136 साल पुरानी मस्जिद पर सियासत तेज! कोलकाता एयरपोर्ट से हटाने की मांग पर गरमाई राजनीति

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है। 

दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है। 

एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल
    कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था। 

    हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं। 

30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?

    एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है। 

    अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है। 

मस्जिद कमेटी ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए। 

फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए। 

हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज
मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है। 

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे। 

क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं। 

हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार को बेहद संतुलन और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा विषय भी बन सकता है। 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सहकारिता क्षेत्र: सीए वैभव जैन

विवेक झा, भोपाल। सहकारिता क्षेत्र देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह क्षेत्र न केवल किसानों और ग्रामीण नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह बात टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा आयोजित मासिक स्टडी सर्किल में वक्ताओं ने कही।

स्टेट जीएसटी ऑफिस में हुआ मासिक स्टडी सर्किल

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था के सदस्यों के लिए मासिक स्टडी सर्किल का आयोजन दोपहर 4 से 5 बजे तक स्टेट जीएसटी ऑफिस में किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत “सहकारिता क्षेत्र पर विशेष व्याख्यान” आयोजित हुआ, जिसमें सीए वैभव जैन ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।

किसानों और ग्रामीणों तक पहुंच रही वित्तीय सेवाएं

सीए वैभव जैन ने अपने व्याख्यान में कहा कि सहकारी संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और आम नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का मजबूत माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि दूरस्थ गांवों में जहां निजी वित्तीय संस्थानों की पहुंच सीमित रहती है, वहां सहकारी संस्थाएं लोगों को आर्थिक सहायता, ऋण सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराती हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलती है।

प्रोफेशनल्स के लिए बढ़ रहे अवसर

व्याख्यान के दौरान सहकारिता क्षेत्र में प्रोफेशनल्स के लिए उपलब्ध अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ता और टैक्स प्रोफेशनल्स अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बना सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ऑडिट, लेखांकन, कम्प्लायंस और वित्तीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रोफेशनल्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली अधिक मजबूत और जवाबदेह बन सकती है।

सदस्यों ने बताया उपयोगी और ज्ञानवर्धक

कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने विषय को वर्तमान समय के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। स्टडी सर्किल में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, संभावनाओं और प्रोफेशनल्स की भूमिका पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह सचिव संदीप चौहान सहित वरिष्ठ सदस्य गोविंद वसंता, राजेश्वर दयाल, सौरभ श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा और अनिल जैन समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

टैक्स प्रोफेशन में अब ‘स्मार्ट वर्क’ की जरूरत: सीए संभव सैठी

विवेक झा, भोपाल। टैक्स प्रोफेशन में तेजी से बढ़ती तकनीकी जरूरतों और बदलती कार्यप्रणाली के बीच अब ऑफिस ऑटोमेशन को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। यही कारण है कि आधुनिक सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म टैक्स प्रोफेशनल्स के कामकाज का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। यह बात टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा आयोजित स्टडी सर्किल में विशेषज्ञ वक्ताओं ने कही।

स्टडी सर्किल में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा 22 मई 2026 को शाम 5 से 6 बजे तक स्टडी सर्किल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में Gystify के फाउंडर सीए संभव सैठी ने टैक्स प्रोफेशन में ऑफिस ऑटोमेशन की भूमिका और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में टैक्स प्रोफेशनल्स के सामने लगातार बदलती कम्प्लायंस, नए नियम, विभागीय नोटिस, रिकन्सिलिएशन और समय सीमा जैसी कई चुनौतियां खड़ी हैं। ऐसे में केवल मैन्युअल कार्यप्रणाली पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है।

ऑटोमेशन से बढ़ रही कार्यक्षमता

सीए संभव सैठी ने बताया कि ऑफिस ऑटोमेशन एवं Gystify जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म डेटा मैनेजमेंट, कम्प्लायंस ट्रैकिंग, रिकन्सिलिएशन और रिटर्न स्टेटस जैसी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और व्यवस्थित बनाते हैं। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि त्रुटियों में भी कमी आती है।

उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन के माध्यम से प्रोफेशनल्स अपनी ऊर्जा केवल डेटा प्रोसेसिंग में खर्च करने के बजाय टैक्स प्लानिंग, सलाहकारी सेवाओं और बेहतर क्लाइंट रिलेशनशिप विकसित करने पर लगा सकते हैं। यही भविष्य के सफल टैक्स प्रोफेशनल की पहचान होगी।

