनशैली और सादगी का प्रेरणादायक संदेश दिया। मंत्री राजपूत मुख्यमंत्री सचिवालय से अपने शासकीय निवास सी-2, 74 बंगले तक पैदल पहुंचे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को आंदोलन का रूप दें। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पैदल चलने और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने का प्रयास करने की भी अपील की।

मंत्री राजपूत ने कहा कि भागदौड़ भरी जीवनशैली और लगातार बढ़ते तनाव के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। नियमित पैदल चलना न केवल शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग प्रतिदिन कुछ समय पैदल चलने की आदत विकसित करें तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योग, व्यायाम और पैदल चलने जैसी गतिविधियों को शामिल करना चाहिए। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी हमारा योगदान बढ़ेगा। मंत्री राजपूत ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए।

राजपूत ने कहा कि सादगीपूर्ण जीवनशैली भारतीय संस्कृति की पहचान रही है और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।

 

सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सोलर उपकरणों की उपलब्धता बढ़ायें
मंत्रालय में हुई ऊर्जा विभाग के कार्यों की समीक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे।

नवाचारों की प्रशंसा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है।

19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति

बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है।

समाधान योजना 2025-26

समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई।

प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी

प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं।

ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश

    सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

    मजरों टोलों के सभी घरों तक सभी कार्य पूर्ण करें।

    विद्युत देयक वसूली और नगद संग्रहण में वृद्धि हुई है ,इसे कायम रखें।

    ऊर्जा विभाग में 2500 करोड़ रुपए की हानि को कम किया है। ऐसे प्रयास जारी रखें।

    जबलपुर में वन नेशन वन ग्रिड के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के कार्य के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

    विद्युत बचत उपाय पर निरंतर अमल हो।

    प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया, भारिया के घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। इन वर्गों के सभी लोगों को लाभ पहुंचाएं।

    ऊर्जा की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारी को अंजाम दें।

    मध्यप्रदेश विद्युत जनरेशन कंपनी लाभ में है। इसके लिए कंपनी के पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं।
    बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

जून से महंगी होंगी Maruti Suzuki की कारें, कीमतों में 30 हजार तक बढ़ोतरी

नई दिल्ली
 भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India ने गुरुवार को अपनी कारों की कीमतों में जून 2026 से 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है. स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में, घरेलू कार बनाने वाली कंपनी ने कहा कि Maruti ने अपने पोर्टफोलियो में अपने सभी मॉडलों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। 

कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि, “इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, कंपनी ने जून 2026 से अपने पोर्टफोलियो में मॉडल्स की कीमतें 30,000 रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया है। 

एक ऑफिशियल बयान में, कंपनी ने इस फैसले के लिए रॉ मटेरियल और ऑपरेशनल कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया, जिसका ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर असर पड़ रहा है। 

कार बनाने वाली कंपनी ने आगे कहा कि, “पिछले कुछ महीनों से, कंपनी कॉस्ट कम करने के तरीकों से कॉस्ट पर पड़ने वाले असर को जितना हो सके कम करने की लगातार कोशिश कर रही है। 

Maruti Suzuki India ने कहा कि उसने कॉस्ट का कुछ बोझ उठाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कॉस्ट कम करने के कई कदम उठाए हैं, लेकिन कॉस्ट के खराब माहौल की वजह से कुछ हद तक असर पड़ना ज़रूरी हो गया है। 

कंपनी ने आगे कहा कि उसने कस्टमर्स पर असर को जितना हो सके कम करने की कोशिश की है. अपनी फाइलिंग में उसने आगे कहा कि, “हालांकि, महंगाई का दबाव अब ऊंचे लेवल पर है और खर्च का खराब माहौल बना हुआ है, इसलिए कंपनी को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा मार्केट पर डालना होगा, साथ ही यह भी पक्का करना होगा कि कस्टमर्स पर असर जितना हो सके कम से कम हो। 

इसमें आगे कहा गया कि, “बदलाव की सही मात्रा हर मॉडल में अलग-अलग होगी.” यह नई घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत में कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने कमोडिटी की ज़्यादा कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और सप्लाई चेन में महंगाई के दबाव को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की है। 

