समर्थन मूल्य पर देश में सबसे अधिक 13.10 लाख किसानों से हुआ गेहूं का उपार्जन

भोपाल 

मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 10 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नंबर-1 स्थान पर है। इस तरह से मध्यप्रदेश समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के मामले में सर्वाधिक किसानों को लाभांवित करने वाला राज्य है। यही नहीं अब तक लगभग 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में सतत कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है।

मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग

मंत्री  राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है।

किसानों को 20,680 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 20,680.83 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।

 

कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026: ऐश्वर्या राय का रेड कार्पेट लुक और फैंस के साथ खास पल

कान फिल्म फेस्टिवल 2026 में ऐश्वर्या राय ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। उन्होंने डिजाइनर अमित अग्रवाल के बनाए एक शानदार नीले गाउन में रेड कार्पेट पर वॉक किया। कान से ऐश्वर्या राय का एक वीडियो सामने आया है, जिसने उनके फैन का दिल जीत लिया है। उन्होंने यहां मौजूद अपने फैंस के साथ पोज दिए। यह वीडियो फाफी वायरल हो रहा है। फैंस इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में क्या है?
वायरल हो रहे वीडियो में ऐश्वर्या राय को होटल परिसर के अंदर जाते हुए देखा गया, जहां उनके चारों ओर सुरक्षाकर्मी और फोटोग्राफर मौजूद थे। इस बीच ऐश्वर्या अपने फैंस के साथ बातचीत कर रही हैं और उनके साथ पोज दे रही हैं। यहां पहले से कई फैंस अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए लाइन में लगे हुए थे। एक युवा फैन उनके पास आई और ऐश्वर्या ने उसके बगल में खड़े होकर तस्वीर के लिए पोज दिया। जब वह वहां से जा रही थीं, तो एक्ट्रेस ने कहा अपना ख्याल रखना।

ऐश्वर्या ने महिला के साथ दिया पोज
इसके बाद एक और बुजुर्ग फैन उनके पास आईं और वह ऐश्वर्या के साथ फोटो खिंचवाना चाहती थीं। जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की तो ऐश्वर्या ने कहा कि उन्होंने उनसे वादा किया था। उस फैन ने एक्ट्रेस का हाथ पकड़ा और उनसे कहा कि वह सबसे बेहतरीन महिला हैं। ऐश्वर्या राय ने आभार व्यक्त किया और फिर वहां से चली गईं।

यूजर्स को पसंद आई ऐश्वर्या की अदा
इस वीडियो पर कई फैंस ने कमेंट किए हैं और ऐश्वर्या की तारीफ की है। एक फैन ने लिखा, ‘ऐश्वर्या बहुत अच्छी हैं।’ एक और यूजर ने लिखा ‘वह सबसे अच्छी और कोमल हैं।’ एक और यूजर ने उन्हें ‘विनम्र’ कहा है। एक और यूजर ने लिखा ‘वह पल अच्छा लगा जब ऐश्वर्या ने कहा,  ‘मैंने उनसे वादा किया है, उन्हें मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने दो।’

होर्मुज संकट के 76 दिन बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी दुनिया में सबसे सस्ता ईंधन? जानें 4 साल का पूरा गणित

नई दिल्ली

देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है। 

कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ
28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय
बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया। 

साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे। 

19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। 

अब वैश्विक तुलना देखिए.
होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही। 

सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो। 

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं। 

अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं?
केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है। 

सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं। 

अब 2014 के ’71 रुपये वाले पेट्रोल’ की चर्चा.
कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे। 

यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये,
FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये,
FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये,

और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं। 

चार साल का पूरा हिसाब
2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं। 

 

BJP में शामिल होते ही राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी, राज्यसभा की अहम समिति के बने अध्यक्ष

नई दिल्ली

हाल ही में आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया गया है।

याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया
राज्यसभा की एक अधिसूचना में कहा गया है कि राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसमें यह भी बताया गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से इस पैनल का पुनर्गठन किया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया।

