रायपुर : वनांचलों में सुशासन की नई बयार: ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ और ‘सुशासन तिहार’ से बदला अंदरूनी गाँवों का माहौल

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में इन दिनों शासन की संवेदनशीलता और सक्रियता का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह पाट दिया है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार आयोजित ‘सुशासन तिहार’, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ एवं ‘जनभागीदारी अभियान’ के तहत ओरछा विकासखंड के ग्राम जाटलूर, धोबे और हरवेल सहित कई अंदरूनी गाँवों में उत्सव जैसा माहौल है।

इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज को सशक्त बनाना और विकास की मुख्यधारा से छूटे अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुँचाना है।

एसी कमरों से निकलकर ज़मीन पर उतरा प्रशासन
इस अभियान की सबसे प्रभावशाली तस्वीर तब सामने आई, जब कलेक्टर के दिशा-निर्देशन में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने सुदूर गाँवों का पैदल भ्रमण किया। उबड़-खाबड़ रास्तों और भौगोलिक चुनौतियों के बीच जब पूरी प्रशासनिक टीम ग्रामीणों के मोहल्लों और मजरों तक पहुँची, तो जनता में यह मजबूत संदेश गया कि सरकार अब सिर्फ बंद कमरों से आदेश जारी नहीं कर रही, बल्कि खुद जमीन पर आकर हकीकत परख रही है। जिले के आला अधिकारियों को अपने बीच इतनी सादगी से उपस्थित पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

चौपाल पर ही मिलीं डिजिटल सेवाएँ और स्वास्थ्य सुविधाएं
इन विशेष शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को बहुत बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें छोटे-मोटे शासकीय कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने और आर्थिक बोझ उठाने से मुक्ति मिल गई है। शिविर स्थल पर ही आधार कार्ड, पहचान पत्र व अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों में सुधार और नए दस्तावेज बनाने की सुविधा तत्काल प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का मौके पर ही स्वास्थ्य परीक्षण किया और निःशुल्क दवाइयां वितरित कीं गई। इसी तरह कृषि, महिला एवं बाल विकास और पंचायती राज जैसे विभिन्न विभागों के स्टॉलों के जरिए जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और पोषण की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

जनविश्वास से सज रही सुशासन की नई इबारत
जब सरकार की मंशा विशुद्ध रूप से जनहित की हो, तो सुशासन केवल कागजी शब्द नहीं रहता, बल्कि गाँव-गाँव की सूरत बदलने वाली एक जीवंत ताकत बन जाता है। शिविरों में ग्रामीणों की यह भारी और स्वस्फूर्त भागीदारी इसी सकारात्मक बदलाव की गवाह है। विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से आयोजित इस महा-अभियान ने न केवल वनांचल के भाई-बहनों में शासन-प्रशासन के प्रति अटूट भरोसा जगाया है, बल्कि बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में विकास की एक नई और व्यावहारिक इबारत लिख दी है।

लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

नई दिल्ली 

 देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री  साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री  केदार कश्यप एवं  रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

जशपुर में विकास कार्यों की समीक्षा : लोकार्पण-शिलान्यास के बाद शिलापट्ट नहीं लगा, तो होगी कड़ी कार्रवाई- वित्त मंत्री ओपी चौधरी

रायपुर

वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री  ओपी चौधरी ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि जशपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना सुनिश्चित करें। प्रभारी मंत्री  चौधरी ने आज जशपुर जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागीय योजनाओं और जारी विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। 

शिलापट्ट स्थापना में लापरवाही पर सख्त रुख
        

प्रभारी मंत्री  चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार द्वारा जशपुर जिले में रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिन विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। शिलापट्ट लगाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी। यदि कहीं भी यह शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट उपेक्षित पड़ा है या स्थापित नहीं किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर खेती पर विशेष ध्यान
        
वित्त मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख वर्गों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत मिल रही एक हजार रूपए की मासिक सहायता का उपयोग महिलाएं बच्चों के भविष्य के लिए, समृद्धि सुकन्या योजना जैसी बचत योजनाओं में करें। इसके अलावा स्वरोजगार के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना के अंतर्गत कम ब्याज दर पर 25 हजार रूपए तक का ऋण त्वरित उपलब्ध कराया जाए। पारंपरिक खेती से हटकर किसानों को अधिक मुनाफे वाले फलोत्पादन (विशेषकर केला और लीची की खेती) तथा आधुनिक मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही कृषि विभाग खरीफ सीजन के लिए समितियों में पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

जिले की प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति
          
बैठक में कलेक्टर  रोहित व्यास ने जिले में चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर और अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण तेजी से जारी है। सन्ना विकासखंड के ग्राम पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए विशेष तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुनकुरी और जशपुर में नालंदा परिसर तथा सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना पर कार्य चल रहा है।