इससे पहले, Mahindra & Mahindra ने 6 अप्रैल से अपने SUV और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कंपनी ने कहा कि बढ़ती इनपुट और ऑपरेशनल लागत का हवाला देते हुए, कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी, जिसमें सभी मॉडलों में औसतन लगभग 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 

एशिया के मैदान पर चमकेगी मध्यप्रदेश की बेटियों की प्रतिभा

भोपाल 

मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने एक बार फिर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। जापान में आयोजित होने वाले महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 के लिए घोषित भारतीय टीम में अकादमी की 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। चयनित खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए देश एवं मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी। प्रतियोगिता का आयोजन जापान के काकामिगाहारा में 29 मई से 06 जून 2026 तक किया जाएगा।

अकादमी की चार बेटियों को मिला राष्ट्रीय मंच

भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल की गोलकीपर महक परिहार, मिडफील्डर स्नेहा दावड़े एवं नम्मी गीता, तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी नौशीन नाज़ को शामिल किया गया है। इन खिलाड़ियों का चयन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासित प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत का परिणाम है।

चार खिलाड़ियों का एक साथ भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था एवं महिला हॉकी विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

महिला अंडर-18 एशिया कप : पूल-ए में भारत की मजबूत चुनौती

प्रतियोगिता में भारतीय टीम पूल-ए में शामिल है, जहां उसका मुकाबला कोरिया, मलेशिया एवं सिंगापुर जैसी मजबूत टीमों से होगा। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 30 मई को मलेशिया के विरुद्ध करेगी। इसके बाद 31 मई को कोरिया तथा 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ मुकाबला खेलेगी।

भोपाल में हुआ विशेष प्रशिक्षण, अंतर्राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार हुई टीम

भारतीय महिला अंडर-18 टीम ने प्रतियोगिता पूर्व अपना प्रशिक्षण शिविर भोपाल के राष्ट्रीय कैंप में पूर्ण किया, जहां खिलाड़ियों ने तकनीकी कौशल, सामरिक रणनीति, मैच फिटनेस एवं टीम समन्वय पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी तैयारी क्रम में भारतीय टीम ने भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चार मैचों की श्रृंखला भी खेली, जिसमें टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए आत्मविश्वासपूर्ण जीत दर्ज की। यह श्रृंखला खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

जापान में होगा एशिया का बड़ा मुकाबला

महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 का आयोजन 29 मई से 6 जून 2026 तक काकामिगाहारा, जापान में किया जाएगा। भारतीय टीम को पूल-ए में कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर के साथ रखा गया है। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 30 मई को मलेशिया के विरुद्ध करेगी। इसके बाद 31 मई को कोरिया तथा 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल 5 जून एवं फाइनल मुकाबला 6 जून को होगा।

बेटियों का भारतीय टीम में चयन प्रदेश के लिए गौरव-  सारंग

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने भारतीय महिला अंडर-18 टीम एवं चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, “मध्यप्रदेश की बेटियों का भारतीय टीम में चयन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। खिलाड़ियों ने अपने समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर यह उपलब्धि अर्जित की है। हमें विश्वास है कि भारतीय टीम एशिया कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित करेगी। मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर एवं विश्वस्तरीय खेल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।”

महिला हॉकी प्रतिभाओं का मजबूत केंद्र बन रहा मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल लगातार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार कर रही है। आधुनिक खेल अधोसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली, खेल विज्ञान आधारित फिटनेस प्रबंधन एवं अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से अकादमी देश की अग्रणी हॉकी प्रशिक्षण संस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

एक साथ चार महिला खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश महिला हॉकी प्रतिभाओं के विकास में तेजी से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

 

 

मालखेड़ी स्टेशन बना मालखेड़ी जंक्शन, यात्रियों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद

बीना
 पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर जोन के अंतर्गत जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडल के कुल 14 स्टेशनों को जंक्शन का दर्जा दिया है, इसमें मालखेड़ी स्टेशन भी शामिल है, जो कि अब जंक्शन के नाम से पहचाना जाएगा। जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद स्टेशन पर सुविधाओं में विस्तार की उम्मीद भी जाग गई है। बीना शहर से महज दो किलोमीटर दूर यह स्टेशन अभी जबलपुर मंडल में आता है, जहां पर सुविधाओं के विस्तार की मांग लगातार की जाती है, लेकिन यहां पर जो ट्रेनें खड़ी होती हैं, उनके अनुसार सुविधाओं में विस्तार की जरूरत है।

दरअसल रेलवे अधोसंरचना विकास और नई रेल लाइनों, कॉर्ड लाइनों व बाईपास लाइनों के चालू होने के बाद यात्रियों व रेल परिचालन की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशनों के नामों को संशोधित करने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति और भारतीय रेलवे सम्मेलन (आईआरसीए), नई दिल्ली के से चर्चा के बाद पश्चिम मध्य रेल के तीनों मंडलों (जबलपुर, भोपाल एवं कोटा) के कुल 14 रेलवे स्टेशनों के नामों में संशोधन कर उन्हें अब आधिकारिक तौर पर जंक्शन स्टेशन के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इन सभी स्टेशनों के पुराने अल्फाबेटिकल (अक्षर) और न्यूमेरिकल (संख्यात्मक) कोड में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वह पहले की तरह ही रहेंगे। केवल नाम में जंक्शन शब्द जोड़ा गया है।

अल्फाबेटिकल और न्यूमेरिकल कोड यथावत रहेंगे

रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्टेशनों के अल्फाबेटिकल और न्यूमेरिकल कोड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल नाम के साथ ‘जंक्शन’ शब्द जोड़ा गया है।

    पश्चिम मध्य रेलवे के 14 स्टेशनों के नाम में जुड़ा ‘जंक्शन’
    जबलपुर मंडल के सबसे ज्यादा 8 स्टेशन शामिल
    भोपाल मंडल के 3 और कोटा मंडल के 3 स्टेशन अपग्रेड
    रेलवे बोर्ड और IRCA की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना
    स्टेशन कोड पहले जैसे ही रहेंगे, उनमें कोई बदलाव नहीं
    नए रेल रूट और कॉर्ड लाइन शुरू होने के बाद लिया गया फैसला
    यात्रियों को सही रूट चुनने और ट्रेनों के संचालन में मिलेगी सुविधा

जबलपुर मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन
कटनी साउथ → कटनी साउथ जंक्शन (KTES)
कटनी मुड़वारा → कटनी मुड़वारा जंक्शन (KMZ)
कैमा → कैमा जंक्शन (KMA)
सगमा → सगमा जंक्शन (SAGM)
बांसापहाड़ → बांसापहाड़ जंक्शन (BNSP)
बीना मालखेड़ी → बीना मालखेड़ी जंक्शन (MAKR)
कटंगी खुर्द → कटंगी खुर्द जंक्शन (KTKD)

कछपुरा → कछपुरा जंक्शन (KEQ)

 

भोपाल मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन
तलवड़िया → तलवड़िया जंक्शन (TLV)
रूठियाई → रूठियाई जंक्शन (RTA)

संत हिरदाराम नगर → संत हिरदाराम नगर जंक्शन (SHRN)
नई रेल लाइनों और बेहतर कनेक्टिविटी को देखते हुए 14 स्टेशनों को “जंक्शन” का दर्जा दिया गया है। इससे रेल संचालन और यात्रियों की सुविधा बेहतर होगी
रेलवे अधिकारी, पश्चिम मध्य रेल विभाग

कोटा मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन
गंगापुर सिटी → गंगापुर सिटी जंक्शन (GGC)
रामगंज मंडी → रामगंज मंडी जंक्शन (RMA)
गुड़ला → गुड़ला जंक्शन (GQL)

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, स्टेशनों को जंक्शन का दर्जा मिलने से ट्रेनों के सुचारू संचालन, नए रेल रूट के बेहतर प्रबंधन और यात्रियों को सही यात्रा मार्ग चुनने में काफी आसानी होगी। इसके साथ ही भविष्य में इन स्टेशनों पर सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।