“स्मार्ट वर्क” का दौर, तकनीक अपनाने वालों का भविष्य उज्ज्वल

स्टडी सर्किल में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय “स्मार्ट वर्क” का दौर है, जहां तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलना ही सफलता की कुंजी बन चुका है। जो प्रोफेशनल अपने ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक और ऑफिस ऑटोमेशन को अपनाएगा, वही भविष्य में अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और सफल साबित होगा।

सीए संभव सैठी ने जानकारी दी कि उनका संस्थान अन्य विषयों पर भी तेजी से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर कार्य कर रहा है और आने वाले समय में प्रोफेशनल्स के लिए नई तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह सचिव संदीप चौहान सहित वरिष्ठ सदस्य गोविंद वसंता, राजेश्वर दयाल, सौरभ श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा और अनिल जैन सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान टैक्स प्रोफेशन में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर विस्तृत चर्चा भी की गई।

जल गंगा संवर्धन के तहत गंगा दशमी पर्व पर 25 मई को होंगे पूरे प्रदेश में कार्यक्रम

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गंगा दशमीं पर के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 25 मई को कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य शासन ने समस्त जिलों में गंगा दशमी पर्व पर आयोजित गतिविधियों एवं कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले मुख्य अतिथियों की सूची जारी की है।

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा, मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह रतलाम, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय धार, मंत्री श्री प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर, मंत्री श्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सिवनी, मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम, मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट देवास, मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग विदिशा, मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह निवाड़ी, मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री श्री राकेश शुक्ला भिंड, मंत्री श्री चेतन्य काश्यप भोपाल और मंत्री श्री इंदर सिंह परमार आगर-मालवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे।

इसी प्रकार राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर सीहोर, राज्यमंत्री श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी खंडवा, राज्यमंत्री श्री दिलीप जायसवाल मंडला, राज्यमंत्री श्री गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्यमंत्री श्री लखन पटेल दमोह, राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार अनूपपुर और राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल बैतूल के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

लोकसभा सांसद श्री रोड़मल नागर शाजापुर, लोकसभा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सीधी, लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्रा मऊगंज, लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता मंदसौर, लोकसभा सांसद श्री बंटी विवेक साहू छिंदवाड़ा, लोकसभा सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ग्वालियर और लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी इंदौर और राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर नीमच, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया पांढुर्णा के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

विधायक श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विधायक श्री जयसिंह मरावी शहडोल, विधायक श्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर, विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार खरगौन, विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर, विधायक श्री श्याम बरडे बड़वानी, विधायक श्री हरिशंकर खटीक टीकमगढ़, विधायक श्री पन्नालाल शाक्य गुना, विधायक श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी अशोकनगर, विधायक श्री शिवनारायण ज्ञान सिंह उमरिया, विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी रायसेन, विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल दतिया, विधायक श्रीमती ललिता यादव छतरपुर, विधायक श्री संजय सत्येन्द्र पाठक कटनी और विधायक श्री रामनिवास शाह सिंगरौली के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी श्योपुर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रूदेश परस्ते डिंडोरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सहाय हरदा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरीबाई खरत आलीराजपुर और नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत ठाकुर बालाघाट के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

मध्यप्रदेश में खत्म होगी दोहरी परीक्षा प्रणाली, शिक्षक भर्ती में नया नियम लागू

 भोपाल

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब शिक्षक भर्ती के लिए अलग से चयन परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उम्मीदवारों को केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के लिए “कनिष्ठ सेवा संयुक्त परीक्षा नियम-2026” का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि यह नियम अगले एक माह के भीतर लागू कर दिए जाएंगे। जुलाई व अगस्त में माध्यमिक व प्राथमिक पात्रता परीक्षा से इसकी शुरुआत होगी।

दोहरी परीक्षा प्रणाली होगी समाप्त

अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पहले पात्रता परीक्षा और उसके बाद चयन परीक्षा आयोजित की जाती थी। इस व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को दो बार आवेदन करना पड़ता था और अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी और केवल एक परीक्षा के आधार पर भर्ती की जाएगी।

वर्ष 2018 में आयोजित उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी एकल परीक्षा प्रणाली अपनाई गई थी। उस समय करीब 21 हजार पदों पर भर्ती की गई थी। हालांकि बाद में शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में फिर दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई थी। अब विभाग फिर से पुरानी एकल परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रहा है।