चड्ढा के अलावा पैनल के सदस्यों में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रंगव्रा नारज़ारी और संदोश कुमार पी शामिल हैं।

एक अन्य अधिसूचना में राज्यसभा सचिवालय ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा के सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है।

आप के 7 सांसदों ने थामा था बीजेपी का हाथ
बता दें कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में एक रहे राघव चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पार्टी को अलविदा कह दिया था। सभी सात सांसदों ने 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। राज्यसभा में 10 सांसदों वाली आप के अब केवल 3 सांसद बचे हैं।

आप ने की थी बर्खास्त करने की मांग
इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस बीच राघव चड्ढा की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर उनके बारे में प्रसारित किए जा रहे फर्जी, एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित सामग्री दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा व व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर छेड़छाड़ की गई सामग्री तैयार करना और प्रसारित करना न केवल कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अपूरणीय प्रतिष्ठात्मक क्षति भी हो रही है।

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह राघव चड्ढा के व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं बनता। उनकी आलोचना उनके राजनीतिक फैसले को लेकर और बीजेपी में जाने को लेकर की जा रही है। हाई कोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों का व्यवसायिक इस्तेमाल और आलोचना करने में अंतर है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, अफवाहों से बचें

रायपुर

 छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आम उपभोक्ताओं को घबराकर अतिरिक्त खरीदी या संग्रहण करने की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है तथा किसानों और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्तमान समय में 3 करोड़ 94 लाख 7 हजार 700 लीटर पेट्रोल तथा 8 करोड़ 8 लाख 83 हजार लीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति के लिए कुल 2516 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। खाद्य विभाग के अनुसार रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी के कारण डीजल की मांग में वृद्धि को देखते हुए ऑयल कंपनियों के लखौली और मंदिर हसौद (रायपुर) तथा गोपालपुर (कोरबा) स्थित डिपो से जिलों को लगातार आवश्यकतानुसार आपूर्ति की जा रही है।

गौरतलब है कि 22 मई 2026 को ही प्रदेश को 21 लाख 83 हजार लीटर पेट्रोल और एक करोड़ 29 लाख 75 हजार लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही प्रतिदिन नियमित रूप से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति जारी है।

खाद्य सचिव ने राज्य में ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा के लिए 20 मई 2026 को सभी ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन पेट्रोल पंपों में स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन रही हो, वहां डिपो से तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी क्षेत्र में उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

राज्य शासन ने 22 मई 2026 से प्रदेश के सभी पेट्रोल और डीजल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में पेट्रोल-डीजल देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि किसानों तथा कलेक्टर द्वारा चिन्हित अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। राज्य शासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में आकर पैनिक खरीदी अथवा इसका संग्रहण न करें। जरूरत के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

रुद्री में साकार होगा आस्था और आधुनिकता का अद्भुत संगम

रायपुर

धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से मंदिर परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तीन चरणों में विकसित करने की योजना तैयार की गई है।

विशेष बात यह है कि पूरे विकास कार्य में मंदिर की मूल संरचना और उसकी आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाएगा। बिना किसी बड़े विध्वंस या संरचनात्मक क्षति के मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली के समन्वय से नया स्वरूप दिया जाएगा। प्रस्तावित डिजाइन में शिखर, त्रिशूल, ओम् प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, नंदी प्रतिमा, दीप स्तंभ और जाली कार्य जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग और पत्थर आधारित फिनिश मंदिर परिसर को भव्य, आकर्षक और कालातीत स्वरूप प्रदान करेंगे।

परियोजना का उद्देश्य केवल मंदिर सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत चौड़े पैदल मार्ग, सुव्यवस्थित प्रवेश और निकास द्वार, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप और सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास किया जाएगा। परिसर में डिजिटल सूचना स्क्रीन, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, विश्राम क्षेत्र, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

घाट क्षेत्र को भी विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। यहां रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड, सुरक्षित सीढ़ियां और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि धार्मिक गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें। इसके अलावा गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, खुला मंच, रिवर फ्रंट कॉटेज और भविष्य में विकसित होने वाली मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएं इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनाएंगी।