मालखेड़ी से जाती हैं चार दिशाओं में ट्रेनें
मालखेड़ी स्टेशन जो अब जंक्शन है, यहां से चार दिशाओं में ट्रेनें चलती हैं, यहां से सीधे कटनी, झांसी, आगरा, मथुरा दिल्ली, गुना, कोटा अजमेर व भोपाल, इटारसी, मुंबई की ओर ट्रेनें चलती हैं। स्टेशन पर सुविधाओं के अभाव में अभी सिर्फ 24 ट्रेनों का स्टॉपेज है, जबकि यहां पर करीब 36 से अधिक ट्रेनें निकलती हैं, जिनमें से कई ट्रेनों का स्टॉपेज यहां पर नहीं है। अब लोगों को उम्मीद है कि सभी ट्रेनें यहां पर रुकेंगी और रिजर्वेशन टिकट काउंटर, पर्याप्त स्टॉल सहित अन्य सुविधाओं में विस्तार किया जाएगा। सुविधाएं बढ़ने से यात्रियों को परेशनियों से निजात मिलेगी। अभी सड़क, प्रकाश मूलभूत सुविधाओं की कमी है।

वर्षा पूर्व सड़क, पुल एवं भवनों के संधारण का कार्य करें पूर्ण : प्रबंधक संचालक यादव

भोपाल

लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रदेश में संचालित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा के लिए 20 मई को मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा भोपाल, मण्डला, अशोकनगर, खंडवा, रीवा, नीमच एवं निवाड़ी जिलों में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में कुल 34 कार्यों का रेंडम आधार पर चयन कर परीक्षण किया गया। निरीक्षित कार्यों में 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं पुल), 6 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) के भवन निर्माण, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा एक कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम से संबंधित था।

निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा बैठक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल, प्रमुख अभियंता (बीडीसी)  अजय वास्तव, तकनीकी सलाहकार एमपीआरडीसी  आर.के. मेहरा सहित विभाग के समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

समीक्षा में निवाड़ी जिले में सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय से रियारा धाम तेहरका तक 1.50 किलोमीटर लंबाई की निर्माणाधीन सड़क के संबंध में संबंधित मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग सागर परिक्षेत्र को पुनः निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त 19 अन्य कार्यों में आंशिक सुधार कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए।

बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निरीक्षण प्रतिवेदनों में की गई अनुशंसाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पूर्व में किए गए निरीक्षणों की लंबित कार्यवाहियों का निराकरण अगली समीक्षा बैठक से पूर्व पूर्ण किया जाए।

समीक्षा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों के संतोषजनक और समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं को निराकरण की जानकारी देकर संतुष्टि प्राप्त करने तथा विभागीय रैंकिंग में सुधार के लिये निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में वर्षा ऋतु से पूर्व सड़क, पुल एवं भवनों के संधारण कार्य पूर्ण करने, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट स्थलों के सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने तथा लोक कल्याण सरोवर योजना के कार्य 30 जून 2026 तक पूर्ण कर विभागीय पोर्टल पर जियो-टैग्ड वाली फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अतिरिक्त भास्कराचार्य संस्थान द्वारा विकसित किए जा रहे लोक कल्याण सूचकांक मॉड्यूल में समय पर प्रविष्टियां दर्ज करने, सड़क किनारे पौधारोपण करने तथा विभागीय नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

 

सिर्फ 20 रुपए में अंतरिक्ष की सैर, उज्जैन में टेलीस्कोप से दिख रहे चांद-शुक्र-बृहस्पति

उज्जैन
 मध्य प्रदेश का उज्जैन अब विज्ञान और खगोल अध्ययन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. शहर में मौजूद प्राचीन जीवजी वैधशाला, डोंगला स्थित वरामिहिर वैधशाला, तरामण्डल और विज्ञान केंद्र विज्ञान प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी क्रम में प्राचीन जीवजी वैधशाला में 21 मई से विशेष खगोलीय अवलोकन कार्यक्रम की शुरुवात हुई है जो 28 मई तक चलेगी। 