सरकारी शिक्षकों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष

नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए जारी स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष तक रहेगी। यदि इस अवधि में अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिलती है तो उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी। भर्ती के लिए विभागीय पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी जारी की जाएगी और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।

निजी स्कूलों में भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य

निजी स्कूलों में भी अब केवल पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति की जाएगी। हालांकि निजी विद्यालय किसी भी वर्ष की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवार को नियुक्त कर सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता आजीवन रहेगी।
अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत

नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। पहले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था। हर वर्ष लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। अब एक ही परीक्षा होने से समय और धन दोनों की बचत होगी।

स्कोर सुधारने का मिलेगा मौका

ईएसबी अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली में अभ्यर्थियों को भविष्य में अपने स्कोर में सुधार करने का अवसर भी मिलेगा। उम्मीदवार चाहें तो दोबारा परीक्षा देकर बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं।

अब शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ पात्रता परीक्षा होगी। चयन परीक्षा नहीं होगी। आजीवन वैध रहेगा, लेकिन अभ्यर्थी चाहें तो अपने स्कोर में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।- केके द्विवेदी, संचालक, स्कूल शिक्षा विभाग

 

टारगेट पूरा नहीं करने वाले अफसर-कर्मचारी हटेंगे, MP की नई तबादला नीति में सख्ती; 15 जून तक होंगे ट्रांसफर

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 लागू करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत अब तय लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा से पहले भी हटाया जा सकेगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद आदेश जारी कर 1 जून से 15 जून तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी ट्रांसफर आदेश केवल ऑनलाइन जारी होंगे। 15 जून के बाद जारी किए गए तबादला आदेश मान्य नहीं माने जाएंगे। नई नीति का असर लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर पड़ेगा।

खराब प्रदर्शन पर समय से पहले होगा तबादला
नई व्यवस्था में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन साल पूरा होने पर बाहर भेजा जा सकेगा। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होगा।हालांकि सरकार ने साफ किया है कि तीन साल की अवधि अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का प्रदर्शन खराब पाया जाता है या वह विभागीय लक्ष्य पूरे नहीं कर पाता है, तो प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला पहले भी किया जा सकेगा।

महिलाओं और सेवानिवृत्ति के करीब कर्मचारियों को राहत
नई तबादला नीति में महिला कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के लिए भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

तीन साल से पहले भी हो सकेगा तबादला
नई नीति के तहत प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। वहीं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि तबादले की अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ई-ऑफिस के माध्यम से ही मंत्रियों को देना होगा अनुमोदन
तबादले राज्य और जिला स्तर पर होंगे। पति-पत्नी (दंपती) की पदस्थापना एक स्थान पर रखी जाएगी। गंभीर बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवकों को भी तबादले में रियायत दी जाएगी। मंत्री व प्रभारी मंत्रियों की अनुशंसा पर तबादले होंगे। मंत्री का अनुमोदन ई-ऑफिस के माध्यम से ही होगा। इतना ही नहीं विभाग अपनी सुविधा के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुमोदन व मुख्यमंत्री की अनुशंसा से तबादला नीति बना सकेंगे।

स्वयं के व्यय वाले तबादलों में दो स्थितियां शामिल नहीं होंगी। इन्हें तबादला नीति से बाहर रखा गया है। पहला कि ऐसे शासकीय सेवक जो अति गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, लकवा, हृदयाघात से पीड़ित हैं और मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरित किए जाते हैं उनका इस तबादला नीति में समावेश नहीं किया जाएगा।

वहीं पति-पत्नी व स्वयं बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवक भी तबादला नीति की निर्धारित सीमा से बाहर रखा गया है। तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान केवल विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन पर ही तबादले होंगे।

न्यायिक और प्रशासनिक सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति
पद या संवर्ग की संख्या 200 तक है तो 20 प्रतिशत तबादले ही किए जाएंगे। वहीं 201 से 1000 संख्या तक 15 प्रतिशत, 1001 से 2000 तक 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक होने पर पद या संवर्ग में कार्यरत संख्या के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। तबादले ई-ऑफिस के माध्यम से होंगे। इनमें स्वैच्छिक तबादले भी होंगे। यह नीति मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मध्य प्रदेश मंत्रालय पर लागू नहीं होगी।

सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे अमले को राहत
जिले के भीतर जिला संवर्ग/राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से तबादला किया जाएगा। गृह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक के कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों का स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड द्वारा और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होगा।

जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर/संयुक्त कलेक्टर अनुभाग परिवर्तन एवं तहसीलदार, नायब तहसीलदार की पदस्थापना प्रभारी मंत्री के परामर्श से की जाएगी। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष हो, सामान्यतः उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक
सरकार ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि केवल अवधि पूरी होने के आधार पर तबादले न किए जाएं। न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति से वापसी और रिक्त पदों की आवश्यकता जैसे मामलों में ही तबादला प्रक्रिया अपनाई जाएगी।साथ ही रिक्त पदों को भरने के नाम पर एक के बाद एक किए जाने वाले श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर भी रोक लगा दी गई है।

पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था लागू
पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा। जिले के भीतर पदस्थापना पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद करेंगे।वहीं उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।

गंभीर बीमारियों और दिव्यांग कर्मचारियों को छूट
नई नीति में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर छूट दी जाएगी।इसके अलावा 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।

ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार ने सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी करना अनिवार्य किया है। आदेश में कर्मचारी का एम्पलाई कोड दर्ज करना जरूरी होगा।तबादले के बाद पुराने स्थान से वेतन निकाले जाने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। वहीं जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गबन या नैतिक अपराधों की जांच लंबित है, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा।

रिक्त पदों के लिए श्रृखलाबंद तबादलों पर रोक
सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि निर्माण और नियामक प्रकृति वाले विभागों को छोड़कर केवल तीन वर्ष की अवधि को तबादले का आधार न बनाया जाए। न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत, रिक्त पदों की पूर्ति, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी तय प्रक्रिया के तहत तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि रिक्त पदों की पूर्ति के लिए श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक रहेगी।

महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान
नई नीति में महिला कर्मचारियों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।

पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने के भी आवेदन
पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, लेकिन अंतिम निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार होगा। स्वयं के खर्च पर या परस्पर स्थानांतरण के आवेदन ऑनलाइन अथवा कार्यालय प्रमुख के सत्यापन के बाद स्वीकार किए जाएंगे।

गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को राहत
गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरण किया जा सकेगा। वहीं 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्यतः तबादला नहीं किया जाएगा, हालांकि उनकी इच्छा पर स्थानांतरण संभव रहेगा।

कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को राहत
मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी। वहीं वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल संबंधित पदों से हटाने का प्रावधान भी रखा गया है।

सभी ट्रांसफर आदेश ऑनलाइन जारी होंगे
सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी आदेश शून्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं होगा। आदेशों में ट्रेजरी में उपयोग होने वाला एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य रहेगा।

जांच वाले अधिकारियों को कार्यपालिक पद नहीं
नई नीति में यह भी कहा गया है कि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, उनकी भी कार्यपालिक पदों पर पोस्टिंग नहीं होगी।

सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष कार्यालयों से जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी आदेश निर्धारित अवधि के बाहर मानकर शून्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं किया जाएगा।

स्थानांतरण आदेशों में ट्रेजरी में उपयोग होने वाला एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। कर्मचारी का स्थानांतरण होने के बाद उसके पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण बंद किया जाएगा। यदि इसके बाद वेतन निकाला जाता है तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। स्थानांतरित कर्मचारियों का अवकाश नई पदस्थापना पर जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत होगा।

अभ्यावेदन और संवर्ग के लिए अलग व्यवस्था
कलेक्टर, विभागीय अधिकारी, वन संरक्षक और पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी तबादला आदेशों के खिलाफ अभ्यावेदन का निराकरण विभागाध्यक्ष संबंधित मंत्री की मंजूरी से करेंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के मामलों में मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की मंजूरी से फैसला करेंगे। अन्य श्रेणी के मामलों का निराकरण विभागीय मंत्री की मंजूरी से किया जाएगा।

जिला संवर्ग कर्मचारियों और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादला आदेश मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी होंगे।

पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था
उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा। जिले के भीतर पदस्थापना पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद करेंगे। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।

 

MP को मिलेगा 6 लेन एक्सप्रेस कॉरिडोर! ग्वालियर से नागपुर का सफर होगा बेहद आसान

सागर
 ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे। 

भूतल परिवहन मंत्रालय की सहमति के बाद सर्वे कार्य शुरु
ग्वालियर से नागपुर की कनेक्टिविटी अभी तक सीधे तौर पर नहीं है. ऐसे में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने ग्वालियर, बैतूल, नागपुर कारीडोर के लिए सहमति दे दी है. फिलहाल जो प्रस्ताव है, उसके तहत 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्स लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा. ये कॉरिडोर ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से होते हुए नागपुर तक जाएगा. ग्वालियर से शुरू होकर यह मार्ग नागपुर तक पहुंचेगा। 

