ईरान-अमेरिका तनाव में शांति डील की चर्चा तेज, 5 शर्तों पर अटका समझौता

नई दिल्ली  

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अब संभावित पीस डील की रूपरेखा सामने आने लगी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने दावा किया है कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पांच बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन पर समझौते की कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान में शांति समझौते पर बातचीत लगभग तय हो गई है और इसका जल्द ही ऐलान किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के संवर्धित यूरेनियम का है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे. यही यूरेनियम लंबे समय से पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अहम माना जाता है.

दूसरी बड़ी शर्त ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी को चालू रखे, जबकि बाकी गतिविधियों पर रोक लगे. इसके अलावा अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध में हुए नुकसान की कोई भरपाई या मुआवजा नहीं देगा.

क्या ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड?
फार्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने से इनकार कर दिया है. वहीं अलग-अलग मोर्चों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में एक अहम सुरक्षा क्लॉज भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान या उसके सहयोगी गुटों पर हमला नहीं करेंगे. इसके बदले ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई प्रीएम्प्टिव यानी पहले हमला नहीं करेगा.

हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने खुलकर पुष्टि की है.

जंग खत्म करने के लिए ईरान की भी रखी पांच शर्तें
ईरान ने भी इससे पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपनी पांच शर्तें रखी थीं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस करना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल था.

अमेरिका-ईरान जंग की टाइमलाइन
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिन तक संघर्ष चला. बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई ड्राफ्ट प्रस्ताव एक्सचेंज हुए.

F-1/OPT छात्रों के लिए नया सवाल: क्या वीजा इरादा अब ग्रीन कार्ड में बाधा बनेगा?

नई दिल्ली

 अमेरिका की US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक नई पॉलिसी मेमो की घोषणा की है, जिसके तहत देश में ग्रीन कार्ड चाहने वाले विदेशियों को अब अमेरिका की बजाय अपने देश से ही आवेदन करना होगा।

इस घोषणा में, USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, “यह पॉलिसी हमारे इमिग्रेशन सिस्टम को वैसे काम करने देती है, जैसा कि कानून का मकसद है, न कि इसमें मौजूद कमियों का फायदा उठाने को बढ़ावा देती है।”

उन्होंने कहा कि जब विदेशी अपने देश से आवेदन करते हैं, तो उन लोगों को ढूंढने और निकालने की जरूरत कम हो जाती है, जो रेजिडेंसी (रहने की अनुमति) न मिलने पर छिपकर अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से रहने लगते हैं।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, “छात्र, अस्थायी कर्मचारी या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले गैर-प्रवासी थोड़े समय के लिए और किसी खास मकसद से अमेरिका आते हैं। सिस्टम यही है कि जब उनका दौरा खत्म हो जाए तो वे वापस चले जाएं। उनका यह दौरा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं बनना चाहिए।”

USCIS के नए मेमो का आपकी वर्कफोर्स के लिए क्या मतलब है?
21 मई, 2026 को USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे ग्रीन कार्ड आवेदनों की समीक्षा करते समय अधिक सख्त मानक लागू करें, जो USA के भीतर रहकर रहकर अप्लाई किए गए हैं।

अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि U.S. में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना एक राहत का एक ‘असाधारण’ रूप है और इसे वीजा जारी करने की ‘नियमित कांसुलर प्रक्रिया’ की जगह लेने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था।

इस मेमो का मतलब है कि अमेरिका में काम करने वाले वो विदेशी नागरिक अपने वीजा का मकसद पूरा होने के बाद USA छोड़ देंगे, जिनके पास F-1 OPT/STEM OPT वीजा है। इस तरह का वीजा’नॉन-डुअल इंटेंट’ (दोहरे इरादे वाला नहीं) माना जाता है।

वहीं, वे लोग जिन्हें वीजा से छूट (जैसे, ESTA) मिली हुई है, उन्हें U.S. के बाहर किसी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ के लिए आवेदन करना होगा।

ऐसा उन्हें तभी नहीं करना होगा, जब वे कोई ‘असाधारण परिस्थिति’ दिखा सकें। हालांकि, इस मेमो में ‘असाधारण परिस्थिति’ को परिभाषित नहीं किया गया है।

Memo में क्या कहा गया है?
USCIS के पास हमेशा से ग्रीन कार्ड के आवेदन को अस्वीकार करने का कानूनी अधिकार रहा है, भले ही आवेदक सभी शर्तों को पूरा करता हो। यानी यह अधिकार ‘विवेक’ (discretion) पर आधारित होता है।