इस आयोजन में देश-दुनिया से उज्जैन आने वाले पर्यटकों और विज्ञान में रुचि रखने वालों को 8 इंच टेलिस्कोप से अंतरिक्ष के अद्भुत नजारे दिखाए जा रहे हैं. पर्यटक टेलीस्कोप की मदद से चंद्रमा पर मौजूद गड्ढे, बृहस्पति ग्रह की पत्तियों और उसके उपग्रहों का नजदीक से अवलोकन कर रहे हो। 

गाइड दे रहे रोचक जानकारी
मौके पर मौजूद गाइड पर्यटकों के साथ वैज्ञानिक महत्व साझा कर रहे हैं और बड़ी रोचक जानकारियां भी दे रहे हैं. जिससे पहले ही दिन बड़ा उत्साह पर्यटकों में देखा गया. हालांकि इसमे 10 साल से कम उम्र के बच्चों को दूर रखा गया है. वहीं वैधशाला के अधीक्षक के अनुसार, ”शुक्र, बृहस्पति और बढ़ते चंद्रमा का अवलोकन भी करवाया जा रहा है. विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम नगरी में पर्यटकों और विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 

छात्र बोला- अभी तक चंद्रमा के बारे में किताबों में पढ़ा था
अनुभव ले चुके पर्यटकों ने चर्चा की. पांचवी कक्षा के हनी ने कहा, ”यह बड़ा ही अद्भुत है, इसमें चंद्रमा की सतह पर गड्ढे, बृहस्पति पर पत्तियां और उसके उपग्रह को बड़ी आसानी से देखा जा रहा है. अभी तक सिर्फ किताबों में पड़ा था लेकिन आज पहली बार इसे करीब से देखकर महसूस किया, यह बहुत ही रोचक था। 

कक्षा सातवीं में पढ़ने वाले प्रिंस ने कहा, ”इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. जो भी कुछ मैंने देखा उसे में अपने दोस्तों से भी शेयर करूंगा और उन्हें भी यहां आने के लिए आग्रह करूंगा.” वहीं पर्यटक विकास बोले टेलिस्कोप से 8 दिन के लिए दी गई सुविधा का हर किसी को फायदा उठाना चाहिए. यह बहुत ही अद्भुत और रोचक अनुभव रहा। 

जीवजी वैधशाला अधीकक्ष ने कहा, ”वर्तमान में आकाश में सायं सूर्यास्त के बाद आप पश्चिम दिशा में लठ्ठू की तरह चमकदार शुक्र ग्रह को देख रहे हैं. पश्चिमी आकाश में लगभग 60 अशं पर चमकदार बृहस्पति ग्रह दिखाई दे रहा है. साथ ही शुक्ल पक्ष का प्रतिदिन बढ़ता हुआ हमारा चन्द्रमा तो आकाश में दिख ही रहा है. इस प्रकार तीन खगोलीय पिण्डों के अवलोकन के लिए एवं अपनी जिज्ञासा के समाधान का यह सबसे शानदार अवसर है। 

इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय जीवाजी वैधशाला उज्जैन द्वारा उसे 8 दिन के लिए ग्रीष्मकालीन आकाशीय अवलोकन के नाम से शुरू किया है. हर रोज शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पर्यटक इसका लाभ उठा सकते हैं. सिर्फ शुक्र ग्रह नीचे की स्थिति में होने के कारण शाम 8:00 बजे के बाद टेलीस्कोप की परिधि से बाहर हो जायेगा. इसलिए इसे शाम 8:00 बजे तक ही दिखाया जा सकेगा. आकाशीय अवलोकन के लिये आकाश का खुला होना आवश्यक है. 20 प्रति व्यक्ति शुल्क रखा गया है। 

दुर्घटनाओं से बचना है तो घरेलू उपकरणों में रखें सही अर्थिंग

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आम जनता से जागरुक होने की अपील की है। इस संबंध में कंपनी ने सुरक्षा संबंधी मापदंड जारी किए हैं। विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से विद्युत लाईनों से धरातलभवनों से सुरक्षित दूरी आदि के लिए केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा मापदंड निर्धारित किये हैं। 

क्रं.

विवरण

एल.टी. लाईन

11 के.व्ही. लाईन

33 के.व्ही. लाईन

1.

