बकरीद अवकाश बदलने की मांग: बैंक यूनियनों ने सीएम से की 28 मई को छुट्टी घोषित करने की अपील

भोपाल। ईद उल जुहा (बकरीद) के अवकाश को लेकर मध्य प्रदेश में बैंक यूनियनों ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण मांग की है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू), मध्य प्रदेश ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आग्रह किया है कि बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत पूर्व में घोषित 27 मई 2026 के अवकाश को संशोधित कर 28 मई 2026 किया जाए।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस, मध्य प्रदेश के कोऑर्डिनेटर वी. के. शर्मा ने शुक्रवार को जारी प्रेस नोट में कहा कि इस वर्ष ईद उल जुहा (बकरीद) का त्योहार 28 मई 2026 को मनाया जाएगा, जबकि पहले 27 मई को अवकाश घोषित किया गया था। ऐसे में वास्तविक पर्व की तिथि पर अवकाश घोषित किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली और गुजरात सरकार ने भी स्थिति स्पष्ट होने के बाद अपने पूर्व घोषित अवकाश आदेशों में संशोधन करते हुए 28 मई 2026 को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। ऐसे में मध्य प्रदेश शासन को भी कर्मचारियों और आमजन की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

यूएफबीयू का कहना है कि बैंक और वित्तीय संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मचारी एवं अधिकारी ईद उल जुहा के अवसर पर धार्मिक परंपराओं और पारिवारिक आयोजनों में शामिल होते हैं। यदि अवकाश वास्तविक त्योहार के दिन नहीं रहेगा तो कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

बैंक यूनियनों ने यह भी कहा कि त्योहारों से जुड़े अवकाश का उद्देश्य संबंधित समुदाय को धार्मिक और सामाजिक रूप से सुविधा देना होता है। इसलिए पर्व की वास्तविक तिथि पर ही अवकाश घोषित होना अधिक व्यावहारिक और न्यायसंगत होगा।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने मुख्यमंत्री से शीघ्र निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा है कि यदि समय रहते आदेश जारी किया जाता है तो बैंक कर्मचारियों, अधिकारियों और ग्राहकों को भी भ्रम की स्थिति से राहत मिलेगी। फिलहाल बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों की नजर अब राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा का त्वरित असर: कोसरंगी की दीदियों को मिली 50 निःशुल्क सिलाई मशीनें

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा बीते दिन आरंग विकासखंड के एलआरसी सेंटर, कोसरंगी के अवलोकन किया गया था तथा कोसरंगी में जन चौपाल के दौरान की गई घोषणा पर त्वरित अमल करते हुए आज मीरा एवं राधा ग्राम संगठन, कोसरंगी की महिलाओं को 50 निःशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की गईं।

मुख्यमंत्री  साय ने एलआरसी सेंटर के निरीक्षण के दौरान ग्राम संगठन की महिलाओं से मुलाकात कर उनके आजीविका गतिविधियों और कार्यों की जानकारी ली थी।  महिलाओं ने जन चौपाल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री  साय ने महिलाओं की मांग को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही अधिकारियों को शीघ्र सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश का पालन करते हुए आज कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में ग्राम संगठन की दीदियों को जिला पंचायत सदस्य  गुरु सौरभ साहेब एवं  जनपद पंचायत आरंग अध्यक्ष मती ताकेश्वरी मुरली साहू की उपस्थिति में सिलाई मशीन प्रदान किया गया।

ग्राम कोसरंगी के ग्राम संगठन की दीदी मती सपना पटेल ने बताया कि मेरे समूह कल जन चौपाल में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय जी हमारे गांव आए थे जहां हमने सिलाई मशीन की मांग की जिसके बाद हमे आज जिला प्रशासन द्वारा सिलाई मशीन दे दी गई। मीरा ग्राम संगठन की सदस्य मती यशोदा मांडले ने बताया कि कल हमारे ग्राम कोसरंगी में मुख्यमंत्री  जी का कार्यक्रम था जिसमें हमने सिलाई मशीन की मांग की थी और हमें सिलाई मशीन मिल गई।

मांग जल्द पूरी होने पर उत्साहित दीदियों ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने उनकी जरूरत को समझते हुए तुरंत निर्णय लिया, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित होगा।