यह मेमो इस बात की पुष्टि करता है कि इस अधिकार का प्रयोग अब और भी अधिक सोच-समझकर और सख्ती से किया जाना चाहिए।

अधिकारियों को मूल्यांकन करने के लिए नकारात्मक कारकों की सूची
आप्रवासन कानूनों का उल्लंघन, या किसी भी आप्रवासन दर्जे (status) की शर्तों का उल्लंघन
 किसी भी सरकारी एजेंसी के साथ धोखाधड़ी या झूठी गवाही के वर्तमान या पिछले मामले
देश में प्रवेश करने के बाद किया गया कोई भी ऐसा आचरण, जो उस वीजा के मूल उद्देश्य के अनुरूप न हों
शुरुआत में की गई उम्मीद के अनुसार देश छोड़कर न जाना। मेमो में इसे “इस विश्लेषण के लिए अत्यंत प्रासंगिक” बताया गया है।

इन कारकों को सख्त बनाने के लिए, मेमो ने एक बहुत ऊंचा मानक (high bar) तय किया है। आवेदकों को ‘असामान्य या असाधारण’ कारकों को दिखाना होगा, जिसमें पारिवारिक संबंध और नैतिक चरित्र शामिल हैं।

इसका अर्थ यह है कि सकारात्मक कारक इतने मजबूत होने चाहिए कि वे इस तथ्य पर भारी पड़ सकें कि आवेदक ने विदेश से आवेदन करने के बजाय U.S. में ही रुककर आवेदन करने का विकल्प चुना।

मेमो के लहजे को देखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि USCIS इस नियम को काफी सख्ती से लागू करेगा। आपकी वर्कफोर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

कर्मचारी से ज्यादा HR को करना होगा काम  
HR और मोबिलिटी टीमों के लिए इसका मतलब ये हुआ कि ग्रीन कार्ड फाइलिंग में आपके कर्मचारियों से ज्यादा आपको मेहनत की जरूरत होगी। इसके लिए इमिग्रेशन वकीलों को पहले से ही ऐसी फाइलें तैयार करनी चाहिए, जो आवेदक के U.S. से जुड़ाव, उनके नियमों के पालन के रिकॉर्ड और उनके मामले को आगे क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? इन बातों को दस्तावेजों में दर्ज करती हों।

हालांकि जांच-पड़ताल का स्तर बदल गया है। अब फाइलिंग को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। वकीलों को अब हर I-485 आवेदन के लिए एक मजबूत तर्क देना होगा कि इस व्यक्ति को U.S. से बाहर जाने के बजाय, U.S. के अंदर से ही अपने ग्रीन कार्ड के लिए
आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए?

जिन लोगों के पास’नॉन-डुअल इंटेंट’ वीजा है, उन्हें ज्यादा डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी। मेमो में अधिकारियों से कुछ बातों पर विचार करने को कहा गया है, जिनमें पारिवारिक जुड़ाव, इमिग्रेशन की स्थिति और इतिहास, आवेदक का नैतिक चरित्र शामिल हैं। इनमें से हर बात को सबूतों के साथ साबित करना होगा।

H-1B और L-1 कर्मचारी
इसका मतलब है कि भले ही H-1B और L-1 कर्मचारी लंबे समय से U.S. के भीतर अपनी स्थिति में बदलाव (adjustment of status) के लिए आवेदन कर पा रहे हैं, लेकिन अब वे यह नहीं मान सकते कि यह रास्ता अपने आप और सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही पूरा हो जाएगा।

अधिकारियों को ऐसे ठोस तर्क चाहिए, जिनसे यह साबित हो सके कि आवेदक U.S. में अपनी स्थिति में बदलाव के हकदार क्यों हैं। इन तर्कों में टैक्स का इतिहास, पारिवारिक परिस्थितियां, करियर में प्रगति, और U.S. में उनकी जड़ों से जुड़े अन्य सबूत शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण से समझिए
एक F-1 OPT कर्मचारी कंप्यूटर साइंस में PhD पूरी करता है, एक टेक कंपनी में अपना STEM OPT पूरा करता है और यह तर्क देते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है कि उसका काम ‘राष्ट्रीय हित’ में है।

मेरिट के आधार पर यह एक मजबूत मामला है, सिवाय इसके कि सालों पहले उसने एक दूतावास अधिकारी से कहा था कि उसकी योजना अपने देश वापस लौटने की है।

इस मेमो के तहत, अधिकारी अब यह पूछ सकते हैं कि उन्होंने असल में U.S. में ही रुकने का फ़ैसला कब किया और वे इस बात को उनके ग्रीन कार्ड आवेदन पर फैसला लेते समय ध्यान में रख सकते हैं।

हो सकता है कि उनका आवेदन पूरी तरह से रद न हो, लेकिन उन्हें अपने इस बदले हुए फ़ैसले के बारे में सीधे तौर पर सफाई देनी होगी और यह बताना होगा कि वे U.S. के भीतर ही अपनी स्थिति में बदलाव के लिए आवेदन क्यों कर रहे हैं?