पूरे लेआउट को वास्तु सिद्धांतों, प्राकृतिक वेंटिलेशन, खुले प्रांगण और श्रद्धालुओं की क्रमिक आध्यात्मिक यात्रा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। डिजाइन में सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है।

पर्यावरण संरक्षण को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग शेड, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक प्रकाश और वायु संचार आधारित डिजाइन, हरित क्षेत्र विकास तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। स्थानीय और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के साथ स्थानीय कारीगरों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा के अनुसार यह परियोजना केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं, बल्कि धमतरी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला प्रयास है। आने वाले समय में रुद्रेश्वर धाम प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा

बिलासपुर में अवैध बोर खनन पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, 2 दिन में 8 वाहन जब्त

बिलासपुर.

कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में अवैध बोर खनन और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन के खिलाफ प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। बीते दो दिनों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 8 वाहनों को जब्त किया गया है। प्रशासन ने 4 बोर मशीनों और 4 हाइवा वाहनों पर कार्रवाई कर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों में हड़कंप मचा दिया है।

जानकारी के मुताबिक ग्राम बसिया में देर रात अवैध रूप से बोर खनन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान वहां से दो बोर मशीनें जब्त की गईं।इसके अलावा तिफरा क्षेत्र में भी प्रशासन ने दबिश देकर दो और बोर मशीनों को पकड़ा।

बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी ढो रहे थे हाइवा
राजस्व विभाग की टीम ने बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी का परिवहन कर रहे 4 हाइवा वाहनों को भी जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार सभी वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए सिरगिट्टी और तोरवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया है।

तहसीलदार के नेतृत्व में हुई संयुक्त कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई तहसीलदार प्रकाश साहू के नेतृत्व में राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने की। प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

जल जीवन मिशन के तहत 8555 योजनाओं का ग्राम पंचायतों द्वारा संचालन

रायपुर

 उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव ने आज लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा मैदानी अधिकारियों की बैठक लेकर जल जीवन मिशन के कार्यों, नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं एवं प्रदेश में ग्रीष्म काल में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। राज्य के सभी जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव तथा जल जीवन मिशन के संचालक  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता  के.के. मरकाम भी बैठक में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने आगामी दो वर्षों के रोडमैप पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को मिशन के शेष कार्यों को गंभीरता, सक्रियता और तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर काम की गति और पूर्णता से ही केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कार्यों के लिए राशि जारी की जाएगी। जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को और ज्यादा फोकस एवं बारीकी से करना है। उन्होंने कहा की वर्तमान समय में पेयजल आपूर्ति अधिकांशतः शासकीय व्यवस्था पर ही आश्रित है। जल आपूर्ति की अपर्याप्त व्यवस्था या इसमें किसी तरह की बाधा आने पर लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए विभाग को दूरदृष्टि एवं पूर्वानुमान के साथ काम करने की जरूरत है।

उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में हर गांव की पेयजल व्यवस्था की समय-समय पर जांच करने और किसी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जहां-जहां जल जीवन मिशन के काम पूरे हो गए हैं, वहां हर घर जल का सत्यापन कराकर योजनाओं के संचालन-संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपने को कहा। उन्होंने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को कलेक्टरों से चर्चा कर प्रत्येक योजना की प्रगति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं के कार्यों में सक्रिय सहयोग कर योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करने को कहा। 

उप मुख्यमंत्री ने ग्रीष्म काल में प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत करने और जलस्तर के नीचे चले जाने के कारण सूख चुके हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाकर जलापूर्ति दुरूस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर तत्परता से नया ट्यूबवेल भी खोदने को कहा।  साव ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जलजनित रोगों से बचाव के लिए भी पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गंदे पानी की आपूर्ति रोकने, नालियों से गुजरने वाले पाइपलाइनों को बदलने तथा जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण करने को कहा।