ऐसा क्षेत्र जहाँ वाहनटैफिक होवहाँ जमीन से कंडक्टर की दूरी।

4.6 मीटर

5.2 मीटर

5.2 मीटर

2.

सड़क के समानांतर विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर से जमीन की दूरी।

5.5 मीटर

5.8 मीटर

5.8 मीटर

3.

सड़क क्रॉसिंग करती विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर की जमीन से दूरी।

5.8 मीटर

6.1 मीटर

6.1 मीटर

4.

किसी मकान के ऊपर से गुजरने वाली लाईन के निचले कंडक्टर एवं मकान के सबसे ऊँपर हिस्से के बीच की दूरी

2.5 मीटर

3.7 मीटर

3.7 मीटर

 

5.

किसी मकान के पास से गुजरने वाली लाईन के सबसे नजदीकी कंडक्टर की मकान से दूरी।

1.2 मीटर

मीटर

मीटर

 

6.

लाईन एवं पेड़ की डाली के बीच की दूरी

1.2 मीटर

मीटर

मीटर

नागरिकों से अपील है कि अपने आवासीय परिसर अथवा स्थापनाओं से विद्युत लाइनो की दूरी निर्धारित मापदंड अनुसार रखें। निम्नदाब और मध्यदाब स्थापनाओं में प्रायः व्यक्ति विद्युतमय चालक के सीधे सम्पर्क में आता हैजबकि उच्च दाब स्थापनाओं में वह विद्युतमय चालक से सीधे सम्पर्क में आने के पूर्व ही फ्लेश ओव्हर डिस्टेंस में आने से स्पार्क हो कर झुलस जाता है। इस प्रकार दुर्घटना का घातक तथा गैर घातक होना दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के ‘‘डिग्री आफ बन्र्स’’ पर निर्भर रहता है। निम्नदाब अथवा मध्यदाब स्थापनाओं में सुरक्षा के लिए साधारण केवल फ्यूज लगाए जाते हैं। साधारण फ्यूज अपनी क्षमता से अधिक करंट बहने पर ही गर्म हो कर पिघल जाता हैइसमें कुछ समय लगता है और यही समय ‘‘दुर्घटनाग्रस्त’’ होने के लिए घातक सिद्ध होता हैपरन्तु अर्थिंग सही हो तो फ्यूज अतिशीघ्र उड़ जाता है। इसी कारण से विद्युत स्थापनाओं में अर्थिंग व्यवस्था अति महत्वपूर्ण हो जाती है। घरेलू स्थापनाओं में विद्युत दुर्घटनाएं मुख्यतः वायरिंग एवं फिटिंग में खराबी आने से तथा उपकरणों में खराबी आने से लीकेज या शार्टसर्किट के कारण होती है। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे आई.एस.आई. मार्क के उपकरण ही उपयोग में लाएं।

विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दें

कंपनी ने आम लोगों को विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देने अपील की है। भवन निर्माणकॉलोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान अक्सर यह देखने में आया है कि बिजली के खम्बों को सड़क के बीच में खड़ा कर दिया जाता है या कॉलोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊंचा कर दिया जाता है। इस दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों का ध्यान नहीं रखा जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊंची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभीकभी दुर्घटनाएं हो भी जाती है। इस संबंध में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों से कहा है कि इस प्रकार के नियम विरूद्ध कार्यों की रोकथाम की जाए और मैदानी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में विद्युत सुरक्षा एवं विद्युत प्रदाय सुचारू रखने के लिए विद्युत अधिनियम 2003 में जो प्रावधान दिए गए हैंउनके अनुसार कार्यवाही की जाए।

भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोडभवनस्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ताएजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने के लिये रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने के लिये कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। नई लाइनों के निर्माण के दौरान रोडभवन या स्ट्रक्चर से उक्त नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित अंतराल रखते हुए ही कार्य कराए जाएं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों।

