सबसे दूर, सबसे पहले: नारायणपुर के 262 आदिवासी गाँवों में पहुँचेगा विकास

​रायपुर

छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय परिवारों के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए नारायणपुर जिले में “सबसे दूर, सबसे पहले” की अनूठी थीम पर ‘जनजाति गरिमा उत्सव’ जन भागीदारी अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों को पूरी तरह संतृप्त (Saturated) करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर ने अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के कड़े निर्देश दिए।
       
​कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान का मुख्य ध्येय शासन की हर एक कल्याणकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके लिए ज़िला प्रशासन और नोडल अधिकारियों की टीम सीधे जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेगी।

तीन बड़े अभियानों का त्रिवेणी संगम: गाँव-गाँव शिविर

     
 ​इस अभियान के तहत जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। जिले के सभी 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों में विशेष जन भागीदारी शिविर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत 255 गाँवों को कवर किया जाएगा, जहाँ ‘आदि सेवा केंद्रों’ के माध्यम से जनसुनवाई होगी और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जाएगा। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 204 गाँवों में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित कर सीधे शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएँ
    
​18 मई से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान गाँवों में ही एकीकृत शिविरों का आयोजन हो रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल कैंप,पात्रता के अनुसार ​ऑन-द-स्पॉट जनकल्याणकारी योजनाओं के फॉर्म भरना और मौके पर ही लाभान्वित करना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे।
​    
सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी से ही जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है। यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।”

जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील
    ​
कलेक्टर ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक ग्रामीणों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से वंचित न रहे।

सुरक्षित छत्तीसगढ़ की ओर कदमः ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ के आधुनिक वाहनों को हरी झंडी

रायपु

आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजनांदगांव में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

आधुनिक तकनीक से और मजबूत होगी पुलिस व्यवस्था
          
वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं का आधुनिकीकरण नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। “एक नंबर, अनेक माध्यम, त्वरित सहायता” की सोच पर आधारित डायल-112 सेवा प्रदेशवासियों को किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और मदद उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इन आधुनिक तकनीक-आधारित वाहनों से पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी और कानून व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

वाहनों का वर्गीकरण और उनकी खासियतें
          
‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के विस्तार के तहत कुल 22 आधुनिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया गया है, जिनका वर्गीकरण इस प्रकार है। डायल-112 वाहन  18 (त्वरित आपातकालीन रिस्पॉन्स के लिए), हाईवे पेट्रोलिंग वाहन के लिए  03 (राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और सुरक्षा की निगरानी के लिए), फॉरेंसिक वाहन 01 (घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए) ये सभी वाहन नवीनतम जीपीएस (ळच्ै), उन्नत संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं। इससे कंट्रोल रूम को रियल-टाइम लोकेशन मिलेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूचना पर पुलिस बल बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच सकेगा।

जनता को मिलेगा त्वरित लाभ
           
इन नए हाई-टेक वाहनों के सड़कों पर उतरने से न केवल आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद आपातकालीन चिकित्सा व सुरक्षा सहायता मिल सकेगी। स्थानीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी स्लोगन एक्के नम्बर, सब्बो बर के साथ इस सेवा को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इन वाहनों के संचालन से कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित एवं बेहतर आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘कामयाबी वेन’ को दिखाई हरी झंडी : दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों तक पहुंचेगी डिजिटल शिक्षा की नई रोशनी

रायपु

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम कुशहा में आयोजित चौपाल के दौरान नीति आयोग द्वारा वित्तपोषित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत संचालित ‘कामयाबी वेन’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों तक आधुनिक डिजिटल शिक्षा और तकनीकी आधारित सीखने के अवसर पहुंचाए जाएंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के अनुभव में सकारात्मक बदलाव आएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीक का समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी डिजिटल संसाधनों और नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

उल्लेखनीय है कि ‘कामयाबी वेन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को वर्चुअल रियलिटी (VR) एवं ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक आधारित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। यह वेन विज्ञान, गणित, तकनीकी अवधारणाओं और अन्य विषयों को अधिक रोचक, अनुभवात्मक और व्यवहारिक तरीके से समझाने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, तकनीकी जागरूकता तथा बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार आने की संभावना है।

मुख्यमंत्री  साय  ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभिनव पहल दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा उन्हें विज्ञान, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा से सरल एवं प्रभावी ढंग से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

इस अवसर पर विधायक  भैया लाल राजवाड़े, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर मती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक  रवि कुमार कुर्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

सुशासन तिहार में हितग्राहियों से आत्मीय संवाद: योजनाओं के लाभ से बदलती जिंदगी की तस्वीर देख मुख्यमंत्री हुए प्रसन्न