राज्य स्तरीय जैव-विविधता पुरस्कारों में दक्षिण पन्ना का परचम, “जैव-विविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” सम्मान से हुआ सम्मानित

भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 22 मई 2026 के अवसर पर भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड द्वारा घोषित “राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार 2024 एवं 2025” में दक्षिण पन्ना वनमण्डल को “जैव-विविधता स्वामित्व रखने वाला सर्वश्रेष्ठ विभाग” श्रेणी में सम्मानित किया गया।

दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा जैव-विविधता संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में अनेक अभिनव एवं जनभागीदारी आधारित कार्य किए गए। वनमण्डल द्वारा पक्षियों, तितलियों, औषधीय पौधों, विरासत वृक्षों, प्राकृतिक झिरियों तथा स्थानीय जैविक धरोहरों का व्यापक अभिलेखीकरण एवं दस्तावेजीकरण किया गया। साथ ही स्थानीय स्तर पर जैव-विविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए गए। गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में दक्षिण पन्ना द्वारा “वल्चर फ्रेंडली गौशाला”, सतत मॉनिटरिंग, प्रतिबंधित दवाइयों की रोकथाम एवं ग्रामीण सहयोग आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण पन्ना क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2021 में जहां गिद्धों की संख्या 614 थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1127 तक पहुँच गई।

मानव-सर्प संघर्ष को कम करने एवं सर्पदंश से बचाव के लिये दक्षिण पन्ना वनमण्डल द्वारा विशेष “सांप-सीढ़ी” आधारित शैक्षणिक खेल विकसित किया गया। इस नवाचार के माध्यम से हजारों बच्चों एवं ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार एवं वैज्ञानिक जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई गई। इस पहल से जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा मानव-सर्प संघर्ष संबंधी भ्रांतियों को कम करने में सहायता मिली।

व्यक्तिगत (शासकीय) श्रेणी में दक्षिण पन्ना वनमण्डल के वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रथम पुरस्कार एवं वनरक्षक  वीरेंद्र पटेल को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा दक्षिण पन्ना क्षेत्र में 129 महत्वपूर्ण औषधीय पौधों का अभिलेखीकरण एवं जनजागरूकता कार्य किया गया। वहीं  वीरेंद्र पटेल द्वारा कल्दा क्षेत्र में 97 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण कर पक्षी एवं जैवविविधता संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का उल्लेखनीय कार्य किया गया। दक्षिण पन्ना वनमण्डल की यह उपलब्धि जनभागीदारी, टीम भावना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार आधारित संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। यह सम्मान न केवल दक्षिण पन्ना वन विभाग बल्कि पूरे पन्ना जिले के लिए गौरव का विषय है तथा भविष्य में जैव-विविधता संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

जैव-विविधता संरक्षण में डिंडोरी वनमण्डल हुआ पुरस्कृत

मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा प्रदेश में जैव-विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रारंभ किये गये “राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2024 एवं 2025 अंतर्गत वनमंडल डिंडोरी को पहुंच एवं लाभ प्रभाजन के अधिकतम अनुबंध श्रेष्ठ वनमंडल अतंर्गत वर्ष 2023-24 में प्रथम स्थान एवं वर्ष 2024-25 में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण, चेन्नई के अध्यक्ष  वीरेंद्र आर. तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन ने की तथा राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. बी. बालाजी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मध्यप्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव  सुदीप सिंह ने किया। राज्य स्तरीय पुरस्कार दक्षिण पन्ना वनमण्डल की ओर से वनमण्डलाधिकारी अनुपम शर्मा, वन परिक्षेत्र अधिकारी पवई  नितेश पटेल एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी कल्दा  परिवेश भदौरिया द्वारा प्राप्त किया गया। दक्षिण पन्ना वनमण्डल के नामांकन की अनुशंसा जिला कलेक्टर मती उषा परमार एवं वनमण्डलाधिकारी द्वारा की गई थी।

 

तुलसी गबार्ड ने ट्रंप कैबिनेट से दिया इस्तीफा, अचानक फैसले से अमेरिकी राजनीति में हलचल