कानून व्यवस्था और जन-जागरूकता
          
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि जिले में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अनूठा हेलमेट जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार से अधिक नागरिकों के अपील वीडियो जारी किए जा चुके हैं।

व्यापक विभागीय समीक्षा
          
प्रभारी मंत्री ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित दो दर्जन से अधिक विभागों के कल्याणकारी कार्यों की गहन समीक्षा की।
        
 बैठक में जशपुर विधायक मती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, डीएफओ  शशि कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

जनजातीय गरिमा उत्सव

​रायपुर  

जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित इस मेले में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के, विशेषकर ग्राम बैगीनडीह के जनजातीय कारीगरों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
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 ग्राम बैगीनडीह का झारा शिल्प

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इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित ‘कात्यायनी’ और ‘भारत माता’ जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं।

​ट्राइफेड (TRIFED): शिल्पकारों की तरक्की का नया मार्ग
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सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं।
​ ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात ‘ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।
    
​वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा
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ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है
​उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,​कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और ​उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है।

​ट्राइफेड का हिस्सा बनने का खुला अवसर
      
​ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।

माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता वास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 

जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता वास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता वास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता वास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से मिले सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जनकल्याण और समग्र विकास पर चर्चा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुलाकात के प्रमुख बिंदु –
आदिवासी उत्थान और विकास: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के समग्र विकास और उत्थान के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है.
जनकल्याणकारी योजनाएं: प्रतिनिधिमंडल के साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई, ताकि उनका अधिकतम लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सके.
सांस्कृतिक संरक्षण: चर्चा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को बढ़ावा देने और सहेजने पर सहमति बनी.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात

रायपुर

 छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।
     
मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मंत्री विश्वास सारंग ने किया करोड़ों की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमि-पूजन

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने रविवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 78, विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से होने वाली सीवेज परियोजना एवं अन्य विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री  सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार मध्यप्रदेश में विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रही है। हर वर्ग के कल्याण और हर क्षेत्र का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल विकास कार्य करना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को सुगम भी बनाना है। मंत्री  सारंग ने कहा कि इस परियोजना से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी, जलभराव एवं गंदगी की समस्या से राहत मिलेगी तथा नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्राप्त होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

हज़ारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ

वार्ड 78 स्थित विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से निर्माण होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत 13 करोड़ रुपये की लागत से 42 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बनाया जाएगा तथा 9 करोड़ रुपये की लागत से 8079 हाउस सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे लगभग 35,306 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वच्छता, आधुनिक सीवेज व्यवस्था और सुगम नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे न केवल जनजीवन अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनेगा बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

कार्यक्रम में मंत्री  सारंग का क्षेत्रवासियों द्वारा पुष्पवर्षा एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। और क्षेत्रवासियों ने करोड़ों की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों की सौगात के लिए आभार व्यक्त किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल प्रदाय से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों को दिये सख्त निर्देश

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी विभागों को पेयजल संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण और प्रतिदिन मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिये हैं। इस क्रम में नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई, जल निगम आदि विभागों के पेयजल व्यवस्था से जुड़े समस्त अमले के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अवकाश स्वीकृत होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने रविवार को कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और नगर निगम के अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा है कि वे सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाएं और पेयजल उपलब्धता के लिए अधिकारियों की समिति बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करें। यह सुनिश्चित करें कि टैंकर से पेयजल आवश्यकता वाले क्षेत्रों में वितरित हो और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हो। उन्होंने टैंकर के दुरूपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों से संवाद और समन्वय रखकर पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर से कहा कि पेयजल उपलब्धता के लिये युद्ध स्तर पर काम करें। शहरी क्षेत्र की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखें और अन्य विभागों के साथ ही ऊर्जा विभाग को भी इस पूरे प्लान में शामिल रखें। उन्होंने निर्देश दिये कि कोई भी नलजल योजना का विद्युत कनेक्शन न कटे। मुख्य सचिव  जैन ने बताया कि राज्य शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में वोरवेल आदि के खनन के लिए 1500 करोड़ रूपये की राशि जारी की है और पंचायतों को संधारण कार्य के लिए 55 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई है, जिससे पेयजल उपलब्धता में कोई असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर मेकेनिज्म तैयार करें और नियमित रूप से समीक्षा करें। बैठक में नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पीएचई, ऊर्जा और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