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज ग्राम रामपुर में सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को करीब से जाना। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों से योजनाओं के लाभ, आयवृद्धि, आजीविका और जीवनस्तर में आए सुधारों की जानकारी लेते हुए कहा कि जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तभी सुशासन की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होती है।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने साधना महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी मती जागेश्वरी प्रजापति से उनके समूह द्वारा तैयार किए जा रहे आलू चिप्स के व्यवसाय की जानकारी ली। मती जागेश्वरी ने बताया कि समूह अब तक आलू चिप्स की बिक्री से लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुका है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने सहज मुस्कान के साथ कहा, “आलू चिप्स का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ रहा है।” मुख्यमंत्री की इस आत्मीय टिप्पणी से शिविर स्थल पर हर्ष और आत्मीयता का वातावरण बन गया। 

मुख्यमंत्री ने समूह की महिलाओं की मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उन्हें अपने उत्पादों का विस्तार करने, बेहतर पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से “लखपति दीदी योजना” की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 8 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं तथा सरकार का लक्ष्य 10 लाख लखपति दीदियां तैयार करना है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अब समय केवल लखपति बनने का नहीं, बल्कि आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने का है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं परिवार, समाज और राज्य के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती हैं।शिविर में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही  प्राण साय प्रजापति से भी आत्मीय चर्चा की। हितग्राही ने बताया कि योजना के माध्यम से उनके परिवार का पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर गरीब परिवार को सम्मानपूर्वक पक्की छत उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

सुशासन तिहार की सार्थकता उस समय और स्पष्ट दिखी जब ग्राम चंद्रपुर निवासी मती प्रिया सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने शिविर में राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था और उसी दिन उनका आवेदन निराकृत कर राशन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों की सराहना की तथा कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य ही आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, सरल और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुँचे।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के एक लाभार्थी से भी संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे प्राप्त राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने उनकी पहल की सराहना करते हुए उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप लगाने के लिए प्रेरित किया, ताकि सिंचाई लागत कम हो, खेती अधिक लाभकारी बने और किसानों को बिजली खर्च से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार आधारित खेती ही किसानों की आय वृद्धि का मजबूत आधार बनेगी।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों के अनुभव सुनने के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकाधिक लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर, समृद्ध तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

कोण्डागांव में भव्य रूप में मनाया जाएगा तेलीन सत्ती माता महोत्सव, उप मुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव कोण्डागांव जिले के केशकाल में साहू संघ बस्तर संभाग द्वारा आयोजित प्रथम तेलीन सत्ती माता महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप और भोजराज, विधायक नीलकंठ टेकाम और आशाराम नेताम सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाज के प्रमुखजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री साव ने तेलीन सत्ती माता को नमन करते हुए महोत्सव के प्रथम आयोजन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि केशकाल घाटी से गुजरने वाले यात्री तेलीन सत्ती माता का आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं, जिससे उनकी यात्रा सफल और मंगलमय होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह महोत्सव और अधिक भव्य स्वरूप में आयोजित होगा तथा सभी के सहयोग से इसका गौरव लगातार बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज के गौरव हैं और उनके नेतृत्व में गांव, गरीब एवं किसानों के कल्याण के लिए अनेक जनहितकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि साहू समाज अन्य समाजों के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी के गौरव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यहां मां दंतेश्वरी की आराधना के लिए देशभर से लोग एकत्रित होते हैं। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक बस्तर संभाग को विकसित संभाग बनाने का संकल्प लिया है, जिसमें जनसहयोग आवश्यक है।

बस्तर सांसद महेश कश्यप ने समाज को विभाजित करने वाली ताकतों से सतर्क रहने और सभी समाजों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने भी महोत्सव के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व मंत्री रमशीला साहू, ताम्रध्वज साहू, कमलचंद भंजदेव, पूर्व सांसद दीपक बैज, साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू और महोत्सव समिति के संयोजक राजेश मायाराम साहू सहित साहू समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