वाशिंगटन

 तुलसी गबार्ड ने अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया है. गबार्ड ने इस्तीफे के पीछे अपने पति को कैंसर होने की पारिवारिक वजह का हवाला दिया है. तुलसी का यह इस्तीफा आगामी 30 जून से प्रभावी हो जाएगा. उनके हटने के बाद अब प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास कार्यवाहक डायरेक्टर के तौर पर खुफिया विभाग का जिम्मा संभालेंगे। 

भले ही ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के फैसले का सम्मान करते हुए उनकी तारीफों के पुल बांधे हों, लेकिन अमेरिकी सियासी गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है. हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि क्या यह वाकई सिर्फ एक पारिवारिक संकट है या फिर इसके पीछे व्हाइट हाउस के भीतर चल रही कोई बड़ी सियासी अनबन? 

ये महज कयास नहीं है बल्कि ऐसे कई तथ्य है जो इस ओर इशारा करते हैं कि ट्रंप और तुलसी के बीच रिश्ते अब पहले की तरह सहज नहीं रहे थे। दरअसल, तुलसी गबार्ड का जाना ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका इसलिए भी है, क्योंकि महज दो महीने पहले ही उनके बेहद करीबी सहयोगी और पूर्व नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 

तुलसी गबार्ड का इस्तीफा कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह ट्रंप कैबिनेट में लगातार हो रहे बदलावों की कड़ी का हिस्सा है. गबार्ड इस साल ट्रंप प्रशासन छोड़ने वाली चौथी कैबिनेट सदस्य बन गई हैं. उनसे ठीक पहले इसी साल अप्रैल में श्रम मंत्री लोरी चावेज-डीरेमर ने अपने पद से किनारा कर लिया था. इतना ही नहीं, होमलैंड सिक्योरिटी मिनिस्टर क्रिस्टी नोएम और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी जैसी ताकतवर महिलाएं भी इस साल ट्रंप प्रशासन से अलग हो चुकी हैं। 

बड़े फैसलों से ‘गायब’ थीं तुलसी, ईरान पर बढ़ गई थी तल्खी
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है. नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जैसे बेहद संवेदनशील और शीर्ष पद पर होने के बावजूद तुलसी गबार्ड पिछले कुछ समय से अमेरिकी सरकार के बड़े फैसलों में कम ही सक्रिय दिखाई दे रही थीं. खासकर ऐसे वक्त में जब अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों के खिलाफ बेहद कड़े और आक्रामक कदम उठाए, तब खुफिया प्रमुख के तौर पर तुलसी गबार्ड की भूमिका सबसे अहम होनी चाहिए थी, लेकिन वे परिदृश्य से लगभग गायब रहीं। 

यह महज कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस नीतिगत टकराव थे. अपने पूरे राजनीतिक करियर के दौरान तुलसी गबार्ड की छवि एक ऐसी नेता की रही है जो विदेशों में अमेरिकी सेना के हस्तक्षेप और युद्धों का कड़ा विरोध करती आई हैं. ऐसे में जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई और हमलों का फैसला किया, तो प्रशासन के भीतर तुलसी गबार्ड के साथ उनका तनाव साफ तौर पर खुलकर सामने आ गया था। 

तुलसी गबार्ड के इस्तीफे पर क्या बोले ट्रंप
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘दुर्भाग्य से, शानदार काम करने के बाद तुलसी गबार्ड 30 जून को प्रशासन छोड़ रही हैं। उनके प्यारे पति अब्राहम को हाल ही में हड्डी के कैंसर का दुर्लभ डायग्नोसिस हुआ है। वे सही मायने में उनके साथ रहना चाहती हैं ताकि उन्हें अच्छा स्वास्थ्य वापस दिला सकें। वे इस कठिन लड़ाई को साथ मिलकर लड़ रहे हैं। मुझे कोई शक नहीं है कि वह जल्द ही पहले से भी बेहतर हो जाएंगे।’

उन्होंने कहा कि तुलसी ने अद्भुत काम किया है और हम उन्हें बहुत मिस करेंगे। उनके बेहद सम्मानित प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस, एरॉन लुकास अब एक्टिंग डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस के रूप में कार्य करेंगे।