फिजिबिलिटी सर्वे और डीपीआर की तैयारी
फिलहाल इस कारीडोर के लिए NHAI (National Highways Authority of India) द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य ये है कि इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक की स्थिति क्या होगी और क्या लाभ होगा. इसी आधार पर जल्द ही कॉरिडोर के अलाइनमेंट और डीपीआर को अंतिम रुप दिया जाएगा. फिलहाल इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि इसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की तरह बनाया जाए. ये अभी जो सड़क हैं, उसी का चौड़ीकरण सिक्सलेन के रूप में किया जाए। 

ब्लैक स्पाॅट खत्म करने का होगा काम
प्रस्तावित ग्वालियर बैतूल नागपुर कॉरिडोर के निर्माण की शुरूआत से ही यातायात सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है. एनएचएआई कॉरिडोर के सिवनी जिले से गुजरने वाले हिस्से में लखनादौन और खवासा के बीच ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए काम कर रहा है. इन ब्लैक स्पाॅट पर अंडरपास, ओवरब्रिज और पुलों का निर्माण किया जाएगा. अंडरपास के जरिए लोकल ट्रैफिक को अलग से रास्ता दिया जाएगा। 

सफर में 6-7 घंटे कम लगेगा वक्त
इस कॉरिडोर के बनने से ग्वालियर और नागपुर के बीच यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा. फिलहाल ग्वालियर से नागपुर जाने में 22 से 24 घंटे लगते हैं. सिक्सलेन कारीडोर के बाद ये वक्त महज 16 से 18 घंटे रह जाएगा. इसके साथ ही सफर सुरक्षित हो जाएगा। 

हर जिले में इंडस्ट्रियल क्लस्टर से व्यवसाय को लगेगे पंख
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि, ”ये कॉरिडोर मध्य प्रदेश के जिन 9 जिलों से गुजर रहा है, वहां कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाए जाएंगे. जिनका उद्देश्य लाजिस्टिक हब तैयार करना है. इस कॉरिडोर से पर्यटन व्यावसाय को पंख लगने के अलावा, खनिज, फल, अनाज, दवाईयां और प्लास्टिक व्यावसाय को पंख लगेगे. उद्यमियों की लागत और सफर में लगने वाला समय कम होगा. इस हाइवे की ग्वालियर-आगरा हाइवे और नागपुर पुणे मुंबई हाइवे से कनेक्टिविटी आसान हो 
जाएगी। 

LPG New Rules: अब नियम तोड़े तो बंद होगी गैस सप्लाई, ई-KYC और 25 दिन का लॉक-इन अनिवार्य

भोपाल
 देश में रसोई गैस (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा नए और कड़े नियम प्रभावी कर दिए गए हैं. सरकार की ‘एक परिवार, एक गैस कनेक्शन’ नीति के तहत जारी की गई इन गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकना और सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी बनाना है. यदि उपभोक्ता तय समय सीमा के भीतर इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी गैस आपूर्ति रोकी जा सकती है। 

नए नियमों के तहत प्रमुख बदलाव और आवश्यक दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं
1. पीएनजी और एलपीजी का दोहरा कनेक्शन प्रतिबंधित

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन चालू है, वे अब घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर का उपयोग नहीं कर सकेंगे. सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में सिलेंडर की आवश्यकता नहीं है. ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा. ऐसा न करने पर तेल कंपनियों (Indane, Bharat Gas, HP Gas) द्वारा एलपीजी कनेक्शन को ब्लॉक कर दिया जाएगा और रिफिल बुकिंग रोक दी जाएगी. उपभोक्ता अपने वितरक के पास सिलेंडर और रेगुलेटर जमा कर सुरक्षा राशि वापस पा सकते हैं। 

2. सिलेंडर बुकिंग के लिए ‘लॉक-इन पीरियड’ तय
सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और एडवांस बुकिंग पर अंकुश लगाने के लिए दो बुकिंग के बीच न्यूनतम समयावधि निर्धारित की गई है:

शहरी क्षेत्र: उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के कम से कम 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे.

ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 45 दिनों का अनिवार्य अंतर रखना होगा। 

3. ई-केवाईसी (e-KYC) और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
सभी सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके बिना उपभोक्ताओं की रिफिल बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी. साथ ही, जिन उपभोक्ताओं की वार्षिक कर योग्य आय ₹10 लाख या उससे अधिक है, उन्हें एलपीजी सब्सिडी के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। 

4. सुरक्षित डिलीवरी के लिए DAC व्यवस्था
गैस चोरी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है. सिलेंडर की डिलीवरी तभी होगी जब उपभोक्ता अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (OTP) को डिलीवरी एजेंट के साथ साझा करेंगे. उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने नजदीकी गैस वितरक से संपर्क कर ई-केवाईसी की स्थिति जांच लें और नियमों का समय पर पालन करें। 

 

राज्यसभा चुनाव में BJP का नया दांव! नए चेहरों पर मंथन, बंद लिफाफे में दिल्ली भेजे जाएंगे नाम

भोपाल 

केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी कर मध्यप्रदेश की तीन सीटों में होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। प्रदेश में तीन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें भाजपा से सांसद और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी है। कांग्रेस से दिग्विजय सिंह हैं। उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। नए उम्मीदवारों के चयन को लेकर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी में नए चेहरे पर विचार किया जा रहा है। अंतिम चर्चा के बाद उम्मीदवारों के नाम बंद लिफाफे में केंद्रीय समिति को भेजे जाएंगे।

कांग्रेस की एक सीट पर भाजपा किसी डमी प्रत्याशी को समर्थन दे सकती है
भाजपा राज्यसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस की थाह भी नाप सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस की एक सीट पर भाजपा किसी डमी प्रत्याशी को समर्थन दे सकती है।

हाल ही में वर्चुअली बैठक भी बुलाई गई थी। शुरुआती चर्चा पूरी हो गई है। राज्यसभा का चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद पार्टी द्वारा दिल्ली से मार्गदर्शन मांगकर पार्टी मुख्यालय में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक बुलाई जाएगी।

केंद्रीय मंत्री कुरियन केरल में कांजिरापल्ली सीट से चुनाव लड़े थे, चुनाव हारने के कारण बदले समीकरण
केंद्रीय मंत्री कुरियन केरल में कांजिरापल्ली सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा दोबारा उन्हें मप्र से उच्च सदन में भेजने पर विचार कर रही है। वजह यह भी है कि वे केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं में शुमार हैं। यदि मध्यप्रदेश मूल के व्यक्ति को भेजने की बात का मुद्दा उठा तो तस्वीर बदल सकती है।

सुमेर सिंह की संघ में अच्छी पकड़ लेकिन उनके नाम पर संशय के बादल
इतिहास के प्रोफेसर से राज्यसभा तक का सफर तय करने वाले बड़वानी के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी की जगह पार्टी किसी अन्य युवा चेहरे पर विचार कर सकती है। शीर्ष नेताओं का मानना है कि भाजपा के पास कई अन्य चेहरे हैं जिन्हें अवसर मिलना चाहिए।

राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव ही राज्यसभा का लड़ा, सुमेर सिंह को प्रदेश में बीजेपी के आदिवासी चेहरे के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है

हालांकि यह काम इतना आसान भी नहीं है। सांसद सुमेर सिंह की संघ में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव ही राज्यसभा का लड़ा था। सुमेर सिंह को प्रदेश में बीजेपी के आदिवासी चेहरे के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता रहा है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने नवा रायपुर में विकास कार्यों का किया निरीक्षण

रायपुर

 वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने आज नवा रायपुर में संचालित महत्वपूर्ण विकास कार्यों का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
         
वित्त मंत्री ने रेलवे ओवर ब्रिज,  प्रवासी पक्षियों के लिए नेस्टिंग आइलैंड, सेक्टर-10 की सड़के, कार्यरत महिलाओं हेतु हॉस्टल, पीपल गार्डन शहरी वन (पीपल कुंज), सीबीडी आईटी बिल्डिंग,  कम्पोजिट आयोग भवन, एनटीपीसी कार्यालय एवं ऑडिटोरियम भवन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,  फेयर ग्राउंड स्टेशन, श्रमिक कैंप सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण किया।
          
निरीक्षण के दौरान  चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए सभी अधोसंरचना परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
        
 वित्त मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से नवा रायपुर में यातायात सुगम होगा, खेल अधोसंरचना मजबूत होगी और डिजिटल व प्रशासनिक सेवाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ  चंदन कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे l

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