सड़कों की बारबार मरम्मत से सड़कों की ऊंचाई बढ़ने से लाइनों और सड़क के बीच अंतराल कम होता जाता है। अतः इस ओर विशेष ध्यान देकर ऐसी लोकेशनों पर लाइन की ऊंचाई बढ़ाने हेतु संबंधित एजेन्सी से सम्पर्क कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। नवीन कॉलोनियों में विद्युत प्रदाय करने के लिए रोडवाटर सप्लाईसीवेज लाइन आदि के निर्माण के साथसाथ उपकेन्द्र तथा लाइनों का विस्तार भी प्राथमिकता के आधार पर हो ताकि भवन निर्माण का कार्य लाइनों से सुरक्षात्मक दूरी (अंतराल) रखते हुए नियमानुसार हो सके। 

 

100 सिर्फ एक नंबर’, रुपये की गिरावट पर अरविंद पनगढ़िया का बड़ा बयान

नई दिल्‍ली

पिछले कुछ समय से रुपये में तेज गिरावट आई है, जिसे लेकर कुछ एक्‍सपर्ट्स का दावा है कि रुपया 100 लेवल के पार जा सकता है. यह भी खबर आई है कि आरबीआई रुपये को 100 लेवल पर जाने से बचाने के लिए कई प्रयास कर रहा है। 

इस बीच, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI से आग्रह किया है कि 100 लेवल पर जाने से बचाने की कोशिश ना करें. इसे अपनी नीतिगत प्रतिक्रिया निर्धारित न करने दें. 100 सिर्फ एक नंबर है जैसे 99 और 101. उनका तर्क है कि मौजूदा तेल संकट के जवाब में करेंसी का कमजोर होना ही उचित उपाय है। 

इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि तेल की कमी चाहे अस्थायी साबित हो या लंबे समय तक चलने वाली, रुपये में गिरावट होने देना ही सबसे व्यावहारिक उपाय होगा. उन्होंने कहा कि अगर तेल की कमी शॉर्टटर्म (3 महीने से एक वर्ष तक) रहती है, तो रुपया अभी गिरावट पर रहेगा, लेकिन तेल आयात बिल कम होने और विदेशी पूंजी द्वारा ‘सस्ते’ रुपये का लाभ उठाने के लिए भारतीय निवेश की तलाश करने के बाद इसमें काफी सुधार होगा। 

रुपये को बचाने की कोशिश बेकार 
उन्होंने तर्क दिया कि अगर रुकावट लंबे समय तक चलता है, तो भंडार में कमी या महंगे डॉलर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से रुपये को बचाने के प्रयास विफल हो जाएंगे. पनगढ़िया ने कहा कि तेल की कमी लंबे समय तक चलने वाली है. ऐसे में गिरावट के अलावा किसी भी अन्य उपाय का सहारा लेना व्यर्थ होगा. रुपये को बचाने के प्रयास से भंडार तब तक कम होता रहेगा जब तक कि वह पूरी तरह समाप्त न हो जाए। 

100 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर जाना ही होगा
इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि डॉलर बांडों को जारी करना और हाई इंटरेस्‍ट वाले NRI डिपॉजिट को भी अस्‍थायी समाधान बताकर खारिज कर दिया. उन्‍होंने कहा कि 100 रुपये प्रति डॉलर का लेवल पार करना ही होगा. पनगढ़िया ने 2013 के मुद्रा संकट से इसकी तुलना की, जब भारत को हाई महंगाई और व्यापक आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ा था। 

उन्होंने कहा कि यह 2013 नहीं है. साल 2013 में महंगाई दो अंकों में थी. अब ऐसा नहीं है. इसलिए, अर्थव्यवस्था अवमूल्यन के साथ आने वाले कुछ महंगाई दबाव को अवशोषित करने के लिए अच्छी स्थिति में है. उन्होंने डॉलर बांडों और उच्च ब्याज वाले एनआरआई जमाओं को ‘महंगे साधन’ बताया है, जो बड़े पैमाने पर लाभ को धनी प्रवासी भारतीयों तक पहुंचाते हैं। 

अभी कहां है रुपया? 
गौरतलब है कि ये बयान रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.95 पर पहुंचने और बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर 96.86 पर बंद होने के एक दिन बाद आई है. भू-राजनीतिक तनाव में कमी और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद गुरुवार को मुद्रा में 49 पैसे की उछाल आई और यह 96.37 पर बंद हुई। 

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