तुलसी गबार्ड के बारे में जानिए
तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिकन समोआ में हुआ था। उन्होंने हवाई से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चार बार सांसद के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और 2024 के अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया। इसके बाद उन्हें 2025 में अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बनाया गया। तुलसी गबार्ड का भारत से सीधा पारिवारिक संबंध नहीं है, क्योंकि वे भारतीय मूल की नहीं हैं। हालांकि उनका हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है। उनकी मां हिंदू धर्म से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने सभी बच्चों को संस्कृत नाम दिए। तुलसी नाम हिंदू धर्म में पवित्र पौधे से जुड़ा है।

भगवद गीता और वैष्णव परंपरा से प्रभावित
तुलसी गबार्ड बचपन से ही भगवद गीता और वैष्णव परंपरा से प्रभावित रही हैं। वे अमेरिकी कांग्रेस में चुनी जाने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी महिला बनीं और उन्होंने शपथ भी भगवद गीता पर ली थी। भारत के साथ उनके रिश्ते राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर मजबूत रहे हैं। उन्होंने कई बार भारत का दौरा किया और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने की वकालत की। 2014 में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवद गीता की प्रति भेंट की थी। वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के समर्थन में भी खुलकर सामने आई थीं। मार्च 2025 में उन्होंने भारत का दौरा कर आतंकवाद और सुरक्षा सहयोग पर भारतीय अधिकारियों से चर्चा की थी। हिंदू पहचान और भारत के प्रति सकारात्मक रुख के कारण भारत में भी उनकी काफी चर्चा होती रही है।

जब ट्रंप ने गबार्ड के दावों को सरेआम किया था खारिज
ट्रंप और तुलसी गबार्ड के बीच की यह तल्खी और असहजता कोई नई बात नहीं है. पिछले साल अमेरिकी कांग्रेस के सामने दोनों के बीच का यह वैचारिक मतभेद पूरी दुनिया ने देखा था। 

गबार्ड ने खुफिया इनपुट्स के आधार पर एक बयान दिया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही खुफिया प्रमुख के इस बयान को खारिज कर दिया था. तब ट्रंप ने कहा था, “मुझे फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने (तुलसी गबार्ड) क्या कहा है. मुझे लगता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब था। 

शुभेंदु अधिकारी के निशाने पर ममता की एक और पहचान! कोलकाता स्टेडियम के बाहर तोड़ी गई फुटबॉल मूर्ति

कलकत्ता

ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाने वाले सीएम शुभेंदु सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में शनिवार को ममता के कार्यकाल में बने एक स्टैच्यू को हटा दिया गया। यह स्टेच्यू साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर बनाया गया था। यह फैसला, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसीथ प्रमाणिक के बयान के बाद आया है। इस बयान में निशीथ ने स्टेडियम में सुविधाओं को बढ़ाने का ऐलान किया था।

खेल मंत्री ने क्या कहा था
इस दौरान प्रमाणिक ने इस स्टैच्यू की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह स्टैच्यू दिखने में अच्छा नहीं है। यह बहुत बदसूरत है। कमर के नीचे के दो पैर और उनके ऊपर रखा हुआ फुटबॉल अजीब सा लगता है। शुभेंदु सरकार में खेल मंत्री ने कहाकि यह देखने में भी बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगती, इसलिए हम इस तरह की बेतुकी और अर्थहीन बनावट को यहां नहीं रखेंगे और इसे हटा दिया जाएगा। प्रमाणिक ने कहाकि जब से यह मूर्ति लगी है, पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए । इसके बाद मेस्सी विवाद हुआ और सरकार की सत्ता भी चली गई।

राजनीतिक बयान भी आए सामने
इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं. बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब तोड़ दी गई है, जैसा पहले कहा गया था. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है. दरअसल, कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस प्रतिमा को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह संरचना स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है और इसे हटाने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की बात भी कही थी। 