EB-2 और EB-3 बैकलॉग मामले
वह कर्मचारी, जो EB-2 या EB-3 जो शायद एक दशक या उससे ज्यादा समय से ग्रीन वीजा की कतार में हैं। उनके लिए इस मेमो का ज़ोर ‘इक्विटीज’ (न्यायसंगत आधार) पर है।

ये ऐसे संकेत हैं कि आवेदक ने U.S. में अपना जीवन बसा लिया है और यह बात उनके पक्ष में काम करती है। U.S. के साथ गहरे और सकारात्मक संबंध, लंबे समय का रोज़गार इतिहास, यहीं पले-बढ़े बच्चे, संबंधित इमिग्रेशन कानूनों का लगातार पालन और ऐसे जीवनसाथी जिनका करियर U.S. में पहले से ही स्थापित है।

ये सभी इस बात के सबूत हो सकते हैं कि इस व्यक्ति को U.S. के भीतर से ही आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? हालांकि, इन सबूतों का दस्तावेज़ीकरण (documentation) बहुत मजबूत होना चाहिए।

B-1, B-2, और ESTA यात्री
B-1, B-2, या ESTA वीजा पर आने वाले यात्रियों को इस मेमो के तहत सबसे ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जब उन्होंने आवेदन किया था, तो उन्होंने एक कांसुलर अधिकारी को बताया था कि वे एक छोटी यात्रा के लिए आ रहे हैं और उसके बाद वापस चले जाएंगे।

इसके बाद, U.S. के भीतर से ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना आवेदक के खिलाफ जा सकता है, भले ही वह किसी वैध विवाह के मामले में ही क्यों न हों।
अब अधिकारियों को एक ऐसी बात के तौर पर देखने के लिए कहा जा रहा है, जो आवेदक के खिलाफ जा सकती है।

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के निर्देश जारी

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के  निर्देश जारी किए हैं.

शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है.

प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है.

डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए
सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा.

जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा.

चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा
बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.

भारत-अमेरिका वार्ता में मजबूत साझेदारी पर जोर, जयशंकर-रुबियो की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली

 भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था.

दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं.

विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा
बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है.

USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग
उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

‘क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता’
अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी.

रुबियो ने की भारत की तारीफ
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक ‘रणनीतिक साझेदारी’ इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं.

मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं.

मेक इन इंडिया पर जोर
साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं.

उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है.

आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. इस बैठक में जयशंकर के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अमेरिका की ओर से मार्को रुबियो अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ उपस्थित थे.

 

भारत दौरे पर मार्को रुबियो का बड़ा दावा, बोले- ईरान मुद्दे पर जल्द आ सकती है ‘अच्छी खबर’

नई दिल्ली

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। चार दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे रुबियो ने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को ईरान मुद्दे पर ‘अच्छी खबर’ मिल सकती है। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शांति समझौता होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव को समाप्त करेगा।

बता दें कि ईरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रुबियो ने जोर देकर कहा कि यह समझौता उस प्रक्रिया की शुरुआत करेगा जिसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां किसी को भी ईरानी परमाणु हथियारों से डरने या चिंता करने की जरूरत न पड़े।

ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता
इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान की कार्रवाई की निंदा की। रुबियो ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने की धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

शनिवार को ट्रंप ने क्या कहा था?
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए कहा था कि इस बात की ”पूरी तरह से 50/50” संभावना है कि वह कोई ‘अच्छा’ सौदा कर पाएंगे
या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे।

वहीं, ट्रंप ने रविवार सुबह दावा किया कि इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ईरान के साथ शांति समझौते पर ‘काफी हद तक’ बातचीत हो चुकी है। तीन महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अहम प्रगति मानी जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि औपचारिक घोषणा से पहले समझौते के अंतिम विवरण पर चर्चा जारी है। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से हुई बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। ट्रंप ने इस वार्ता को ‘शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन’ करार दिया। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा

फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने की अनुमति देने को तैयार हुआ है, लेकिन इसका मतलब ‘मुक्त आवागमन की पूर्ण बहाली’ नहीं है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के पोस्ट को ‘प्रचार’ बताया। आईआरजीसी ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है कि ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम को किसी भी समझौते की मुख्य शर्त बताया था, लेकिन ईरान की ओर से इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। इस स्तर पर परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।

बस्तर में अपराध जांच को मिलेगी रफ्तार, मोबाइल फॉरेंसिक वैन बनी पुलिस की नई ताकत

जगदलपुर.