मुख्य सचिव  जैन कहा कि कंट्रोल रूम को स्वयं कलेक्टर लीड करें और जनप्रतिनिधियों आदि से प्राप्त होने वाली शिकायतों के अलावा लोक सेवा गारंटी तथा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का न्यूनतम समय अवधि में निराकरण करवाएं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ बेहतर संवाद रखें एवं पेयजल उपलब्धता तथा शिकायतों के निराकरण का प्रचार-प्रसार भी करें। उन्होंने कहा कि आगामी एक माह के लिए प्लान बनाकर रोज सख्ती से मानीटरिंग की जाए। पेयजल प्रदाय कार्य में लगे सभी विभागों के अमले के अवकाश पर तत्काल प्रतिबंध लगाएं और अपरिहार्य होने पर ही अवकाश स्वीकृत किया जाए।

मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे ट्रीटेड वाटर का भी समुचित उपयोग करें साथ ही टैंकर से जल प्रदाय पर विशेष ध्यान रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर हाल में बसाहटों में टैंकर पहुंचे तथा जल प्रदाय करें। कलेक्टर्स से कहा गया है कि नई एसओपी जारी की गई है, एसओआर को रिवाइज किया गया है और अब जल संधारण के 10 हजार तक के कार्य पंचायत स्वयं कर सकती है। मुख्य सचिव ने कहा कि 15वां एवं 16वां वित्त आयोग की राशि का भी पेयजल उपलब्धता में उपयोग किया जा सकता है। मुख्य सचिव ने बताया कि केन्द्र वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, मूलभूत मद, अन्य अनुदान जो केन्द्र या राज्य शासन से दिया गया है, के अलावा पंचायत की स्वयं के आय के स्रोतों से भी पेयजल व्यवस्था पर पंचायतें व्यय कर सकती हैं। उन्होंने कमिश्नर से भी अपने संभाग में विशेष सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा है।

अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई ने कलेक्टर्स से कहा कि वे पेयजल के सभी स्रोतों पर विशेष सतर्कता रखें और पहले से यह जानकारी रखें कि कहीं स्रोत में जल की कोई कमी तो नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक रूप से जल स्रोत की उपलब्धता पर भी पहले से काम करें।

जल संवर्धन अभियान और गंगा दशहरा पर कार्यक्रमों को जनोपयोगी स्वरूप दें

बैठक में अपर मुख्य सचिव  शिव शेखर शुक्ला ने कलेक्टर्स से कहा कि 25 मई से प्रदेश में दो दिवसीय गंगा दशहरा के आयोजन होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. माहेन यादव स्वयं 25 और 26 मई को उज्जैन के क्षिप्रा तट पर अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे।  शुक्ला ने कहा कि आयोजनों को पेयजल से जोड़कर जनोपयोगी बनाया जाए और जन-प्रतिनिधियों तथा आमजन की उपस्थिति सुनिश्चित करें।

 

भोपाल एयरपोर्ट यात्रियों को बड़ी सौगात! नए अराइवल एरिया में रिजर्व लाउंज और टैक्सी सुविधा शुरू

भोपाल.

राजा भोज एयरपोर्ट पर हाल ही में विकसित किए गए नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं। नियमित उड़ानों से भोपाल आने वाले विशिष्ट और अति विशिष्ट यात्री अब मुख्य लाउंज के बजाय नए रिजर्व लाउंज में समय बिता सकेंगे।

एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा शुरू किए गए इस नए अराइवल एरिया का अब तक करीब एक लाख यात्री उपयोग कर चुके हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां “मे आई हेल्प यू” काउंटर भी बनाया गया है, जहां एयरपोर्ट परिसर और सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

अब अंदर ही बुक होगी टैक्सी
नए अराइवल एरिया में यात्री एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले ही प्री-पेड टैक्सी बुक करा सकेंगे। इससे खासकर पहली बार भोपाल आने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एस्केलेटर सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब यात्री विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर पार्किंग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। पहले यात्रियों को पार्किंग तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

कस्टमर सर्वे में फिर नंबर-वन बनने की उम्मीद
राजा भोज एयरपोर्ट को पिछले राष्ट्रीय कस्टमर सैटिस्फेक्शन सर्वे में चेक-इन स्टाफ के व्यवहार और प्रतीक्षा समय जैसे मानकों पर पांच में से पूरे पांच अंक मिले थे। एयरपोर्ट अथॉरिटी को उम्मीद है कि नई सुविधाओं के कारण इस बार भी भोपाल एयरपोर्ट शीर्ष स्थान हासिल करेगा।

नंबर एक आने की उम्मीद –
हमें फिर से नंबर एक आने की उम्मीद है क्यों कि पिछले सर्वे के बाद सुविधाएं बढ़ी हैं इसलिए नंबर कम होने का कोई कारण नहीं है।
– रामजी अवस्थी, डायरेक्टर, राजाभोज एयरपोर्ट, भोपाल

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