प्रदेश में नागरिकों को लोक परिवहन सुविधा के लिये सुगम परिवहन सेवा योजना शीघ्र प्रारंभ करे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना शीघ्र प्रारंभ की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक ले रहे थे। बताया गया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन किया जा रहा है। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आमजन के लिए सुरक्षित, सुगम और सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है। बेहतर लोक परिवहन आसान यात्रा का साधन ही नहीं, प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवन रेखा भी है। प्रदेश की सीमा में अन्य राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए परिवहन चौकियों और टोल नाकों को और अधिक आधुनिक एवं सुविधा सम्पन्न बनाया जाए। इसके लिए परिवहन चौकियों को शीघ्र ही एकीकृत (इंटीग्रेटेड) करने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग में मानव संसाधन की कमी की पूर्ति अभियान चलाकर की जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना क्षेत्रों की मैपिंग करा ली जाए, जिससे जरूरतमंदों को जल्द से जल्द मेडिकल सर्विसेस मुहैया कराई जा सकें। विभिन्न विभागों द्वारा दी जा रही एम्बुलेंस सेवाओं को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए, जिससे दुर्घटना क्षेत्रों में जरूरतमंद तक 30 मिनट से भी कम समय में एम्बुलेंस ऑटो मोड (जो स्पॉट से निकटतम हो) में पहुंच जाए।

‘म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय’ का होगा गठन

बैठक में सचिव परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा क्रियान्वित पीएम-राहत योजना एवं राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, पूरे देश में पहले स्थान पर है। पीएम-राहत योजना में राज्य के सभी 55 जिलों में जिला नोडल अधिकारियों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है। योजना में कुल 2,298 प्रकरणों में से 1692 प्रकरण अनुमोदित कर दिए गए हैं। राहवीर योजना में कुल 109 आवेदन मिले, इनमें से 49 प्रकरण मंजूर कर लिए गए हैं। बालाघाट जिले में राहवीर योजना पर बहुत अच्छा काम हुआ है।

बैठक में बताया गया कि हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (SCCoRS) की बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा इन दोनों योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की पहल की बेहद सराहना की गई है। इसी कमेटी की अनुशंसा पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पृथक से ‘म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय’ का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को दिए गए 4,400 करोड़ रूपए के लक्ष्य के विरूद्ध कुल 4911.78 करोड़ रूपए राजस्व आय अर्जित की गई। दिए गए लक्ष्य से विभाग द्वारा 111.6 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जन किया गया है। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 5,721 करोड़ रूपए राजस्व आय का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में 51 प्रकार की फेसलेस सर्विसेस दी जा रही हैं। इससे नागरिकों को बिचौलियों से तो मुक्ति मिली ही है, साथ ही पारदर्शितापूर्ण सेवा प्रदाय भी सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी उपलब्धियों के लिए विभागीय मंत्री, अधिकारियों एवं मैदानी अमले को भी बधाई दी।

‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण नेटवर्क विस्तार, महिला सुरक्षा और प्रदेश के नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’ की अद्यतन प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना का जल्द से जल्द फील्ड में शुभारंभ किया जाए। सचिव, परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि योजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से प्रक्रियागत काम जारी है। यह योजना दो चरणों में चलाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश में 7 क्षेत्र क्रमश: इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) एवं रीवा (शहडोल सहित) स्थापित किए गए हैं। पहले चरण में चलाई जाने वाली बसों के लिए क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्ग मंजूरी की विभागीय अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अन्य क्षेत्रों के विस्तारित मार्गों की अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में प्रदेश के कुल 1,164 मार्गों पर लगभग 5,206 बसों का संचालन अगले दो सालों में किया जाएगा। इन सभी बसों की सुचारू मॉनिटरिंग के लिए एक दक्ष एवं इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैंनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में इंदौर क्षेत्र के कुल 121 मार्गों में कुल 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र के 120 मार्गों में 371 बसें, भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों में 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र के 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र के 92 मार्गों में 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र के 65 मार्गों में 298 बसें तथा रीवा क्षेत्र के 35 मार्गों में 184 बसें चलाई जाएंगी। योजना के तहत चलाई जाने वाली सभी बसों का रंग एक जैसा होगा, ताकि एकरूपता बनी रहे।

सचिव परिवहन ने बताया कि ड्रायविंग लायसेंस एवं पंजीयन प्रमाण पत्र को सहज बनाने के लिए विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2024 से डिजिटल फार्म में प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में ई-डिटेक्शन प्रणाली प्रारंभ करने की व्यवस्था की जा रही है। इस पर काम प्रगति पर है। इस प्रणाली से चिन्हित स्थानों पर लगे कैमरों द्वारा वाहनों की नंबर प्लेट अपने आप स्कैन हो जाएगी। स्कैन किए गए वाहन क्रमांक से दस्तावेज वाहन पोर्टल से स्वत: जांच होकर सीधे ऑनलाइन भेज दिया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, परिवहन आयुक्त  उमेश जोगा सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

ट्विशा केस में नया मोड़, परिवार कोर्ट पहुंचा; 46 मोबाइल नंबरों के CDR सुरक्षित करने की मांग