बस्तर संभाग में अपराध जांच को तकनीकी मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. जगदलपुर में मोबाइल फॉरेंसिक वेन का शुभारंभ किया गया. यह अत्याधुनिक वेन घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में पुलिस की मदद करेगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया और तेज व सटीक बनेगी.

कार्यक्रम में पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. फॉरेंसिक विशेषज्ञ अब मौके पर ही डिजिटल और तकनीकी जांच कर सकेंगे. इस सुविधा से साइबर और आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव होगी. पुलिस का दावा है कि आधुनिक तकनीक से अपराधियों तक पहुंच आसान होगी. वेन में जांच से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं. बस्तर संभाग में पहली बार इस तरह की मोबाइल सुविधा उपलब्ध हुई है. अधिकारियों ने इसे न्याय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया. इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की जांच में भी तेजी आने की उम्मीद है. पुलिस विभाग अब तकनीक आधारित जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है.

ट्विशा केस में बड़ा अपडेट! AIIMS में दूसरा पोस्टमार्टम जारी, भदभदा घाट पर होगा अंतिम संस्कार

भोपाल/नई दिल्ली.

नोएडा की 33 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आज का दिन अहम है। भोपाल एम्स में पुलिस की भारी मुस्तैदी के बीच त्विषा का दूसरा पोस्टमार्टम किया जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में मौत का सच जानने के लिए दोबारा यह प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके बाद भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में त्विषा का अंतिम संस्कार होगा।

बता दें कि दिल्ली एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम रविवार को ही भोपाल पहुंची। राज्य सरकार की औपचारिक अपील और भोपाल कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली एम्स के निदेशक खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः लिया है संज्ञान
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ सोमवार, 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने इस स्वतः संज्ञान मामले को “एक युवती की उसके ससुराल में अप्राकृतिक मृत्यु में कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं” शीर्षक दिया है, जो पुलिस व स्थानीय प्रशासन की शुरुआती भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ससुराल में मिला था शव, पति 7 दिन की रिमांड पर
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही शादी के बंधन में बंधीं त्विषा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी पाई गई थीं। मृतका के परिजनों ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद त्विषा के पति वकील समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 10 दिनों तक फरार रहने के बाद समर्थ सिंह को शुक्रवार को जबलपुर से गिरफ्तार किया, जिसे शनिवार को स्थानीय अदालत ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

दूसरी तरफ, आरोपी सास गिरिबाला सिंह का दावा है कि पुलिस ने बयान दर्ज करने के लिए अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने मांग की है कि सीबीआई को जल्द से जल्द इस मामले की कमान संभालनी चाहिए।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर बोले मार्को रूबियो, रिश्तों को बताया “वैश्विक सहयोग का आधार”

नई दिल्ली

 भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं।

रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं।

रूबियो ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।”

रूबियो ने आगे कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।”

‘भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित’
उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।”

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, “यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।”

कान्स 2026 के क्लोजिंग सेरेमनी में छाईं ऐश्वर्या राय, फैंस के दिलों पर किया राज

ऐश्वर्या राय बच्चन कान्स की जान हैं… भारत की आन-बान-शान हैं. इस गॉर्जियस डीवा के लिए ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा. ऐश्वर्या का कान्स 2026 की क्लोजिंग सेरेमनी को अटेंड करना, फैंस के लिए टूटते तारे को देखकर विश मांगने जैसा रहा. तीन दिन तक अपने सभी लुक में एक्ट्रेस ने फैंस को खूब चौंकाया.

ऐश्वर्या के इन तीन दिन में कई वीडियोज सामने आएं, जिनमें बेटी आराध्या के साथ बिताया खास पल विदेशी फैंस का ऐश्वर्या…चीयर करने वाला पल तो शामिल था ही. साथ ही कई और भी खास मोमेंट्स थे जिन्होंने फैंस का दिन बना दिया. आइये बताते हैं.