साल्ट लेक स्टेडियम देश के प्रमुख फुटबॉल मैदानों में से एक है, जहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसे बड़े मुकाबले होते रहे हैं. पिछले साल यहां फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान भी भारी भीड़ देखने को मिली थी. यह प्रतिमा साल 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी. इसे लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग राय बनी हुई थी. कुछ लोग इसे स्टेडियम की पहचान मानते थे, जबकि कुछ इसे असामान्य और विवादित बताते थे. अब इसके तोड़े जाने के बाद कोलकाता में एक बार फिर राजनीतिक और खेल दोनों ही स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। 

साल 2017 में हुआ तैयार
आखिर शनिवार को, स्टेडियम के पास होने वाले बदलाव के तहत इस स्टैच्यू को हटा दिया गया। साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर यह स्टैच्यू साल 2017 में बनाया गया था। उस साल अंडर-17 फीफा विश्वकप से पहले इसे वीवीआईपी गेट के पास लगाया गया था। इस मूर्ति में फुटबॉल खेलने वाले विशाल पैर दिखाए गए हैं, जो ‘विश्व बांग्ला’ लोगो में विलीन होते हुए प्रतीत होते हैं और फुटबॉल पर ‘जयी’ शब्द अंकित है।

खेलमंत्री के कई ऐलान
इसके अलावा खेल मंत्री प्रमाणिक ने विवेकानंद युवा भारती क्रीडांगन के आसपास फूड कोर्ट बनाने से लेकर बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का भी ऐलान किया। खेलमंत्री ने यह भी कहाकि लियोनेल मेस्सी के दौरे को लेकर हुए विवाद की फिर से जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि टिकट धारकों को पैसे वापिस मिलें।

गौरलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को हराकर सरकार बनाई है। शुभेंदु सरकार यहां पर भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं।

रायपुर : बदलते बस्तर की नई तस्वीर, बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक

रायपुर.

बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया।

सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे।

चौपाल पर संवाद और ‘सुशासन परिसर’ की सराहना
अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे ‘सुशासन परिसर’ का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें
प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया।

पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन
गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में ‘सुशासन परिसर’ और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके।

सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज
बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया।

मोटर साइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

बंगाल में बुलडोजर एक्शन तेज! SAIL की जमीन पर बना TMC नेता का दफ्तर ध्वस्त

कोलकाता

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया। 

शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था। 

स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है। 

टीएमसी ने लगाया ‘टारगेट पॉलिटिक्स’ का आरोप
इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर ‘टारगेट पॉलिटिक्स’ का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी। 

सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। 

इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया। 

आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है।

टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज
दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है।

बदले की भावना से कार्रवाई
वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है।

रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण
इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी
गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

छत्तीसगढ़ में कुओं-बोरवेल का वैज्ञानिक सर्वे, जलदूत ऐप में दर्ज होगा भूजल डेटा

दुर्ग.

भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिले में अब गांवों के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान संचालित किया जाएगा।

अभियान के तहत चयनित खुले कुओं एवं बोरवेल में उपलब्ध पानी की गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा ऑनलाइन एप में दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी अमले को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में जलदूत एप के माध्यम से बोरवेल के वाटर लेवल की भी जांच सुनिश्चित की जाए। सर्वे के दौरान जलस्तर मापन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और जल संकट की संभावित स्थिति का आकलन करना है।

जलदूत एप के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना, वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। पहली बार बारिश पूर्व यानी प्री-मानसून अवधि में तथा दूसरी बार बारिश के बाद पोस्ट- मानसून अवधि में कुओं का जलस्तर मापा जाएगा। इससे वर्षा के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को अभियान की तैयारी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

मापन अधिक वैज्ञानिक और एकरूप
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार इस बार भूजल स्तर मापन की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एकरूप बनाया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि कुओं की माप केवल मेजरिंग टेप के माध्यम से ही की जाए, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे।

सर्वे में सूखे कुएं भी शामिल
सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि इस बार ऐसे सूखे कुएं, जिनमें पानी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इन मामलों में जलस्तर के स्थान की कुल गहराई दर्ज की जाएगी। इसके लिए मंत्रालय ने प्री-मानसून 2026 पर कुएं सर्वे में “कुएं की कुल गहराई” नामक नया पैरामीटर जलदूत मोबाइल एप में जोड़ा है। इससे भूजल संरचना, जल उपलब्धता तथा जलस्तर में होने वाले बदलावों का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।