 भोपाल 
द्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की आस लगाए शोकाकुल परिवार ने जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी मोर्चा खोल दिया है।मृतका के पिता और परिवार द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, उन्होंने माननीय सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में स्वतंत्र दूसरा पोस्टमार्टम परीक्षण कराए जाने के लिए विधिसम्मत आवेदन प्रस्तुत किया है।

एम्स नई दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग, आरोपी को दी चुनौती
परिवार ने स्पष्ट किया है कि देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान (एम्स, नई दिल्ली) द्वारा स्वतंत्र चिकित्सकीय राय प्राप्त होने से जांच प्रक्रिया में जनसामान्य का विश्वास पुनः स्थापित हो सकेगा और मृत्यु के वास्तविक कारणों को लेकर कोई संदेह शेष नहीं रहेगा।

  पूर्व जज गिरिबाला सिंह को पुलिस ने पूछताछ के लिया बुलाया
ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। भोपाल पुलिस ने ट्विशा की सास, पूर्व जिला जज और कंज्यूमर फोरम की पूर्व अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को पूछताछ के लिए तीसरा नोटिस जारी किया है।

पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं करती हैं, तो पुलिस कोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत निरस्त करने का आग्रह करेगी। यह मामला 12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद सामने आया था। ट्विशा का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था।

मामले में दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर जांच का दबाव बढ़ा

    भोपाल पुलिस के अनुसार गिरिबाला सिंह को पूछताछ के लिए लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं, लेकिन जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी का रसूख या पद जांच को प्रभावित नहीं करेगा।

    गिरिबाला सिंह को 15 मई को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर अग्रिम जमानत मिली थी। वहीं उनके बेटे और भोपाल के वकील समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत 18 मई को अदालत ने खारिज कर दी थी। समर्थ सिंह फिलहाल फरार है और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है।

परिवार ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप

    ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार का दावा है कि ट्विशा पर मानसिक दबाव बनाया गया, गाली-गलौज की गई और यहां तक कि गर्भपात के लिए भी मजबूर किया गया। ट्विशा की मां को भेजे गए कुछ व्हाट्सएप संदेश भी जांच एजेंसियों के पास हैं, जिनमें उसने मदद मांगी थी।

    ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से उनकी शादी हुई थी। वह पूर्व मॉडल और मार्केटिंग प्रोफेशनल थीं। परिवार ने मामले की CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट में ड्रग्स के सबूत नहीं

    गिरिबाला सिंह ने सार्वजनिक बयान में दावा किया था कि ट्विशा स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित थीं और ड्रग्स का सेवन करती थीं। हालांकि पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अब तक की फॉरेंसिक जांच में ड्रग्स सेवन का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

    मामले में दूसरा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अदालत ने शव संरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने इस मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। फिलहाल SIT पूरे मामले में बयान, डिजिटल सबूत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

 

जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाये। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भी जनजातीय कृषकों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। इसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से दल भेजा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों, आश्रम और छात्रावासों में शिक्षा और रहन सहन की गुणवत्ता बेहतर करें। जनजातीय क्षेत्रों में परंपरागत सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और समग्र विकास के लिए समाज सेवी संगठनों का भी सहयोग लें। जनजातीय क्षेत्र में शासन के विभिन्न विभाग मिलकर कार्य करें। कन्वर्जेंस से जन सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाये। जनजातीय समाज में पशुपालन को बढ़ावा दें और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में इनका सहयोग ले। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया के समग्र विकास के लिए सतत् कार्य करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा परिणाम 2026 में सर्वश्रेष्ठ 10 ज़िलों में से 7 जनजातीय जिले शामिल हैं। दिसम्बर 2023 से अब तक जनजातीय वर्ग के कक्षा 9 एवं 10 के कुल 3 लाख 65 हज़ार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 28 हज़ार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि भुगतान की गई है। विभाग द्वारा 2671 छात्रावास और आश्रम शालाओं का संचालन किया जा रहा है।

मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह 15 सौ रुपये की राशि शासन की आहार अनुदान योजना में प्रदान की जा रही है। दिसम्बर 2023 से अभी तक में 2 लाख 37 हजार 550 महिलाओं को कुल 432 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।

 

पेट्रोल-डीजल के बाद अब महंगाई का नया झटका! रुपये की गिरावट बढ़ाएगी बोझ

नई दिल्‍ली
मिडिल ईस्‍ट में तनाव और तेल की कीमतें ऊपर जाने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम में अभी तक दो बार बढ़ोतरी की गई है और आगे भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इन सबसे परे सरकार एक और बड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है, जिसका बोझ आम आदमी के ऊपर आ सकता है। 