बेस्ट फ्रेंड ने दी झप्पी
अब जब इस ग्रैंड इवेंट का समापन हो चुका है तो ऐश्वर्या के कई वीडियोज सामने आ रहे हैं. जहां वो लोगों से मिलतीं, उनसे अपनेपन से बात करतीं. तो वहीं कई हॉलीवुड एक्ट्रेस उन्हें देख दौड़ लगाती दिखीं. ऐश्वर्या का चार्म और रॉयल प्रेजेंस तो जैसे महफिल ही लूट रहा है.

एक वीडियो में हॉलीवुड स्टार ईवा लोंगोरिया ऐश्वर्या को देख इतनी एक्साइटेड हो गईं कि उनके पास ही भागी चली गईं. उन्होंने एक्ट्रेस को अपना बेस्ट फ्रेंड बताया और कहा कि कान्स अब शुरू हुआ है. ईवा और ऐश्वर्या की फोटोज सालों से कान्स इवेंट में सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रही हैं. दोनों साथ में खूब पोज देते हैं और इनकी दोस्ती की खूब चर्चा होती है.

बॉडीगार्ड ने चौंकाया
ऐश्वर्या का इसी के साथ एक और वीडियो सामने आया जहां वो अपने साथ चलते बॉडीगार्ड को देख हैरान नजर आईं. ऐश्वर्या ने कहा कि वो बहुत लंबा है. फिर वो बहुत ही क्यूट तरीके से बॉडीगार्ड को घूरती हुई दिखीं. ऐश्वर्या का ये वीडियो खूब वायरल हो रहा है. फैंस उनकी मासूमियत पर फिदा हो रहे हैं.

इसी के साथ ऐश्वर्या का ब्रूट को दिया कान्स से एक इंटरव्यू भी सामने आया जहां वो अपनी सोशल मीडिया की जानकारी, कॉन्फिडेंस और खुद से दोस्ती करने पर बात करती दिखीं.

इंस्टाग्राम के चक्कर में नहीं पड़ना चाहतीं ऐश्वर्या
ऐश्वर्या ने कहा कि- मेरे आसपास के लोग मुझे याद दिलाते रहते हैं कि इंस्टाग्राम का गेम बहुत पहले शुरू हो चुका है. आप ही इसे यूज नहीं कर रहे हो. मैं उस स्पेस में गई ही नहीं हूं. मेरे लिए सोशल मीडिया भी एक तरह का मीडिया ही है, जो अलग अलग तरह से एग्जिस्ट करता है. इसके अलग-अलग चेहरे हैं. आप जब काम करते हैं तो साथ मिलकर ही करते हैं, क्योंकि ये सारे मीडियम्स ऑडियन्स के बेस पर ही चलते हैं. मैं इसे सिंपल ही रखना चाहती हूं.

ऐश्वर्या ने आगे अपनी फीलिंग्स जाहिर करते हुए कहा कि मैं हमेशा हर दिन ऐसे काम करती हूं जैसे ये पहला दिन हो. आपकी जर्नी कैसी है, ये मायने रखता है, यहां कुछ भी सही-गलत नहीं है.

अपने आने वाले वर्क कमिटमेंट्स पर बात करते हुए ऐश्वर्या ने बताया कि मैं स्क्रिप्ट्स में ऐसा कुछ अलग नहीं ढूंढती, बस जब आप उसे पढ़ते हो तो, वो कहानी आपको क्लिक कर जाए. इतना ही काफी है.

राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष बने राघव चड्ढा, पुनर्गठन के बाद नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने समिति का पुनर्गठन करते हुए इस संबंध में अधिसूचना जारी की है.

राज्यसभा की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से याचिका समिति का पुनर्गठन किया है. इसके तहत सदन के 10 सदस्यों को पैनल में नामित किया गया है. इसमें लिखा है, “राघव चड्ढा को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.”

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के अलावा याचिका समिति में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, र्वंग्रा नारजरी और संतोष कुमार पी. को सदस्य बनाया गया है.

इसी के साथ राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को ‘कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर बनी संयुक्त समिति का सदस्य नामित किया है.

वहीं लोकसभा सचिवालय की अलग अधिसूचना में कहा गया कि लोकसभा अध्यक्ष ने 21 मई से प्रभावी रूप से अरविंद गणपत सावंत को ‘कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक’ पर बनी संयुक्त समिति के लिए नामित किया है.

गौरतलब है कि राघव चड्ढा दो तिहाई ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे. उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेता शामिल रहे.

उस वक्त राघव चड्ढा ने कहा था, ‘पिछले कुछ वर्षों से मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं. हमने यह फैसला किया है कि हम संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे.”

उन्होंने कहा था कि जिस आम आदमी पार्टी को खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वो अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है. अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम करती है.

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