उप मुख्यमंत्री  साव ने विभागीय अधिकारियों से लोगों को बारिश के पानी को संचित करने, वृक्षारोपण, जलस्रोतों के संरक्षण-संवर्धन और रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित करने को कहा। भविष्य में जल की पर्याप्त उपलब्धता के लिए ये बहुत जरूरी है। उन्होंने बैठक में नक्सल प्रभावित रहे जिलों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों को गति देते हुए पहुंचविहीन एवं दूरस्थ वनांचलों में भी स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के विभिन्न प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक  ओंकेश चंद्रवंशी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता  एस.एल. पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

वर्ष 2026-27 में 13,183 और 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जल जीवन मिशन के तहत प्रगतिरत 13 हजार 183 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान क्रमशः 22 और 48 समूह जल प्रदाय …

‘स्वामित्व योजना’ से बदली जिंदगी, दिलीप वर्मा बोले- अब पक्का मकान बनाने का सपना होगा पूरा

​रायपुर.

“मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना से मुझे ज़मीन का मालिकाना हक मिल गया है। अब मुझे अपना खुद का पक्का आवास बनाने में बहुत आसानी होगी। इस मदद के लिए छत्तीसगढ़ शासन को मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद।” यह भावुक और कृतज्ञता भरे शब्द बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के दौरान हितग्राही दिलीप कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से कहे।

​सुशासन तिहार में सीधे संवाद से बढ़ी खुशियां
राजस्व विभाग की ‘स्वामित्व योजना’ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर  में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने योजना के तहत लाभान्वित हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। इसी कड़ी में जब मुख्यमंत्री ने दिलीप कुमार वर्मा से बात की, तो दिलीप ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि ज़मीन का कानूनी हक मिलने से उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है और अब वे बिना किसी अड़चन के अपना आशियाना बना सकेंगे

हर गरीब का हो अपना पक्का मकान: मुख्यमंत्री
हितग्राही दिलीप वर्मा की बात सुनकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उन्हें सहर्ष बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय अंतिम व्यक्ति तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का असली हक मिल रहा है, जिससे न केवल उन्हें बैंक लोन मिलने में आसानी होगी, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने की राह भी आसान होगी। दिलीप कुमार जी जैसे लाखों परिवारों के चेहरे पर आई यह मुस्कान ही हमारी सरकार की असली ताकत है। सुशासन का मतलब ही यही है कि हर नागरिक को उसका अधिकार बिना किसी परेशानी के मिले।

हरदा के डायल-112 हीरोज रेलवे ट्रैक पर खड़े व्यक्ति की सतर्कता से बचाई जान समझाइश देकर परिजनों के सुपुर्द किया

भोपाल

हरदा जिले के थाना टिमरनी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, सतर्कता एवं संवेदनशील कार्रवाई से रेलवे ट्रैक पर खड़े एक व्यक्ति की समय रहते जान बचाई गई। त्वरित हस्तक्षेप एवं समझाइश के माध्यम से पीड़ित व्यक्ति को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया।

22 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना टिमरनी क्षेत्र अंतर्गत रेलवे स्टेशन के पास एक व्यक्ति आत्महत्या के उद्देश्य से रेलवे ट्रैक पर खड़ा है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही टिमरनी थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  धर्मेंद्र पटवारी एवं पायलट  संजय पवार ने मौके पर पहुँचकर पाया कि एक व्यक्ति रेलवे ट्रैक पर खड़ा था। उसी दौरान ट्रेन आने का सिग्नल भी हो चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं साहस का परिचय देते हुए तत्काल व्यक्ति को पकड़कर रेलवे ट्रैक से सुरक्षित बाहर निकाला और संभावित हादसे को टाल दिया।

घटना की सूचना मिलने पर पीड़ित व्यक्ति के परिजन भी मौके पर पहुँच गए। डायल-112 टीम द्वारा व्यक्ति को सुरक्षित डायल 112 वाहन से थाना लाया गया, जहाँ परिजनों को बुलाकर समझाइश दी गई एवं आवश्यक परामर्श उपरांत व्यक्ति को उनके सुपुर्द किया गया।

डायल-112 जवानों की सतर्क, संवेदनशील एवं त्वरित कार्यवाही से एक व्यक्ति की जान बचाई जा सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

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