दरअसल, पिछले कुछ समय से भारतीय करेंसी (Rupee) में बड़ी गिरावट देखी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया एक साल के दौरान 10 से 12 फीसदी तक गिर गया है. ऐसे में कई एक्‍सपर्ट्स रुपये को 100 लेवल के पार जाने की संभावना जता रहे हैं. इस बीच, RBI कई बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।  

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है. साथ ही करेंसी ट्रांसफर और डॉलर जुटाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. ऐसे में अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाती है तो इस संकट के समय में आपके बैंक लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी, जो मिडिल क्‍लास के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं होगा। 

रुपया 97 के करीब पहुंचने पर बढ़ी टेंशन 
बुधवार को रुपये के नए रिकॉर्ड लो ने सिर्फ देश के लोगों को ही चिंता में नहीं डाल दिया, बल्कि RBI अधिकारी भी तनाव में आ गए. रिपोर्ट का दावा है कि 97 के करीब रुपया पहुंचने के बाद  गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई शीर्ष अधिकारियों ने संभावित उपायों पर चर्चा करने के लिए आंतरिक बैठकें की हैं। 

क्‍या-क्‍या उपाय कर सकता है आरबीआई? 
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उपलब्ध विकल्पों में से एक ब्याज दरों में वृद्धि करना है. आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की अलगी बैठक 5 जून को होगा, जिसमें रेपो रेट बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है. अन्‍य उपायों में एनआरआई डिपॉजिट स्‍कीम के माध्‍यम से विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। 

2013 से मिलता-जुलता दिख रहा ये उपाय 
विचाराधीन उपाय 2013 के टेपर टैंट्रम काल के दौरान उठाए गए कुछ उपायों से मिलते-जुलते हैं. उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बैंकों के माध्यम से NRIs के लिए डिपॉजिट स्‍कीम शुरू की थीं. आरबीआई का अनुमान है कि इस बार इन योजनाओं से 50 अरब डॉलर तक की राशि आ सकती है, जबकि पहले यह राशि लगभग 30 अरब डॉलर थी। 

बता दें RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 जून तक होनी है. समिति ने इस साल अपनी मानक दर को 5.25% पर अनचेंज रखा है, हालांकि ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट में तेजी के कारण आने वाले महीनों में इसमें तेजी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।  

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के 86वें सम्मेलन में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी, 45 करोड़ की परियोजनाओं को मिली स्वीकृति

नवा रायपुर

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का 86वाँ मंडल सम्मेलन बुधवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंडल मुख्यालय में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने की। बैठक में प्रदेशभर में आवासीय एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई।

सम्मेलन में लगभग 45 करोड़ रुपये की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि रायपुर जिले के तिल्दा स्थित दीनदयाल आवास कॉलोनी, कोहका में व्यवसायिक सह आवासीय प्रकोष्ठ भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 76 आवासीय एवं व्यावसायिक भवन बनाए जाएंगे, जिसकी अनुमानित लागत 10.37 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

इसी प्रकार स्ववित्तीय अटल विहार योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के गिनाबहार क्षेत्र में 97 आवासीय भवनों के निर्माण एवं 7 एकड़ भूमि विकास कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें 6 एमआईजी, 64 एलआईजी और 27 ईडब्ल्यूएस भवन शामिल हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.51 करोड़ रुपये बताई गई है।

वहीं, मुंगेली जिले के सारधा (लोरमी) क्षेत्र में स्ववित्तीय योजना के तहत 200 ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण और 5 एकड़ भूमि के बाह्य विकास कार्य को भी मंजूरी मिली। इस परियोजना पर लगभग 16.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सम्मेलन में निर्माण कार्यों में जीएसटी भुगतान प्रणाली और रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाण पत्र की वर्तमान व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए समान मानक प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सीधी भर्ती में दिव्यांगजनों के आरक्षण संबंधी पदों के चिन्हांकन को समाज कल्याण विभाग की 25 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुरूप लागू रखने का निर्णय भी लिया गया।

मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्य शासन के कर्मचारियों के अनुरूप पुनरीक्षित महंगाई भत्ता देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए पीपीपी मोड पर एजेंसी नियुक्त करने हेतु निविदा प्रपत्र एवं लाइसेंस अनुबंध प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

सम्मेलन में यह जानकारी भी दी गई कि मंडल द्वारा वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में करीब 317 करोड़ रुपये मूल्य की 1647 संपत्तियों का विक्रय किया गया है।

बैठक में मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव डी.एस. भारद्वाज, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि जी.आर. रावटे, वित्त विभाग के प्रतिनिधि निखिल अग्रवाल तथा हुडको के प्रतिनिधि हितेश बरोट सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पढ़ें देखें प्रोफाइल