देवास पटाखा फैक्ट्री हादसे में बढ़ा मौतों का आंकड़ा, दो और मरीजों ने तोड़ा दम; मृतकों की संख्या 8 हुई

देवास 

देवास जिले के टोंककला में 14 मई को हुए पटाखा फैक्टरी हादसे में झुलसे अजय और निरंजन ने भी दम तोड़ दिया। शुक्रवार रात इलाज के दौरान दोनों घायलों की मौत हो गई। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। फैक्ट्री विस्फोट के बाद से दोनों का उपचार MYH में चल रहा था। बर्न यूनिट में दोनों मरीजों की हालत अभी बेहद गंभीर बनी हुई थी। दोनों बिहार के रहने वाले थे।

वहीं इंदौर के एमवाय अस्पताल में एडमिट एक मरीज की सोमवार रात मौत हो गई थी। सोमवार को जिस मरीज की मौत हुई थी उसका नाम राम (20) पिता मुकेश कुमार था।
वहीं हादसे में घायल विशाल (25) को सिर में गंभीर चोट आने के बाद न्यूरो सर्जरी वार्ड में एडमिट है। धमाके के दौरान विशाल दूर जाकर गिर पड़ा था, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और खून का थक्का जम गया। विशाल की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। विशाल को आज दोपहर 1 बजे बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

बर्न यूनिट में संक्रमण की आशंका को देखते हुए पांच नर्सिंग कर्मचारियों की शिफ्ट वाइज 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। उधर, चोइथराम हॉस्पिटल में एडमिट चार मरीजों में से तीन को सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। अभी यहां एक मरीज एडमिट है। उसकी हालत ठीक है। उसे बुधवार को डिस्चार्ज किया जाएगा।

देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मृत मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार के थे। शुरुआत में धीरज, सनी और सुमित की मौत की जानकारी सामने आई थी। गुरुवार देर रात अमलतास अस्पताल में इलाजरत दो मजदूर अमर और गुड्डू ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5 हो गई। अब राम की मौत सहित मृतकों की संख्या छह हो गई है।

ब्लास्ट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास के मकान तक हिल गए। हादसे के बाद झुलसे मजदूर बदहवास हालत में बाहर निकलते दिखे। कुछ लोगों के कपड़े स्किन से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर बाल और जले अवशेष बिखरे पड़े मिले।

ग्वालियर में दर्दनाक घटना! दुल्हन के बाद दूल्हे ने भी लगाई फांसी, 27 दिन पहले हुई थी शादी

ग्वालियर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नवविवाहित जोड़े की आत्महत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. एक महीने पहले जिन दो परिवारों में शादी की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है. सिद्धार्थ कांदिल और मेघा उर्फ ज्योति की शादी 25 अप्रैल को हुई थी, लेकिन शादी के 27 दिन बाद ही दोनों की मौत हो गई। 

जानकारी के मुताबिक, शादी के कुछ दिन बाद मेघा अपने मायके मुरार चली गई थी. बताया जा रहा है कि 1 मई को वह मायके पहुंची थी. इसके बाद 20 मई को उसने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. नवविवाहिता की मौत की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। 

पत्नी की मौत से सिद्धार्थ पूरी तरह टूट गया था. बताया जा रहा है कि वह गहरे सदमे में चला गया था. पत्नी की मौत के दो दिन बाद 22 मई को सिद्धार्थ ने भी पिंटो पार्क स्थित अपने घर के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

पुलिस जांच में जुटी, मोबाइल रिकॉर्डिंग खंगाल रही टीम
घटना के बाद इलाके में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है. जिन घरों में कुछ दिन पहले शहनाइयां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ आंसू और मातम दिखाई दे रहा है. नवविवाहित जोड़े की लगातार दो मौतों ने सभी को हैरान कर दिया है। 

मामले में पुलिस ने दोनों घटनाओं को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्डिंग की मदद से आत्महत्या की वजह तलाशने में जुटी हुई है. फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई आरोप नहीं लगाया गया है। 

सीएसपी अतुल सोनी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और मोबाइल रिकॉर्डिंग समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके। 

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